कमजोर पीएमआई और मजबूत अमेरिकी डॉलर से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव, 0.7140 के नीचे मंदी का रुख बरकरार ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था में विनिर्माण संकुचन और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7100 के स्तर का परीक्षण कर रहा है, जबकि तकनीकी स्तर पर 0.7140 के नीचे मंदी का परिदृश्य बना हुआ है। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर नया बिकवाली दबाव देखने को मिला है, जिससे यह मुद्रा 0.7100 के अहम स्तर का परीक्षण करने की दिशा में फिसल गई है। ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था के हालिया आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी डॉलर के दबदबे ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बाजार प्रतिभागी घरेलू आर्थिक संकेतकों की सुस्ती के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर बनने वाले नए कूटनीतिक और आर्थिक समीकरणों पर पैनी नजर रख रहे हैं। घरेलू आर्थिक आंकड़े और पीएमआई के सुस्त संकेत ऑस्ट्रेलिया के ताजा फ्लैश पीएमआई आंकड़ों ने घरेलू अर्थव्यवस्था की धीमी गति को उजागर किया है। इन आंकड़ों के अनुसार देश का विनिर्माण क्षेत्र संकुचन की स्थिति में पहुंच गया है, जो औद्योगिक गतिविधियों में आई गिरावट को दर्शाता है। इसके अलावा सेवा क्षेत्र में लगातार दूसरे महीने बेहद धीमी गति से विस्तार दर्ज किया गया है। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र दोनों से मिलने वाले इन कमजोर संकेतों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में बिकवाली के सिलसिले को फिर से तेज कर दिया है, जिससे निवेशकों का भरोसा घटा है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और आगामी ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की कमजोरी के पीछे केवल घरेलू कारक ही जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि अमेरिकी डॉलर में जारी तेजी भी एक बड़ा अवरोध बनकर सामने आ रही है। मुद्रा बाजार में कारोबारी गुरुवार को होने वाली बेहद अहम ट्रंप-शी बैठक का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस शिखर वार्ता से निकलने वाले संकेतों को लेकर निवेशक सतर्क हैं, जिसके चलते सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्तियों और अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिल रही है। वहीं दूसरी ओर, वित्तीय बाजारों ने अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता के पूरा होने के घटनाक्रम को काफी हद तक नजरअंदाज कर दिया है और उनका पूरा ध्यान व्यापारिक परिदृश्य पर केंद्रित है। तकनीकी स्तर और अल्पकालिक कारोबारी दायरा अल्पकालिक मूल्य चाल को देखते हुए यह स्पष्ट होता है कि मुद्रा हाल के समय में एक सीमित दायरे में फंसी रही है। इससे पहले के कारोबारी दिन में मूल्य 0.7105 और 0.7135 के बीच रहने का अनुमान जताया गया था, हालांकि वास्तविक हलचल 0.7093 से 0.7126 के निचले दायरे में दर्ज की गई। अंततः सत्र की समाप्ति 0.7115 के स्तर पर हुई, जो 0.05 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्शाती है। वर्तमान सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के 0.7095 और 0.7125 के बीच कारोबार करने की संभावना देखी जा रही है। मध्यम अवधि का परिदृश्य और अहम प्रतिरोध स्तर एक से तीन सप्ताह के व्यापक नजरिए से तकनीकी विश्लेषक ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को लेकर नकारात्मक रुख बनाए हुए हैं। पिछले सप्ताह की शुरुआत में जब हाजिर भाव 0.7090 पर था (17 सितंबर), तब इसके गिरकर 0.7050 तक पहुंचने का अनुमान जताया गया था। इसके बाद मुद्रा बढ़कर 0.7140 तक पहुंची। जब भाव 0.7120 पर था (22 सितंबर), तब यह स्पष्ट किया गया कि जब तक 0.7140 का मजबूत प्रतिरोध स्तर ऊपर की तरफ स्पष्ट रूप से नहीं टूटता, तब तक मंदी का रुख बना रहेगा। हालांकि, मुद्रा के 0.7050 के स्तर तक गिरने की संभावना अब काफी कम हो गई है, लेकिन तकनीकी रूप से दबाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। बैंक ऑफ जापान का नीतिगत फैसला और येन की स्थिति वैश्विक बाजार के अन्य प्रमुख घटनाक्रमों में बैंक ऑफ जापान (बीओजे) ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। यह फैसला नीति निर्माताओं के 7-2 के मतदान से लिया गया, जो पिछले कई हफ्तों से बाजार की आम अपेक्षाओं के बिल्कुल अनुरूप रहा। इसके बावजूद जापानी येन में उल्लेखनीय मजबूती नहीं देखी गई, क्योंकि इस कदम को अपेक्षाकृत नरम रुख वाला माना गया। बुधवार को एशियाई सत्र में यूएसडी/जेपीवाई 157.00 के मध्य स्तर पर कारोबार करता रहा, जो पिछले शुक्रवार को छुए गए दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब है। हालांकि संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंकाएं जोड़ी के आगे के लाभ को सीमित कर रही हैं। सोने में गिरावट और फेडरल रिजर्व का सख्त रुख अमेरिकी डॉलर की निरंतर खरीद का असर कमोडिटी बाजार पर भी पड़ा है। यूरोपीय सत्र के पूर्वार्द्ध में सोने की कीमतों में लगातार गिरावट जारी रही, जिससे 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे के स्तरों से पिछले दिन दर्ज की गई रिकवरी का एक बड़ा हिस्सा समाप्त हो गया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक और सख्त रुख के कारण बिना ब्याज देने वाली पीली धातु से निवेशकों की पूंजी बाहर निकल रही है और नकदी की ओर प्रवाह बढ़ रहा है। कुल मिलाकर अमेरिकी नीतिगत मजबूती के सामने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और सोना दोनों ही बिकवाली के दबाव से जूझ रहे हैं। इसका आप पर असर वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार और ब्याज दरों में यह फेरबदल अंतरराष्ट्रीय यात्रा, आयात-निर्यात और विदेशी निवेश से जुड़े लोगों को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। • मुद्रा विनिमय: कमजोर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से ऑस्ट्रेलिया यात्रा या वहां अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए स्थानीय मुद्रा विनिमय पर खर्च में मामूली राहत मिल सकती है। दूसरी तरफ मजबूत अमेरिकी डॉलर से डॉलर-मूल्यवर्ग वाले सभी खर्च अधिक महंगे बने रहेंगे। • आयात लागत: ऑस्ट्रेलिया के भीतर मैन्युफैक्चरिंग संकुचन और कमजोर घरेलू मुद्रा से आयातित उपभोक्ता वस्तुओं और इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतें ऊंची रह सकती हैं। स्थानीय खुदरा विक्रेताओं को अपनी मार्जिन में समायोजन करना पड़ सकता है। • सोना और निवेश: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और मजबूत डॉलर के चलते सोने में निवेश करने वालों को अल्पकालिक मूल्य दबाव का सामना करना पड़ सकता है। बिना ब्याज वाली परिसंपत्तियों के मुकाबले डॉलर जैसी संपत्तियों में रिटर्न बेहतर दिख रहा है। • विदेशी मुद्रा व्यापारी: 0.7140 का स्तर टूटने तक ट्रेडर्स को ऊपर के स्तरों पर सतर्क रहने की जरूरत है। सीमा-बद्ध ट्रेडिंग रणनीतियां अपनाना जोखिम प्रबंधन के लिहाज से अधिक मुफीद साबित हो सकता है। ऐसा क्यों हुआ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में गिरावट और विदेशी मुद्रा बाजार में व्यापक उथल-पुथल घरेलू विनिर्माण सुस्ती और अमेरिकी डॉलर की चौतरफा मजबूती के चलते पैदा हुई है। • घरेलू विनिर्माण संकुचन: ऑस्ट्रेलिया के फ्लैश पीएमआई आंकड़ों में विनिर्माण क्षेत्र संकुचन के दायरे में फिसल गया और सेवाओं की रफ्तार लगातार दूसरे महीने धीमी रही। इन कमजोर आंकड़ों ने निवेशकों में देश की आर्थिक सेहत को लेकर आशंकाएं बढ़ा दीं। • फेडरल रिजर्व का सख्त रुख: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक मौद्रिक नीति रुख ने अमेरिकी डॉलर में निरंतर खरीदारी को बढ़ावा दिया है। उच्च डॉलर यील्ड ने गैर-ब्याज देने वाली धातुओं और अन्य मुद्राओं पर भारी दबाव बनाया है। • भू-राजनीतिक घटनाक्रम: गुरुवार को होने वाली अहम ट्रंप-शी शिखर वार्ता से पहले बाजार में सतर्कता का माहौल है। जोखिम लेने से बचने की इस प्रवृत्ति ने सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर को सहारा दिया है। • बैंक ऑफ जापान का नरम कदम: बैंक ऑफ जापान द्वारा दरें 1.00% से बढ़ाकर 1.25% करने के बावजूद येन कमजोर रहा क्योंकि बाजार ने इस बढ़ोतरी को अपेक्षा के अनुरूप और अत्यधिक आक्रामक नहीं माना। सवाल-जवाब 1. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव क्यों बढ़ रहा है? ऑस्ट्रेलिया के विनिर्माण क्षेत्र के संकुचन में जाने, सेवा क्षेत्र की धीमी वृद्धि और अमेरिकी डॉलर की चौतरफा मजबूती के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बना हुआ है। 2. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए अहम प्रतिरोध स्तर क्या है? तकनीकी विश्लेषण के अनुसार जब तक 0.7140 का स्तर स्पष्ट रूप से पार नहीं होता, तब तक ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर मंदी का दृष्टिकोण बरकरार रहेगा। 3. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों पर क्या निर्णय लिया है? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। 4. सोने की कीमतों में गिरावट क्यों दर्ज की जा रही है? अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त नीतिगत रुख और मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण निवेशकों की पूंजी बिना ब्याज वाले सोने से दूर जा रही है। https://trendkia.com/market/kamajora-pmi-aura-majabuta-us-dollar-se-australian-dollar-para-dabava-0-7140-ke-niche-mndi-ka-rukha-barakarara-37051 TrendKia — Har trend, sabse pehle.