कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद सोने की चाल पर दो विश्लेषकों की अलग राय, जानिए आगे के संकेत महीनों में सबसे सुस्त अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बावजूद सोने में तेजी न लौटने पर विश्लेषक बंटे हुए हैं। जहां एक पक्ष इसे बॉन्ड यील्ड के दबाव में और गिरावट का संकेत मानता है, वहीं दूसरा पक्ष चार हजार डॉलर के स्तर पर मजबूत संस्थागत मांग देख रहा है। अमेरिकी रोजगार बाजार से महीनों में सबसे कमजोर आंकड़े सामने आने के बाद भी सर्राफा बाजार में अपेक्षित तेजी दर्ज नहीं की जा सकी। इस घटनाक्रम को लेकर वित्तीय बाजार के दो प्रमुख विश्लेषक पूरी तरह से विपरीत निष्कर्ष पर पहुंचे हैं। एक तरफ जहां राडोम्स्की का मानना है कि तीन कारोबारी सत्रों में दूसरी बार तेजी के अनुकूल समाचार पर भी धातु का न चढ़ पाना यह साबित करता है कि मौजूदा रुझान अब भी बॉन्ड बाजार के दीर्घकालिक यील्ड के नियंत्रण में है और इसकी दिशा नीचे की तरफ है। वहीं दूसरी तरफ, सोकोलिडोउ का विश्लेषण कहता है कि बीस साल के उच्च स्तर पर पहुंची सरकारी यील्ड के बावजूद सोने का चार हजार डॉलर प्रति औंस के नीचे न फिसलना अंतर्निहित और ढांचागत मांग का प्रमाण है, जो अंततः बाजार में प्रभावी रहेगी। निवेशकों के लिए अब अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर के मुख्य चालकों पर नजर रखना आवश्यक हो गया है, क्योंकि यदि यील्ड में बढ़त जारी रही और डॉलर को घरेलू मजबूती मिली तो मंदी का रुख हावी रहेगा, जबकि केंद्रीय बैंकों और सुरक्षित निवेश की मांग दबाव को सोखती रही तो सोने का लचीलापन बरकरार रहेगा। विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर का दबाव और प्रमुख मुद्राओं की स्थिति व्यापक वित्तीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर की नई मजबूती अन्य संपत्तियों पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। एशियाई कारोबारी सत्र के उत्तरार्ध में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में ताजा बिकवाली देखी गई, जिससे यह जोड़ी शून्य दशमलव छह नौ शून्य शून्य (0.6900) के स्तर की ओर फिसल गई। इस गिरावट के पीछे पश्चिम एशिया तथा रूस और यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच डॉलर को मिला समर्थन प्रमुख कारण रहा। मुद्रा बाजार के व्यापारी नई दिशा तलाशने के लिए कच्चे तेल की कीमतों, ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) से जुड़ी ब्याज दर अपेक्षाओं पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। दूसरी ओर, डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) ने अपनी पुरानी गिरावट को मिटाते हुए एशियाई सत्र के दौरान एक सौ अट्ठावन दशमलव शून्य शून्य (158.00) के स्तर को दोबारा हासिल कर लिया और यह पिछले एक सप्ताह के सीमित दायरे में कारोबार करता रहा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें क्षीण पड़ने के बावजूद वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता डॉलर को सहारा दे रही है, जिससे इस जोड़ी को वापसी करने में मदद मिली। हालांकि, बैंक ऑफ जापान (BoJ) के सख्त मौद्रिक रुख की संभावनाओं और मुद्रा हस्तक्षेप के मंडराते जोखिम के कारण येन को समर्थन मिल सकता है, जो डॉलर की इस बढ़त को सीमित कर सकता है। सोने के प्रमुख तकनीकी स्तर और दायरा सोमवार के कारोबार में सोने ने अपने शुरुआती नुकसान को थोड़ा कम किया, लेकिन इसके बावजूद यह अपने पुराने दायरे में ही फंसा नजर आया। बाजार में ऊपर की ओर सुधार के प्रयास बयालीस सौ डॉलर ($4,200) के नीचे ही सीमित रहे, जबकि दो महीने का निचला स्तर इकतालीस सौ दस डॉलर ($4,110) इससे कुछ ही दूरी पर बना हुआ है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में हालिया नरमी ने कीमती धातुओं को कुछ हद तक राहत दी है, लेकिन अमेरिकी ट्रेजरी की ऊंची बॉन्ड यील्ड डॉलर की किसी भी बड़ी गिरावट को रोक रही है और सोने की कीमतों पर दबाव बनाए हुए है। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में स्थिरता और तेजी के संकेत डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में बिटकॉइन सोमवार को सियासी और आर्थिक संकेतों के बीच संकीर्ण दायरे में स्थिरता के साथ छियासी हजार डॉलर ($86,000) के स्तर से ऊपर कारोबार करता दिखा। दूसरी तरफ ऑल्टकॉइन्स में सकारात्मक परिदृश्य देखने को मिला, जहां एथेरियम बढ़त के साथ सत्ताईस सौ डॉलर ($2,700) के पार पहुंच गया, जबकि रिपल एक दशमलव पांच दो डॉलर ($1.52) के ऊपर मजबूती से टिका रहा। यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने मौद्रिक नीति का असमंजस यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के समक्ष भी नीतिगत स्तर पर बड़ी दुविधा खड़ी हो गई है। सामान्य परिस्थितियों में जब मुद्रास्फीति तय लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से चल रही हो, तब केंद्रीय बैंक के पास ब्याज दरें बढ़ाने का सीधा रास्ता होता है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियां सामान्य नहीं हैं। इस समय बॉन्ड बाजार पहले ही मौद्रिक सख्ती का एक बड़ा हिस्सा अपने स्तर पर अंजाम दे चुका है, जिसके चलते यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने नीतिगत फैसले लेने का एक जटिल और कठिन संकट खड़ा हो गया है। इसका आप पर असर सोने के सीमित दायरे में रहने और बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तरों पर बने रहने से खुदरा खरीदारों और वित्तीय निवेशकों के लिए आने वाले दिनों में कीमतें तय दायरे में रहने के आसार हैं। • खुदरा खरीदारों के लिए: सोने के दाम $4,110 से $4,200 के दायरे में सीमित रहने से कीमतों में कोई अचानक भारी गिरावट या उछाल नहीं दिख रहा है। शादी-ब्याह या आभूषण खरीदने की योजना बना रहे ग्राहक मौजूदा भावों को आधार मानकर योजना बना सकते हैं। • वित्तीय निवेशकों के लिए: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के 20 साल के उच्च स्तर पर होने से सुरक्षित संपत्तियों की स्पर्धा बढ़ गई है। पोर्टफोलियो में सोने को शामिल रखने वाले निवेशक $4,000 के अहम समर्थन स्तर पर नजर बनाए रखें। • मुद्रा विनिमय और यात्रियों के लिए: डॉलर की मजबूती के कारण AUD और JPY जैसी मुद्राएं दबाव में चल रही हैं। विदेश यात्रा या विदेशी मुद्राओं में लेनदेन करने वाले लोगों को डॉलर में मजबूती का असर लागत पर देखने को मिल सकता है। • क्रिप्टो निवेशकों के लिए: बिटकॉइन का $86,000 और एथेरियम का $2,700 से ऊपर टिके रहना डिजिटल परिसंपत्तियों में स्थिरता का संकेत है। कारोबारी आल्टकॉइन्स में जारी हल्की तेजी के बीच सख्त जोखिम प्रबंधन का पालन कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी रोजगार बाजार में नरमी के बावजूद सोने में तेजी न आने का मुख्य कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का दो दशक के उच्च स्तर पर टिके रहना और डॉलर की निरंतर मजबूती है। इसके अलावा वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियों ने वित्तीय संपत्तियों को सीमित दायरे में बांध रखा है। • बॉन्ड यील्ड और गैर-ब्याज संपत्तियां: सरकारी बॉन्ड पर मिल रही बीस साल की उच्चतम यील्ड निवेशकों को बिना ब्याज वाली परिसंपत्ति जैसे सोने की ओर तुरंत मुड़ने से रोक रही है। इसके चलते रोजगार के कमजोर आंकड़े भी सोने में बड़ा उछाल लाने में विफल रहे। • भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर की मांग: पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन संघर्ष के बने रहने से डॉलर को सुरक्षित निवेश के तौर पर निरंतर समर्थन मिल रहा है। डॉलर की मजबूती ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन सहित अन्य परिसंपत्तियों की बढ़त को रोक दिया है। • ढांचागत मांग का सहारा: केंद्रीय बैंकों द्वारा स्वर्ण भंडार बढ़ाने और सुरक्षित निवेश की निरंतर खरीद ने सोने को चार हजार डॉलर के स्तर से नीचे गिरने नहीं दिया है। यही कारण है कि भारी दबाव के बावजूद कीमतें निचले स्तरों से तेजी से संभल रही हैं। • केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक उलझन: यूरोपीय सेंट्रल बैंक और अन्य केंद्रीय बैंकों के सामने बॉन्ड यील्ड की अनपेक्षित चाल से सख्त फैसले लेने की सीमाएं बन गई हैं। इससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में स्पष्ट दिशा की कमी बनी हुई है। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के कमजोर रहने के बाद भी सोने में तेजी क्यों नहीं आई? अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड बीस साल के उच्च स्तर के करीब बनी हुई है, जिससे बिना ब्याज देने वाले सोने की मांग पर दबाव बना रहा। 2. सोने के बाजार में विश्लेषक राडोम्स्की और सोकोलिडोउ के विचारों में क्या अंतर है? राडोम्स्की का मानना है कि यील्ड के दबाव से सोने में और गिरावट आएगी, जबकि सोकोलिडोउ का कहना है कि चार हजार डॉलर का स्तर न टूटना मजबूत ढांचागत मांग का संकेत है। 3. सोने के लिए मौजूदा समय में कौन से प्रमुख स्तर देखे जा रहे हैं? सोने की बढ़त बयालीस सौ डॉलर ($4,200) के नीचे सीमित है, जबकि दो महीने का निचला स्तर इकतालीस सौ दस डॉलर ($4,110) नजदीक बना हुआ है। 4. विदेशी मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन की क्या स्थिति है? डॉलर की मजबूती से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर गिरकर 0.6900 के करीब आ गया है, जबकि USD/JPY संभलकर 158.00 के स्तर पर पहुंच गया है। 5. क्रिप्टोकरेंसी बाजार में प्रमुख टोकन किस स्तर पर कारोबार कर रहे हैं? बिटकॉइन छियासी हजार डॉलर ($86,000) के ऊपर टिका हुआ है, एथेरियम सत्ताईस सौ डॉलर ($2,700) के पार है और रिपल एक दशमलव पांच दो डॉलर ($1.52) के ऊपर है। 6. यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के सामने क्या चुनौती है? मुद्रास्फीति लक्ष्य से दोगुनी होने के बावजूद बॉन्ड बाजार पहले ही सख्ती कर चुका है, जिससे ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला जटिल हो गया है। https://trendkia.com/market/kamajora-us-jobs-data-ke-bada-gold-ki-chala-para-2-analysts-ki-alaga-raya-janie-age-ke-snketa-43432 TrendKia — Har trend, sabse pehle.