# महंगाई की चिंता के बीच भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिए नीतिगत सख्ती के संकेत, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों पर लगा ब्रेक

> भारतीय रिज़र्व बैंक की हालिया बैठक के मिनट्स से संकेत मिलता है कि ब्याज दरों में कटौती फिलहाल संभव नहीं है। वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में महंगाई दर 5 प्रतिशत से ऊपर रहने के अनुमान के कारण नीतिगत सख्ती की संभावना बनी हुई है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-08-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/mahngai-ki-chinta-ke-bicha-reserve-bank-of-india-ne-die-nitigata-sakhti-ke-snketa-byaja-daron-men-katauti-ki-ummidon-para-laga-bre-18966 · **Language:** Hindi
**Tags:** भारतीय रिज़र्व बैंक, मौद्रिक नीति, ब्याज़ दर, भारतीय रुपया, महंगाई दर, अमेरिकी डॉलर, सोना कीमत, क्रिप्टो बाज़ार

भारतीय रिज़र्व बैंक की अगस्त की शुरुआत में हुई नीतिगत बैठक के मिनट्स जारी कर दिए गए हैं। इन विवरणों से स्पष्ट होता है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती को लेकर बाज़ार की उम्मीदों से अधिक सतर्क रुख अपना रहा है। गर्वनर संजय मल्होत्रा के सार्वजनिक बयानों की तुलना में जारी किए गए मिनट्स का मिज़ाज काफी सतर्क नज़र आ रहा है। वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में महंगाई दर 5 प्रतिशत के स्तर से ऊपर रहने की आशंका के बीच मौद्रिक नीति में ढील देने की गुंजाइश खत्म होती दिख रही है। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा बांड बायबैक के फैसले ने दुनिया भर के विदेशी मुद्रा, सर्राफा और क्रिप्टो बाज़ारों की हलचल बढ़ा दी है।

## रिज़र्व बैंक के मिनट्स में सख्ती के संकेत और ब्याज दर पर रुख
डीबीएस ग्रुप रिसर्च की विश्लेषक राधिका राव के अनुसार, अगस्त के शुरुआती हफ्ते में हुई रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के जो विवरण बुधवार देर रात सामने आए हैं, वे नीतिगत समीक्षा के दौरान गवर्नर के बयानों से कहीं ज्यादा सतर्क रुख बयां करते हैं। बैठक के मिनट्स दर्शाते हैं कि समिति के चार सदस्य तटस्थ से लेकर सतर्क रुख अपनाने के पक्ष में थे। वहीं डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने ब्याज दरों में किसी भी तरह की कटौती की संभावनाओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया।

बैठक के दौरान गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नीतिगत दरों में बदलाव न करते हुए ठहराव की नीति का समर्थन किया। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट चेतावनी भी दी कि यदि आने वाले समय में महंगाई की रफ्तार तेज़ होती है, तो केंद्रीय बैंक को व्यापक स्तर पर नीतिगत सख्ती का कदम उठाना पड़ सकता है। वित्तीय विश्लेषणों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही के दौरान खुदरा महंगाई औसतन 5 प्रतिशत से अधिक बनी रह सकती है। मानसून की चाल, अल नीनो का जोखिम और वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव महंगाई के परिदृश्य को अनिश्चित बनाए हुए हैं। इसी कारण निवेशक आने वाले समय में मौद्रिक सख्ती के जोखिम को ध्यान में रखकर रणनीति बना रहे हैं।

## भारतीय रुपये की चाल और 96.0 के स्तर पर प्रतिरोध
घरेलू वित्तीय बाज़ारों में भारतीय रुपये की विनिमय दर पर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों और अमेरिका में ब्याज दरों के रुझान का सीधा असर देखने को मिल रहा है। विदेशी मुद्रा बाज़ार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया (USD/INR) जब भी 96.0 के स्तर को पार करने की कोशिश करता है, वहां उसे मजबूत प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है। बाज़ार विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर पर डॉलर की बिकवाली और केंद्रीय बैंक की मौजूदगी के कारण रुपये को सहारा मिल रहा है। जून के महीने में रुपये की एक महीने की अस्थिरता (1M Volatility) अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी, लेकिन अगस्त के दौरान इसमें काफी हद तक नरमी दर्ज की गई है।

## अमेरिकी ट्रेजरी का बांड बायबैक और वैश्विक तरलता प्रोत्साहन
वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में बुधवार को एक बड़ा नीतिगत घटनाक्रम सामने आया। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अपने तय कैलेंडर से अलग हटकर बांड बायबैक कार्यक्रम को दोगुना करने का ऐलान किया। बुधवार को 12:32 GMT पर जारी सूचना के अनुसार, ट्रेजरी विभाग 10 वर्ष से 20 वर्ष और 20 वर्ष से 30 वर्ष की परिपक्वता अवधि वाले क्षेत्रों में तरलता सहायता बायबैक अभियानों का आकार बढ़ाने जा रहा है।

इस फैसले के तहत प्रति ऑपरेशन अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह नया ढांचा 9 सितंबर से प्रभावी होगा और 4 नवंबर तक लागू रहेगा। अमेरिकी बांड बाज़ार में तरलता बढ़ाने के इस कदम ने वैश्विक मुद्रा बाज़ारों से लेकर कमोडिटी और डिजिटल एसेट्स तक व्यापक असर डाला है।

## विदेशी मुद्रा, सोना और क्रिप्टो बाज़ार पर व्यापक असर
अमेरिकी डॉलर में आई स्थिरता के बीच प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं में मिला-जुला रुझान देखने को मिल रहा है। ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) गुरुवार को यूरोपीय सत्र के दौरान 1.3600 के स्तर के आसपास कारोबार करता दिखा। पाउंड 11 मई के बाद के अपने उच्चतम स्तर से थोड़ा पीछे हटने के बाद स्थिर बना हुआ है। वहीं यूरो (EUR/USD) यूरोपीय बाज़ार में 1.1700 के स्तर से नीचे मजबूती हासिल कर रहा है। मई के उत्तरार्ध के बाद के अपने उच्चतम स्तर को छूने के बाद यूरो निवेशक 1.1700 के ऊपर नए ब्रेकआउट का इंतज़ार कर रहे हैं। बाज़ार की नज़र अब आने वाले अमेरिकी बेरोज़गारी दावों के आंकड़ों और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी है।

सर्राफा बाज़ार की बात करें तो सोने की कीमतों में एशियाई सत्र के दौरान मामूली मुनाफावसूली देखी गई। सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे आ गया, लेकिन यह अभी भी जून की शुरुआत के बाद के अपने उच्चतम स्तर के करीब बना हुआ है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक मिनट्स के बाद डॉलर के तीन महीने के निचले स्तर से उबरने के कारण सोने के खरीदारों ने मुनाफा कमाया। हालांकि, अमेरिकी बांड यील्ड में आई गिरावट ने सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट को रोक दिया।

उधर क्रिप्टो बाज़ार में भी अमेरिकी बांड बायबैक का असर देखा गया। रिपल, सोलाना और कार्डानो जैसी प्रमुख डिजिटल संपत्तियां गुरुवार को बढ़त बनाए रखने में सफल रहीं। रिपल (XRP) बीते दिन 10 प्रतिशत की ज़बरदस्त तेज़ी दर्ज करने के बाद 1.0951 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा। तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि XRP और SOL में और बढ़त की गुंजाइश बनी हुई है, जबकि ADA के हालिया लाभ में कुछ गिरावट का जोखिम बना हुआ है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** बैंक लोन और ईएमआई (EMI) पर ब्याज दरें कम होने की उम्मीद फिलहाल टल गई है, क्योंकि रिज़र्व बैंक नीतिगत दरों को उच्च स्तर पर बनाए रख सकता है।

**रुपये और बाज़ार पर:** डॉलर के मुकाबले रुपया 96.0 के स्तर के आसपास स्थिर रहने की संभावना है, लेकिन महंगाई दर 5% से ऊपर रहने से आने वाले समय में कड़े मौद्रिक फैसलों का असर बाज़ार पर दिख सकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या भारतीय रिज़र्व बैंक जल्द ही ब्याज दरों में कटौती करेगा?
नहीं, रिज़र्व बैंक के जारी मिनट्स के अनुसार ब्याज दरों में कटौती की संभावना फिलहाल बहुत कम है क्योंकि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में महंगाई दर 5% से अधिक रहने का अनुमान है।

### 2. डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का मौजूदा स्तर क्या है?
विदेशी मुद्रा बाज़ार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया (USD/INR) 96.0 के स्तर को पार करने की कोशिश कर रहा है, जहां इसे मजबूत प्रतिरोध मिल रहा है।

### 3. अमेरिकी ट्रेजरी के बांड बायबैक फैसले का क्या असर हुआ है?
अमेरिकी ट्रेजरी ने बांड बायबैक की अधिकतम सीमा 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दी है, जिससे बाज़ार में तरलता बढ़ी है और डॉलर स्थिर हुआ है।

### 4. सोने और क्रिप्टो बाज़ार में क्या हलचल देखी गई?
सोना 4,500 डॉलर से नीचे कारोबार कर रहा है लेकिन जून के बाद के उच्चतम स्तर के करीब है, जबकि रिपल (XRP) 10% की बढ़त के बाद 1.0951 डॉलर के पास स्थिर बना हुआ है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._