कमजोर अमेरिकी जॉब्स आंकड़ों के बावजूद सोने में तेजी क्यों थमी, जानें बड़े निवेशकों और सटोरियों का असली रुख अमेरिकी रोजगार आंकड़ों में भारी गिरावट और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका घटने के बावजूद सोने की कीमतें दबाव में हैं, जिसकी मुख्य वजह बढ़ती बॉन्ड यील्ड और बाजार में सटोरियों व संस्थागत खरीदारों के बीच जारी खींचतान है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में रोजगार सृजन की गति धीमी पड़ने और श्रम बाजार के सबसे कमजोर आंकड़े सामने आने के बाद आमतौर पर सोने में एक जोरदार उछाल की उम्मीद की जाती है। जब भी फेडरल रिजर्व (फेड) की ओर से मौद्रिक सख्ती थमने के संकेत मिलते हैं, गैर-उपज वाली कीमती धातुओं में तेजी का रुख बनता है। लेकिन हालिया आंकड़ों के जारी होने के बाद पीली धातु की शुरुआती बढ़त बेहद तेजी से गायब हो गई। बाजार का यह बर्ताव साफ संकेत देता है कि सर्राफा बाजार अब केवल केंद्रीय बैंक के अगले नीतिगत फैसले की उम्मीदों के आधार पर कारोबार नहीं कर रहा है, बल्कि इसके पीछे लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड यील्ड और निवेशकों के अलग-अलग धड़ों के बीच एक गहरा टकराव चल रहा है। रोजगार के कमजोर आंकड़ों पर सोने की बेअसर प्रतिक्रिया सितंबर महीने के नॉनफार्म पेरोल्स (NFP) आंकड़ों में अमेरिकी अर्थव्यवस्था के भीतर सिर्फ 29 हजार नए रोजगार जुड़ने की पुष्टि हुई, जो कि 90 हजार के अनुमानित आंकड़े से काफी नीचे है। इसके साथ ही बेरोजगारी दर मामूली बढ़कर 4.2 प्रतिशत पर पहुंच गई और सालाना मजदूरी की वृद्धि दर घटकर 3 प्रतिशत पर आ गई। इससे पहले के महीनों में दर्ज रोजगार वृद्धि के आंकड़ों में भी नीचे की ओर संशोधन किया गया। सामान्य परिस्थितियों में यह संपूर्ण आर्थिक परिदृश्य सोने में बड़ी तेजी की जमीन तैयार करता, क्योंकि इसने अक्टूबर में फेड द्वारा ब्याज दर में किसी भी संभावित बढ़ोतरी की संभावना को लगभग खत्म कर दिया। सितंबर के दौरान जिस मौद्रिक दबाव ने सोने की चाल को दबाकर रखा था, वह इस आंकड़े के बाद हटता हुआ दिखा। सोने ने शुरुआत में इन कमजोर आंकड़ों पर तेजी दिखाकर प्रतिक्रिया दी, लेकिन यह उछाल टिक नहीं सका। इससे पहले जब उम्मीद से कमजोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) महंगाई के आंकड़े आए थे, तब भी फेड द्वारा दर वृद्धि के जोखिम कम हुए थे। रोजगार रिपोर्ट ने इस धारणा को और पुख्ता किया कि आर्थिक वृद्धि धीमी हो रही है और मजदूरी से जुड़ा दबाव कम हो रहा है। इसके बावजूद सोना नई ऊंचाई छूने में नाकाम रहा, क्योंकि अमेरिकी ट्रेजरी बाजार ने इसका साथ नहीं दिया। नरम आर्थिक आंकड़ों के बाद भी लंबी अवधि के अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड दशकों के उच्चतम स्तर के करीब बने हुए हैं। फेड की नीतियों की अपेक्षाओं और लंबी अवधि के यील्ड कर्व के बीच का यह फासला सोने की दिशा तय करने वाला सबसे अहम कारक बन चुका है। ओसीबीसी के विश्लेषकों का मानना है कि केवल फेड द्वारा दर वृद्धि का जोखिम टलना सोने को अगले बड़े उछाल पर ले जाने के लिए पर्याप्त नहीं है। कीमती धातु के लिए टिकाऊ तेजी का रास्ता तभी खुलेगा जब कमजोर आर्थिक आंकड़े लंबी अवधि और वास्तविक बॉन्ड यील्ड को निरंतर आधार पर नीचे खींचने में सफल होंगे। जब तक अमेरिकी डॉलर मजबूत बना रहेगा और बॉन्ड यील्ड में गिरावट नहीं आएगी, तब तक रोजगार के कमजोर आंकड़े अकेले दम पर सोने की चाल को ऊपर नहीं ले जा सकेंगे। सटोरियों और ट्रेंड आधारित फंड्स का घटता दांव पहली नजर में सोने की सुस्ती को देखकर यह लग सकता है कि निवेशक कीमती धातु से किनारा कर रहे हैं, लेकिन डेरिवेटिव्स और पोजीशनिंग आंकड़े एक अधिक जटिल तस्वीर पेश करते हैं। टीडी सिक्योरिटीज के अनुसार, सटोरिए ट्रेडर्स लगातार तीन हफ्तों से अपनी तेजी की पोजीशन (लॉन्ग एक्सपोजर) कम कर रहे हैं और मंदी के सौदे (शॉर्ट पोजीशन) बढ़ा रहे हैं। जैसे-जैसे पूरी यील्ड कर्व पर दरें ऊंची बनी हुई हैं और अमेरिकी डॉलर में मजबूती दिख रही है, लीवरेज्ड ट्रेडर्स सोने पर अपना दांव घटाने के लिए मजबूर हुए हैं। हालांकि, बाजार के सभी हिस्सेदार एक जैसा व्यवहार नहीं कर रहे हैं। व्यवस्थित कमोडिटी ट्रेडिंग एडवाइजर्स (CTAs), जो रुझानों, अस्थिरता और तकनीकी सिग्नलों के आधार पर पूरी तरह मशीनी ढंग से फैसले लेते हैं, हालिया शॉर्ट कवरिंग के बावजूद सतर्क और मंदी के रुख में बने हुए हैं। टीडी सिक्योरिटीज ने स्पष्ट किया है कि सीटीए फंड्स ने कुछ शॉर्ट पोजीशन जरूर काटी हैं, लेकिन जब तक कीमतें 4,300 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार नहीं करतीं, तब तक वे बड़े पैमाने पर शॉर्ट कवरिंग या नई खरीदारी करने के मूड में नहीं हैं। इसीलिए 4,300 डॉलर का स्तर अब एक साधारण तकनीकी आंकड़ा नहीं रह गया है। इस स्तर के ऊपर का सुधार तकनीकी रणनीतियों और एल्गो ट्रेडिंग सिस्टम के रुख को मंदी से तेजी में बदलने की ताकत रखता है। जब तक कीमतें इस सीमा से नीचे हैं, सीटीए फंड्स के पास अपने रक्षात्मक या मंदी के नजरिए को छोड़ने की कोई ठोस वजह नहीं है। इस तरह बाजार में एक अनूठा ढांचा बन गया है जहां सिस्टम आधारित ट्रेडर्स मंदी में बैठे हैं, जबकि अन्य खरीदार धीरे-धीरे जमावड़ा कर रहे हैं। विवेकाधीन फंड्स, ईटीएफ और केंद्रीय बैंकों का मजबूत सहारा इस विरोधाभास के बीच एक बड़ा सहारा डिस्क्रिशनरी (विवेकाधीन) फंड्स, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) और वैश्विक केंद्रीय बैंकों की ओर से मिल रहा है। टीडी सिक्योरिटीज के अध्ययन से पता चलता है कि जहां व्यवस्थित फंड्स सतर्क हैं, वहीं विवेकाधीन निवेशक अपनी लॉन्ग पोजीशन लगातार बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही ईटीएफ में निवेश और केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद इस दबाव के दौर में भी धातु को मजबूती प्रदान कर रही है। ऐतिहासिक रूप से सोने के लिए मौजूदा परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण होनी चाहिए थीं। वास्तविक यील्ड का ऊंचा होना, ट्रेजरी यील्ड का बहु-दशकीय ऊंचाइयों पर रहना, मजबूत अमेरिकी डॉलर और फेड के सख्त रुख के संकेत—ये सभी कारक पारंपरिक रूप से सोने की कीमतों को गिराने के लिए जाने जाते हैं। इसके बावजूद सोना 4,100 डॉलर के स्तर के ऊपर टिके रहने में कामयाब रहा है। कमजोर आर्थिक आंकड़ों के साथ विवेकाधीन ट्रेडर्स और संस्थागत खरीदारों का निरंतर समर्थन ही वह ताकत है जिसने सोने को वास्तविक यील्ड की आंधी के सामने ढहने से बचा रखा है। सटोरिया सौदों में लॉन्ग पोजीशन का घटना तात्कालिक रूप से मंदी का अहसास कराता है, लेकिन बाजार चक्र के हिसाब से यह स्थिति विक्रेताओं की संख्या को भी खत्म करती है। जब बाजार में बहुत अधिक लॉन्ग पोजीशन जमा हो जाती हैं, तो बाजार में गिरावट का जोखिम बढ़ जाता है क्योंकि हर कोई पहले से खरीदारी में होता है। इसके विपरीत, जब सट्टेबाज अपने सौदे खाली कर देते हैं, तो नए बिकवाल कम रह जाते हैं। यदि भविष्य में बॉन्ड यील्ड नीचे गिरती है, तो यही मंदी वाले सीटीए ट्रेडर्स 4,300 डॉलर के पार जाते ही आक्रामक खरीदार बन सकते हैं, जिससे सोने में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। चार्ट्स और तकनीकी स्तरों का विश्लेषण दैनिक तकनीकी चार्ट पर भी वही रस्साकशी साफ दिखाई दे रही है जो पोजीशनिंग आंकड़ों में है। कीमती धातु 4,110 डॉलर के दायरे में कारोबार कर रही है, जो कि इसके 50-दिवसीय, 100-दिवसीय और 200-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज (SMA) से नीचे है। वर्तमान में 50-दिवसीय SMA लगभग 4,332 डॉलर, 100-दिवसीय SMA लगभग 4,267 डॉलर और 200-दिवसीय SMA 4,531 डॉलर के आसपास स्थित हैं। यह ढांचा मध्यम अवधि में तकनीकी दबाव की पुष्टि करता है। जनवरी के शिखर के बाद से सोने ने लगातार निचले उच्च स्तर (लोअर हाइज) बनाए हैं, जबकि अगस्त के अंत में 4,700 डॉलर के करीब का उछाल भी टिक नहीं पाया था। यदि सोना 4,100 डॉलर के अहम सपोर्ट को बचाने में नाकाम रहता है, तो कीमतें 4,000 डॉलर और अंततः जून-जुलाई के निचले स्तर 3,960 डॉलर से 3,940 डॉलर के दायरे तक खिसक सकती हैं। गर्मियों के दौरान 4,000 डॉलर के करीब बार-बार मजबूत मांग देखी गई थी, इसलिए 4,100 डॉलर से 3,940 डॉलर का यह संपूर्ण क्षेत्र एक निर्णायक परीक्षा है कि क्या दीर्घकालिक खरीदार सट्टेबाजों की बिकवाली को थाम पाएंगे। यदि यह क्षेत्र टूटता है, तो यह माना जाएगा कि दीर्घकालिक मांग अब बॉन्ड यील्ड के दबाव को बेअसर करने के लिए पर्याप्त नहीं रही। इसके विपरीत, यदि 4,100 डॉलर के दायरे से तेजी की वापसी होती है, तो हालिया 4,225 डॉलर का पिवट स्तर पहला लक्ष्य होगा। इसके पार निकलने पर कीमतें 4,300 डॉलर से 4,330 डॉलर के उस संगम क्षेत्र को चुनौती दे सकती हैं जहां 50-दिवसीय और 100-दिवसीय मूविंग एवरेज मौजूद हैं। इस क्षेत्र के ऊपर एक टिकाऊ ब्रेकआउट सीटीए फंड्स से शॉर्ट कवरिंग को गति देगा और अगला बड़ा तकनीकी पड़ाव 4,531 डॉलर के 200-दिवसीय मूविंग एवरेज के रूप में सामने आएगा। लाइव मार्केट डेटा और संकेतकों का हाल वर्तमान लाइव मार्केट सत्र में गोल्ड फ्यूचर्स (GC=F) 4,125 डॉलर के स्तर पर देखा गया, जो पिछले बंद भाव 4,187 डॉलर के मुकाबले 1.47 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 3,901 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है, जबकि वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत का 0.69 गुना दर्ज किया गया। तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 33 के स्तर पर है, जो ओवरसोल्ड क्षेत्र के काफी करीब पहुंच चुका है। एमएसीडी (MACD) -71.02 पर है जो सिग्नल लाइन -53.31 से नीचे है (हिस्टोग्राम -17.70, मंदी का संकेत)। एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) में 20-दिवसीय EMA 4,269 डॉलर, 50-दिवसीय EMA 4,324 डॉलर और 200-दिवसीय EMA 4,439 डॉलर पर हैं, जबकि 50-दिवसीय SMA 4,372 डॉलर और 200-दिवसीय SMA 4,550 डॉलर पर हैं। ईएमए50 का ईएमए200 से नीचे जाना डेथ क्रॉस की स्थिति बनाए हुए है, जिससे लंबी अवधि का रुझान नीचे की ओर बना हुआ है। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड्स 4,085 डॉलर से 4,493 डॉलर (मध्य 4,289 डॉलर) के बीच हैं और भाव बैंड्स के भीतर बने हैं। एडीएक्स (ADX) 21 पर एक कमजोर रेंज बाउंड रुझान दिखाता है, जबकि स्टोकेस्टिक फास्ट 10 और सिग्नल 11 पर है। 14-दिवसीय एटीआर (ATR) 93.43 पर दैनिक अस्थिरता को दर्शाता है। 20-दिवसीय सपोर्ट 4,091 डॉलर और रेजिस्टेंस 4,480 डॉलर के आसपास है। प्रमुख ट्रेडिंग स्तरों में पिवट 4,138 डॉलर, रेजिस्टेंस R1 4,185 डॉलर, R2 4,245 डॉलर, और सपोर्ट S1 4,078 डॉलर, S2 4,032 डॉलर शामिल हैं। सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ऐतिहासिक भूमिका और केंद्रीय बैंकों की रणनीति मानव इतिहास में सोने ने हमेशा मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में एक बुनियादी भूमिका निभाई है। आभूषणों में इसके आकर्षण के अलावा, कीमती धातु को वैश्विक संकटों, राजनीतिक उथल-पुथल और आर्थिक अनिश्चितता के दौर में सबसे भरोसेमंद सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) माना जाता है। चूंकि यह किसी विशेष सरकार या केंद्रीय प्राधिकरण की देनदारी पर निर्भर नहीं करता, इसलिए मुद्रा अवमूल्यन और अनियंत्रित महंगाई के खिलाफ यह सबसे बड़ा रक्षा कवच साबित होता है। केंद्रीय बैंक दुनिया में सोने के सबसे बड़े धारक हैं। आर्थिक संकट के समय अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं की स्थिरता और देश की साख को मजबूत बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार का विविधीकरण करते हुए सोने की भारी खरीदारी करते हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, केंद्रीय बैंकों ने वर्ष 2022 में अपने भंडार में 1,136 टन सोना जोड़ा, जिसकी कुल कीमत लगभग 70 अरब डॉलर थी। यह आंकड़ा रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से किसी भी एक वर्ष में की गई सबसे बड़ी आधिकारिक खरीद थी। चीन, भारत और तुर्की जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक अपने सोने के भंडार में तेजी से विस्तार कर रहे हैं। पारंपरिक रूप से सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के साथ उल्टा संबंध होता है। जब डॉलर गिरता है, तो सोना मजबूत होता है। इसी तरह, शेयर बाजार में भारी तेजी सोने को कमजोर करती है, जबकि जोखिम भरी संपत्तियों में बिकवाली के दौर में सोने की मांग बढ़ जाती है। सोने पर कोई निश्चित ब्याज या यील्ड नहीं मिलती, इसलिए जब ब्याज दरें घटती हैं तो इसकी अपील बढ़ती है और ब्याज दरें ऊंची रहने पर इस पर दबाव आता है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का मूल्य डॉलर (XAU/USD) में तय होता है, इसलिए डॉलर की मजबूती अक्सर इसकी कीमतों पर लगाम लगाती है। वैश्विक मुद्राओं, बॉन्ड बाजार और क्रिप्टोकरेंसी का हाल व्यापक वित्तीय बाजारों में भी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती का गहरा असर देखने को मिल रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) हालिया सुधार के बाद 0.7000 के नीचे दबाव में बना हुआ है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के सख्त रुख के बावजूद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नए उछाल ने डॉलर की मांग बढ़ा दी है, जिससे यह जोड़ी दबाव में है और निवेशक फेड की एफओएमसी (FOMC) मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं। इसी तरह, डॉलर-येन (USD/JPY) 158.50 के करीब डेढ़ सप्ताह के उच्च स्तर पर ट्रेड कर रहा है, जहां बैंक ऑफ जापान (BoJ) के नरम रुख और अमेरिकी यील्ड में तेजी ने डॉलर को मजबूती दी है। दूसरी ओर, डिजिटल संपत्ति बाजार में बिटकॉइन (BTC) हाल ही में 87,200 डॉलर के स्तर पर सप्लाई का सामना करने के बाद सुधारात्मक दौर में आ गया है। ऑल्टकॉइन्स में भी गिरावट देखी जा रही है, जहां इथेरियम (ETH) 2,600 डॉलर के प्रमुख सपोर्ट की ओर फिसल रहा है और रिपल (XRP) 1.45 डॉलर के मांग क्षेत्र के पास कमजोरी दिखा रहा है। वहीं यूरोप में यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) अपने महंगाई लक्ष्य से लगभग दोगुनी महंगाई के बावजूद असमंजस में है, क्योंकि बॉन्ड बाजार में पहले से ही वित्तीय स्थितियां सख्त हो चुकी हैं। कुल मिलाकर, रोजगार आंकड़ों के कमजोर रहने के बाद भी सोने में तेजी न आना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि जब तक ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड अपने मौजूदा उच्च स्तरों से नीचे नहीं आती, तब तक केवल ब्याज दर कटौती की उम्मीदें कीमती धातु को बड़ी छलांग नहीं दिला पाएंगी। आने वाले दिनों में यदि 4,100 डॉलर का आधार टिका रहता है और 4,300 डॉलर का स्तर पार होता है, तभी मंदी में फंसे सटोरियों की शॉर्ट कवरिंग से एक बड़ा रिवर्सल संभव हो सकेगा। इसका आप पर असर सोने की कीमतों में चल रही यह सुस्ती और बॉन्ड यील्ड का दबाव सीधे तौर पर सर्राफा खरीदारों, खुदरा निवेशकों और म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो को प्रभावित करेगा। • खुदरा खरीदारों और आभूषण प्रेमियों पर: सोने की कीमतों में 4,100 डॉलर (लाइव $4,125) के पास स्थिरता रहने से घरेलू बाजार में आभूषण खरीदारों को अचानक आने वाली महंगाई से राहत मिलेगी। यदि शादी-ब्याह या त्योहारी सीजन के लिए खरीदारी करनी है, तो मौजूदा सीमित दायरे में गिरावट का फायदा उठाया जा सकता है। • गोल्ड ईटीएफ और म्यूचुअल फंड निवेशकों पर: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और ईटीएफ निवेशकों के रिटर्न में तात्कालिक तौर पर सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। बॉन्ड यील्ड में नरमी आने तक निवेशकों को आक्रामक एकमुश्त खरीद के बजाय एसआईपी (SIP) के जरिए व्यवस्थित निवेश जारी रखना चाहिए। • डेरिवेटिव्स और कमोडिटी ट्रेडर्स पर: तकनीकी स्तरों के मुताबिक 4,100 डॉलर एक अहम सपोर्ट और 4,300 डॉलर प्रमुख ब्रेकआउट स्तर है। ट्रेडर्स को 93.43 डॉलर के दैनिक एटीआर (ATR) को ध्यान में रखते हुए सख्त स्टॉप-लॉस के साथ सीमित दायरे की रणनीतियां अपनानी चाहिए। • वैश्विक आर्थिक और मुद्रा बाजार पर: अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड के मजबूत रहने से भारतीय रुपये जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बना रहेगा। आयात लागत में संतुलन बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने का भंडार बढ़ाना जारी रहने की संभावना है। ऐसा क्यों हुआ कमजोर रोजगार रिपोर्ट के बावजूद सोने में तेजी न आने का मुख्य कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का कई दशकों के उच्च स्तर पर टिके रहना और सटोरियों द्वारा मंदी की पोजीशन बढ़ाना है। हालांकि ब्याज दर कटौती की उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन बॉन्ड बाजार की बेरुखी ने तेजी पर ब्रेक लगा दिया है। • बॉन्ड यील्ड का उच्च स्तर: कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद भी लंबी अवधि की अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड दशकों के उच्चतम स्तर के करीब बनी रही। जब बिना ब्याज वाली संपत्ति की तुलना में सरकारी बॉन्ड से सुरक्षित और आकर्षक रिटर्न मिलता है, तो सोने में नया निवेश अटक जाता है। • सटोरियों और सीटीए फंड्स की मंदी की पोजीशन: डेरिवेटिव्स बाजार में सटोरिए लगातार तीन हफ्तों से शॉर्ट पोजीशन बढ़ा रहे हैं और एल्गोरिदम आधारित सीटीए फंड्स 4,300 डॉलर से नीचे बिकवाली के रुख में हैं। इस व्यवस्थित बिकवाली दबाव ने कमजोर पेरोल आंकड़ों के सकारात्मक प्रभाव को दबा दिया। • अमेरिकी डॉलर का मजबूत रुख: वैश्विक बाजार में भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और अन्य प्रमुख मुद्राओं की कमजोरी के चलते अमेरिकी डॉलर मजबूत बना रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का कारोबार डॉलर में होने के कारण मजबूत ग्रीनबैक ने कीमती धातु की तेजी को रोक दिया। • संस्थागत मांग का सीमित असर: यद्यपि केंद्रीय बैंक और विवेकाधीन फंड्स खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन जब तक दीर्घकालिक यील्ड नीचे नहीं आती, यह खरीद सट्टेबाजी के बिकवाली दबाव को पूरी तरह पलटने में असमर्थ रही है। सवाल-जवाब 1. कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद भी सोने में तेजी क्यों नहीं आई? लंबी अवधि के अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड के दशकों के उच्चतम स्तर पर बने रहने और सटोरियों द्वारा शॉर्ट पोजीशन बढ़ाने के कारण सोने की शुरुआती बढ़त टिक नहीं सकी। 2. सितंबर महीने में अमेरिकी जॉब्स के क्या आंकड़े दर्ज किए गए? सितंबर नॉनफार्म पेरोल्स में केवल 29 हजार नए रोजगार जुड़े जो 90 हजार के अनुमान से काफी कम थे, जबकि बेरोजगारी दर 4.2 प्रतिशत पर पहुंच गई। 3. सीटीए फंड्स सोने में शॉर्ट कवरिंग कब शुरू करेंगे? बाजार विश्लेषकों के अनुसार, जब तक सोने की कीमत 4,300 डॉलर प्रति औंस के पार नहीं निकलती, तब तक सीटीए फंड्स बड़े पैमाने पर शॉर्ट कवरिंग नहीं करेंगे। 4. सोने के लिए नीचे और ऊपर की ओर प्रमुख तकनीकी स्तर कौन से हैं? सोने के लिए 4,100 डॉलर और 3,960-3,940 डॉलर मजबूत सपोर्ट स्तर हैं, जबकि 4,225 डॉलर और 4,300-4,330 डॉलर मुख्य रेजिस्टेंस क्षेत्र हैं। 5. केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद को लेकर क्या स्थिति है? वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार केंद्रीय बैंकों ने 2022 में रिकॉर्ड 1,136 टन सोना खरीदा था, और चीन, भारत तथा तुर्की जैसे देश अपने भंडार में लगातार बढ़ोतरी कर रहे हैं। https://trendkia.com/market/kamajora-ameriki-jobs-ankaron-ke-bavajuda-gold-men-teji-kyon-thami-janen-bare-niveshakon-aura-satoriyon-ka-asali-rukha-44724 TrendKia — Har trend, sabse pehle.