{
  "type": "article",
  "title": "महंगाई के संशोधित आंकड़ों ने घटाई अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना",
  "summary": "आर्थिक विश्लेषण ब्यूरो द्वारा जुलाई और अगस्त के महंगाई आंकड़ों में कटौती के बाद वित्तीय बाजारों में 28 अक्टूबर को ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद तेजी से घट गई है। हालांकि अमेरिकी परिवारों के मजबूत खर्च और बेहतर आर्थिक वृद्धि के चलते दिसंबर में दरें बढ़ने का अनुमान अब भी पूरी तरह बना हुआ है।",
  "content": "अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा हाल ही में की गई ब्याज दर बढ़ोतरी के तुरंत बाद वित्तीय बाजारों में यह प्रबल धारणा बन गई थी कि फेडरल रिजर्व 28 अक्टूबर की अपनी आगामी मौद्रिक नीति बैठक में एक और वृद्धि कर सकता है। दर वृद्धि के बाद के शुरुआती दो सप्ताहों में व्यापारियों ने अक्टूबर में नई बढ़ोतरी की संभावना को लगभग 70 प्रतिशत तक आंका था। लेकिन हालिया मुद्रास्फीति रिपोर्ट और आधिकारिक आंकड़ों के संशोधन के बाद बाजार का यह रुख नाटकीय रूप से बदल चुका है। सीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जो फ्यूचर्स अनुबंधों की कीमतों के आधार पर नीतिगत बदलावों की संभावनाओं को मापता है, 28 अक्टूबर को दर वृद्धि की संभावना गिरकर केवल 34.87 प्रतिशत रह गई है। इसके विपरीत, 9 दिसंबर तक ब्याज दरों में एक और चौथाई प्रतिशत की बढ़ोतरी की संभावना पूरे 100 प्रतिशत पर आंकी जा रही है। जिस जुलाई के आंकड़ों को आधार बनाकर फेड ने सितंबर में दरें बढ़ाई थीं, उसका प्रभाव मात्र पांच सप्ताह ही टिक सका।\n\n नीति निर्माताओं के लिए व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी पीसीई सूचकांक सबसे पसंदीदा पैमाना है, जिसे केंद्रीय बैंक वार्षिक 2 प्रतिशत के लक्ष्य पर स्थिर रखने का प्रयास करता है। खाद्य और ऊर्जा की कीमतों में कृषि पैदावार और कच्चे तेल के वैश्विक उतार-चढ़ाव के कारण भारी अस्थिरता रहती है, इसलिए अधिकारी दीर्घकालिक रुझान को समझने के लिए कोर पीसीई पर विशेष नजर रखते हैं। अगस्त के ताजा आंकड़ों में कोर कीमतें मासिक आधार पर 0.2 प्रतिशत बढ़ीं, जबकि अर्थशास्त्रियों का पूर्वानुमान 0.3 प्रतिशत का था। वार्षिक आधार पर कोर दर 3 प्रतिशत दर्ज की गई, जो 3.3 प्रतिशत के अनुमान से काफी कम रही। विश्लेषकों का अनुमान मासिक स्तर पर एक दशांश प्रतिशत और वार्षिक स्तर पर तीन दशांश प्रतिशत अधिक था। इस अंतर की मुख्य जड़ पुराने आंकड़ों के व्यापक संशोधन में छिपी हुई है।\n\n \n\nपुराने आंकड़ों के संशोधन ने कैसे बदला मुद्रास्फीति का गणित\n आर्थिक विश्लेषण ब्यूरो यानी बीईए प्रतिवर्ष अधिक विस्तृत टैक्स रिटर्न और सर्वेक्षण आंकड़ों के साथ अपने पुराने अनुमानों को फिर से संशोधित करता है। साल 2026 के इस संशोधन का दायरा जनवरी 2021 तक के आंकड़ों तक फैला था। इसी क्रम में 26 अगस्त को जारी रिपोर्ट में जुलाई की कोर मुद्रास्फीति 3.3 प्रतिशत और खाद्य व ईंधन सहित मुख्य दर 3.7 प्रतिशत बताई गई थी। नए संशोधित आंकड़ों में इन्हें घटाकर क्रमशः 3 प्रतिशत और 3.4 प्रतिशत कर दिया गया। जब अगस्त के अंतिम आंकड़े सामने आए, तो वे भी बिल्कुल इन्हीं स्तरों पर दर्ज हुए।\n\n केंद्रीय बैंक के 28 अक्टूबर के निर्णय के लिहाज से किसी एक महीने के आंकड़े की तुलना में लंबी अवधि का रुझान अधिक महत्व रखता है। संशोधन के बाद तस्वीर यह बनी है कि कोर मुद्रास्फीति पिछले तीन महीनों से लगातार 3 प्रतिशत के स्तर पर स्थिर बनी हुई है। मासिक आधार पर जुलाई में इसमें केवल 0.1 प्रतिशत और अगस्त में 0.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो फेड के वार्षिक 2 प्रतिशत लक्ष्य के लिए आवश्यक गति के बेहद करीब है। पहली बढ़ोतरी के मात्र छह सप्ताह बाद दूसरी बढ़ोतरी करने के लिए यह आवश्यक था कि महंगाई ऊंची बनी रहे या लगातार बढ़ रही हो, लेकिन संशोधित आंकड़े दर्शाते हैं कि इसमें कोई तेजी नहीं आ रही है और यह सपाट बनी हुई है।\n\n \n\nसितंबर का फैसला और वर्ष 2026 के लिए नीतिगत दृष्टिकोण\n फेडरल रिजर्व ने 16 सितंबर को नीतिगत ब्याज दर को 3.50%-3.75% की सीमा से बढ़ाकर 3.75%-4.00% कर दिया था। यह साल 2023 के बाद केंद्रीय बैंक द्वारा की गई पहली ब्याज दर बढ़ोतरी थी, और समिति के प्रत्येक मतदान सदस्य ने इसके पक्ष में मत दिया था। उसी दिन प्रकाशित अधिकारियों के मध्याह्न पूर्वानुमान के मुताबिक 2026 के अंत तक नीतिगत दर 4.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। इसका सीधा अर्थ यह निकलता है कि पूरे वर्ष में केवल एक और 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की जानी है, हालांकि इस पूर्वानुमान में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि यह कदम किस बैठक में उठाया जाएगा।\n\n फेड प्रमुख केविन वॉर्श ने 16 सितंबर को स्पष्ट कहा था कि मुद्रास्फीति बहुत लंबे समय से काफी ऊंची बनी हुई है, और 3 प्रतिशत पर यह आज भी स्वीकार्य सीमा से अधिक है। जिस आर्थिक अनुमान के आधार पर सितंबर की बढ़ोतरी को उचित ठहराया गया था, उसमें 2026 के अंत तक कोर महंगाई 3.4 प्रतिशत पर पहुंचने का अनुमान जताया गया था। इसका मतलब यह है कि उस अनुमान को सही साबित होने के लिए अब महंगाई की रफ्तार का तेज होना जरूरी है। यह स्थिति साल के अंत तक एक और बढ़ोतरी के तर्क को तो जीवित रखती है, लेकिन 28 अक्टूबर को ही इसे तुरंत लागू करने की आवश्यकता को काफी कमजोर कर देती है, क्योंकि पिछली तात्कालिकता उन आंकड़ों पर टिकी थी जिन्हें अब नीचे संशोधित कर दिया गया है।\n\n \n\nजीडीपी वृद्धि और घरेलू बचत के अप्रत्याशित आंकड़े\n अर्थव्यवस्था के कुल उत्पादन को मापने वाले सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की वृद्धि दर दूसरी तिमाही में 2.2 प्रतिशत वार्षिक दर्ज की गई, जो पूर्व में रिपोर्ट किए गए 1.5 प्रतिशत से काफी बेहतर है। आंकड़ों के संशोधन से यह भी खुलासा हुआ कि अमेरिकी नागरिकों ने पूर्व अनुमान की तुलना में कहीं अधिक बचत की थी। बीईए के पुनर्गणना ने जुलाई की बचत दर को, जो कर-पश्चात बिना खर्च की गई आय का अनुपात है, 3.0 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.6 प्रतिशत कर दिया। इस संशोधन ने दर बढ़ोतरी के पक्ष और विपक्ष दोनों ही खेमों को अपनी बात रखने के पर्याप्त तर्क मुहैया करा दिए।\n\n अमेरिकी परिवारों ने अगस्त के महीने में अपनी इस संचित बचत के एक हिस्से को जमकर खर्च किया। इस दौरान घरेलू खर्च में 0.9 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी देखी गई, जबकि इसके मुकाबले व्यक्तिगत आय में केवल 0.2 प्रतिशत की बढ़त हुई थी। मुद्रास्फीति के प्रभाव को समायोजित करने के बाद भी वास्तविक खर्च 0.6 प्रतिशत बढ़ा, जो मार्च 2025 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। वहीं दूसरी ओर, महंगाई के असर को हटाने के बाद कर-पश्चात वास्तविक आय में कोई वृद्धि दर्ज नहीं की गई। इसका सीधा असर यह हुआ कि घरेलू बचत दर गिरकर 4.1 प्रतिशत पर आ गई, जो नवंबर 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है।\n\n \n\nमजबूत विनिर्माण, निजी रोजगार और दिसंबर में सख्ती के संकेत\n सितंबर में शिकागो परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई, जिसमें 50 से ऊपर का अंक आर्थिक विस्तार को दर्शाता है, 47.1 से उछलकर सीधे 58.8 पर पहुंच गया। इसके साथ ही निजी क्षेत्र में रोजगार के आकलन से जुड़ी एडीपी की रिपोर्ट भी विश्लेषकों के अनुमानों से बेहतर साबित हुई। जब तक उपभोक्ता खर्च और आर्थिक गतिविधियां इतनी मजबूत बनी रहेंगी, तब तक मांग को धीमा करने के उद्देश्य से ब्याज दरें बढ़ा रहे केंद्रीय बैंक के सामने नीतिगत सख्ती रोकने का कोई ठोस कारण नहीं दिखता। यही वजह है कि वित्तीय बाजारों में दिसंबर की बैठक में दर वृद्धि की संभावना को लगभग निश्चित माना जा रहा है।\n\n जून में पदभार संभालने के बाद से फेड प्रमुख केविन वॉर्श ने नीतिगत कदमों पर पहले से अग्रिम मार्गदर्शन देने से लगातार इनकार किया है। इस बीच, ब्याज दर तय करने वाली मौद्रिक समिति के उपाध्यक्ष और न्यूयॉर्क फेड के अध्यक्ष जॉन विलियम्स ने मंगलवार को अपने बयान में कहा कि सितंबर में उठाए गए कदम ने किसी भी नई तात्कालिकता को समाप्त कर दिया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि 2026 के अंत से पहले एक और ब्याज दर बढ़ोतरी उपयुक्त हो सकती है।\n\n न्यूयॉर्क फेड अध्यक्ष के इस भाषण और उसके बाद आई पीसीई रिपोर्ट के चलते बाजार की धारणा में तीव्र गिरावट देखी गई। फेडवॉच पर अक्टूबर की दर वृद्धि की संभावना लगभग 70 प्रतिशत से घटकर भाषण के बाद लगभग आधी रह गई और रिपोर्ट आने के बाद सीधे 34.87 प्रतिशत पर लुढ़क गई। सट्टेबाजी और अनुमानों के मंच पॉलीमार्केट पर भी ठीक ऐसा ही रुख देखने को मिला, जहां अक्टूबर अनुबंध की संभावना भाषण के बाद 67.5 प्रतिशत से गिरकर 43.5 प्रतिशत और रिपोर्ट के बाद 33.5 प्रतिशत पर आ गई। जून में औपचारिक अग्रिम मार्गदर्शन बंद किए जाने के बाद 29 सितंबर के इस भाषण ने अकेले ही अक्टूबर की संभावनाओं को करीब 20 अंक नीचे धकेल दिया।\n\n \n\nराजनीतिक दबाव, चुनाव का समय और आगामी आर्थिक आंकड़े\n अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के मतदान से महज छह दिन पहले ब्याज दरों में बदलाव न करने का फैसला इस सवाल को जन्म दे सकता था कि क्या व्हाइट हाउस ने केंद्रीय बैंक पर कोई दबाव डाला है। हालांकि हालिया सांख्यिकीय संशोधन ने फेड को नीतिगत दर स्थिर रखने का एक ठोस कागजी आधार दे दिया है, क्योंकि जिस महंगाई के आंकड़े को देखकर सितंबर में दरें बढ़ाई गई थीं, वह अब 0.3 अंक कम आंका गया है। इसके परिणामस्वरूप राजनीतिक परिस्थितियां अक्टूबर के फैसले को किसी दिशा में झुका नहीं पा रही हैं, और पूरा निर्णय पूरी तरह से आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर हो गया है।\n\n फेडरल रिजर्व अपने निर्णयों को चुनावों के आसपास समयबद्ध करने के लिए भी जाना जाता है। जुलाई में बैंक ऑफ अमेरिका द्वारा फंड प्रबंधकों के बीच कराए गए एक सर्वेक्षण में 83 प्रतिशत प्रतिभागियों का मानना था कि मध्यावधि चुनाव से पहले कोई दर बढ़ोतरी नहीं की जाएगी, फिर भी फेड ने सितंबर में दरों में इजाफा कर दिया था। अब नीति निर्माताओं और निवेशकों की निगाहें आने वाले प्रमुख आंकड़ों पर टिकी हैं। सितंबर के गैर-कृषि पेरोल आंकड़े शुक्रवार को जारी होंगे, जबकि मुद्रास्फीति का दूसरा बड़ा पैमाना यानी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 14 अक्टूबर को आएगा। अगला पीसीई डेटा 29 अक्टूबर को जारी होगा, जो नीतिगत फैसले के ठीक एक दिन बाद पड़ेगा। इसका मतलब यह है कि बुधवार को आई पीसीई रिपोर्ट मतदान से पहले फेड को मिलने वाली अपनी तरह की अंतिम रिपोर्ट थी।\n\n मौजूदा बाजार संतुलन अक्टूबर में ब्याज दरों को यथावत रखने और दिसंबर में बढ़ोतरी करने के पक्ष में झुका हुआ है। फेडवॉच के मुताबिक अक्टूबर में दरें स्थिर रहने की संभावना 65.13 प्रतिशत और दिसंबर में वृद्धि की संभावना 100 प्रतिशत है। अक्टूबर का विकल्प केवल तभी दोबारा चर्चा में आ सकता है, जब 14 अक्टूबर के सीपीआई आंकड़ों के बाद इसकी संभावना 50 प्रतिशत के ऊपर निकल जाए। इसके लिए कोर महंगाई में इतनी तेज उछाल की आवश्यकता होगी जो जुलाई के संशोधन के असर को पूरी तरह धो डाले। शुक्रवार को आने वाले रोजगार आंकड़े भी अक्टूबर के मुकाबले दिसंबर के कदम को अधिक बल देंगे, क्योंकि जल्दबाजी न करने का मुख्य आधार सिर्फ महंगाई की मंदी पर टिका है।\n\n यदि बाजार में दर बढ़ोतरी को आगे टालने के बजाय पूरी तरह रद्द माना जाने लगे, तो यह आकलन गलत साबित हो सकता है। फेडवॉच के अनुसार 9 दिसंबर तक दो दरों की बढ़ोतरी की संभावना 16.06 प्रतिशत है, जबकि दर वृद्धि बिल्कुल न होने की संभावना शून्य प्रतिशत दर्ज की गई है। यदि ये दोनों आंकड़े परस्पर बदल जाते हैं, तो यह संकेत होगा कि व्यापारी दर वृद्धि रद्द होने की संभावना को भुना रहे हैं। इसकी सबसे संभावित वजह अगस्त का घरेलू खर्च हो सकता है, जो आय की तुलना में चार गुना से भी अधिक तेजी से बढ़ा था और यह केवल तभी तक जारी रह सकता है जब तक बचत शेष रहे। सांख्यिकीविदों ने इस अतिरिक्त बचत का पता 30 सितंबर को लगाया, जबकि अगस्त के खरीदार इसे पहले ही खर्च करना शुरू कर चुके थे।\n\n \n\nवैश्विक वित्तीय बाजारों की हलचल: मुद्रा, सोना और डिजिटल परिसंपत्तियां\n अमेरिकी मौद्रिक नीति में इस संभावित बदलाव के बीच अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में भी उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दो महीने के निचले स्तर यानी 0.6950 के करीब आ गया। ऑस्ट्रेलिया में अगस्त के अंतर्निहित सीपीआई आंकड़े अपेक्षा से कमजोर रहने के चलते रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा आगे ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती में ठहराव आने के बावजूद चीनी पीएमआई के आंकड़े ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा देने में नाकाम रहे।\n\n वहीं यूएसडी/जेपीवाई की जोड़ी ने एशियाई सत्र में 157.00 के नीचे अपने नुकसान को बनाए रखा। बैंक ऑफ जापान के सख्त मौद्रिक रुख की उम्मीदों और मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप के जोखिम ने जापानी येन को सहारा दिया, जिससे घरेलू कारखानों के कमजोर उत्पादन और निराशाजनक खुदरा बिक्री आंकड़ों का असर संतुलित हो गया। साथ ही अमेरिकी डॉलर की चौतरफा नरमी ने भी इस गिरावट में भूमिका निभाई।\n\n कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में उलटफेर देखने को मिला और बुधवार को यह प्रति ट्रॉय औंस 4,150 डॉलर के दायरे में वापस लौट आया। पीली धातु 4,200 डॉलर के प्रमुख स्तर को पार करने के बाद अपनी बढ़त बरकरार नहीं रख सकी और अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल में मिले-जुले रुख के बीच डॉलर द्वारा नुकसान की कुछ भरपाई करने से इसमें मामूली गिरावट दर्ज की गई।\n\n डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में बिटकॉइन का कारोबार बुधवार को सुस्त रहा, जहां निवेशक 83,000 डॉलर के तत्काल स्तर को समर्थन के रूप में बचाने का प्रयास कर रहे हैं। इथेरियम भी बिटकॉइन के नक्शेकदम पर चलते हुए ऊपरी स्तर पर 2,700 डॉलर और निचले स्तर पर 2,600 डॉलर के बीच बना हुआ है, जबकि रिपल 1.50 डॉलर के करीब कारोबार कर रहा है।\n\n यूरोपीय मुद्रा के मोर्चे पर ईयूआर/यूएसडी गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। हालांकि यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति के किसी नए झटके से यूरो को अप्रत्याशित सहारा मिल सकता है। यह मुद्रा जोड़ी बुधवार को 1.1312 के स्तर तक गिर गई, जो जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। यह गिरावट अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से यूरोप के प्रभावित होने की चिंताओं के मिले-जुले असर को दर्शाती है।\n\nइसका आप पर असर\nअमेरिकी ब्याज दरों में संभावित ठहराव से वैश्विक वित्तीय बाजारों और भारत के शेयर बाजार को तात्कालिक राहत मिलेगी।\n\n• भारत में: विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली पर अस्थायी रोक लग सकती है जिससे घरेलू इक्विटी बाजारों में स्थिरता आएगी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में ठहराव आने से भारतीय रिजर्व बैंक पर अपनी नीतिगत दरें बढ़ाने का दबाव भी कम रहेगा।\n• वैश्विक निवेशकों के लिए: 28 अक्टूबर को दरें न बढ़ने से ऋण लागत में तत्काल उछाल नहीं आएगा, जिससे कंपनियों के मुनाफे को सहारा मिलेगा। हालांकि दिसंबर में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है, इसलिए लंबी अवधि के कर्जदारों को सतर्क रहना होगा।\n• मुद्रा बाजार पर प्रभाव: अमेरिकी डॉलर इंडेक्स पर बढ़ता दबाव कुछ समय के लिए थमेगा जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं को सांस लेने का मौका मिलेगा। यदि 14 अक्टूबर का सीपीआई आंकड़ा नरम रहता है तो रुपये जैसी मुद्राओं में स्थिरता देखने को मिल सकती है।\n• सोना और कमोडिटी खरीदारों के लिए: ब्याज दरों के न बढ़ने से सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों को निचले स्तरों पर ठोस समर्थन मिलता रहेगा। हालांकि डॉलर में किसी नई तेजी के चलते धातु की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअक्टूबर की दर वृद्धि की उम्मीदों में आई तेज गिरावट मुख्य रूप से आधिकारिक आंकड़ों के व्यापक संशोधन और नीति निर्माताओं के नरम बयानों का सीधा परिणाम है।\n\n• मुद्रास्फीति आंकड़ों में आधिकारिक कटौती: आर्थिक विश्लेषण ब्यूरो ने जुलाई की कोर पीसीई मुद्रास्फीति को 3.3 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत कर दिया। इसके चलते पिछले तीन महीनों में महंगाई सपाट बनी रही, जिससे छह सप्ताह के भीतर तुरंत दूसरी बढ़ोतरी करने का मुख्य आधार समाप्त हो गया।\n• नीति निर्माताओं का सतर्क रुख: न्यूयॉर्क फेड के अध्यक्ष जॉन विलियम्स ने स्पष्ट किया कि सितंबर की पिछली बढ़ोतरी ने त्वरित कदम उठाने की तात्कालिकता को खत्म कर दिया है। केंद्रीय बैंक अब आर्थिक आंकड़ों के असर को परखने के लिए अतिरिक्त समय लेना चाहता है।\n• कमजोर आय वृद्धि और घटती बचत: अगस्त के महीने में उपभोक्ता खर्च 0.9 प्रतिशत बढ़ा जबकि आय मात्र 0.2 प्रतिशत ही बढ़ी, जिससे बचत दर गिरकर 4.1 प्रतिशत रह गई। आय के बिना केवल पुरानी बचत के दम पर बढ़ता खर्च टिकाऊ नहीं है, जो भविष्य में मांग घटने का संकेत देता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. फेडरल रिजर्व द्वारा 28 अक्टूबर को ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना कितनी रह गई है?\nसीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार 28 अक्टूबर को ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना गिरकर केवल 34.87 प्रतिशत रह गई है।\n\n2. क्या दिसंबर 2026 तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है?\nहां, वायदा बाजार के आंकड़ों के अनुसार 9 दिसंबर तक ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना पूरे 100 प्रतिशत पर आंकी गई है।\n\n3. आर्थिक विश्लेषण ब्यूरो द्वारा जुलाई की मुद्रास्फीति के आंकड़ों में क्या बदलाव किया गया?\nब्यूरो ने अपने वार्षिक संशोधन में जुलाई की कोर महंगाई को 3.3 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत और मुख्य दर को 3.7 प्रतिशत से घटाकर 3.4 प्रतिशत कर दिया है।\n\n4. अगस्त में अमेरिकी घरेलू खर्च और आय में क्या अंतर दर्ज किया गया?\nअगस्त में व्यक्तिगत खर्च में 0.9 प्रतिशत की तेज वृद्धि हुई, जबकि इसके मुकाबले व्यक्तिगत आय केवल 0.2 प्रतिशत ही बढ़ी।\n\n5. फेडरल रिजर्व के आगामी फैसले से पहले कौन से प्रमुख आर्थिक आंकड़े जारी होने वाले हैं?\nअक्टूबर के नीतिगत निर्णय से पहले शुक्रवार को सितंबर के रोजगार आंकड़े और 14 अक्टूबर को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक जारी किया जाएगा।",
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  "publishedAt": "2026-09-30",
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