# महंगाई पर यूरोपियन सेंट्रल बैंक की सख्त चेतावनी, ईसाबेल श्नाबेल बोलीं लंबे समय तक 2 फीसदी से ऊपर रहेंगी दरें

> यूरोपियन सेंट्रल बैंक की कार्यकारी बोर्ड सदस्य ईसाबेल श्नाबेल ने चेतावनी दी है कि यूरोज़ोन में महंगाई दर लंबे समय तक 2 फीसदी के लक्ष्य से ऊपर बनी रह सकती है, जिसके कारण आगे और नीतिगत सख्ती की जरूरत पड़ेगी।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-08-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/mahngai-para-european-central-bank-ki-sakhta-chetavani-isabel-schnabel-bolin-lnbe-samaya-taka-2-phisadi-se-upara-rahengi-daren-22269 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूरोपियन सेंट्रल बैंक, महंगाई, ईसाबेल श्नाबेल, ब्याज दरें, फॉरेक्स मार्केट, सोना, क्रिप्टोकरंसी

यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) की कार्यकारी बोर्ड सदस्य ईसाबेल श्नाबेल ने यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति के परिदृश्य को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मध्यम अवधि में महंगाई दर के केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य पर वापस लौटने की संभावना बेहद कम दिखाई दे रही है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, अर्थव्यवस्था में मूल्य स्थिरता बहाल करने के लिए आने वाले समय में और अधिक नीतिगत सख्ती यानी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आवश्यकता होगी। वित्तीय बाजारों को संबोधित करते हुए यह संकेत दिया गया है कि मुद्रास्फीति का दबाव अनुमान से कहीं अधिक लंबे समय तक बना रह सकता है, जिससे केंद्रीय बैंक को अपनी मौद्रिक नीति को कठोर बनाए रखना होगा।

 

## द्वितीयक प्रभावों को रोकने और ऊर्जा संकट पर ध्यान देने की जरूरत

ईसाबेल श्नाबेल ने अपने वक्तव्य में जोर देकर कहा कि केंद्रीय बैंक का प्राथमिक ध्यान महंगाई के द्वितीयक प्रभावों को शुरुआती चरण में ही रोकने पर होना चाहिए। यदि शुरुआती मूल्य वृद्धि के बाद वेतन मांगों और अन्य सेवाओं में कीमतें तेजी से बढ़ने लगती हैं, तो महंगाई को नियंत्रित करना अत्यधिक जटिल और कठिन हो जाता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वित्तीय बाजार ECB की प्रतिक्रियात्मक कार्यप्रणाली को भली-भांति समझते हैं और उसी अनुसार अपनी अपेक्षाएं तय कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतिगत कड़ाई का भावी विस्तार और दरों में वृद्धि का दायरा पूरी तरह से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर ही निर्भर करेगा।

विशेष रूप से प्राकृतिक गैस की मौजूदा स्थिति और आपूर्ति को लेकर जताई गई चिंताएं काफी गहरी बनी हुई हैं। ऊर्जा क्षेत्र में बनी अनिश्चितता के बावजूद, यूरोज़ोन की व्यापक अर्थव्यवस्था में आगे की ओर गति और मजबूती देखने को मिल रही है। आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने के साथ-साथ यदि ऊर्जा की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो महंगाई लंबे समय तक 2 प्रतिशत के तय मानक से ऊपर टिकी रह सकती है। इसी वजह से केंद्रीय बैंक समय रहते कड़े कदम उठाने की रणनीति पर काम कर रहा है ताकि मुद्रास्फीति को नियंत्रित किया जा सके।

 

## यूरोपियन सेंट्रल बैंक का ढांचा और मौद्रिक नीति के प्रमुख उपकरण

जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में स्थित यूरोपियन सेंट्रल बैंक पूरे यूरोज़ोन क्षेत्र के लिए केंद्रीय रिजर्व बैंक के रूप में कार्य करता है। इस संस्थान का मुख्य दायित्व 20 यूरोपीय सदस्य देशों के लिए मुख्य ब्याज दरें तय करना और संपूर्ण मौद्रिक नीति का कुशल प्रबंधन करना है। ECB का प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण जनादेश मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका सीधा अर्थ यूरोज़ोन में महंगाई दर को 2 प्रतिशत के आसपास सीमित रखना होता है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए बैंक का सबसे प्राथमिक और प्रभावी हथियार मुख्य ब्याज दरों को बढ़ाना या घटाना है। जब केंद्रीय बैंक अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें तय करता है, तो आमतौर पर यूरो करंसी को मजबूती मिलती है और इसका मूल्य बढ़ता है, जबकि दरें घटाने पर यूरो में कमजोरी आती है।

मौद्रिक नीति से जुड़े सभी महत्वपूर्ण निर्णय लेने का अधिकार ECB की गवर्निंग काउंसिल के पास होता है, जिसकी बैठकें एक वर्ष में आठ बार आयोजित की जाती हैं। इस गवर्निंग काउंसिल में यूरोज़ोन के सभी राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों के साथ-साथ छह स्थायी सदस्य शामिल होते हैं। इन स्थायी सदस्यों में यूरोपियन सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्ड भी शामिल हैं, जो नीतिगत दिशा तय करने और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को दिशा देने में केंद्रीय भूमिका निभाती हैं।

 

## क्वांटिटेटिव ईज़िंग (QE) और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) की कार्यप्रणाली

अत्यंत असाधारण और विषम आर्थिक स्थितियों में, जब केवल ब्याज दरों में कटौती करना मूल्य स्थिरता के लक्ष्य को हासिल करने में नाकामी साबित होता है, तब यूरोपियन सेंट्रल बैंक क्वांटिटेटिव ईज़िंग (QE) नामक अपरंपरागत मौद्रिक नीति उपकरण को लागू करता है। QE वह प्रक्रिया है जिसके तहत ECB नई यूरो मुद्रा प्रिंट करता है और उस फंड का उपयोग कमर्शियल बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों से सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदने के लिए करता है। इस बॉन्ड खरीदारी के जरिए वित्तीय प्रणाली में बड़े पैमाने पर लिक्विडिटी यानी नकदी का प्रवाह बढ़ाया जाता है। आमतौर पर QE के क्रियान्वयन से यूरो मुद्रा कमजोर होती है। इतिहास में ECB ने इस उपकरण को अंतिम उपाय के रूप में इस्तेमाल किया है, जिसमें 2009 से 2011 के महान वित्तीय संकट का दौर, 2015 का समय जब महंगाई दर जिद्दी रूप से निचले स्तर पर बनी हुई थी, और हाल ही में कोविड महामारी का संकट काल शामिल है।

इसके ठीक विपरीत, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) पूरी तरह से QE की उल्टी प्रक्रिया है। इसे तब लागू किया जाता है जब अर्थव्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया मजबूत हो जाती है और महंगाई दर में उछाल आने लगता है। क्वांटिटेटिव ईज़िंग में जहां यूरोपियन सेंट्रल बैंक वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदकर उन्हें तरलता प्रदान करता है, वहीं क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में ECB नए बॉन्ड की खरीद तुरंत रोक देता है और अपने पास मौजूद मैच्योर होने वाले बॉन्ड की मूल राशि का फिर से पुनर्निवेश नहीं करता है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि QT की यह प्रक्रिया आमतौर पर यूरो मुद्रा के लिए सकारात्मक और तेजी (बुलिश) लाने वाली साबित होती है।

 

## विदेशी मुद्रा बाजार में हलचल: EUR/USD और GBP/USD का हाल

केंद्रीय बैंकों के मौद्रिक रुख और आने वाले प्रमुख आंकड़ों के बीच अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार (फॉरेक्स) में विभिन्न करंसी पेयर्स में हलचल देखने को मिल रही है। EUR/USD पेयर में वॉल स्ट्रीट के मंगलवार के कारोबार की समाप्ति के बाद 1.1670 के स्तर के आसपास मामूली बढ़त दर्ज की गई। अमेरिकी डॉलर में हल्की कमजोरी के चलते इस पेयर ने लगातार दो दिनों की गिरावट पर रोक लगाई है और फिलहाल 1.1700 के प्रतिरोध स्तर पर अपनी नजरें जमाए हुए है। मुद्रा बाजार के व्यापारी अब बुधवार को जारी होने वाले अमेरिका के पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) प्राइस इंडेक्स और दूसरी तिमाही के संशोधित GDP आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जो आगे की विनिमय दरों की दिशा तय करेंगे।

दूसरी तरफ, GBP/USD पेयर में एशियाई ट्रेडिंग सेशन के दौरान नकारात्मक रुझान देखा गया और यह 1.3600 के मध्य स्तर से नीचे फिसल गया। इस गिरावट से ब्रिटिश पाउंड ने पिछले दिन हासिल की गई मजबूत बढ़त का कुछ हिस्सा गंवा दिया है। इसके बावजूद, यह स्पॉट प्राइस पिछले शुक्रवार को छुए गए अपने छह महीने के उच्चतम स्तर के काफी करीब बना हुआ है। व्यापारी अमेरिका के PCE महंगाई आंकड़ों से नए संकेतों की उम्मीद में सतर्क रुख अपना रहे हैं।

 

## सोने की कीमतों में गिरावट और मीम कॉइन्स में मुनाफावसूली

कीमती धातुओं के बाजार में, सोने की कीमतों में पिछले दिन के दोतरफा उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद नए सिरे से बिकवाली का दबाव देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना फिलहाल 4,650 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे ट्रेड कर रहा है। महत्वपूर्ण अमेरिकी PCE डेटा के आने से पहले व्यापारियों द्वारा अपनी पोजीशनों में बदलाव (रिपोजिशनिंग) करने की वजह से अमेरिकी डॉलर ने फिर से अपनी मजबूती हासिल की है, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बना है। PCE महंगाई डेटा के अलावा, निवेशक शुक्रवार को जैक्सन होल सिंपोजियम में फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉश के संबोधन पर भी बारीक नजर रखेंगे, जिससे भविष्य की ब्याज दर नीति के स्पष्ट संकेत मिल सकते हैं।

डिजिटल एसेट यानी क्रिप्टोकुरेंसी बाजार में, Dogecoin (DOGE), Shiba Inu (SHIB), और Pepe (PEPE) जैसे प्रमुख मीम कॉइन्स पिछले सप्ताह दर्ज की गई दोहरे अंकों की शानदार तेजी के बाद अपनी तेजी की रफ्तार खोते दिख रहे हैं। निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली किए जाने से इन टोकन्स पर नीचे की तरफ दबाव बन गया है। इस बिकवाली के चलते DOGE और PEPE में आगे और गिरावट आने का जोखिम बना हुआ है, जबकि SHIB फिलहाल अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल पर टिके रहने की कोशिश कर रहा है।

## इसका आप पर असर
**निवेशकों और आम जनता पर असर:**

- **ब्याज दरों और महंगाई का दबाव:** यूरोपियन सेंट्रल बैंक की ओर से सख्त रुख के संकेतों का मतलब है कि आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें ऊंची रह सकती हैं, जिससे कर्ज महंगा होने का जोखिम बना रहेगा।
- **करंसी और क्रिप्टो मार्केट में उतार-चढ़ाव:** अमेरिका और यूरोप के महंगाई आंकड़ों से फॉरेक्स और क्रिप्टो बाजार (जैसे डॉगकॉइन और बिटकॉइन) पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनाने की जरूरत है।

## सवाल-जवाब

### 1. ईसाबेल श्नाबेल ने महंगाई को लेकर क्या चेतावनी दी है?
उन्होंने चेतावनी दी है कि यूरोज़ोन में महंगाई दर लंबे समय तक 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी रह सकती है, जिसके कारण यूरोपियन सेंट्रल बैंक को आगे और नीतिगत सख्ती करनी होगी।

### 2. यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) का मुख्य कार्य और उद्देश्य क्या है?
ECB का मुख्य कार्य यूरोज़ोन में मूल्य स्थिरता बनाए रखना और महंगाई दर को 2 प्रतिशत के आसपास सीमित रखना है। यह काम बैंक मुख्य रूप से ब्याज दरें तय करके करता है।

### 3. क्वांटिटेटिव ईज़िंग (QE) और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) में क्या अंतर है?
QE के तहत बैंक नोट छापकर बॉन्ड खरीदता है ताकि बाजार में नकदी बढ़े, जिससे यूरो कमजोर होता है। वहीं QT में बैंक बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है, जिससे यूरो को मजबूती मिलती है।

### 4. अमेरिका के PCE डेटा का सोने और करंसी मार्केट पर क्या प्रभाव पड़ा है?
PCE डेटा से पहले डॉलर में मजबूती आने से सोना 4,650 डॉलर से नीचे आ गया है, जबकि GBP/USD और EUR/USD में सतर्कता के साथ कारोबार हो रहा है।

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