# मजबूत कारोबारी आंकड़ों से अमेरिकी डॉलर में तेजी, इंडेक्स 101 के पार पहुंचा

> सितंबर के मजबूत पीएमआई आंकड़ों और कच्चे तेल में उछाल से अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 101 के स्तर को पार कर गया है। निवेशकों को उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रख सकता है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/majabuta-karobari-ankaron-se-us-dollar-men-teji-index-101-ke-para-pahuncha-37560 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिकी डॉलर, डॉलर इंडेक्स, फेडरल रिजर्व, विदेशी मुद्रा, पीएमआई आंकड़े, कच्चा तेल, वित्त

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर अपनी बढ़त को मजबूती से थामे हुए है और डॉलर इंडेक्स 101 के अहम स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान छह प्रमुख विदेशी मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक का प्रदर्शन काफी मजबूत देखा गया। इससे एक दिन पहले डॉलर इंडेक्स ने 101.23 का स्तर छुआ था, जो पिछले आठ हफ्तों का इसका उच्चतम स्तर है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की तेज वृद्धि और सेवा तथा विनिर्माण क्षेत्र की मजबूत रफ्तार ने मुद्रा बाजार में डॉलर के प्रति आकर्षण को काफी बढ़ा दिया है।

 डॉलर की इस ताजा तेजी को दो प्रमुख कारकों से बड़ा सहारा मिला है। पहला कारण ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज रिकवरी है, जो ईरान द्वारा अमेरिका के सामने न झुकने के संकल्प के बाद देखने को मिली। दूसरा बड़ा कारण सितंबर महीने के लिए जारी हुए फ्लैश एसएंडपी ग्लोबल परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) के उम्मीद से कहीं बेहतर आंकड़े रहे हैं। इन आंकड़ों ने यह संकेत दिया है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था मंदी की आशंकाओं को दरकिनार करते हुए लगातार विस्तार कर रही है, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने के रुख को मजबूती मिली है।

 

## निजी क्षेत्र के पीएमआई आंकड़ों में पांच साल की सबसे तेज वृद्धि

अमेरिका के निजी क्षेत्र की व्यावसायिक गतिविधियों में सितंबर के दौरान उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई है। एसएंडपी ग्लोबल द्वारा जारी किए गए ताजा पीएमआई सर्वेक्षण के अनुसार विनिर्माण और सेवा दोनों ही प्रमुख क्षेत्रों के उत्पादन में जोरदार इजाफा हुआ है। व्यापारिक गतिविधियों के इस समग्र विस्तार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी घरेलू मांग काफी लचीली बनी हुई है और कंपनियों के पास नए ऑर्डरों का प्रवाह लगातार बढ़ रहा है।

 व्यावसायिक गतिविधियों की इस असाधारण वृद्धि पर एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस के मुख्य व्यापार अर्थशास्त्री क्रिस विलियमसन ने कहा कि सितंबर में उत्पादन पांच वर्षों से अधिक समय की सबसे तेज दर से बढ़ा है। उन्होंने रेखांकित किया कि ऐतिहासिक तुलनाओं के आधार पर वर्तमान सर्वेक्षण आंकड़े लगभग 5% की वार्षिक वृद्धि की ओर इशारा करते हैं, जबकि तीसरी तिमाही के लिए कुल मिलाकर 4% की वृद्धि का स्पष्ट संकेत मिल रहा है। आर्थिक उत्पादन में यह जबरदस्त उछाल यह दर्शाता है कि कंपनियां तेजी से आपूर्ति श्रृंखलाओं और ग्राहक मांगों को पूरा करने में जुटी हैं।

 

## डॉलर इंडेक्स का तकनीकी विश्लेषण और प्रमुख स्तर

दैनिक मूल्य चार्ट पर नजर डालें तो डॉलर इंडेक्स 101.10 के आसपास स्थिर बना हुआ है और 20-अवधि के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) 99.98 से ऊपर टिका हुआ है। यह 20-दिवसीय ईएमए वर्तमान में तात्कालिक ट्रेंड सपोर्ट के रूप में काम कर रहा है और लघु अवधि के दृष्टिकोण को पूरी तरह से सकारात्मक बनाए रखता है। तकनीकी दृष्टिकोण से जब तक सूचकांक इस स्तर से ऊपर बना रहता है, तब तक इसमें खरीदारी की रुचि बनी रहने की संभावना है। हालांकि 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) 71.01 के आसपास पहुंच गया है, जो ओवरबॉट स्थिति को दर्शाता है। आरएसआई का यह खिंचाव संकेत देता है कि हालिया तेजी के बाद सूचकांक में थोड़ी रुकावट या सुधारात्मक ठहराव आ सकता है।

 लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 101.14 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद 101.10 से 0.04% की बढ़त दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 95.55 से 101.80 के बीच रहा है और मौजूदा ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना के बराबर है। तकनीकी स्तरों में दैनिक एमएसीडी 0.29 पर है जो सिग्नल लाइन 0.04 से ऊपर होकर 0.24 का सकारात्मक हिस्टोग्राम बना रहा है। विभिन्न मूविंग एवरेजों में 20-ईएमए 99.93, 50-ईएमए 99.86 और 200-ईएमए 99.34 पर स्थित हैं। इसके अलावा 50-ईएमए का 200-ईएमए से ऊपर होना गोल्डन क्रॉस की पुष्टि करता है, जो दीर्घकालिक तेजी का प्रमाण है। बोलिंगर बैंड (20, 2) 98.30 से 101.02 के बीच फैला है और मौजूदा भाव ऊपरी बैंड के पार है, जबकि 29 का एडीएक्स एक मजबूत ट्रेंडिंग बाजार दिखाता है। स्टोकेस्टिक संकेतक में फास्ट लाइन 96 और सिग्नल लाइन 95 पर हैं। दिन का पिवट 101.14 है, जिसके लिए पहला रेजिस्टेंस आर1 101.22 और आर2 101.30 पर है, जबकि सपोर्ट एस1 101.06 और एस2 100.98 पर स्थित है। यदि गिरावट आती है तो 99.98 के स्तर पर खरीदार दोबारा सक्रिय हो सकते हैं, लेकिन इस स्तर के नीचे दैनिक बंद तेजी के रुख को कमजोर कर सकता है।

 

## वैश्विक अर्थव्यवस्था में डॉलर का प्रभुत्व और आरक्षित मुद्रा का इतिहास

अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा है, लेकिन यह दुनिया के कई देशों में स्थानीय नोटों के साथ वास्तविक मुद्रा के रूप में भी चलन में है। वैश्विक मुद्रा बाजार में यह सबसे अधिक ट्रेड होने वाली करेंसी है। 2022 के आंकड़ों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा विनिमय के कुल टर्नओवर में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी 88% से अधिक है, जिसका दैनिक औसत लेनदेन 6.6 ट्रिलियन डॉलर बैठता है। यह विशाल आंकड़ा वैश्विक व्यापार, अंतरराष्ट्रीय ऋणों और वस्तु बाजारों में डॉलर के एकाधिकार को साबित करता है।

 ऐतिहासिक संदर्भ में देखें तो दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड को पीछे छोड़कर दुनिया की प्रमुख आरक्षित मुद्रा का दर्जा हासिल किया था। अपने इतिहास के अधिकांश हिस्से में डॉलर सोने के भंडार से समर्थित था। उस व्यवस्था के तहत विभिन्न देश डॉलर के बदले निश्चित मात्रा में सोना ले सकते थे। लेकिन 1971 में ब्रेटन वुड्स समझौते के टूटने के साथ ही गोल्ड स्टैंडर्ड समाप्त हो गया और डॉलर एक फिएट मुद्रा बन गया, जिसका मूल्य अमेरिकी सरकार की साख और वैश्विक आर्थिक मांग पर निर्भर करता है।

 

## फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और डॉलर पर उसका प्रभाव

अमेरिकी डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक मौद्रिक नीति है, जिसका निर्धारण अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व करता है। फेडरल रिजर्व के पास मुख्य रूप से दो प्रमुख कानूनी दायित्व हैं: कीमतों में स्थिरता बनाए रखना अर्थात मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना और अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना। इन दोनों लक्ष्यों को साधने के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों को घटाना या बढ़ाना होता है।

 जब कीमतें बहुत तेजी से बढ़ने लगती हैं और महंगाई फेड के 2% के वार्षिक लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है। उच्च ब्याज दरों से डॉलर में निवेश पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, जिससे विदेशी निवेशक आकर्षित होते हैं और डॉलर का मूल्य मजबूत होता है। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति 2% से नीचे गिर जाती है या बेरोजगारी दर बहुत अधिक बढ़ जाती है, तो आर्थिक विकास को गति देने के लिए फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करता है। दरों में कटौती से डॉलर पर दबाव पड़ता है और यह कमजोर होने लगता है।

 

## क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का तंत्र

अत्यधिक गंभीर आर्थिक संकट की स्थितियों में फेडरल रिजर्व केवल ब्याज दरों में कटौती तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह अतिरिक्त डॉलर जारी करके क्वांटिटेटिव ईजिंग (क्यूई) लागू करता है। यह एक गैर-मानक मौद्रिक नीति उपाय है, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब वित्तीय प्रणाली में ऋण प्रवाह पूरी तरह ठप हो जाता है। ऐसी स्थिति आमतौर पर तब उत्पन्न होती है जब बैंक डिफॉल्ट के डर से एक-दूसरे को उधार देना बंद कर देते हैं। 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान पैदा हुए क्रेडिट क्रंच से निपटने के लिए फेड ने इसी हथियार का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था। इसमें फेडरल रिजर्व नई मुद्रा तैयार करके मुख्य रूप से वित्तीय संस्थानों से अमेरिकी सरकारी बॉन्ड खरीदता है। प्रणाली में नकदी की भारी बाढ़ आने के कारण क्यूई आमतौर पर अमेरिकी डॉलर को कमजोर करता है।

 इसके ठीक उलट प्रक्रिया को क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (क्यूटी) कहा जाता है। इस प्रक्रिया में फेडरल रिजर्व वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और अपनी बैलेंस शीट में परिपक्व होने वाले बॉन्ड के मूलधन को नए बॉन्ड में फिर से निवेश नहीं करता। इस तरह बाजार से अतिरिक्त तरलता धीरे-धीरे वापस खींच ली जाती है। वित्तीय प्रणाली में नकदी कम होने से यह कदम सामान्यतः अमेरिकी डॉलर के मूल्य के लिए सकारात्मक साबित होता है और उसे मजबूती प्रदान करता है।

 

## प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में हलचल और अन्य वित्तीय बाजार

इस सप्ताह प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा है। करेंसी हीट मैप के अनुसार बेस करेंसी और कोट करेंसी के तुलनात्मक अध्ययन में डॉलर सबसे अधिक मजबूत ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले दिखाई दिया। गुरुवार को एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 0.7000 के स्तर की ओर फिसलता नजर आया। इसका मुख्य कारण ऑस्ट्रेलिया के अगस्त रोजगार आंकड़े रहे, जिसमें बेरोजगारी दर उम्मीद के 4.5% से बढ़कर 4.6% पर पहुंच गई, हालांकि रोजगार परिवर्तन 39.5 हजार रहा जो अनुमानों से बेहतर था। साथ ही निवेशक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली महत्वपूर्ण बैठक को लेकर भी सतर्क बने हुए हैं।

 जापानी येन के मोर्चे पर अमेरिकी डॉलर तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर से फिसलकर एशियाई सत्र में 158.00 के आसपास रहा। जापान में सरकारी बॉन्ड यील्ड में आए उछाल और संभावित मुद्रा हस्तक्षेप के जोखिमों ने येन को सहारा दिया, जबकि फेड की सख्त नीति की उम्मीदों और ऊंची अमेरिकी यील्ड ने डॉलर को समर्थन दिया। बैंक ऑफ जापान ने भी 7-2 के बहुमत से अपने शॉर्ट-टर्म ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया, जो मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण की दिशा में एक और कदम था और बाजार की उम्मीदों के अनुरूप था। वहीं पीली धातु सोने में पिछले दिन की गिरावट के बाद ठहराव देखा गया और यह साप्ताहिक निचले स्तरों पर 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे ट्रेड कर रहा है। इसके अतिरिक्त कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और बॉन्ड यील्ड में तेजी ने शेयर बाजारों की रैली की रफ्तार को धीमा कर दिया है, जिससे वैश्विक इक्विटी सूचकांकों पर दबाव बना हुआ है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में आई इस मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आयात लागत, मुद्रा बाजार और वैश्विक व्यापार पर देखने को मिलेगा।

- **भारतीय आयातकों पर असर:** डॉलर के मजबूत होने से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स का आयात महंगा होने की संभावना है। आयातकों को विदेशी भुगतान के लिए अधिक लागत चुकानी पड़ सकती है, जिससे घरेलू बाजार में कई उत्पादों के दाम बढ़ सकते हैं।
- **वैश्विक निवेशकों के लिए:** अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में तेजी से उभरते बाजारों से पूंजी निकासी का जोखिम बढ़ता है। निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी संपत्तियों को प्राथमिकता दे सकते हैं, जिससे शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव रह सकता है।
- **विदेश यात्रा और शिक्षा:** जिन छात्रों या यात्रियों को डॉलर में फीस या खर्च वहन करना होता है, उनका बजट बढ़ सकता है। डॉलर के 101 के पार टिके रहने से विदेशी मुद्रा रूपांतरण दरें अधिक महंगी बनी रहेंगी।
- **निर्यातकों के लिए अवसर:** डॉलर के मुकाबले अन्य मुद्राओं के कमजोर होने से भारतीय कपड़ा और आईटी निर्यातकों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सकता है। विदेशी बाजारों से होने वाली डॉलर आधारित कमाई का स्थानीय मुद्रा में मूल्य बढ़ जाता है।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी डॉलर में यह उछाल आर्थिक मजबूती के ताजा आंकड़ों, ऊर्जा बाजार के घटनाक्रम और ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने की केंद्रीय बैंक की रणनीति के कारण देखने को मिला है।

- **मजबूत पीएमआई सर्वेक्षण आंकड़े:** सितंबर में अमेरिका के विनिर्माण और सेवा दोनों क्षेत्रों में उम्मीद से बेहतर वृद्धि दर्ज की गई। व्यावसायिक उत्पादन पांच साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने से यह संकेत मिला कि अर्थव्यवस्था मंदी से काफी दूर है।
- **कच्चे तेल की कीमतों में उछाल:** अमेरिका के दबाव के आगे न झुकने के ईरानी संकल्प के बाद कच्चे तेल की कीमतों में सुधार हुआ। तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई का जोखिम बढ़ता है, जो फेडरल रिजर्व को सख्त नीति जारी रखने के लिए बाध्य करता है।
- **फेड की सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदें:** मजबूत आर्थिक आंकड़ों के कारण व्यापारियों को अनुमान है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में जल्द बड़ी कटौती नहीं करेगा। उच्च ब्याज दरें विदेशी पूंजी को आकर्षित करती हैं, जिससे डॉलर का भाव ऊंचा बना रहता है।
- **वैश्विक राजनीतिक सतर्कता:** अमेरिकी राष्ट्रपति और चीनी नेतृत्व के बीच महत्वपूर्ण बैठक से पहले बाजारों में सतर्कता का माहौल देखा गया। अनिश्चितता के दौर में निवेशक सुरक्षित संपत्ति के तौर पर अमेरिकी डॉलर की ओर रुख करते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स वर्तमान में किस स्तर पर कारोबार कर रहा है?
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 101 के स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है और इसने 101.23 का आठ हफ्तों का उच्च स्तर छुआ है।

### 2. डॉलर में इस ताजा मजबूती का मुख्य कारण क्या है?
सितंबर महीने के लिए अमेरिका के मजबूत पीएमआई आंकड़ों और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने डॉलर को मजबूती दी है।

### 3. सितंबर में अमेरिकी व्यावसायिक उत्पादन की वृद्धि दर क्या रही?
एसएंडपी ग्लोबल के अनुसार सितंबर में अमेरिकी कारोबारी उत्पादन पिछले पांच वर्षों से अधिक समय की सबसे तेज गति से बढ़ा है।

### 4. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या बदलाव किया?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है।

### 5. वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार में अमेरिकी डॉलर की कितनी हिस्सेदारी है?
2022 के आंकड़ों के अनुसार वैश्विक मुद्रा विनिमय के कुल कारोबार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी 88% से अधिक है, जिसका दैनिक औसत 6.6 ट्रिलियन डॉलर है।

### 6. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में गिरावट क्यों देखी गई?
ऑस्ट्रेलिया की बेरोजगारी दर अगस्त में बढ़कर 4.6% हो जाने के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में 0.7000 के स्तर की ओर कमजोरी देखी गई।

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