मध्य पूर्व में युद्ध भड़कने से यूरो में भारी गिरावट, डॉलर ने मारी बाजी अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों को हिलाकर रख दिया है। निवेशकों के सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की ओर भागने से यूरो और पाउंड जैसी प्रमुख मुद्राओं में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जबकि सोने की कीमतें 4,000 डॉलर के स्तर पर स्थिर बनी हुई हैं। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में बड़ी हलचल पैदा कर दी है। निवेशक अब तेजी से सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर भाग रहे हैं। मंगलवार के शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान, यूरोपीय मुद्रा यूरो पर भारी दबाव देखा गया। प्रमुख मुद्रा जोड़ी EUR/USD में हल्की गिरावट दर्ज की गई और यह 1.1410 के स्तर के करीब कारोबार कर रही थी। इस गिरावट का सीधा संबंध अमेरिकी डॉलर की बढ़ती ताकत से है। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव तेज होने के कारण डॉलर को सुरक्षित निवेश के तौर पर भारी मांग मिल रही है। इस संकट ने जोखिम वाले तमाम निवेशों पर गहरा दबाव डाल दिया है और व्यापारी बाजार के हर नए घटनाक्रम पर बारीक नजर रख रहे हैं। जवाबी हमले और समुद्री प्रतिबंध बाजार में इस नई घबराहट का मुख्य कारण क्षेत्र में हुआ बड़ा सैन्य उथल-पुथल है। अमेरिका ने ईरान पर नए सिरे से हमले शुरू कर दिए हैं। मंगलवार को ही ईरान के खिलाफ हमलों का यह दसवां दौर था, जो इस संघर्ष के बड़े स्तर पर फैलने का संकेत देता है। अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया कि उसने ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया है। इनमें सैन्य कमान केंद्र, वायु रक्षा और तटीय निगरानी स्थल, समुद्री संपत्तियां, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स, और संचार नेटवर्क शामिल हैं। इन महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर हमले से युद्ध की तीव्रता काफी बढ़ गई है, जिसका सीधा असर मुद्राओं की कीमतों पर पड़ रहा है। खाड़ी देशों में फैलता तनाव इस संघर्ष का असर तेजी से पूरे मध्य पूर्व में फैल रहा है और कई देशों के साथ-साथ अहम व्यापारिक मार्गों को भी अपनी चपेट में ले रहा है। जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने बहरीन और कुवैत पर हमले किए हैं। इसके अलावा, ईरानी बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक टैंकरों को भी निशाना बनाया है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ाते हुए, यमन के ईरान समर्थित हूतियों ने सउदी अरब के खिलाफ समुद्री प्रतिबंध की घोषणा कर दी है। इन आक्रामक कदमों ने एक बड़े युद्ध की आशंकाओं को गहरा कर दिया है, जो EUR/USD जैसी प्रमुख मुद्रा जोड़ियों के लिए बाधा बन रहा है। फेडरल रिजर्व और मुद्रास्फीति का डर इस भारी उथल-पुथल के बीच, बाजार अमेरिका में मौद्रिक नीति की दिशा पर भी नजर रखे हुए है। फिलहाल, व्यापारियों का मानना है कि फेड की जुलाई बैठक में अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना काफी कम है। हालांकि, हालात लगातार बदल रहे हैं। मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध और आपूर्ति में रुकावट के कारण कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं, जिससे एक बार फिर से मुद्रास्फीति बढ़ने का डर पैदा हो गया है। इस दबाव के कारण बाजार यह अनुमान लगा रहा है कि अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं, जो अमेरिकी डॉलर को लगातार मजबूत समर्थन दे रहा है। वैश्विक वित्त में यूरो की स्थिति इन घटनाओं का EUR/USD विनिमय दर पर पूरा असर समझने के लिए वैश्विक वित्तीय प्रणाली में यूरो की भूमिका को जानना जरूरी है। यूरो यूरोपीय संघ के बीस अलग-अलग सदस्य देशों की आधिकारिक मुद्रा है, जो मिलकर यूरोजोन बनाते हैं। अंतरराष्ट्रीय वित्त में यह अमेरिकी डॉलर के बाद विश्व स्तर पर दूसरी सबसे ज्यादा कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। 2022 के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में होने वाले सभी विदेशी मुद्रा लेनदेन में यूरो की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत थी। यह हर दिन औसतन 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के कारोबार में तब्दील होती है, जो वैश्विक व्यापार के लिए इसके भारी महत्व को दर्शाता है। मुद्रा जोड़ियों का गणित विशाल विदेशी मुद्रा बाजार के भीतर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यूरो का व्यापार सबसे बड़ी और सबसे अधिक निगरानी वाली तरलता का केंद्र है। EUR/USD आधिकारिक तौर पर दुनिया भर में सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा जोड़ी है, जिसकी सभी विदेशी मुद्रा लेनदेन में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इस जोड़ी में पूंजी का इतना बड़ा हिस्सा लगा होने का मतलब है कि कोई भी भू-राजनीतिक झटका तुरंत इसकी कीमतों में दिखता है। EUR/USD के बाद अन्य जोड़ियां भी बाजार में अपना स्थान रखती हैं। EUR/JPY जोड़ी वैश्विक लेनदेन का 4 प्रतिशत हिस्सा बनाती है, जबकि EUR/GBP की हिस्सेदारी 3 प्रतिशत है, और EUR/AUD वैश्विक व्यापार की मात्रा का 2 प्रतिशत हिस्सा हासिल करती है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक की जिम्मेदारी यूरो के मूल्य और उसकी स्थिरता को सीधे तौर पर ईसीबी यानी यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा प्रबंधित किया जाता है। जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित, ईसीबी पूरे यूरोजोन के लिए केंद्रीय रिजर्व बैंक के रूप में काम करता है। इसकी मुख्य जिम्मेदारी पूरे क्षेत्र में मौद्रिक नीति बनाना और उसे लागू करना है। ईसीबी का सबसे प्रमुख काम मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका मतलब है मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के बीच संतुलन बनाना। जब मध्य पूर्व के संघर्षों के कारण ऊर्जा की बढ़ती लागत जैसे बाहरी झटके आते हैं, तो ईसीबी को मुद्रा की क्रय शक्ति की रक्षा के लिए अपनी नीतियों में सावधानीपूर्वक बदलाव करना पड़ता है। ब्याज दरें और गवर्निंग काउंसिल मूल्य स्थिरता के अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए, ईसीबी अपने प्राथमिक मौद्रिक उपकरण पर निर्भर करता है, जो कि ब्याज दरों को बढ़ाना या घटाना है। अपेक्षाकृत उच्च ब्याज दरें, या भविष्य में दरों के बढ़ने की उम्मीद, आमतौर पर यूरो को लाभ पहुंचाती है। अधिक लाभ यूरोजोन को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक बना देता है, जिससे मुद्रा की मांग बढ़ जाती है। ब्याज दरों में बदलाव के निर्णय ईसीबी की गवर्निंग काउंसिल द्वारा लिए जाते हैं, जो साल में आठ बार बैठक करती है। इस परिषद में यूरोजोन के सभी सदस्य देशों के राष्ट्रीय बैंकों के प्रमुख और छह स्थायी सदस्य शामिल होते हैं, जिनमें ईसीबी की वर्तमान अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड भी प्रमुख रूप से शामिल हैं। मुद्रास्फीति के आंकड़े और नीतिगत कार्रवाई ईसीबी के निर्णय लेने की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण कारक यूरोजोन के मुद्रास्फीति के आंकड़े हैं, जिसे उपभोक्ता कीमतों के सामंजस्यपूर्ण सूचकांक यानी HICP के जरिए मापा जाता है। यह सूचकांक यूरो के स्वास्थ्य को मापने के लिए एक महत्वपूर्ण बैरोमीटर है। केंद्रीय बैंक 2 प्रतिशत का सख्त मुद्रास्फीति लक्ष्य बनाए रखता है। यदि HICP के आंकड़े दिखाते हैं कि मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत की सीमा को पार कर रही है, तो ईसीबी को इसे नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाने पड़ते हैं। आमतौर पर, इसके तहत आर्थिक गतिविधियों को धीमा करने के लिए ब्याज दरों को बढ़ाया जाता है, जो अंततः यूरो को मजबूत करता है। आर्थिक संकेतक और चार बड़े देश मुद्रास्फीति के अलावा, आर्थिक आंकड़ों की एक विस्तृत श्रृंखला यूरोजोन की अर्थव्यवस्था के समग्र स्वास्थ्य को मापती है। बाजार सकल घरेलू उत्पाद (GDP), विनिर्माण और सेवा PMI, क्षेत्रीय रोजगार और उपभोक्ता भावना सर्वेक्षणों जैसे प्रमुख संकेतकों की जांच करते हैं। एक मजबूत और बढ़ती अर्थव्यवस्था यूरो के लिए फायदेमंद होती है, जो विदेशी निवेश को आकर्षित करती है और ईसीबी को ब्याज दरें बढ़ाने का कारण देती है। इसके विपरीत, कमजोर आंकड़े यूरो में गिरावट लाते हैं। यूरोजोन के भीतर, चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का प्रदर्शन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन सामूहिक रूप से कुल अर्थव्यवस्था का 75 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं, जिससे इनके आंकड़े यूरो की दिशा तय करते हैं। व्यापार संतुलन का असर यूरो के लिए एक और अत्यधिक महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतक व्यापार संतुलन है। यह किसी देश द्वारा अपने निर्यात से कमाए गए राजस्व और आयात पर खर्च की गई राशि के बीच के अंतर को मापता है। व्यापार संतुलन का मुद्रा के मूल्यांकन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। यदि कोई देश ऐसे निर्यात का उत्पादन करता है जिसकी बहुत मांग है, तो विदेशी खरीदारों को उन लेनदेन को पूरा करने के लिए घरेलू मुद्रा खरीदनी होगी, जिससे मुद्रा के मूल्य में वृद्धि होगी। एक सकारात्मक व्यापार संतुलन मुद्रा को मजबूत करता है, जबकि एक नकारात्मक संतुलन मुद्रा के मूल्य पर नीचे की ओर दबाव डालता है। भारी दबाव में ब्रिटिश पाउंड जबकि यूरो अपनी चुनौतियों का सामना कर रहा है, अन्य प्रमुख यूरोपीय मुद्राएं भी वैश्विक घटनाओं का भार महसूस कर रही हैं। ब्रिटिश पाउंड, विशेष रूप से GBP/USD मुद्रा जोड़ी जिसे आमतौर पर केबल कहा जाता है, अतिरिक्त बिकवाली के दबाव में आ गई है। कारोबारी सप्ताह की मंदी वाली शुरुआत में, केबल में भारी गिरावट आई है और यह 1.3420 के निशान के करीब अपने कई दिनों के निचले स्तर पर वापस आ गया है। पाउंड की यह गिरावट मजबूत डॉलर के माहौल और अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े जोखिमों के बीच हो रही है। बाजार का ध्यान अब मंगलवार को जारी होने वाली ब्रिटेन की रोजगार रिपोर्ट पर है, जो पाउंड को आगे की दिशा दे सकती है। यूरो का समर्थन स्तर और आगामी आंकड़े यूरो की ओर वापस लौटें तो, कारोबारी सप्ताह के आगे बढ़ने के साथ ही EUR/USD जोड़ी में मंदी का रुख बना हुआ है। यह मुद्रा जोड़ी लगातार महत्वपूर्ण 1.1400 के मनोवैज्ञानिक क्षेत्र की ओर खिसक रही है, जहां कुछ शुरुआती तकनीकी समर्थन दिखाई दिया है। सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर की मजबूत शुरुआत ने जोखिम वाले पूरे बाजार को दबाव में रखा है। निवेशक मध्य पूर्व के संघर्ष पर बारीकी से नज़र रखे हुए हैं। घरेलू आर्थिक कैलेंडर को देखें तो, यूरो व्यापारी अब व्यापक यूरोजोन और विशेष रूप से जर्मनी के लिए ZEW आर्थिक भावना सर्वेक्षण जारी होने की तैयारी कर रहे हैं, जो आगे आने वाले प्रमुख आंकड़े हैं। सोने की कीमतें और बाजार की बाधाएं कमोडिटी बाजार में भी पारंपरिक रूप से सुरक्षित माने जाने वाले निवेश विकल्प इस जटिल माहौल पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। मंगलवार के एशियाई सत्र के दौरान सोने की कीमतें स्थिर रहीं और यह 4,000 डॉलर के भारी स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा था। हालांकि, अत्यधिक अनिश्चितता के बावजूद, इस कीमती धातु के लिए मुनाफे की संभावनाएं सीमित दिख रही हैं। इसे सीमित करने वाला कारक मुद्रास्फीति की आशंकाओं का फिर से उभरना है, जो कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से प्रेरित है। ये दबाव अमेरिका में उच्च ब्याज दरों की उम्मीदों को मजबूत कर रहे हैं, जो डॉलर को समर्थन दे रहा है। चूंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता है, उच्च ब्याज दरों द्वारा समर्थित मजबूत डॉलर इस धातु के लिए एक गंभीर बाधा के रूप में काम करता है। इसका आप पर असर • विदेशी मुद्रा व्यापारियों के लिए: सुरक्षित निवेश के तौर पर अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मांग के कारण निकट भविष्य में EUR/USD और GBP/USD जैसी प्रमुख जोड़ियों पर भारी दबाव बना रहेगा। • आम उपभोक्ताओं के लिए: मध्य पूर्व में आपूर्ति बाधित होने से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें फिर से महंगाई बढ़ा सकती हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। • कमोडिटी निवेशकों के लिए: हालांकि युद्ध का डर सोने को मजबूत समर्थन दे रहा है, लेकिन अमेरिका में लंबे समय तक उच्च ब्याज दरों की संभावना इसके मुनाफे को सीमित कर देगी। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यूरो क्यों गिर रहा है? अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए अमेरिकी डॉलर का रुख कर रहे हैं, जिससे यूरो में भारी गिरावट आ रही है। 2. अमेरिका ने ईरान में किन ठिकानों पर हमला किया? अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य कमान केंद्रों, वायु रक्षा स्थलों, समुद्री ठिकानों और मिसाइल तथा ड्रोन लॉन्च साइटों को निशाना बनाया है। 3. मध्य पूर्व के संघर्ष का सोने की कीमतों पर क्या असर हो रहा है? सोना 4,000 डॉलर से ऊपर स्थिर है, लेकिन कच्चे तेल की उच्च कीमतों से महंगाई का डर बढ़ रहा है, जिससे अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों की उम्मीद इसके मुनाफे को सीमित कर रही है। 4. कौन से आगामी आर्थिक आंकड़े यूरो को प्रभावित करेंगे? यूरो की भविष्य की दिशा का अनुमान लगाने के लिए व्यापारी यूरोजोन और जर्मनी के आगामी ZEW आर्थिक भावना सर्वेक्षणों पर कड़ी नजर रख रहे हैं। https://trendkia.com/market/madhya-purva-men-yuddha-bharakane-se-euro-men-bhari-giravata-dollar-ne-mari-baji-9874 TrendKia — Har trend, sabse pehle.