# महंगाई में उछाल से दिसंबर में दोबारा दरें बढ़ा सकता है आरबीआई, डीबीएस बैंक का दावा

> अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर छह प्रतिशत पर पहुंचने के आसार हैं, जिसके कारण भारतीय रिजर्व बैंक दिसंबर की बैठक में रेपो रेट में एक और बढ़ोतरी कर सकता है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-11-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/mahngai-men-uchhala-se-disnbara-men-dobara-daren-barha-sakata-hai-rbi-dbs-bank-ka-dava-57511 · **Language:** Hindi
**Tags:** महंगाई दर, आरबीआई, डीबीएस बैंक, रेपो रेट, खाद्य महंगाई, भारतीय अर्थव्यवस्था, खुदरा महंगाई, डॉलर बनाम रुपया

भारत में खुदरा महंगाई दर की रफ्तार एक बार फिर तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। वित्तीय सेवा संस्थान डीबीएस ग्रुप रिसर्च के ताजा अध्ययन के अनुसार, खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों और निचले आधार प्रभाव (बेस इफेक्ट) की वजह से अक्टूबर के महीने में मुख्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई बढ़कर 6.0 प्रतिशत पर पहुंच सकती है। इससे पिछले महीने यानी सितंबर में खुदरा महंगाई दर 5.5 प्रतिशत दर्ज की गई थी। महंगाई में इस संभावित बढ़ोतरी से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दबाव फिर से बढ़ गया है, जिससे दिसंबर में होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा में लगातार दूसरी बार दरें बढ़ाई जा सकती हैं।

 

## खाद्य वस्तुओं के दामों में तेजी और बेस इफेक्ट का असर

डीबीएस के विश्लेषण के मुताबिक, अक्टूबर में मुख्य महंगाई दर में उछाल का प्राथमिक कारण खाद्य वर्ग में लगातार बनी हुई तेजी है। उच्च आवृत्ति वाले आंकड़ों (हाई-फ्रीक्वेंसी डेटा) से पता चलता है कि अनाज, खाद्य तेल और जल्द खराब होने वाली वस्तुओं जैसे सब्जियों की कीमतों में क्रमिक रूप से वृद्धि हुई है। इसके साथ ही, पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कम आधार प्रभाव रहने के कारण भी वार्षिक महंगाई दर का आंकड़ा ऊंचा दिखाई दे रहा है। हालांकि, गैर-खाद्य श्रेणियों में थोड़ी राहत मिलने की संभावना जताई गई है, क्योंकि कीमती धातुओं के दामों में आई नरमी और खुदरा ईंधन कीमतों में बदलाव को टालने से गैर-खाद्य घटकों पर दबाव कुछ कम हुआ है।

 

## कोर इन्फ्लेशन और सेवाओं की लागत में वृद्धि

अध्ययन में यह भी चेतावनी दी गई है कि कोर इन्फ्लेशन (जिसमें खाद्य और ईंधन शामिल नहीं होते) बढ़कर 4.5 से 4.6 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच सकती है। कोर महंगाई में इस वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से सेवाओं की कीमतों में दर्ज की गई बढ़ोतरी और आधार प्रभाव से अप्रत्यक्ष करों के असर का बाहर होना है। जब सेवाओं का खर्च बढ़ता है और टैक्स का आधार अनुकूल नहीं रहता, तब कोर महंगाई दर में तेजी देखना स्वाभाविक होता है। यही कारण है कि समग्र महंगाई परिदृश्य केंद्रीय बैंक के लिए चिंता का सबब बन रहा है।

 

## आरबीआई के लक्ष्य की ऊपरी सीमा और दिसंबर की बैठक

भारतीय रिजर्व बैंक ने खुदरा महंगाई दर के लिए 4 प्रतिशत का लक्ष्य तय किया है, जिसमें 2 प्रतिशत ऊपर या नीचे (यानी 2% से 6%) का लचीलापन रखा गया है। यदि अक्टूबर में सीपीआई महंगाई दर 6.0 प्रतिशत के स्तर को छू लेती है, तो यह आरबीआई की निर्धारित सहनशीलता सीमा के ऊपरी छोर को पार कर जाएगी। डीबीएस ग्रुप रिसर्च का मानना है कि इस स्थिति को देखते हुए रिजर्व बैंक दिसंबर की नीतिगत समीक्षा में अपनी नीति को और सख्त कर सकता है और लगातार दूसरी बार रेपो रेट में बढ़ोतरी का फैसला ले सकता है। इसके अलावा, देश का माल व्यापार घाटा (गुड्स ट्रेड डेफिसिट) भी अभी विस्तृत स्तर पर बना हुआ है, जो बाहरी मोर्चे पर आर्थिक चुनौतियों को दर्शाता है।

 

## वैश्विक विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों की स्थिति

भारतीय अर्थव्यवस्था पर घरेलू दबावों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों की उथल-पुथल का भी गहरा असर पड़ रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियन डॉलर (AUD/USD) तीन सप्ताह के निचले स्तर पर फिसल गया। इसका मुख्य कारण रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) का नरम रुख और शेयर बाजारों में आई बिकवाली रही। हालांकि, अमरीकी बॉन्ड यील्ड के दो महीने के निचले स्तर पर आ जाने से अमरीकी डॉलर की बढ़त सीमित रही और निवेशकों की नजरें अमरीका के गैर-कृषि रोजगार (NFP) आंकड़ों पर टिकी रहीं।

दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमरीकी डॉलर (USD/JPY) ने अपने साप्ताहिक निचले स्तर से रिकवरी दर्ज की। बैंक ऑफ जापान (बीओजे) के सख्त रुख और करेंसी बाजार में संभावित हस्तक्षेप के जोखिमों के बीच अमरीकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और ईरान तनाव कम होने की उम्मीदों ने इस मुद्रा युग्म की तेजी पर अंकुश लगाया। कमोडिटी बाजार में, सोना 4,050 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे गिरकर कारोबार कर रहा था, जबकि हाल ही में अमरीकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद यह 4,000 डॉलर से ऊपर चढ़ा था। सोने में हर उछाल पर मुनाफावसूली देखी जा रही है और कारोबारी दिशा स्पष्ट करने के लिए अमरीकी रोजगार रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

## इसका आप पर असर
खुदरा महंगाई दर बढ़ने और आरबीआई द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना से आम नागरिकों के मासिक बजट और लोन की किस्तों पर सीधा असर पड़ेगा।

- **भारत में:** खाद्य तेल, अनाज और सब्जियों के दाम बढ़ने से आम परिवारों की मासिक रसोई का खर्च बढ़ जाएगा। इसके अलावा, दिसंबर में आरबीआई द्वारा रेपो रेट बढ़ाए जाने से होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई महंगी हो सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
अक्टूबर के महीने में खुदरा महंगाई दर में बढ़ोतरी मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने और बेस इफेक्ट के कारण देखने को मिल रही है।

- **खाद्य कीमतों में तेजी:** हाल की अवधि में अनाज, कुकिंग ऑयल और ताजी सब्जियों की कीमतों में क्रमिक रूप से बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- **निचला आधार प्रभाव:** पिछले साल की समान अवधि में महंगाई का आंकड़ा कम रहने के कारण इस साल वार्षिक वृद्धि दर अधिक दिखाई दे रही है।
- **कोर महंगाई में दबाव:** सेवाओं के दामों में बढ़ोतरी और टैक्स बेस इफेक्ट खत्म होने से कोर इन्फ्लेशन 4.5% से बढ़कर 4.6% तक पहुंच रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. अक्टूबर में भारत की महंगाई दर कितने प्रतिशत रहने का अनुमान है?
डीबीएस ग्रुप रिसर्च के अनुसार, अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 6.0 प्रतिशत पर पहुंच सकती है, जो सितंबर में 5.5 प्रतिशत थी।

### 2. महंगाई दर बढ़ने का मुख्य कारण क्या है?
अनाज, खाद्य तेल और सब्जियों जैसी खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतें और पिछला कम आधार प्रभाव इसका मुख्य कारण है।

### 3. क्या दिसंबर में आरबीआई रेपो रेट बढ़ा सकता है?
हाँ, यदि महंगाई दर 6.0 प्रतिशत तक पहुंचती है, तो आरबीआई अपनी सहनशीलता सीमा के ऊपरी छोर को पार करने के कारण दिसंबर में लगातार दूसरी बार दरें बढ़ा सकता है।

### 4. कोर महंगाई का क्या अनुमान लगाया गया है?
सेवाओं के महंगे होने और टैक्स बेस प्रभाव खत्म होने की वजह से कोर महंगाई 4.5% से 4.6% के बीच रहने का अनुमान है।

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