लैटिन अमेरिकी मुद्राओं के कैरी ट्रेड पर बढ़ा दबाव, अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में गिरावट बाजार में बढ़ती अस्थिरता और जी10 दरों के चलते लैटिन अमेरिकी मुद्राओं के कैरी ट्रेड पर जोखिम गहरा गया है, जबकि अमेरिकी मध्यावधि चुनाव नतीजों के बीच डॉलर और बॉन्ड यील्ड लुढ़क गए हैं। वैश्विक वित्तीय बाजारों में बढ़ती अस्थिरता और जी10 अर्थव्यवस्थाओं की बढ़ती ब्याज दरों के बीच लैटिन अमेरिकी विदेशी मुद्रा बाजार में कैरी ट्रेड की स्थिति काफी संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई है। बीएनवाई में जेफ यू के अनुसार, ब्राजील और मैक्सिको के केंद्रीय बैंकों के अपनी नीतिगत दरों पर यथास्थिति बनाए रखने की संभावना और व्यापार शर्तों से पर्याप्त समर्थन न मिलने की वजह से अब वास्तविक ब्याज दरों का लाभ केवल घरेलू नीतिगत फैसलों पर निर्भर रह गया है। इसके साथ ही पोजिशनिंग आंकड़ों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि विभिन्न क्षेत्रीय मुद्राओं पर बिकवाली का भारी दबाव बना हुआ है, जबकि कुछ प्रमुख मुद्राओं में नई खरीदारी की रफ्तार सुस्त पड़ रही है। लैटिन अमेरिकी मुद्राओं में बिकवाली और हेजिंग का दबाव क्षेत्रीय मुद्राओं की स्थिति पर नजर डालें तो कोलंबियाई पेसो (COP) और चिली पेसो (CLP) में अत्यधिक भारी होल्डिंग्स के बाद अब बिकवाली या हेजिंग गतिविधियों में स्पष्ट तेजी देखी जा रही है। अत्यधिक ओवरहेल्ड स्तरों से निवेशक अपनी स्थिति घटा रहे हैं, जिससे इन मुद्राओं में जोखिम बढ़ गया है। दूसरी ओर मैक्सिकन पेसो (MXN) में लॉन्ग पोजिशन तैयार करने की कोशिशें भी अपनी रफ्तार खोती दिख रही हैं। हालांकि उच्च प्रतिफल देने वाली मुद्राओं में समग्र निवेश अभी भी सीमित दायरे में बना हुआ है, फिर भी लैटिन अमेरिकी परिसंपत्तियां बढ़ते जोखिम के दायरे में खड़ी हैं। ब्राजीलियाई रियल और पेरूवियन सोल की स्थिति ब्राजीलियाई रियल (BRL) और पेरूवियन सोल (PEN) के मामले में बाजार की होल्डिंग्स सामान्य से काफी कम यानी अंडरहेल्ड बनी हुई हैं। हालांकि, इनमें से केवल ब्राजीलियाई रियल में खरीदारी का रुझान विशेष रूप से कमजोर दर्ज किया गया है। निवेशकों के विश्वास को दोबारा सकारात्मक दायरे में लाने के लिए लाभप्रदता में स्पष्ट और ठोस बदलाव की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसके बावजूद, उच्च कैरी ट्रेड वाले नामों में धीरे-धीरे नए मूल्य अवसर भी उभर रहे हैं। ब्राजील के चुनाव लैटिन अमेरिका और उच्च कैरी संपत्तियों के लिए सबसे अहम जोखिम का कारक रहे हैं, और बाजार ने अपनी उम्मीदों को काफी हद तक दोबारा मूल्यांकित कर लिया है, जिसके चलते वर्ष के अंत और आगामी वर्ष की शुरुआत तक इस क्षेत्र का राजनीतिक माहौल शांत होने की उम्मीद है। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से डॉलर इंडेक्स में गिरावट व्यापक मुद्रा बाजार में बुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर इंडेक्स पर भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के शुरुआती नतीजों से उपजी राजनीतिक अनिश्चितता के कारण डॉलर इंडेक्स गिरकर देर सितंबर के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। वाशिंगटन में संभावित राजनीतिक गतिरोध और सुरक्षित निवेश विकल्पों की बढ़ती मांग ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नई गिरावट को गति दी, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर वृद्धि की उम्मीदों का असर बेअसर हो गया और डॉलर पर नीचे की ओर अतिरिक्त दबाव बन गया। येन, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और सोने की हलचल मुद्राओं के प्रमुख जोड़ों में यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) पर बुधवार को भारी बिकवाली दर्ज की गई और एशियाई सत्र में यह 158.00 के नीचे फिसल गया। अमेरिकी मध्यावधि मतगणना के बाद गहराती राजनीतिक अनिश्चितता ने डॉलर को एक महीने के निचले स्तर पर धकेल दिया और वाशिंगटन में नीतिगत गतिरोध के आसार ने सुरक्षित निवेश प्रवाह को गति दी। उधर एयूडी/यूएसडी (AUD/USD) दो सप्ताह के निचले स्तर से ऊपर संभलकर 0.6965 के करीब स्थिर बना रहा, जहां डॉलर की कमजोरी ने इसे सहारा दिया, लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के कम आक्रामक रुख ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त को सीमित रखा। चार हजार डॉलर के पार सोना सुरक्षित निवेश की जोरदार मांग और अमेरिकी डॉलर में चौतरफा गिरावट के बीच सोने की कीमतों ने अपने साप्ताहिक उच्च स्तर के करीब ठोस बढ़त बनाए रखी। हाउस और सीनेट में डेमोक्रेट्स की जीत से वाशिंगटन में नीतिगत गतिरोध की आशंका बढ़ी, जिसने निवेशकों को सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित किया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर दबाव के चलते शुरुआती यूरोपीय सत्र में सोना 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से काफी ऊपर कारोबार करता नजर आया। इसका आप पर असर वैश्विक मुद्राओं में बढ़ती अस्थिरता और अमेरिकी डॉलर में गिरावट से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों और आयात-निर्यात लागत पर सीधा असर पड़ने वाला है। • भारत में प्रभाव: डॉलर की वैश्विक कमजोरी से भारतीय रुपये को अल्पावधि में राहत मिल सकती है और आयात बिल का दबाव हल्का हो सकता है। यदि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट जारी रहती है तो भारतीय इक्विटी बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेश के प्रवाह को गति मिल सकती है। • सोने के खरीदारों और निवेशकों पर: वैश्विक बाजार में सोने के 4,000 डॉलर के पार टिके रहने से घरेलू स्तर पर आभूषणों और निवेश सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर रह सकती हैं। नए खरीदारों को ऊंचे भावों पर खरीदारी करनी पड़ सकती है, जबकि मौजूदा निवेशकों के पोर्टफोलियो मूल्य में बड़ा उछाल दिखेगा। • मुद्रा और कमोडिटी ट्रेडर्स के लिए: लैटिन अमेरिकी मुद्राओं में हेजिंग बढ़ने और जी10 दरों के दबाव से उभरते बाजारों के फॉरेक्स ट्रेड में जोखिम बढ़ गया है। ट्रेडर्स को उच्च अस्थिरता को देखते हुए अपने स्टॉप लॉस और मार्जिन स्तरों को सख्त बनाए रखना होगा। • वैश्विक आर्थिक परिदृश्य: अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में संभावित राजनीतिक गतिरोध से वाशिंगटन में नए नीतिगत फैसलों की गति धीमी हो सकती है। इस गतिरोध से राजकोषीय खर्च और नीतिगत दरों को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी, जिससे संपत्तियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। ऐसा क्यों हुआ लैटिन अमेरिकी मुद्राओं के कैरी ट्रेड में कमजोरी और वैश्विक वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल कई मैक्रोइकॉनॉमिक और राजनीतिक कारणों के एक साथ आने से पैदा हुई है। • बढ़ती अस्थिरता और दर अंतर में कमी: वैश्विक बाजारों में रियललाइज्ड वोलैटिलिटी बढ़ने और जी10 अर्थव्यवस्थाओं में ब्याज दरें ऊपर जाने से कैरी ट्रेड का आकर्षण घट गया है। ब्राजील और मैक्सिको के केंद्रीय बैंकों के अपनी दरों को स्थिर रखने से नीतिगत ब्याज दरों का अतिरिक्त लाभ मिलना बंद हो गया है। • व्यापार शर्तों का अभाव: लैटिन अमेरिकी अर्थव्यवस्थाओं को इस समय अपनी व्यापार शर्तों (टर्म्स ऑफ ट्रेड) से कोई नया सकारात्मक सहारा नहीं मिल रहा है। विदेशी व्यापार से पर्याप्त समर्थन न होने के कारण इन मुद्राओं की मजबूती केवल आंतरिक नीतियों पर निर्भर होकर रह गई है। • अत्यधिक ओवरहेल्ड पोजिशनिंग: कोलंबियाई पेसो और चिली पेसो में निवेशकों की पोजीशन जरूरत से ज्यादा भरी हुई थीं, जिससे मुनाफावसूली और हेजिंग की बिकवाली शुरू हो गई। इसी दौरान मैक्सिकन पेसो में भी नए खरीदार बाजार में बने रहने का उत्साह खो बैठे। • अमेरिकी चुनाव और राजनीतिक अनिश्चितता: अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के शुरुआती नतीजों में डेमोक्रेट्स की बढ़त ने वाशिंगटन में विधायी गतिरोध की संभावना पैदा कर दी। इस राजनीतिक अनिश्चितता ने अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड को गिराते हुए निवेशकों को सोने जैसे सुरक्षित ठिकानों की ओर धकेल दिया। सवाल-जवाब 1. लैटिन अमेरिकी मुद्राओं के कैरी ट्रेड पर दबाव क्यों बढ़ रहा है? बाजार में बढ़ती अस्थिरता और जी10 दरों के ऊपर जाने के साथ-साथ ब्राजील और मैक्सिको के केंद्रीय बैंकों द्वारा दरों को स्थिर रखे जाने से कैरी ट्रेड पर जोखिम बढ़ गया है। 2. किन लैटिन अमेरिकी मुद्राओं में बिकवाली और हेजिंग का दबाव देखा जा रहा है? कोलंबियाई पेसो (COP) और चिली पेसो (CLP) में अत्यधिक भारी होल्डिंग्स के बाद बिकवाली और हेजिंग बढ़ी है, जबकि मैक्सिकन पेसो (MXN) में खरीदारी की रफ्तार सुस्त पड़ी है। 3. ब्राजीलियाई रियल (BRL) की मौजूदा स्थिति क्या है? ब्राजीलियाई रियल में निवेशकों की होल्डिंग कम है और खरीदारी की गति कमजोर बनी हुई है, जिसे सुधारने के लिए लाभप्रदता में स्पष्ट बदलाव की जरूरत है। 4. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में गिरावट की मुख्य वजह क्या रही? अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के शुरुआती नतीजों से उपजी राजनीतिक अनिश्चितता और वाशिंगटन में संभावित गतिरोध के चलते डॉलर देर सितंबर के बाद के निचले स्तर पर आ गया। 5. सोने की कीमत किस स्तर के पार पहुंच गई है? अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में गिरावट के बीच सुरक्षित निवेश मांग के दम पर सोना 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से काफी ऊपर कारोबार कर रहा है। 6. यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) और एयूडी/यूएसडी (AUD/USD) में क्या रुझान रहा? यूएसडी/जेपीवाई गिरकर 158.00 के नीचे आ गया, जबकि एयूडी/यूएसडी दो सप्ताह के निचले स्तर से संभलकर 0.6965 के करीब स्थिर बना रहा। https://trendkia.com/market/laitina-ameriki-mudraon-ke-kairi-treda-para-barha-dabava-us-dollar-aura-bonda-yilda-men-giravata-56324 TrendKia — Har trend, sabse pehle.