मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और होर्मुज का संकट, कच्चे तेल की कीमतें 85.50 डॉलर के पास पहुंचीं मध्य पूर्व में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच ठप पड़ी वार्ता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। WTI क्रूड का भाव एशियाई कारोबारी घंटों में उछलकर 85.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। वैस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट कच्चे तेल के वायदा भाव में गुरुवार को एशियाई कारोबार के दौरान शानदार रिकवरी देखी गई। पिछले दिन के मामूली नुकसान से उबरते हुए कच्चा तेल 85.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। ऊर्जा बाजार में यह उछाल मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका व ईरान के बीच ठप पड़ी बातचीत के कारण आया है। दोनों देशों के बीच बढ़ता विवाद अब होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक समुद्री मार्ग तक फैल चुका है, जिससे वैश्विक कमोडिटी बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बन गया है, हालांकि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से तेल टैंकरों की आवाजाही जारी है। संयुक्त अरब अमीरात द्वारा उठाए गए आर्थिक कदमों के बाद क्षेत्र का राजनीतिक माहौल और अधिक जटिल हो गया है। संयुक्त अरब अमीरात ने अपनी सीमा में संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के बाद ईरान के साथ सभी वित्तीय और व्यावसायिक लेन-देन पर रोक लगा दी है। इन बढ़ते आर्थिक प्रतिबंधों और सुरक्षा जोखिमों के बावजूद, खाड़ी देश भारी मात्रा में कच्चे तेल का निर्यात बनाए हुए हैं। क्षेत्र के तेल उत्पादक वैकल्पिक भू-मार्गों और गुप्त जहाजरानी रास्तों का उपयोग कर अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक बिना रुकावट तेल पहुंचा रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा का खतरा और विश्लेषकों की चेतावनी स्थिति स्पष्ट करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की शिपमेंट का आना-जाना जारी है, और तेहरान के साथ भविष्य में कूटनीतिक बातचीत के दरवाजे खुले हुए हैं। हालांकि ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापारिक माहौल अब भी बेहद नाजुक बना हुआ है क्योंकि विवाद का कोई जल्द समाधान निकलता नहीं दिख रहा है। टीडी सिक्योरिटीज के वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव ऊर्जा व्यापारियों को सतर्क रहने पर मजबूर कर रहा है। फर्म का कहना है कि जहाजों पर नए हमले, सैन्य संघर्ष बढ़ने की चेतावनी और ठप पड़ी शांति वार्ता ऊर्जा बाजार को गंभीर खतरे में डाल रही है। इन कारणों से ब्रेंट क्रूड और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भू-राजनीतिक जोखिम का असर बना हुआ है। अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार और आपूर्ति की स्थिति अंतरराष्ट्रीय बाजार में तनाव के कारण कीमतें बढ़ रही हैं, वहीं अमेरिका में आपूर्ति का मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा जारी साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में वाणिज्यिक कच्चे तेल के घरेलू स्टॉक में 4.4 मिलियन बैरल की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस आंकड़े ने बाजार विशेषज्ञों को थोड़ा हैरान किया है, जो आपूर्ति में कमी का अनुमान लगा रहे थे। दूसरी ओर, EIA के आंकड़ों से पता चला है कि डीजल और हीटिंग ऑयल जैसे डिस्टिलेट का भंडार 1.5 मिलियन बैरल घटकर एक महीने के निचले स्तर पर आ गया है। डिस्टिलेट स्टॉक में आई यह गिरावट देश भर में औद्योगिक और परिवहन ईंधन की मजबूत मांग को दर्शाती है, जबकि बिना रिफाइन किया हुआ कच्चा तेल भंडारों में जमा हो रहा है। वैश्विक बेंचमार्क के रूप में वैस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट का महत्व वैस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट दुनिया के प्रमुख कच्चे तेल बेंचमार्क्स में से एक है, जो ब्रेंट क्रूड और दुबई क्रूड की तरह अंतरराष्ट्रीय कीमतों का आधार तय करता है। मुख्य रूप से अमेरिका में उत्पादित होने वाला WTI तेल अपने कम एपीआई घनत्व और कम सल्फर मात्रा के कारण हल्का और मीठा माना जाता है। अपनी इन्हीं रासायनिक विशेषताओं के कारण WTI उच्च गुणवत्ता वाला माना जाता है, जिससे रिफाइनरियों के लिए इसे पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन में बदलना सस्ता और आसान होता है। WTI कच्चे तेल के भंडारण और वितरण का मुख्य केंद्र ओक्लाहोमा का कुशिंग शहर है। कुशिंग को व्यापक रूप से दुनिया के पाइपलाइन चौराहे के रूप में जाना जाता है। यह स्थान NYMEX क्रूड फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स का भौतिक डिलीवरी केंद्र है। अपनी केंद्रीय स्थिति, विशाल टैंक भंडारण क्षमता और अमेरिका भर में फैले पाइपलाइन नेटवर्क के कारण कुशिंग में होने वाले मूल्य बदलाव पूरी दुनिया के तेल बाजार को प्रभावित करते हैं। WTI की कीमतों को प्रभावित करने वाले मुख्य आर्थिक और आपूर्ति कारक अंतरराष्ट्रीय बाजार में व्यापार होने वाली अन्य कमोडिटीज की तरह, WTI कच्चे तेल का मूल्य भी मांग और आपूर्ति के बुनियादी नियमों से तय होता है। वैश्विक आर्थिक वृद्धि के दौर में औद्योगिक उत्पादन, परिवहन और वाणिज्यिक गतिविधियों में तेजी आती है, जिससे तेल की मांग बढ़ती है और कीमतें ऊपर जाती हैं। इसके विपरीत, वैश्विक आर्थिक सुस्ती या मंदी के समय ईंधन की मांग कमजोर पड़ती है, जिससे कीमतों में गिरावट आती है। राजनैतिक अस्थिरता, युद्ध और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध आपूर्ति पक्ष को सीधे प्रभावित करते हैं। तेल उत्पादन, रिफाइनिंग या समुद्री परिवहन में आई कोई भी रुकावट बाजार से भौतिक तेल की मात्रा कम कर देती है, जिससे खरीदार ऊंचे दाम चुकाने को तैयार हो जाते हैं। इसके अलावा, पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ओपेक के फैसले भी अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर सीधा असर डालते हैं। अमेरिकी डॉलर का मूल्य भी कच्चे तेल के मूल्य निर्धारण में बड़ी भूमिका निभाता है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव विदेशी खरीदारों की क्रय शक्ति को प्रभावित करता है। कमजोर अमेरिकी डॉलर अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए कच्चा तेल सस्ता बना देता है, जिससे मांग बढ़ती है और कीमतें ऊपर जाती हैं। दूसरी ओर, मजबूत डॉलर विदेशी खरीदारों के लिए तेल महंगा कर देता है, जिससे मांग में कमी आती है। साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट और बाजार पर उनका असर तेल व्यापारी साप्ताहिक इन्वेंट्री आंकड़ों पर कड़ी नजर रखते हैं। ये आंकड़े अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट और एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा जारी किए जाते हैं। API हर मंगलवार दोपहर अपने अनुमान जारी करता है, जबकि सरकार की आधिकारिक संस्था EIA बुधवार सुबह अपनी रिपोर्ट प्रकाशित करती है। साप्ताहिक स्टॉक में होने वाले बदलाव ऊर्जा क्षेत्र की मांग और आपूर्ति के संतुलन को उजागर करते हैं। इन्वेंट्री में बड़ी गिरावट मजबूत मांग या तंग आपूर्ति का संकेत देती है, जिससे क्रूड की कीमतें बढ़ती हैं। इसके विपरीत, इन्वेंट्री में भारी बढ़ोतरी बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति का संकेत देती है, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है। आंकड़े बताते हैं कि API और EIA के इन्वेंट्री अनुमान लगभग 75 प्रतिशत मामलों में एक दूसरे के 1 प्रतिशत के भीतर होते हैं। हालांकि, सरकारी एजेंसी होने के कारण व्यापारी EIA की रिपोर्ट को अधिक विश्वसनीय मानते हैं। ओपेक और ओपेक प्लस का बाजार पर प्रभाव ओपेक 12 तेल उत्पादक सदस्य देशों का एक समूह है, जो साल में दो बार बैठक करके उत्पादन कोटा तय करता है। अपने उत्पादन लक्ष्यों में बदलाव करके ओपेक देश वैश्विक आपूर्ति को नियंत्रित करने और अंतरराष्ट्रीय कीमतों को स्थिर रखने का प्रयास करते हैं। जब ओपेक उत्पादन कोटा कम करने का फैसला करता है, तो बाजार में आपूर्ति घटती है और तेल महंगा होता है। वहीं जब यह समूह उत्पादन बढ़ाता है, तो बाजार में उपलब्धता बढ़ने से कीमतें नीचे आती हैं। हाल के वर्षों में, इस समूह ने ओपेक प्लस का गठन करके अपना विस्तार किया है, जिसमें 10 गैर-ओपेक तेल उत्पादक देश शामिल हैं। इन बाहरी साझेदारों में रूस सबसे प्रमुख भूमिका निभाता है। ओपेक प्लस के समन्वित फैसले वैश्विक तेल निर्यात के बड़े हिस्से को नियंत्रित करते हैं, इसलिए उनकी घोषणाओं का अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझान पर गहरा असर पड़ता है। विदेशी मुद्रा और कीमती धातुओं के बाजारों की हलचल ऊर्जा बाजार में जारी हलचल के बीच विदेशी मुद्रा और सर्राफा बाजारों में भी बड़ी हलचल देखी गई। मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड में मजबूती दर्ज की गई और GBP/USD का जोड़ा 1.3600 के स्तर को पार कर मध्य मई के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। पाउंड को यह मजबूती अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट के बाद मिली, जो अमेरिकी वित्त मंत्रालय की एक घोषणा के कारण हुई। वित्त मंत्रालय ने लंबे समय के बॉन्ड की तरलता बनाए रखने के लिए अपनी पुनर्खरीद प्रक्रिया को दोगुना करने का फैसला किया, जिससे डॉलर पर दबाव बढ़ा। ब्रिटेन के आर्थिक आंकड़ों ने भी पाउंड को समर्थन दिया। आंकड़ों के अनुसार ब्रिटेन में जुलाई में वार्षिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति बढ़कर 2.9 प्रतिशत हो गई, जो बाजार के अनुमानों के अनुरूप थी। वहीं मुख्य CPI मुद्रास्फीति जुलाई में बढ़कर 2.6 प्रतिशत हो गई, जो 2.5 प्रतिशत के अनुमान से अधिक थी। इसी तरह, यूरो में भी डॉलर के मुकाबले तेजी देखी गई और EUR/USD 1.1650 के पार पहुंचकर जून की शुरुआत के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर आ गया। अमेरिकी डॉलर पर बने दबाव का सीधा फायदा यूरो को मिला। मुद्रा व्यापारी अब फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के भावी संकेतों के लिए एफओएमसी मिनट्स के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। कीमती धातुओं के बाजार में सोने के भाव जून के बाद के अपने उच्चतम स्तर से थोड़े नीचे आए, लेकिन गुरुवार के एशियाई सत्र के दौरान 4,500 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिके रहने में सफल रहे। अमेरिका-ईरान तनाव और एफओएमसी मिनट्स के सख्त रुख से डॉलर को कुछ समर्थन मिला, जिसने सोने की तेजी पर अंकुश लगाया। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड बाजार में तरलता के सरकारी कदमों से बॉन्ड यील्ड घटी, जिससे सोने की गिरावट सीमित रही। इसका आप पर असर भारत में: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की लागत पर असर पड़ सकता है, जिससे माल ढुलाई महंगी हो सकती है। वैश्विक निवेशकों के लिए: ऊर्जा क्षेत्र में भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने से पेट्रोलियम शेयर और कमोडिटी वायदा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। सवाल-जवाब 1. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी क्यों आ रही है? मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका व ईरान के बीच ठप पड़ी कूटनीतिक बातचीत के कारण कच्चे तेल के भाव बढ़ रहे हैं। 2. WTI कच्चे तेल की वर्तमान कीमत क्या है? गुरुवार को एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान WTI कच्चा तेल 85.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। 3. होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर इसका क्या प्रभाव पड़ा है? तनाव बढ़कर होर्मुज जलडमरूमध्य तक पहुंच गया है, हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जलमार्ग से तेल टैंकरों की आवाजाही जारी है। 4. संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के खिलाफ क्या कदम उठाया है? संयुक्त अरब अमीरात ने अपनी सीमा पर संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के बाद ईरान के साथ सभी वित्तीय और आर्थिक लेन-देन रोक दिए हैं। 5. अमेरिका के क्रूड स्टॉक पर नवीनतम EIA आंकड़ों में क्या सामने आया है? EIA के आंकड़ों से पता चला है कि अमेरिका में घरेलू कच्चे तेल का भंडार 4.4 मिलियन बैरल बढ़ा है, जबकि डिस्टिलेट स्टॉक 1.5 मिलियन बैरल घटकर एक महीने के निचले स्तर पर आ गया है। 6. WTI का पूरा नाम क्या है और यह कहां से आता है? WTI का अर्थ वैस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट है, जो अमेरिका में उत्पादित होने वाला उच्च गुणवत्ता वाला हल्का और मीठा कच्चा तेल है और कुशिंग हब के माध्यम से वितरित किया जाता है। 7. API और EIA की साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट में क्या अंतर है? API मंगलवार को निजी उद्योग के अनुमान जारी करता है जबकि EIA बुधवार को सरकारी आंकड़े पेश करता है, और 75 प्रतिशत मामलों में उनके नतीजे 1 प्रतिशत के भीतर समान होते हैं। https://trendkia.com/market/madhya-purva-men-barhata-tanava-aura-hormuz-ka-snkata-kachche-tela-ki-kimaten-85-50-dolara-ke-pasa-pahunchin-18618 TrendKia — Har trend, sabse pehle.