# कमजोर नौकरियों के आंकड़े और राजनीतिक उठापटक से अमेरिकी डॉलर पर बढ़ा दबाव, सोने और क्रिप्टो बाजार में उछाल

> कमजोर रोजगार आंकड़ों के अनुमान और मध्यावधि चुनाव नतीजों के बीच अमेरिकी डॉलर में बिकवाली का दबाव बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर सोना, कच्चा तेल और डिजिटल एसेट्स पर दिख रहा है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/kamajora-naukariyon-ke-ankare-aura-rajanitika-uthapataka-se-us-dollar-para-barha-dabava-sone-aura-kripto-bajara-men-uchhala-56602 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिकी डॉलर, विदेशी मुद्रा बाजार, सोना, बिटकॉइन, बॉन्ड यील्ड, फेडरल रिजर्व, अमेरिकी चुनाव, वित्त

अमेरिकी मुद्रा में सितंबर के बाद से देखी गई तेज बढ़त अब थमने के कगार पर पहुंच गई है, क्योंकि वित्तीय बाजारों में साल के अंत तक एक राहत भरी बिकवाली की परिस्थितियां बनने लगी हैं। मुद्रा विनिमय बाजार में विश्लेषकों का मानना है कि रोजगार बाजार की धीमी रफ्तार अमेरिकी डॉलर की मौजूदा चाल को धीमा कर सकती है। यदि आगामी पेरोल आंकड़े अनुमान से कमजोर रहते हैं, तो डॉलर में गिरावट की रफ्तार और तेज हो सकती है। मुद्रा विकल्प बाजार भी इस बात के स्पष्ट संकेत दे रहा है कि निवेशक और कारोबारी साल के समापन से पहले कमजोर डॉलर के हिसाब से अपने सौदों की जमावट करने लगे हैं।

## रोजगार के आंकड़े और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों का समीकरण
अमेरिकी लेबर मार्केट के मोर्चे पर अक्टूबर महीने में रोजगार सृजन 40k रहने का अनुमान जताया गया है, जो कि सितंबर के दौरान दर्ज की गई 29k की मामूली वृद्धि के बाद का आंकड़ा है। अर्थशास्त्रियों का आंकलन है कि यह अनुमान बाजार की आम सहमति से कम होने के बावजूद ब्रेक-ईवन रोजगार वृद्धि के दायरे में बना रहेगा। इसके साथ ही, इससे तीन महीने के मूविंग एवरेज में भी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। हालांकि, रोजगार के आंकड़ों में नरमी के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था की बुनियादी गतिविधियां काफी मजबूत बनी हुई हैं। इसके साथ ही महंगाई से जुड़े जोखिम अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, जिसके चलते आगामी दिसंबर बैठक में नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की संभावना काफी अधिक मानी जा रही है। सितंबर के बाद से आई आक्रामक तेजी के बाद वर्ष के अंत में डॉलर में बिकवाली का यह रुख काफी हद तक 2018 के अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद बने रुझान से मेल खाता है।

## मध्यावधि चुनाव और वाशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध का असर
बुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान शुरुआती मध्यावधि चुनाव नतीजों से पैदा हुई राजनीतिक अनिश्चितता ने अमेरिकी डॉलर पर भारी दबाव डाला। वाशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध की बढ़ती संभावनाओं ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग को पुनर्जीवित कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नई गिरावट दर्ज की गई। बॉन्ड प्रतिफल में आई इस गिरावट ने फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी के दावों को बेअसर कर दिया और ग्रीनबैक पर बिकवाली का अतिरिक्त दबाव बना दिया। राजनीतिक उठापटक और नीतिगत फैसलों के बीच वैश्विक स्तर पर निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।

## प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में हलचल: येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर
मुद्रा विनिमय बाजार में जापानी मुद्रा के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में भारी गिरावट देखी गई। बुधवार को एशियाई कारोबार के दौरान USD/JPY फिसलकर 158.00 के स्तर से नीचे आ गया। राजनीतिक अनिश्चितता के बीच डॉलर एक महीने के निचले स्तर तक टूट गया। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दो सप्ताह के निचले स्तर से ऊपर संभलते हुए 0.6965 के आसपास स्थिर कारोबार करता नजर आया। हालांकि, अमेरिकी डॉलर की कमजोरी के बावजूद रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के अपेक्षाकृत कम आक्रामक रुख ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की बढ़त को एक सीमित दायरे में बांधे रखा।

## कमजोर डॉलर से सोने की चमक लौटी, 4,000 डॉलर के पार पहुंचा भाव
मुद्रा बाजार में डॉलर के लड़खड़ाने और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट का सीधा फायदा बहुमूल्य धातुओं को मिला है। लगातार दो सत्रों की गिरावट को पीछे छोड़ते हुए सोने ने बुधवार को शानदार वापसी की। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव एक बार फिर 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर पहुंच गया। डॉलर के कमजोर पड़ने के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भी पीली धातु की इस जोरदार रिकवरी में उत्प्रेरक का काम किया है। निवेशक बॉन्ड यील्ड की गिरावट के बीच अपनी पूंजी की सुरक्षा के लिए दोबारा सोने का रुख कर रहे हैं।

## क्रिप्टोकरेंसी बाजार में जोखिम लेने की भूख बढ़ी
डॉलर के कमजोर होने और वित्तीय बाजारों में लिक्विडिटी के बदले समीकरणों से डिजिटल एसेट्स के बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला है। बुधवार को व्यापक क्रिप्टोकरेंसी बाजार में रिस्क-ऑन सेंटिमेंट सुधरने से बिटकॉइन 78,000 डॉलर के पार कारोबार करता दिखा। मुख्य क्रिप्टोकरेंसी के नक्शेकदम पर चलते हुए इथेरियम भी 2,300 डॉलर के ऊपर बना रहा और मजबूती के संकेत दिए। इसके साथ ही रिपल में भी बढ़त का सिलसिला जारी रहा और यह 1.28 डॉलर के ऊपर पहुंच गया, जिसने लगातार दूसरे दिन तेजी का रुख कायम रखा। आने वाले दिनों में रोजगार के आधिकारिक आंकड़े और चुनावी नतीजों की अंतिम स्थिति इस व्यापक वित्तीय बदलाव की दिशा तय करेंगे।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में गिरावट का असर वैश्विक मुद्रा बाजार से लेकर कमोडिटी और क्रिप्टोकरेंसी तक पर दिखाई दे रहा है।

- **भारत में:** डॉलर पर दबाव बनने से भारतीय रुपये को स्थिरता मिल सकती है और आयात बिल का दबाव कम होगा। इससे कच्चे तेल और आयातित इलेक्ट्रॉनिक सामानों की कीमतों में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
- **सोने के खरीदारों के लिए:** वैश्विक बाजार में सोने के 4,000 डॉलर के पार जाने से घरेलू बाजार में आभूषण महंगे हो सकते हैं। शादी-ब्याह या निवेश के लिए खरीदारी करने वालों को बढ़े हुए दामों का सामना करना पड़ सकता है।
- **क्रिप्टो निवेशकों के लिए:** बिटकॉइन के 78,000 डॉलर के ऊपर टिकने से डिजिटल संपत्तियों में तेजी का रुझान बना रह सकता है। खुदरा निवेशकों के लिए बाजार में लिक्विडिटी और ट्रेडिंग वॉल्यूम में सुधार की उम्मीद है।
- **वैश्विक मुद्रा व्यापारियों के लिए:** प्रमुख मुद्राओं जैसे येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में उठापटक तेज रहने की संभावना है। फॉरेक्स ट्रेडिंग करने वालों को नए पोजीशन लेते समय सख्त स्टॉप-लॉस का इस्तेमाल करना होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी और वित्तीय संपत्तियों में फेरबदल के पीछे कमजोर रोजगार अनुमान और चुनावी अनिश्चितता मुख्य कारण हैं।

- **कमजोर रोजगार वृद्धि का अनुमान:** अक्टूबर में केवल 40k नौकरियों की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है, जो पूर्ववर्ती 29k की धीमी वृद्धि के बाद आया है। यह आंकड़ा आम सहमति से कम रहने के कारण डॉलर के मौजूदा बुल रन को थामने का सीधा कारण बना।
- **अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और राजनीतिक गतिरोध:** शुरुआती चुनाव परिणामों से वाशिंगटन में नीतिगत गतिरोध की आशंका पैदा हुई है। इस राजनीतिक अनिश्चितता ने सुरक्षित निवेश के रूप में बॉन्ड की मांग बढ़ाई, जिससे ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई।
- **बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट:** अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड के घटने से ब्याज दर बढ़ोतरी के दावों का असर फीका पड़ गया। नतीजतन, निवेशकों ने डॉलर की लॉन्ग पोजीशन से मुनाफावसूली शुरू कर दी।
- **कमजोर कच्चे तेल की कीमतें:** कच्चे तेल में सुस्ती और डॉलर की कमजोरी ने एक साथ मिलकर सोने को सहारा दिया, जिससे बहुमूल्य धातुओं में सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ गई।

## सवाल-जवाब

### 1. अक्टूबर के लिए अमेरिकी रोजगार वृद्धि का क्या अनुमान लगाया गया है?
अक्टूबर में रोजगार वृद्धि 40k रहने का अनुमान जताया गया है, जो सितंबर के 29k के आंकड़े के बाद का है।

### 2. सोने की कीमत में क्या बदलाव देखा गया है?
सोने ने दो दिनों की गिरावट को पीछे छोड़ते हुए 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर को फिर से हासिल कर लिया है।

### 3. क्रिप्टोकरेंसी बाजार में प्रमुख टोकन किस स्तर पर कारोबार कर रहे हैं?
बिटकॉइन 78,000 डॉलर के पार, इथेरियम 2,300 डॉलर के ऊपर और रिपल 1.28 डॉलर के ऊपर कारोबार कर रहे हैं।

### 4. डॉलर में बिकवाली की मुख्य वजह क्या मानी जा रही है?
कमजोर पेरोल अनुमान, शुरुआती मध्यावधि चुनाव नतीजों से पैदा हुई राजनीतिक अनिश्चितता और बॉन्ड यील्ड में गिरावट इसकी मुख्य वजहें हैं।

### 5. जापानी मुद्रा के मुकाबले अमेरिकी डॉलर का स्तर क्या रहा?
अमेरिकी डॉलर गिरकर एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान 158.00 के स्तर से नीचे आ गया।

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