मध्य पूर्व में बढ़ते टकराव से चढ़ा डॉलर, यूरो लुढ़ककर 1.1400 के करीब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव गहराने से सुरक्षित निवेश माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिली है, जिससे सोमवार के शुरुआती एशियाई सत्र में EUR/USD जोड़ी कमजोर होकर 1.1400 के आसपास आ गई। अब बाजार की नजर मंगलवार को आने वाले अमेरिकी जून CPI आंकड़ों पर टिकी है। सोमवार के शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र में यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (EUR/USD) कमजोर पड़ती दिखी और यह 1.1400 के करीब खिसक गई। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में तेजी से बिगड़ते हालात हैं। जब भी दुनिया में भू राजनीतिक तनाव बढ़ता है, निवेशक अपना पैसा सुरक्षित ठिकानों की ओर मोड़ देते हैं और अमेरिकी डॉलर ऐसे ही एक सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) के तौर पर देखा जाता है। यही वजह है कि ईरान को लेकर बढ़ते टकराव ने डॉलर को सहारा दिया और यूरो पर दबाव बना दिया। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और गहराया अमेरिकी सेना ने कहा है कि उसने ईरान पर हमलों का एक और दौर शुरू किया है। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय ने रविवार को अमेरिकी सैन्य हमलों की कड़ी निंदा की। ईरान ने वॉशिंगटन पर अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया और साथ ही पड़ोसी देशों को चेतावनी दी कि वे उसके खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई में मदद न करें। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के टूटते सिलसिले में यह एक और बड़ी तल्खी है। कूटनीतिक स्तर पर जितना यह विवाद गहराएगा, उतना ही डॉलर जैसी सुरक्षित मुद्रा को फायदा मिलने की उम्मीद है। यही कारण है कि यह तनाव EUR/USD जैसी प्रमुख जोड़ी के लिए एक बड़ी बाधा बनकर सामने आ रहा है, क्योंकि डॉलर की मजबूती सीधे तौर पर यूरो को नीचे धकेलती है। अब सबकी नजर अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर बाजार की अगली बड़ी परीक्षा मंगलवार को होगी, जब अमेरिका के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) यानी महंगाई के आंकड़े जारी किए जाएंगे। अनुमान है कि जून में हेडलाइन CPI मासिक आधार (MoM) पर 0.1% गिर सकता है, जबकि इसी अवधि के दौरान कोर CPI में 0.3% की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है। अगर अमेरिका में महंगाई के नरम पड़ने के संकेत मिलते हैं, तो फेडरल रिजर्व (फेड) पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव कम हो जाएगा। और जब ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद घटती है, तो डॉलर पर दबाव बनता है और वह कमजोर पड़ सकता है। यही वजह है कि इस हफ्ते डॉलर की चाल काफी हद तक इन्हीं आंकड़ों पर निर्भर करेगी। इसके अलावा दिन में बाद में फेड के गवर्नर क्रिस्टोफर वालर और यूरोपीय केंद्रीय बैंक की नीति निर्माता इसाबेल श्नाबेल के बयान भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यूरो आखिर है क्या और क्यों है इतना अहम यूरो उन 20 यूरोपीय संघ के देशों की साझा मुद्रा है जो यूरोजोन का हिस्सा हैं। दुनिया भर में सबसे ज्यादा कारोबार होने वाली मुद्राओं में यूरो अमेरिकी डॉलर के बाद दूसरे नंबर पर आता है। आंकड़ों की बात करें तो साल 2022 में दुनिया के कुल विदेशी मुद्रा लेनदेन में यूरो की हिस्सेदारी 31% रही, और इसका औसत दैनिक कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से भी ज्यादा रहा। EUR/USD दुनिया की सबसे ज्यादा कारोबार वाली मुद्रा जोड़ी है, जिसकी कुल लेनदेन में हिस्सेदारी करीब 30% आंकी जाती है। इसके बाद EUR/JPY (4%), EUR/GBP (3%) और EUR/AUD (2%) का नंबर आता है। यानी वैश्विक करेंसी बाजार में यूरो की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यूरोपीय केंद्रीय बैंक की भूमिका जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) यूरोजोन का रिजर्व बैंक है। यही संस्था ब्याज दरें तय करती है और मौद्रिक नीति का प्रबंधन करती है। ECB का सबसे बड़ा लक्ष्य कीमतों में स्थिरता बनाए रखना है, यानी या तो महंगाई को काबू में रखना या फिर विकास को गति देना। इसके लिए इसका सबसे बड़ा हथियार ब्याज दरों को घटाना या बढ़ाना है। आमतौर पर ऊंची ब्याज दरें, या दरें बढ़ने की उम्मीद, यूरो को फायदा पहुंचाती हैं और इसके उलट स्थिति में यूरो कमजोर पड़ता है। ECB की गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार बैठक कर मौद्रिक नीति से जुड़े फैसले लेती है। ये फैसले यूरोजोन के राष्ट्रीय बैंकों के प्रमुखों और छह स्थायी सदस्यों द्वारा लिए जाते हैं, जिनमें ECB की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड भी शामिल हैं। महंगाई के आंकड़े यूरो के लिए क्यों मायने रखते हैं यूरोजोन में महंगाई को हार्मोनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेज (HICP) के जरिए मापा जाता है और यह यूरो के लिए एक बेहद अहम आर्थिक संकेतक है। अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा बढ़ती है, खासकर ECB के 2% के तय लक्ष्य से ऊपर चली जाती है, तो ECB को इसे काबू में लाने के लिए ब्याज दरें बढ़ानी पड़ती हैं। अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर यूरो को मजबूती देती हैं, क्योंकि इससे यह क्षेत्र वैश्विक निवेशकों के लिए पैसा लगाने की ज्यादा आकर्षक जगह बन जाता है। अर्थव्यवस्था के आंकड़े और यूरो की चाल अलग अलग आर्थिक आंकड़े किसी अर्थव्यवस्था की सेहत का पता देते हैं और सीधे तौर पर यूरो को प्रभावित कर सकते हैं। GDP, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज PMI, रोजगार और उपभोक्ता धारणा से जुड़े सर्वे जैसे संकेतक इस साझा मुद्रा की दिशा तय कर सकते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था यूरो के लिए अच्छी होती है। यह न सिर्फ ज्यादा विदेशी निवेश को आकर्षित करती है, बल्कि ECB को ब्याज दरें बढ़ाने के लिए भी प्रेरित कर सकती है, जिससे यूरो सीधे तौर पर मजबूत होता है। इसके उलट, अगर आर्थिक आंकड़े कमजोर रहते हैं, तो यूरो के गिरने की आशंका बढ़ जाती है। यूरो क्षेत्र की चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं यानी जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन के आंकड़े खास तौर पर मायने रखते हैं, क्योंकि ये मिलकर यूरोजोन की कुल अर्थव्यवस्था का 75% हिस्सा बनाते हैं। व्यापार संतुलन का असर यूरो के लिए एक और अहम आंकड़ा व्यापार संतुलन (ट्रेड बैलेंस) है। यह संकेतक इस बात को मापता है कि किसी देश ने एक तय अवधि में अपने निर्यात से कितनी कमाई की और आयात पर कितना खर्च किया, इन दोनों के बीच का अंतर क्या रहा। अगर कोई देश ऐसी चीजें निर्यात करता है जिनकी मांग दुनिया भर में ज्यादा है, तो विदेशी खरीदारों की अतिरिक्त मांग के चलते उसकी मुद्रा की कीमत अपने आप बढ़ जाती है। यानी सकारात्मक शुद्ध व्यापार संतुलन किसी मुद्रा को मजबूत करता है, और नकारात्मक संतुलन उसे कमजोर कर देता है। पाउंड और अन्य मुद्राओं का हाल दूसरी ओर, शुक्रवार को GBP/USD 1.3400 के ऊपर हल्की बढ़त बनाए रहा। ब्रिटेन की सरकार में नेतृत्व बदलाव को लेकर बनी उम्मीदों और बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) की ओर से और सख्ती की उम्मीदों ने ब्रिटिश पाउंड को सहारा दिया, जबकि मध्य पूर्व में तनाव में नरमी और फेड की ओर से दरें बढ़ने की घटती उम्मीदों ने अमेरिकी डॉलर पर दबाव बनाया। सोने और कच्चे तेल पर नजर सोमवार के एशियाई सत्र में सोना कमजोर होकर फिर 4,100 डॉलर से नीचे चला गया, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले डॉलर को सहारा दिया। इसके अलावा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से पैदा हुई महंगाई की चिंता ने 2026 में फेड की ओर से ब्याज दर बढ़ाए जाने की उम्मीदों को और पुख्ता कर दिया, जिससे डॉलर को और फायदा हुआ और ब्याज न देने वाली धातु सोने पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। हालांकि, सोना पिछले हफ्ते के निचले स्तर से ऊपर टिका रहा, क्योंकि इस हफ्ते आने वाले अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों से पहले कारोबारी सतर्क नजर आ रहे हैं। पूरे हफ्ते बाजार की चाल किस पर निर्भर इस हफ्ते अमेरिकी महंगाई की रिपोर्ट और वॉर्श की गवाही सबसे अहम रहने वाली है। अमेरिका के कई अन्य आंकड़ों और मध्य पूर्व के तनाव के बीच डॉलर का दबदबा बना रह सकता है। ईरान को लेकर बढ़ते ताजा तनाव के बीच चीन के GDP आंकड़े दूसरी तिमाही (Q2) पर पड़ने वाले असर की तस्वीर साफ करेंगे। वहीं, बैंक ऑफ कनाडा से RBNZ की तरह दर बढ़ाने की उम्मीद नहीं की जा रही है। बाजारों ने जुलाई की शुरुआत दिसंबर में दर बढ़ोतरी को आधार मानते हुए की थी, और फिर पांच कारोबारी सत्रों तक इसी अनुमान को कभी छोड़ा और कभी दोबारा अपनाया। 57 हजार के पेरोल आंकड़े ने सख्ती की दांव को कमजोर किया, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर बंद होने की आशंका ने इन दांवों को दोबारा हवा दे दी। बुधवार को जारी हुए जून की FOMC बैठक के मिनट्स इसी उतार चढ़ाव के बीच सामने आए, जो एक ऐसी दुनिया की तस्वीर पेश कर रहे थे जो पहले ही बदल चुकी थी। इसका आप पर असर • ट्रेडर्स और निवेशकों के लिए: यूरो के कमजोर पड़ने और डॉलर के मजबूत होने से EUR/USD में शॉर्ट टर्म गिरावट का दबाव बना है, इसलिए करेंसी पोजिशन लेने से पहले मंगलवार के अमेरिकी CPI आंकड़ों का इंतजार करना समझदारी होगी। • आम लोगों के लिए: मध्य पूर्व के तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की आशंका है, जिसका सीधा असर आयात लागत और महंगाई पर पड़ सकता है, वहीं मजबूत डॉलर विदेश यात्रा और डॉलर में होने वाले भुगतान को महंगा बना सकता है। सवाल-जवाब 1. सोमवार को EUR/USD किस स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था? सोमवार के शुरुआती एशियाई सत्र में EUR/USD कमजोर होकर 1.1400 के करीब आ गया। 2. यूरो में गिरावट की मुख्य वजह क्या है? अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य और कूटनीतिक तनाव के चलते सुरक्षित निवेश माने जाने वाले डॉलर को मजबूती मिली, जिससे यूरो पर दबाव पड़ा। 3. इस हफ्ते बाजार किस अमेरिकी आंकड़े पर नजर रखेगा? मंगलवार को जारी होने वाले जून के अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) यानी महंगाई के आंकड़ों पर सबकी नजर रहेगी। 4. जून CPI को लेकर क्या अनुमान है? अनुमान है कि हेडलाइन CPI मासिक आधार पर 0.1% गिर सकता है, जबकि कोर CPI में 0.3% की बढ़ोतरी हो सकती है। 5. ईरान के विदेश मंत्रालय ने क्या कहा? ईरान के विदेश मंत्रालय ने रविवार को अमेरिकी हमलों की निंदा की, वॉशिंगटन पर अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ने का आरोप लगाया और पड़ोसी देशों को उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई में मदद न करने की चेतावनी दी। 6. सोमवार को सोने का क्या हाल रहा? सोमवार के एशियाई सत्र में सोना कमजोर होकर फिर 4,100 डॉलर से नीचे चला गया, क्योंकि मजबूत डॉलर और महंगाई की चिंता ने उस पर दबाव बनाया। 7. दिन में कौन से नीति निर्माता बयान देने वाले हैं? फेड के गवर्नर क्रिस्टोफर वालर और यूरोपीय केंद्रीय बैंक की नीति निर्माता इसाबेल श्नाबेल दिन में बाद में बोलने वाले हैं। https://trendkia.com/market/madhya-purva-men-barhate-takarava-se-charha-dollar-euro-lurhakakara-1-1400-ke-kariba-7231 TrendKia — Har trend, sabse pehle.