# खाड़ी देशों से आपूर्ति बढ़ने से कच्चा तेल 91 डॉलर के नीचे फिसला, पश्चिमी एशिया में सैन्य हलचल से गिरावट सीमित

> खाड़ी क्षेत्र से तेल निर्यात में तेजी आने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में डब्ल्यूटीआई क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल के नीचे लुढ़क गया है, हालांकि पश्चिमी एशिया में नए सैन्य तनाव ने कीमतों को सहारा दिया है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/khari-deshon-se-apurti-barhane-se-kachcha-tela-91-dolara-ke-niche-phisala-west-asia-men-sainya-halachala-se-giravata-simita-41779 · **Language:** Hindi
**Tags:** कच्चा तेल, डब्ल्यूटीआई क्रूड, खाड़ी देश, ऊर्जा बाजार, पेट्रोलियम निर्यात, डोनाल्ड ट्रंप, होर्मुज जलडमरूमध्य, ओपेक

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली और डब्ल्यूटीआई क्रूड फिसलकर 91.00 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया। इसके साथ ही साप्ताहिक चार्ट पर भी तेल का रुख नकारात्मक दायरे में चला गया है। खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति बढ़ने की खबरों ने बाजार में तेल संकट की आशंकाओं को काफी हद तक कम कर दिया है, जिसके चलते खरीदारों ने मुनाफावसूली की है। हालांकि, पश्चिमी एशिया में अमेरिका की तरफ से अतिरिक्त सैन्य बल भेजने और व्यापारिक समुद्री मार्ग में नई घटनाओं के चलते कीमतों में यह गिरावट एक सीमित दायरे में ही सिमट कर रह गई।

## खाड़ी देशों से तेल का प्रवाह सुधरा
जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर महीने के दौरान पश्चिमी एशिया के देशों से कच्चे तेल का दैनिक प्रवाह औसतन 17.7 बैरल प्रति दिन रहा। यह आंकड़ा युद्ध पूर्व स्तर का लगभग 98 प्रतिशत है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों से आपूर्ति श्रृंखला काफी हद तक सामान्य हो रही है। इसी तरह ईंधन निर्यात भी औसतन 3 मिलियन बैरल प्रति दिन दर्ज किया गया, जो संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर का करीब 58 प्रतिशत बैठता है। ऊर्जा निर्यात के इन आंकड़ों ने वैश्विक बाजारों को यह भरोसा दिलाया कि तेल की तत्काल कमी नहीं होने जा रही है।

इसके अलावा, पश्चिमी देशों के भीतर स्टॉक जारी करने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी ने भी कीमतों पर दबाव कम किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस और जर्मनी से तुरंत डीजल के आपातकालीन भंडार जारी करने का आग्रह किया है और ऐसा न करने पर अमेरिकी निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। इस कदम ने यूरोप और अमेरिका दोनों जगहों पर ईंधन की आपूर्ति को लेकर सकारात्मक माहौल बनाने का काम किया, जिससे कच्चे तेल के दामों में चल रही तेजी पर ब्रेक लग गया।

## भू-राजनीतिक तनाव ने तय की कीमतों की निचली सीमा
कच्चे तेल में आई इस गिरावट के बावजूद बाजार को नीचे से मजबूत सहारा मिल रहा है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह बात सामने आई है कि पेंटागन इस क्षेत्र में लगभग 10,000 सैनिकों के साथ अपना तीसरा विमानवाहक पोत भेज रहा है। इस भारी सैन्य जमावड़े को बाजार विश्लेषक इस बात का सीधा संकेत मान रहे हैं कि पश्चिमी एशिया में किसी भी समय सैन्य टकराव दोबारा भड़क सकता है।

वैश्विक समुद्री यातायात पर नजर रखने वाली रॉयल नेवी की संस्था यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने यह भी बताया कि गुरुवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय एक तेल टैंकर किसी अज्ञात प्रक्षेप्य की चपेट में आ गया। दुनिया के सबसे संवेदनशील और व्यस्त समुद्री गलियारे में हुई इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस रास्ते से माल की आवाजाही अभी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। आपूर्ति मार्ग पर मंडराते इस खतरे के कारण व्यापारी तेल की भारी बिकवाली करने से बच रहे हैं, जिससे क्रूड 91 डॉलर के आसपास टिकने की कोशिश कर रहा है।

## डब्ल्यूटीआई क्रूड क्या है और इसकी महत्ता
डब्ल्यूटीआई क्रूड अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में सबसे व्यापक रूप से कारोबार किए जाने वाले कच्चे तेलों में से एक है। डब्ल्यूटीआई का पूरा नाम वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट है। यह वैश्विक तेल बाजार के तीन प्रमुख प्रकारों में शामिल है, जिनमें ब्रेंट और दुबई क्रूड अन्य दो बड़े नाम हैं। घनत्व में हल्का और गंधक की कम मात्रा होने के कारण इसे अक्सर लाइट और स्वीट ऑयल भी कहा जाता है। कम सल्फर और उच्च गुणवत्ता के कारण इसे आसानी से रिफाइन किया जा सकता है और इससे पेट्रोल तथा डीजल जैसे उत्पादों का उत्पादन सुगम होता है।

यह कच्चा तेल मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका से निकाला जाता है। इसके भौतिक वितरण और व्यापार का मुख्य केंद्र कुशिंग हब है, जिसे दुनिया भर में द पाइपलाइन क्रॉसरोड्स ऑफ द वर्ल्ड के नाम से जाना जाता है। डब्ल्यूटीआई दुनिया भर के विश्लेषकों, सरकारों और मीडिया द्वारा तेल की कीमतों का आकलन करने के लिए एक मानक बेंचमार्क के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

## कच्चे तेल के दामों को तय करने वाले प्रमुख कारक
दुनिया की किसी भी अन्य वित्तीय संपत्ति की तरह, कच्चे तेल की कीमतें भी मांग और आपूर्ति के बुनियादी नियमों से संचालित होती हैं। जब दुनिया भर में आर्थिक वृद्धि तेज होती है, तब उद्योगों और परिवहन क्षेत्र में ऊर्जा की खपत बढ़ती है, जिससे कीमतें चढ़ती हैं। इसके विपरीत वैश्विक सुस्ती या मंदी के समय मांग घटने से कीमतों में गिरावट आती है। इसके अलावा उत्पादक क्षेत्रों में राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध, प्रतिबंध और शिपिंग मार्गों में व्यवधान आपूर्ति को सीधे प्रभावित करते हैं, जिससे अचानक मूल्य वृद्धि देखी जाती है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की ताकत भी तेल की लागत पर गहरा असर डालती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का अधिकांश कारोबार अमेरिकी डॉलर में ही किया जाता है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो अन्य विदेशी मुद्राओं को रखने वाले खरीदारों के लिए तेल खरीदना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है, जिससे वैश्विक मांग को बढ़ावा मिलता है। वहीं जब डॉलर मजबूत होता है, तो गैर-अमेरिकी खरीदारों के लिए तेल महंगा हो जाता है, जिससे मांग पर नकारात्मक दबाव पड़ता है।

## ओपेक और ओपेक प्लस की रणनीतिक भूमिका
वैश्विक तेल बाजार में कीमतों और आपूर्ति को नियंत्रित करने में ओपेक यानी ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज का बहुत बड़ा योगदान है। यह 12 प्रमुख तेल उत्पादक देशों का एक समूह है, जो साल में दो बार होने वाली बैठकों में अपने सदस्य देशों के लिए सामूहिक उत्पादन कोटा निर्धारित करता है। जब ओपेक देश अपने उत्पादन कोटे में कटौती करने का फैसला लेते हैं, तो बाजार में आपूर्ति कम हो जाती है और तेल की कीमतें तेजी से ऊपर की तरफ भागने लगती हैं। इसके विपरीत, जब यह संगठन उत्पादन बढ़ाने का निर्णय लेता है, तो आपूर्ति बढ़ने से कीमतों में नरमी आती है।

समय के साथ इस संगठन का दायरा बढ़ा है और अब इसे ओपेक प्लस के नाम से भी जाना जाता है। ओपेक प्लस में मूल 12 सदस्यों के अलावा 10 अतिरिक्त गैर-ओपेक उत्पादक देश शामिल हैं। इन गैर-ओपेक देशों में रूस सबसे प्रमुख और प्रभावशाली देश है, जिसके उत्पादन फैसलों पर पूरे वैश्विक ऊर्जा बाजार की नजर टिकी रहती है।

## इन्वेंट्री आंकड़े तय करते हैं बाजार की दिशा
अमेरिका में हर हफ्ते जारी होने वाली तेल भंडारण रिपोर्टें भी डब्ल्यूटीआई क्रूड की दैनिक चाल को प्रभावित करती हैं। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट यानी एपीआई और एनर्जी इंफॉर्मेशन एजेंसी यानी ईआईए द्वारा जारी इन्वेंट्री आंकड़े यह दिखाते हैं कि अमेरिकी भंडारण में तेल की कितनी मात्रा बची हुई है। यदि इन रिपोर्टों में भंडारण में अचानक कमी दिखाई देती है, तो इसका अर्थ यह निकाला जाता है कि खपत बढ़ रही है, जिससे कीमतों को समर्थन मिलता है। इसके उलट अगर भंडार बढ़ता हुआ पाया जाता है, तो यह सुस्त मांग या अतिरिक्त आपूर्ति का संकेत होता है, जिससे कीमतें नीचे गिरती हैं।

एपीआई अपने आंकड़े हर मंगलवार को पेश करता है, जबकि सरकारी संस्था ईआईए की आधिकारिक रिपोर्ट इसके ठीक अगले दिन बुधवार को आती है। लगभग 75 प्रतिशत मौकों पर इन दोनों रिपोर्टों के आंकड़े 1 प्रतिशत के अंतर के भीतर एक जैसे ही रहते हैं। हालांकि, ईआईए के एक आधिकारिक सरकारी एजेंसी होने के कारण संस्थागत निवेशक और बाजार विश्लेषक इसके आंकड़ों को अधिक प्रामाणिक और भरोसेमंद मानते हैं।

## इसका आप पर असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उतार-चढ़ाव और पश्चिमी एशिया के तनाव का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट और ईंधन की लागत पर पड़ सकता है।

- **भारत में प्रभाव:** भारत अपनी तेल जरूरतों का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है, इसलिए 91 डॉलर के आसपास कच्चा तेल बने रहने से देश के आयात बिल और चालू खाता घाटे पर दबाव बना रहेगा। हालांकि यदि खाड़ी देशों से आपूर्ति बढ़ने के कारण कीमतें और घटती हैं, तो सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को स्थिर रखने में काफी राहत मिलेगी।
- **परिवहन और लॉजिस्टिक्स:** अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की बढ़ती लागत माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स खर्च को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। यदि डीजल के दामों पर वैश्विक दबाव बना रहता है, तो इसका असर दैनिक उपभोग की वस्तुओं और खाद्यान्न की ढुलाई लागत पर पड़ सकता है।
- **वैश्विक यात्रियों और उड़ानों पर:** कच्चे तेल के ऊंचे स्तर पर टिके रहने से विमानन कंपनियों का एविएशन टर्बाइन फ्यूल खर्च अधिक बना रहेगा। ऐसे में आगामी हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा की टिकटों के दाम में कमी आने की संभावना बेहद कम हो जाती है।
- **शेयर बाजार के निवेशकों के लिए:** पेंटागन की सैन्य तैनाती और होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकर पर हमले जैसी घटनाएं बाजार में अनिश्चितता पैदा करती हैं। इससे तेल विपणन कंपनियों, पेंट और टायर कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
खाड़ी देशों से तेल के निर्यात में सुधार आने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति को लेकर बनी घबराहट कम हुई है, जिससे कच्चे तेल के दामों में यह गिरावट देखने को मिली। हालांकि पश्चिमी एशिया में अमेरिका द्वारा अतिरिक्त सैन्य बल भेजे जाने और व्यापारिक जहाजों पर हमलों के कारण कीमतें एक निश्चित सीमा से नीचे नहीं गिर पा रही हैं।

- **खाड़ी निर्यात में जोरदार वापसी:** सितंबर महीने में पश्चिमी एशिया से कच्चे तेल का प्रवाह 17.7 बैरल प्रति दिन और ईंधन निर्यात 3 मिलियन बैरल प्रति दिन दर्ज हुआ, जो युद्ध पूर्व सामान्य स्तर के काफी करीब पहुंच चुका है। आपूर्ति में हुई इस वास्तविक वृद्धि ने बाजार की उस चिंता को दूर किया जिसमें लंबे समय तक तेल की कमी रहने की आशंका जताई जा रही थी।
- **अमेरिका की तरफ से स्टॉक जारी करने का दबाव:** अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फ्रांस और जर्मनी को आपातकालीन डीजल भंडार तुरंत जारी करने के निर्देश दिए गए, जिससे उत्पाद बाजार में राहत की उम्मीद जगी। इस राजनीतिक चेतावनी ने खरीदारों को यह संकेत दिया कि पश्चिमी देश ईंधन की कमी नहीं होने देंगे।
- **होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा संकट:** रॉयल नेवी की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के अनुसार एक अज्ञात प्रक्षेप्य द्वारा तेल टैंकर को निशाना बनाए जाने से मुख्य समुद्री मार्ग पर खतरा बना हुआ है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि ऊर्जा आपूर्ति के रास्ते पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं, जिसने कीमतों में भारी गिरावट को रोक दिया।
- **अमेरिकी सैन्य बलों की नई तैनाती:** पेंटागन द्वारा लगभग 10,000 सैनिकों के साथ तीसरे विमानवाहक पोत को क्षेत्र में भेजे जाने की योजना ने यह संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच कभी भी टकराव बढ़ सकता है। इस सैन्य हलचल ने बाजार में युद्ध का जोखिम प्रीमियम बनाए रखा है।

## सवाल-जवाब

### 1. डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों में गिरावट क्यों आई?
खाड़ी देशों से सितंबर में तेल और ईंधन का निर्यात बढ़ने की रिपोर्ट के बाद बाजार में आपूर्ति संकट की चिंता कम हो गई, जिससे डब्ल्यूटीआई क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गया।

### 2. सितंबर में खाड़ी देशों से तेल का प्रवाह कितना रहा?
जेपी मॉर्गन के अनुसार सितंबर में पश्चिमी एशिया से कच्चे तेल का औसत प्रवाह 17.7 बैरल प्रति दिन रहा, जो युद्ध से पहले के स्तर का लगभग 98 प्रतिशत है।

### 3. ईंधन निर्यात के आंकड़े क्या रहे?
सितंबर महीने में इस क्षेत्र से ईंधन का निर्यात औसतन 3 मिलियन बैरल प्रति दिन रहा, जो संघर्ष पूर्व आपूर्ति के 58 प्रतिशत के बराबर है।

### 4. डोनाल्ड ट्रंप ने किन देशों से डीजल भंडार जारी करने को कहा है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस और जर्मनी से तुरंत अपने डीजल भंडार जारी करने का आग्रह किया है और ऐसा न करने पर अमेरिकी निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है।

### 5. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट सीमित क्यों रही?
पेंटागन द्वारा 10,000 सैनिकों के साथ तीसरा विमानवाहक पोत क्षेत्र में भेजने और होर्मुज जलडमरूमध्य में एक टैंकर पर हमले के कारण कीमतों में बड़ी गिरावट नहीं आई।

### 6. डब्ल्यूटीआई का पूरा नाम क्या है और इसे स्वीट क्रूड क्यों कहते हैं?
डब्ल्यूटीआई का पूरा नाम वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट है। इसमें गंधक की मात्रा काफी कम होने के कारण इसे स्वीट क्रूड कहा जाता है।

### 7. ओपेक प्लस समूह क्या है?
ओपेक प्लस में 12 पारंपरिक ओपेक सदस्य देशों के अलावा रूस समेत 10 अतिरिक्त गैर-ओपेक तेल उत्पादक देश शामिल हैं, जो उत्पादन कोटा मिलकर तय करते हैं।

### 8. तेल इन्वेंट्री पर कौन सी दो संस्थाएं रिपोर्ट जारी करती हैं?
अमेरिकी बाजार में इन्वेंट्री की जानकारी अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट हर मंगलवार को और सरकारी संस्था एनर्जी इंफॉर्मेशन एजेंसी हर बुधवार को जारी करती है।

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