मध्य पूर्व में संघर्ष गहराने से वैश्विक बाजारों में हड़कंप, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और यूएस डॉलर मजबूत मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से वैश्विक वित्तीय बाजारों में सतर्कता का माहौल है। कच्चे तेल के दाम जुलाई के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं, जबकि अमेरिकी डॉलर की मांग में तेजी देखी जा रही है। बुधवार, 2 सितंबर को वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता और जोखिम से बचने की भावना हावी दिखाई दे रही है। मध्य पूर्व क्षेत्र में गहराते सैन्य और राजनीतिक संकट के कारण निवेशकों में घबराहट का माहौल है। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच निवेशक safe-haven परिसंपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे यूएस डॉलर को मजबूती मिल रही है। दिन के उत्तरार्ध में अमेरिका के निजी क्षेत्र के रोजगार आंकड़ों पर बाजार की नजर रहेगी, जबकि बैंक ऑफ कनाडा अपनी मौद्रिक नीति दरों की घोषणा करने वाला है। मुद्रा बाजार में इस सप्ताह यूएस डॉलर का प्रदर्शन प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मजबूत रहा है, जिसमें न्यूजीलैंड डॉलर के खिलाफ अमेरिकी मुद्रा ने सबसे अधिक बढ़त हासिल की है। क्रूड ऑयल $90 के पार पहुँचा और डीजल मार्जिन ने बनाया नया रिकॉर्ड ऊर्जा बाजार में मध्य पूर्व संकट का सीधा और गहरा असर देखने को मिल रहा है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल के बेंचमार्क में मंगलवार को लगभग 5 प्रतिशत की जोरदार तेजी दर्ज की गई। बुधवार को एशियाई ट्रेडिंग सत्र के दौरान WTI क्रूड $90 प्रति बैरल के स्तर को पार कर जुलाई के अंत के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। हालांकि बाद में कुछ मुनाफावसूली के कारण कीमतें थोड़ी सुधरीं और यह $89.50 प्रति बैरल के आसपास स्थिर कारोबार करता देखा गया। पिछले छह दिनों में से पांच दिनों में कच्चे तेल में तेजी का रुख रहा है, जिसने 24 जुलाई के बाद के उच्चतम स्तर को छू लिया है। कच्चे तेल के साथ-साथ रिफाइंड उत्पादों के बाजार में अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड, जो WTI क्रूड के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स के प्रीमियम को दर्शाता है, पहली बार $100 प्रति बैरल के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया। कारोबार के दौरान यह intraday रिकॉर्ड $102.00 प्रति बैरल से अधिक के स्तर पर पहुंच गया। डीजल के मार्जिन में इस रिकॉर्ड उछाल से स्पष्ट है कि वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति और रिफाइनिंग क्षमताओं को लेकर गहरी चिंताएं बनी हुई हैं। अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों से पहले प्रमुख मुद्रा जोड़ों पर दबाव वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने के माहौल का सीधा फायदा यूएस डॉलर को मिला है। मंगलवार को बढ़त के साथ बंद होने के बाद, बुधवार को USD इंडेक्स 100.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर की ओर आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी मुद्रा की इस मजबूती ने अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं पर भारी दबाव बना दिया है। यूरो और अमेरिकी डॉलर का जोड़ीदार (EUR/USD) मंगलवार को गिरावट दर्ज करने के बाद बुधवार को 1.1600 के स्तर से नीचे आ गया, जो पिछले दो हफ्तों का इसका सबसे निचला स्तर है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी (hawkish policy) की संभावनाओं के पुनर्मूल्यांकन ने यूरो पर दबाव बढ़ा दिया है। इसी तरह, ब्रिटिश पाउंड और यूएस डॉलर (GBP/USD) की जोड़ी बुधवार को शुरुआती यूरोपीय कारोबारी सत्र में 1.3500 के करीब फिसल गई। सुरक्षित निवेश के रूप में यूएस डॉलर की मजबूत मांग के कारण पाउंड बैकफुट पर आ गया है। बाजार प्रतिभागी अब शुक्रवार को आने वाली अमेरिका की अगस्त रोजगार रिपोर्ट (Non-Farm Payrolls) और आज जारी होने वाले निजी क्षेत्र के रोजगार आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस बीच, सोने की कीमतों में शुरुआती गिरावट के बाद कुछ सुधार देखा गया। चार हफ्ते के निचले स्तर से उबरकर सोना यूरोपीय सत्र की शुरुआत में $4,320 प्रति औंस से ऊपर कारोबार कर रहा था। यूएस डॉलर में हल्की नरमी ने सोने को समर्थन दिया, हालांकि फेड की सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों के कारण सोने में बड़ी तेजी सीमित दिखाई दे रही है। बैंक ऑफ कनाडा का फैसला और अमेरिका-कनाडा संबंधों का असर कनाडाई डॉलर (CAD) के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि बैंक ऑफ कनाडा (BoC) अपनी मौद्रिक नीति की घोषणा करने वाला है। हालांकि, वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि कनाडाई डॉलर की मुख्य समस्या घरेलू मौद्रिक नीति से परे है। कॉमर्ज़बैंक के विश्लेषकों के अनुसार, कनाडा और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंध एक बार फिर निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि अगर BoC आज बैठक में सख्त रुख के संकेत भी देता है, तब भी CAD का भविष्य घरेलू नीति से अधिक अमेरिका के साथ उसके संबंधों पर निर्भर करेगा। केंद्रीय बैंकों का जनादेश, मौद्रिक नीति के उपकरण और संचालन की व्यवस्था वैश्विक अर्थव्यवस्था में केंद्रीय बैंक अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसी भी देश या क्षेत्र में मूल्य स्थिरता (Price Stability) बनाए रखना केंद्रीय बैंक का मुख्य जनादेश होता है। जब अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें लगातार बढ़ती हैं तो उसे मुद्रास्फीति (Inflation) कहा जाता है, और जब कीमतें गिरती हैं तो उसे अवस्फीति (Deflation) कहा जाता है। यूएस फेडरल रिजर्व (Fed), यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) और बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) जैसे दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों का प्राथमिक लक्ष्य मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत के आसपास बनाए रखना होता है। मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंकों के पास सबसे प्रमुख हथियार बेंचमार्क पॉलिसी रेट यानी ब्याज दर होती है। पूर्व-निर्धारित बैठकों में केंद्रीय बैंक अपनी नीतिगत दरों पर निर्णय लेते हैं। जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी करता है, तो इसे मौद्रिक कड़ाई (Monetary Tightening) कहा जाता है। इससे बैंकों के लिए कर्ज महंगा हो जाता है, जिससे अर्थव्यवस्था में मांग घटती है और मुद्रास्फीति पर लगाम लगती है। इसके विपरीत, जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करता है, तो इसे मौद्रिक ढील (Monetary Easing) कहा जाता है, जिससे लोगों और कंपनियों के लिए कर्ज लेना आसान और सस्ता हो जाता है। केंद्रीय बैंक आमतौर पर राजनीतिक रूप से स्वतंत्र होते हैं। इनके नीतिगत बोर्ड के सदस्यों का चयन विभिन्न पैनलों और सुनवाई प्रक्रियाओं के माध्यम से होता है। नीति बोर्ड के सदस्यों की विचारधारा अलग-अलग हो सकती है। जो सदस्य कम ब्याज दरों और सस्ती उधारी के पक्षधर होते हैं ताकि आर्थिक विकास को गति मिले (भले ही मुद्रास्फीति 2% से थोड़ी ऊपर चली जाए), उन्हें 'हॉक' की तुलना में 'डोव' (doves) कहा जाता है। वहीं, जो सदस्य उच्च ब्याज दरों के जरिए बचत को बढ़ावा देने और मुद्रास्फीति को हर हाल में 2% या उससे नीचे रखने पर जोर देते हैं, उन्हें 'हॉक' (hawks) कहा जाता है। केंद्रीय बैंक की बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष या गवर्नर करते हैं, जिनका काम हॉक्स और डोव्स के बीच सहमति बनाना होता है। बराबर वोट की स्थिति में अध्यक्ष का वोट निर्णायक होता है। किसी भी नीतिगत निर्णय से कुछ दिन पहले से लेकर फैसले के ऐलान तक, बोर्ड सदस्यों को सार्वजनिक रूप से बोलने की मनाही होती है, जिसे 'ब्लैकआउट अवधि' (Blackout Period) कहा जाता है। अगस्त की तेजी के बाद क्रिप्टो मार्केट की रफ्तार पड़ी धीमी अगस्त के महीने में शानदार बढ़त दर्ज करने के बाद प्रमुख डिजिटल परिसंपत्तियों में गिरावट का रुख देखा जा रहा है। बिटकॉइन (BTC), एथेरियम (ETH) और रिपल (XRP) पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है। तकनीकी संकेतकों से पता चलता है कि शीर्ष क्रिप्टोकरेंसी में तेजी की गति कमजोर पड़ रही है। बिटकॉइन में शुरुआती मंदी के संकेत दिखाई दे रहे हैं, जबकि एथेरियम $2,500 के स्तर से रिजेक्ट होने के बाद नीचे की ओर आ गया है। इसी तरह, रिपल (XRP) भी अपने प्रमुख सपोर्ट लेवल के नीचे समेकित (consolidate) हो रहा है, जिससे क्रिप्टो निवेशकों का दृष्टिकोण सतर्क बना हुआ है। इसका आप पर असर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों का सीधा असर भारतीय आम नागरिकों की जेब और घरेलू बाजार पर पड़ेगा। • भारत में: पेट्रोल और डीजल की वैश्विक कीमतों में वृद्धि से घरेलू स्तर पर ईंधन दरें और परिवहन लागत बढ़ सकती है। इससे दैनिक उपभोग की वस्तुओं की महंगाई बढ़ने का सीधा खतरा बना हुआ है। • भारतीय निवेशकों पर: शेयर बाजार में अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों (FII) द्वारा पूंजी निकासी से भारतीय रुपये पर दबाव आ सकता है। आईटी और एक्सपोर्ट कंपनियों को डॉलर मजबूत होने से फायदा हो सकता है, लेकिन आयात पर निर्भर उद्योग प्रभावित होंगे। • ईंधन एवं ऊर्जा क्षेत्र: डीजल क्रैक स्प्रेड का रिकॉर्ड $102 तक पहुंचना रिफाइनरी कंपनियों के मार्जिन पर गहरा असर डालेगा, जिसका अंतिम भार लॉजिस्टिक्स और माल भाड़े पर पड़ेगा। • सोना और क्रिप्टो निवेशक: सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी, जबकि क्रिप्टोकरेंसी में अल्पकालिक बिकवाली से रिटेल निवेशकों को सावधानी बरतनी होगी। सवाल-जवाब 1. मध्य पूर्व तनाव का कच्चे तेल पर क्या असर पड़ा है? WTI कच्चा तेल 5% की बढ़त के साथ $90 प्रति बैरल से ऊपर पहुँच गया है, जो जुलाई के बाद का उच्चतम स्तर है। 2. यूएस डॉलर इंडेक्स किस स्तर पर कारोबार कर रहा है? सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से यूएस डॉलर इंडेक्स 100.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर की ओर आगे बढ़ रहा है। 3. डीजल क्रैक स्प्रेड ने क्या नया रिकॉर्ड बनाया है? अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड पहली बार $100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर intraday रिकॉर्ड $102.00 के ऊपर पहुंच गया। 4. केंद्रीय बैंकों का मुख्य लक्ष्य क्या होता है? केंद्रीय बैंकों का मुख्य जनादेश अर्थव्यवस्था में मूल्य स्थिरता बनाए रखना और मुद्रास्फीति को लगभग 2% पर सीमित रखना होता है। 5. क्रिप्टोकरंसी बाजार में गिरावट क्यों देखी जा रही है? अगस्त में भारी बढ़त के बाद तकनीकी संकेतकों के कमजोर पड़ने से बिटकॉइन, एथेरियम और रिपल में मुनाफावसूली का दबाव है। https://trendkia.com/market/madhya-purva-men-sngharsha-gaharane-se-vaishvika-bajaron-men-haraknpa-kachche-tela-ki-kimaton-men-uchhala-aura-us-dollar-majabuta-26320 TrendKia — Har trend, sabse pehle.