मजबूत अमेरिकी जॉब्स डेटा से फेड की सख्ती की आशंका बढ़ी, डांस्के बैंक के मुताबिक शेयर बाजारों पर दबाव मजबूत अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से फेड के सख्त रुख अपनाने की उम्मीदें बढ़ी हैं, जिससे वैश्विक शेयर बाजारों पर दबाव बना है, हालांकि हफ्तेभर में साइक्लिकल सेक्टरों ने डिफेंसिव सेक्टरों से बेहतर प्रदर्शन किया, डांस्के बैंक का कहना है। अमेरिका से आए मजबूत रोजगार आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व के आगे के रुख को लेकर बाजार की उम्मीदें बदल दी हैं, और इसका असर सीधे शेयर बाजारों पर दिख रहा है। डांस्के बैंक की रिसर्च टीम के मुताबिक, उम्मीद से ज्यादा मजबूत जॉब्स डेटा के बाद निवेशक अब फेड के सख्त रुख अपनाने की संभावना ज्यादा मानकर चल रहे हैं, और इसी वजह से नए हफ्ते की शुरुआत में शेयर बाजारों पर दबाव बना। अमेरिकी बाजार फिसला, यूरोप में मामूली बढ़त जॉब्स डेटा आने के बाद एसएंडपी 500 में गिरावट देखी गई, क्योंकि निवेशकों को आशंका है कि मजबूत रोजगार बाजार फेड को उतनी जल्दी ब्याज दरें घटाने से रोक सकता है जितनी पहले उम्मीद थी। दूसरी ओर, यूरोप का स्टॉक्स 600 इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ। डांस्के बैंक के मुताबिक यह अंतर मुख्य रूप से इस वजह से आया कि ग्रोथ से जुड़े शेयरों और ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील शेयरों ने इस खबर पर अलग-अलग तरीके से प्रतिक्रिया दी। साइक्लिकल शेयरों का दबदबा कायम शुक्रवार की कमजोरी के बावजूद, डांस्के बैंक के मुताबिक पूरा हफ्ता ज्यादातर साइक्लिकल सेक्टरों के नाम रहा। साइक्लिकल शेयर, यानी वे कंपनियां जिनका प्रदर्शन आर्थिक विकास की रफ्तार से सीधे जुड़ा होता है, अपेक्षाकृत मजबूत बने रहे, जबकि ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील सेक्टर पिछड़ गए। टीम ने कहा, "मजबूत जॉब्स डेटा से जुड़े ग्रोथ के संकेतों को देखते हुए साइक्लिकल शेयरों का अपेक्षाकृत बेहतर बना रहना स्वाभाविक ही था।" इस दौरान औद्योगिक क्षेत्र, सेमीकंडक्टर कंपनियों और मैटेरियल्स सेक्टर की कंपनियों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, क्योंकि मजबूत रोजगार आंकड़े आगे मजबूत आर्थिक ग्रोथ का संकेत माने जा रहे हैं। वित्तीय, कम्युनिकेशन और टेक्नोलॉजी शेयरों की बढ़त डांस्के बैंक की टीम के मुताबिक हफ्तेभर में सेक्टरों की चाल में कोई नाटकीय उतार-चढ़ाव नहीं दिखा, लेकिन दिशा लगातार एक जैसी बनी रही। वित्तीय क्षेत्र, कम्युनिकेशन और टेक्नोलॉजी शेयरों में हफ्तेभर में करीब 2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई, जिससे इन्होंने डिफेंसिव सेक्टरों को पीछे छोड़ दिया। इसके उलट, ऊर्जा, कंज्यूमर स्टेपल्स और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर, जिन्हें आमतौर पर आर्थिक अनिश्चितता के दौर में सुरक्षित माना जाता है, इसी अवधि में 0.5 से 1 प्रतिशत तक फिसल गए। फेड की सख्ती का मतलब शेयरों के लिए क्या जब फेड सख्त रुख अपनाता दिखता है, तो इसका आमतौर पर मतलब होता है कि ब्याज दरों में कटौती देर से या कम मात्रा में होगी। इससे कंपनियों की भविष्य की कमाई का मौजूदा मूल्यांकन घटता है, और इसका सबसे ज्यादा असर उन सेक्टरों पर पड़ता है जो सस्ते कर्ज की उम्मीद में पहले ही चढ़ चुके थे, जैसे रियल एस्टेट, यूटिलिटीज और अन्य डिफेंसिव सेक्टर। वहीं औद्योगिक और वित्तीय जैसे साइक्लिकल सेक्टरों को मजबूत जॉब्स डेटा से फायदा मिलता है, भले ही इसका मतलब यह भी हो कि कर्ज महंगा लंबे समय तक बना रहेगा। डेटा पर टिके बाजारों का जाना-पहचाना पैटर्न साइक्लिकल शेयरों में बढ़त और ब्याज दर के प्रति संवेदनशील शेयरों में पिछड़ना, यह पैटर्न बाजारों में तब आम हो जाता है जब फेड की नीति काफी हद तक आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर हो। मजबूत ग्रोथ के संकेत कंपनियों की कमाई के लिए अच्छी खबर होते हैं, लेकिन जो लोग ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद लगाए बैठे हैं उनके लिए बुरी खबर, यही वजह है कि एक ही जॉब्स रिपोर्ट औद्योगिक और वित्तीय शेयरों को ऊपर ले जा सकती है और साथ ही उन सेक्टरों को नीचे धकेल सकती है जो बॉन्ड जैसा व्यवहार करते हैं। डांस्के बैंक के आंकड़े बताते हैं कि हफ्तेभर निवेशकों ने शेयर बाजार से पूरी तरह बाहर निकलने के बजाय इन दोनों खेमों के बीच पैसा घुमाया, क्योंकि शुक्रवार को एसएंडपी 500 में आई गिरावट के साथ ही साइक्लिकल सेक्टरों में बढ़त भी दर्ज हुई। लेबर डे की वजह से अमेरिकी बाजार बंद डांस्के बैंक के मुताबिक, नए हफ्ते की शुरुआत में कारोबार सामान्य से कम रहने की संभावना है, क्योंकि लेबर डे की छुट्टी की वजह से अमेरिकी बाजार बंद हैं। इससे फिलहाल ज्यादातर हलचल यूरोपीय बाजारों में ही दिख रही है, जब तक अमेरिकी बाजार दोबारा नहीं खुलते। निवेशकों की नजर अब भी जॉब्स डेटा के उन संकेतों पर टिकी है जो फेड की आगे की नीति की दिशा तय कर सकते हैं। इसका आप पर असर इसका सीधा असर उन सभी पर पड़ता है जिनका पैसा अमेरिकी या यूरोपीय शेयरों में लगा है, चाहे सीधे तौर पर हो या म्यूचुअल फंड, इंडेक्स फंड या पेंशन खातों के जरिए। • ब्याज दर कटौती की उम्मीद टली: मजबूत जॉब्स डेटा से फेड की जल्द ब्याज दर घटाने की संभावना कम हो गई है। अगर आप सस्ते लोन या मॉर्गेज री-फाइनेंस की उम्मीद कर रहे थे, तो इसमें और देरी हो सकती है। • डिफेंसिव सेक्टर वाले पोर्टफोलियो को झटका: ऊर्जा, कंज्यूमर स्टेपल्स और हेल्थकेयर शेयर हफ्तेभर में 0.5 से 1 प्रतिशत तक गिरे। जिन निवेशकों ने स्थिरता के लिए इन "सुरक्षित" सेक्टरों में पैसा लगाया था, उन्हें फायदे की बजाय नुकसान झेलना पड़ा। • साइक्लिकल और टेक्नोलॉजी शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया: वित्तीय, कम्युनिकेशन और टेक्नोलॉजी शेयरों में हफ्तेभर में करीब 2 प्रतिशत की बढ़त रही। इन सेक्टरों में ज्यादा हिस्सेदारी वाले पोर्टफोलियो ने बाकी बाजार से बेहतर प्रदर्शन किया। • आज अमेरिकी कारोबार बंद: लेबर डे की वजह से वॉल स्ट्रीट बंद है, इसलिए अमेरिकी शेयरों में जॉब्स डेटा का पूरा असर बाजार खुलने के बाद ही दिखेगा। • आगे भी उतार-चढ़ाव संभव: जब तक फेड की ब्याज दर नीति साफ नहीं होती, ग्रोथ से जुड़े और डिफेंसिव शेयरों के बीच यह खींचतान जारी रह सकती है। सवाल-जवाब 1. शेयर बाजारों पर दबाव क्यों बना? अमेरिका से आए उम्मीद से ज्यादा मजबूत रोजगार आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व के सख्त रुख अपनाने की उम्मीदें बढ़ा दीं, जिससे डांस्के बैंक के मुताबिक वैश्विक शेयर बाजारों पर दबाव बना। 2. एसएंडपी 500 और स्टॉक्स 600 का प्रदर्शन कैसा रहा? एसएंडपी 500 में गिरावट आई जबकि स्टॉक्स 600 मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ। 3. हफ्तेभर में कौन-से सेक्टर सबसे आगे रहे? वित्तीय, कम्युनिकेशन और टेक्नोलॉजी सेक्टर करीब 2 प्रतिशत की बढ़त के साथ आगे रहे, साथ ही औद्योगिक, सेमीकंडक्टर और मैटेरियल्स सेक्टर में भी मजबूती दिखी। 4. कौन-से सेक्टर पिछड़े? ऊर्जा, कंज्यूमर स्टेपल्स और हेल्थकेयर जैसे डिफेंसिव सेक्टर हफ्तेभर में 0.5 से 1 प्रतिशत तक फिसले। 5. अमेरिकी बाजार आज बंद क्यों हैं? लेबर डे की छुट्टी की वजह से अमेरिकी बाजार बंद हैं। 6. यह विश्लेषण किसने दिया है? यह विश्लेषण डांस्के बैंक की रिसर्च टीम का है। https://trendkia.com/market/majabuta-ameriki-jobsa-deta-se-fed-ki-sakhti-ki-ashnka-barhi-danske-bank-ke-mutabika-sheyara-bajaron-para-dabava-28887 TrendKia — Har trend, sabse pehle.