# मध्य पूर्व में सैन्य तनाव के बीच कच्चे तेल में नरमी, 91.50 डॉलर के करीब फिसला WTI क्रूड

> दो दिनों की लगातार तेजी के बाद शुक्रवार को एशियाई सत्र में डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमतें 0.45 प्रतिशत गिरकर 91.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गईं, हालांकि फारस की खाड़ी में बढ़ते भू-राजनीतिक टकराव से कीमतों को निचला सहारा मिल रहा है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/madhya-purva-men-sainya-tanava-ke-bicha-kachche-tela-men-narami-91-50-dolara-ke-kariba-phisala-wti-crude-41701 · **Language:** Hindi
**Tags:** कच्चा तेल, डब्ल्यूटीआई क्रूड, मध्य पूर्व तनाव, अमेरिका ईरान, कमोडिटी बाजार, ओपेक, ऊर्जा कीमतें, वित्त

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में शुक्रवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में हल्का दबाव देखने को मिला। अमेरिकी मानक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.45 प्रतिशत की गिरावट के साथ 91.50 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार करता नजर आया। इस नरमी के साथ ही पिछले दो कारोबारी सत्रों से जारी बढ़त का सिलसिला थम गया और लगभग चार हफ्तों के निचले स्तर से शुरू हुई रिकवरी की रफ्तार सुस्त पड़ गई। हालांकि, मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कीमतों में बड़ी गिरावट की गुंजाइश सीमित बनी हुई है। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, कच्चे तेल का भाव वर्तमान में 92.52 डॉलर पर चल रहा है, जो पिछले बंद भाव 92.87 डॉलर के मुकाबले 0.38 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर के बीच रहा है, जबकि वॉल्यूम 20-दिन के औसत का 0.05 गुना दर्ज किया गया है।

## फारस की खाड़ी में बढ़ता सैन्य जमावड़ा और जहाजों पर हमले
ऊर्जा बाजारों के लिए इस समय सबसे बड़ा भू-राजनीतिक जोखिम अमेरिका और ईरान के बीच गहराता टकराव बना हुआ है। पेंटागन द्वारा फारस की खाड़ी में तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और 10,000 नाविकों तथा मरीन सैनिकों को भेजने की तैयारी की जा रही है। इस संभावित तैनाती से क्षेत्र में सैन्य टकराव की आशंका काफी बढ़ गई है। इसके समानांतर, ईरान के पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी यानी पीजीएसए ने जानकारी दी है कि हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य में कई तेल टैंकरों पर हमले किए गए हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक कच्चे तेल की आवाजाही के लिए दुनिया के सबसे संवेदनशील चोकपॉइंट्स में से एक है।

सैन्य गतिविधियों के साथ-साथ कूटनीतिक बयानों ने भी आग में घी डालने का काम किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि वह बहुत जल्द यह फैसला करेंगे कि ईरान पर हमला करना है या नहीं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि युद्ध किसी न किसी तरह बहुत जल्द खत्म हो जाएगा। ऐसे सख्त बयानों और खाड़ी क्षेत्र में सैन्य जमावड़े ने तेल बाजारों में एक मजबूत भू-राजनीतिक रिस्क प्रीमियम बनाए रखा है, जिससे बिकवाली के दौर में भी कच्चे तेल को एक ठोस सपोर्ट मिल रहा है।

## तकनीकी स्तर और रिट्रेसमेंट के अहम पड़ाव
तकनीकी चार्ट पर डब्ल्यूटीआई क्रूड का ढांचा मिलाजुला बना हुआ है, जिसके चलते किसी भी दिशा में बड़े सौदे करने से पहले सावधानी बरतने की जरूरत महसूस की जा रही है। गिरावट की स्थिति में पहला तात्कालिक सपोर्ट 50.0 प्रतिशत रिट्रेसमेंट स्तर 90.59 डॉलर पर मौजूद है। यदि कीमतें इससे नीचे खिसकती हैं, तो अगला अहम पड़ाव 61.8 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट स्तर 87.89 डॉलर पर आता है। यह दायरा मिलकर खरीदारों के लिए एक मजबूत डिमांड जोन तैयार करता है। अगर यह सपोर्ट जोन भी टूटता है, तो बाजार में 84.06 डॉलर और 79.18 डॉलर के गहरे स्तर देखने को मिल सकते हैं।

ऊपरी स्तरों की बात करें तो पहला तत्काल रेजिस्टेंस 38.2 प्रतिशत रिट्रेसमेंट स्तर 93.28 डॉलर पर स्थित है, जिसके तुरंत बाद 100-पीरियड एसएमए 94.08 डॉलर पर प्रतिरोध पेश करता है। तेजी की दिशा में एक मजबूत रैली स्थापित करने के लिए बाजार को 23.6 प्रतिशत रिट्रेसमेंट स्तर 96.60 डॉलर को पार करना होगा। इसके बाद ही कीमतें 101.99 डॉलर के स्ट्रक्चरल हाई को चुनौती दे सकती हैं, जो मौजूदा अल्पकालिक मंदी के रुख को पलटने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लाइव तकनीकी आंकड़ों के मुताबिक, 14-पीरियड आरएसआई 50 पर तटस्थ है। एमएसीडी 0.66 पर है जबकि इसकी सिग्नल लाइन 1.84 पर दर्ज की गई है, जिसका हिस्टोग्राम -1.18 के साथ मंदी का संकेत दे रहा है। मूविंग एवरेज के संदर्भ में 20-दिन का ईएमए 93.31 डॉलर, 50-दिन का ईएमए 90.26 डॉलर और 200-दिन का ईएमए 80.73 डॉलर पर है। वहीं 50-दिन का एसएमए 88.60 डॉलर और 200-दिन का एसएमए 82.39 डॉलर पर मौजूद है। 50-दिन का ईएमए 200-दिन के ईएमए से ऊपर होने के कारण लॉन्ग-टर्म अपट्रेंड में एक गोल्डन क्रॉस बना हुआ है। बॉलिंगर बैंड्स 86.65 डॉलर से 105.58 डॉलर के दायरे में फैले हैं, जिसका मध्य स्तर 96.11 डॉलर है और मौजूदा कीमत इन बैंड्स के भीतर बनी हुई है। 14-पीरियड एडीएक्स 22 पर कमजोरी और सीमित दायरे का इशारा कर रहा है। स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 22 और सिग्नल लाइन 18 पर है। 14-पीरियड एटीआर 4.38 डॉलर की दैनिक वोलैटिलिटी दर्शा रहा है, जिसे स्टॉप-लॉस बफर के रूप में देखा जा सकता है। 20-दिन का सपोर्ट लगभग 88.58 डॉलर और रेजिस्टेंस 106.75 डॉलर के करीब है। मुख्य पिवट स्तर 92.81 डॉलर पर है, जिसमें आर1 रेजिस्टेंस 93.22 डॉलर और आर2 रेजिस्टेंस 93.91 डॉलर है, जबकि एस1 सपोर्ट 92.12 डॉलर और एस2 सपोर्ट 91.71 डॉलर पर स्थित है।

## डब्ल्यूटीआई क्रूड की प्रकृति और कुशिंग हब की भूमिका
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचे जाने वाले कच्चे तेल की प्रमुख किस्मों में शामिल है। यह ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ मिलकर वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों के निर्धारण का आधार बनता है। डब्ल्यूटीआई को इसकी कम डेंसिटी और कम सल्फर मात्रा के कारण हल्का और मीठा तेल कहा जाता है। इस गुणवत्ता के कारण इसे रिफाइन करना अपेक्षाकृत काफी आसान और लागत के लिहाज से प्रभावी माना जाता है।

इस तेल का मुख्य उत्पादन संयुक्त राज्य अमेरिका में होता है और इसका वितरण ओक्लाहोमा स्थित कुशिंग हब के जरिए किया जाता है। कुशिंग को पाइपलाइन क्रॉसरोड्स ऑफ द वर्ल्ड के नाम से जाना जाता है क्योंकि यह प्रमुख पाइपलाइनों और विशाल स्टोरेज टैंकों का एक केंद्रीय नेटवर्क है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और वित्तीय बाजारों में डब्ल्यूटीआई की कीमतों को मानक के रूप में व्यापक रूप से उद्धृत किया जाता है।

## मांग, आपूर्ति, डॉलर और ओपेक का प्रभाव
किसी भी वित्तीय या भौतिक वस्तु की तरह, कच्चे तेल की कीमतों का प्राथमिक निर्धारण मांग और आपूर्ति के बुनियादी नियमों से होता है। वैश्विक आर्थिक विकास में तेजी आने पर औद्योगिक और परिवहन गतिविधियां बढ़ती हैं, जिससे तेल की खपत और कीमतें चढ़ती हैं। इसके विपरीत, वैश्विक मंदी या धीमी विकास दर मांग को घटाकर कीमतों पर दबाव डालती है। भू-राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध, व्यापारिक पाबंदियां और प्रतिबंध सीधे तौर पर तेल की आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करते हैं, जिससे अचानक कीमतों में उछाल आ जाता है।

तेल का व्यापार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की विनिमय दर भी कीमतों को सीधे प्रभावित करती है। जब अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है, तो अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए कच्चा तेल सस्ता हो जाता है, जिससे वैश्विक मांग को बढ़ावा मिलता है। दूसरी ओर, मजबूत डॉलर तेल को महंगा बनाकर खरीदारी को हतोत्साहित करता है। इसके अतिरिक्त, ओपेक के फैसले तेल आपूर्ति को नियंत्रित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ओपेक 12 प्रमुख तेल उत्पादक देशों का एक संगठन है, जो साल में दो बार होने वाली बैठकों में सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा तय करता है। जब ओपेक उत्पादन घटाने का फैसला करता है, तो बाजार में आपूर्ति कम होने से कीमतें ऊपर चढ़ती हैं। जब उत्पादन बढ़ाया जाता है, तो आपूर्ति बढ़ने से कीमतें नरम होती हैं। इसमें गैर-ओपेक देशों, विशेष रूप से रूस को शामिल करके गठित ओपेक प्लस समूह भी वैश्विक उत्पादन नीतियों को बड़े पैमाने पर प्रभावित करता है।

## इन्वेंटरी रिपोर्टों की भूमिका
कच्चे तेल के अल्पकालिक उतार-चढ़ाव में साप्ताहिक इन्वेंटरी रिपोर्टों की भूमिका बेहद अहम होती है। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट यानी एपीआई और एनर्जी इंफॉर्मेशन एजेंसी यानी ईआईए द्वारा जारी किए जाने वाले आंकड़े तेल के भंडार की वास्तविक स्थिति दर्शाते हैं। यदि रिपोर्ट में भंडार में गिरावट दर्ज की जाती है, तो यह मजबूत मांग का संकेत होता है और कीमतों को ऊपर धकेलता है। वहीं भंडार में अप्रत्याशित वृद्धि कमजोर मांग या जरूरत से ज्यादा आपूर्ति को दर्शाती है, जिससे कीमतों में गिरावट आती है। एपीआई अपनी रिपोर्ट हर मंगलवार को जारी करता है, जबकि सरकारी एजेंसी ईआईए अपनी रिपोर्ट अगले दिन यानी बुधवार को प्रस्तुत करती है। ऐतिहासिक रूप से, दोनों रिपोर्टों के परिणाम 75 प्रतिशत मामलों में एक-दूसरे से 1 प्रतिशत के अंतर के भीतर समान रहते हैं। ईआईए एक आधिकारिक सरकारी निकाय होने के कारण इसके आंकड़ों को वित्तीय बाजारों में अधिक विश्वसनीय माना जाता है।

## अन्य वैश्विक वित्तीय बाजारों की हलचल
कमोडिटी और मुद्रा बाजारों के व्यापक परिदृश्य पर नजर डालें तो अमेरिकी गैर-कृषि पेरोल यानी नॉन-फार्म पेरोल्स रिपोर्ट से पहले निवेशक काफी सतर्क हैं। एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.6950 की ओर उछला, जिसे नवंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों और लगातार ऊंची वैश्विक यील्ड से सहारा मिला। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स अपने 17 महीने के उच्चतम स्तर से मुनाफावसूली के चलते पीछे हटा है।

अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी यानी यूएसडी/जेपीवाई एशियाई सत्र में टोक्यो सीपीआई के उम्मीद से अधिक गर्म रहने और डॉलर की सामान्य नरमी के बीच 158.00 के करीब संघर्ष करती नजर आई। सोने की कीमतों में भी दबाव देखा गया, जहां कई प्रयासों के बावजूद 4,200 डॉलर के स्तर को पार करने में विफलता के बाद एशियाई सत्र में सोना लाल निशान में लौट आया। ट्रेडर्स सितंबर के अमेरिकी रोजगार आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो अक्टूबर में फेडरल रिजर्व की संभावित दर वृद्धि की उम्मीदों को नया मोड़ दे सकते हैं। डिजिटल एसेट्स के मोर्चे पर, पाई नेटवर्क की कीमत में वोलैटिलिटी बनी रही और यह 0.0900 डॉलर के पास मँडराती दिखी। पिछले दिन 3 प्रतिशत से अधिक के नुकसान के बाद यह चार घंटे के चार्ट पर राइजिंग वेज पैटर्न के नीचे टूटने के जोखिम का सामना कर रही है, जहां 0.1000 डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर इसके लिए मजबूत बाधा बना हुआ है।

## इसका आप पर असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का 90 डॉलर के ऊपर बने रहना और मध्य पूर्व में तनाव सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और परिवहन लागत को प्रभावित करता है।

- **भारत में प्रभाव:** भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय भाव ऊंचे रहने पर देश का आयात बिल बढ़ता है। इसका असर आने वाले महीनों में घरेलू ईंधन कीमतों, ढुलाई लागत और रोजमर्रा के सामानों की खुदरा महंगाई पर पड़ सकता है।
- **उपभोक्ताओं पर असर:** ईंधन की बढ़ती कीमतों से आम आदमी के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ सकता है। लंबी दूरी की यात्रा और लॉजिस्टिक्स महंगे होने से आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं।
- **कमोडिटी निवेशकों के लिए:** एमसीएक्स पर कच्चे तेल में कारोबार करने वाले ट्रेडर्स को 90.59 डॉलर और 87.89 डॉलर के सपोर्ट स्तरों पर नजर रखनी चाहिए। अत्यधिक वोलैटिलिटी को देखते हुए सख्त स्टॉप लॉस के बिना बड़े सौदे करने से बचना समझदारी होगी।
- **मुद्रा और शेयर बाजार:** तेल महंगा होने से भारतीय रुपये की विनिमय दर पर दबाव बढ़ता है और व्यापार घाटा चौड़ा होता है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और पेंट, टायर जैसे कच्चे तेल पर निर्भर सेक्टर्स के शेयरों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
कच्चे तेल में आई हालिया तेजी और उसके बाद का कंसोलिडेशन वैश्विक आपूर्ति को लेकर गहराती चिंताओं और तकनीकी प्रतिरोध के टकराव का परिणाम है।

- **सैन्य तनाव और नौसैनिक जमावड़ा:** फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना द्वारा अतिरिक्त एयरक्राफ्ट कैरियर और 10,000 सैनिकों की तैनाती की योजना ने आपूर्ति बाधित होने का सीधा खतरा पैदा किया है। इसके चलते तेल बाजारों में एक निश्चित सुरक्षा प्रीमियम जुड़ गया है जो कीमतों को गिरने से रोक रहा है।
- **होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों पर हमले:** विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग में वाणिज्यिक जहाजों पर हालिया हमलों ने मालवाहक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस मार्ग से दुनिया के कुल समुद्री तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है, जिससे किसी भी व्यवधान का तत्काल असर पड़ता है।
- **तकनीकी मुनाफावसूली:** पिछले दो दिनों में लगभग चार हफ्तों के निचले स्तर से आई मजबूत रिकवरी के बाद ट्रेडर्स ने 93 डॉलर के करीब मुनाफावसूली की है। तकनीकी चार्ट पर 38.2 प्रतिशत और 23.6 प्रतिशत के मजबूत रेजिस्टेंस स्तर कीमतों की तेज बढ़त को सीमित कर रहे हैं।
- **ओपेक नीतियां और इन्वेंटरी आंकड़े:** उत्पादन कोटा को लेकर ओपेक और उसके सहयोगियों की सख्त निगरानी के साथ-साथ अमेरिकी इन्वेंटरी के स्तर बाजार की मांग-आपूर्ति का संतुलन तय कर रहे हैं। अमेरिका से आने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों से पहले बाजार में व्यापक रूप से सतर्कता बरती जा रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत में ताजा गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
दो दिनों की लगातार तेजी के बाद एशियाई सत्र में मुनाफावसूली होने और 93.28 डॉलर के तकनीकी रेजिस्टेंस का सामना करने के चलते कीमतों में 0.45 प्रतिशत की गिरावट आई।

### 2. मध्य पूर्व में किस घटनाक्रम से तेल की कीमतों को सहारा मिल रहा है?
पेंटागन द्वारा फारस की खाड़ी में 10,000 सैनिकों और तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर को भेजने की तैयारी तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमलों से कीमतों को निचला सपोर्ट मिला है।

### 3. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बुधवार को कहा कि वह बहुत जल्द फैसला करेंगे कि ईरान पर कार्रवाई करनी है या नहीं, और यह युद्ध किसी न किसी तरह जल्द समाप्त हो जाएगा।

### 4. डब्ल्यूटीआई क्रूड के लिए निकटतम सपोर्ट स्तर कौन से हैं?
तात्कालिक सपोर्ट 50.0 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट स्तर 90.59 डॉलर पर है, जबकि इसके बाद मजबूत डिमांड जोन 87.89 डॉलर पर स्थित है।

### 5. डब्ल्यूटीआई तेल को हल्का और मीठा क्यों कहा जाता है?
इसकी अपेक्षाकृत कम डेंसिटी के कारण इसे हल्का और कम सल्फर मात्रा होने की वजह से मीठा कहा जाता है, जिससे इसे रिफाइन करना आसान होता है।

### 6. एपीआई और ईआईए इन्वेंटरी रिपोर्टों में क्या अंतर है?
एपीआई एक निजी उद्योग संस्था है जो मंगलवार को आंकड़े जारी करती है, जबकि ईआईए एक आधिकारिक अमेरिकी सरकारी एजेंसी है जिसकी बुधवार को आने वाली रिपोर्ट को अधिक विश्वसनीय माना जाता है।

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