पश्चिम एशिया में बढ़ा सैन्य तनाव और काहिरा में कूटनीतिक हलचल, जानिए वैश्विक बाज़ारों पर इसका असर दक्षिणी लेबनान में इज़राइली हवाई हमलों के दोबारा शुरू होने और काहिरा में गाजा शांति वार्ता के बीच वैश्विक वित्तीय बाज़ारों में रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ की स्थिति देखी जा रही है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर गहरा गया है, क्योंकि इज़राइल ने लेबनान में अपने सैन्य अभियानों को तेज़ करते हुए नए सिरे से हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। इसके साथ ही मिस्र की राजधानी काहिरा में शांति समझौते को लेकर कूटनीतिक बैठकों का दौर जारी है। इन सैन्य और कूटनीतिक गतिविधियों का सीधा असर वैश्विक वित्तीय बाज़ारों, विदेशी मुद्रा दरों और कमोडिटी कीमतों पर देखने को मिल रहा है। निवेशक मौजूदा अनिश्चितता के बीच सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में नई हलचल पैदा हो गई है। दक्षिणी लेबनान में नए हवाई हमले और बढ़ता सैन्य संघर्ष इज़राइली सेना ने हाल के दिनों में लेबनान के खिलाफ अपने हवाई हमलों को दोबारा शुरू कर दिया है। इससे पहले चालू महीने की शुरुआत में इन हमलों की तीव्रता में कुछ कमी देखी गई थी। इज़राइल रक्षा बलों के आधिकारिक बयानों के अनुसार, दक्षिणी लेबनान में किए गए एक लक्षित हमले में हिजबुल्लाह के वरिष्ठ कमांडर अबू हसन अला को मार गिराया गया है। जून की शुरुआत में दोनों पक्षों के बीच हुए युद्धविराम समझौते के बाद से यह सबसे भीषण सैन्य टकराव माना जा रहा है। हालिया हमलों में कुल 11 लोगों की मौत हुई है। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई शनिवार को हिजबुल्लाह द्वारा किए गए उस हमले के जवाब में की गई है, जिसमें इज़राइल के 3 सैनिक घायल हो गए थे। इज़राइली प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि उसे भविष्य में किसी भी तरह का खतरा महसूस होता है, तो वह इस सशस्त्र गुट पर फिर से सैन्य हमले करेगा। काहिरा में शांति वार्ता और कूटनीतिक प्रयास एक तरफ जहां सीमा पर गोलाबारी जारी है, वहीं दूसरी ओर मिस्र की राजधानी काहिरा में कूटनीतिक प्रयास तेज़ कर दिए गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष प्रतिनिधियों ने रविवार को मिस्र, कतर और तुर्की के मध्यस्थों के साथ अहम बैठकें कीं। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा तैयार किए गए गाजा शांति रोडमैप को आगे बढ़ाना है, भले ही इज़राइल गाजा पट्टी में अपने सैन्य अभियान जारी रखे हुए है। कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, मध्यस्थों द्वारा आयोजित कुछ बैठकों में हमास के अधिकारी भी शामिल थे। इन बैठकों में डोनाल्ड ट्रंप के दूत और दामाद जारेड कुशनर के अलावा गाजा के लिए ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस दूत निकोले म्लादेनोव ने हिस्सा लिया। अमेरिकी प्रतिनिधियों जारेड कुशनर और निकोले म्लादेनोव की इज़राइल के प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहू के साथ सोमवार को एक उच्च स्तरीय बैठक तय की गई है। उल्लेखनीय है कि बेन्जामिन नेतन्याहू ने 9 अगस्त को दिए अपने बयान में गाजा शांति के लिए ट्रंप के इस नवीनतम खाके को पूरी तरह से अमान्य करार दिया था। वित्तीय बाज़ारों का मनोविज्ञान: रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ की स्थिति भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के इस दौर में वित्तीय जगत में प्रचलित दो महत्वपूर्ण अवधारणाओं 'रिस्क-ऑन' और 'रिस्क-ऑफ' को समझना बेहद आवश्यक है। यह शब्दावली दर्शाती है कि बाज़ार में निवेशक जोखिम लेने के लिए कितने तैयार हैं। रिस्क-ऑन बाज़ार में निवेशक भविष्य के विकास को लेकर आशावादी होते हैं और उच्च रिटर्न की उम्मीद में जोखिम भरी संपत्तियों को खरीदने में रुचि दिखाते हैं। ऐसी स्थिति में आमतौर पर शेयर बाज़ारों में तेज़ी आती है, और सोने को छोड़कर लगभग सभी औद्योगिक और व्यापारिक कमोडिटीज के दाम बढ़ते हैं। इसके अतिरिक्त, कच्चे माल का निर्यात करने वाले देशों की राष्ट्रीय मुद्राएं मजबूत होती हैं और क्रिप्टोकरेंसी में उछाल देखने को मिलता है। इसके विपरीत, रिस्क-ऑफ बाज़ार तब बनता है जब निवेशक भविष्य की अनिश्चितताओं से चिंतित होकर सुरक्षित निवेश विकल्पों को चुनते हैं। इस दौरान मामूली रिटर्न मिलने के बावजूद पूंजी की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है। रिस्क-ऑफ माहौल में सरकारी बॉन्ड्स की मांग बढ़ती है, सोने में चमक आती है, और अमेरिकी डॉलर, जापानी येन व स्विस फ्रैंक जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली मुद्राओं की विनिमय दरों में सुधार होता है। मुद्रा बाज़ार पर भू-राजनीति का प्रभाव रिस्क-ऑन माहौल में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD), कैनेडियन डॉलर (CAD) और न्यूजीलैंड डॉलर (NZD) जैसी कमोडिटी-संचालित मुद्राओं के साथ-साथ रूसी रूबल (RUB) और दक्षिण अफ्रीकी रैंड (ZAR) जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं में बढ़त दर्ज की जाती है। इन देशों की अर्थव्यवस्थाएं बड़े पैमाने पर कच्चे माल के निर्यात पर निर्भर हैं, और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि से इन संसाधनों की मांग बढ़ जाती है। दूसरी ओर, संकट या रिस्क-ऑफ की स्थिति में वैश्विक पूंजी मुख्य रूप से तीन प्रमुख सुरक्षित मुद्राओं में शरण लेती है: अमेरिकी डॉलर (USD), जापानी येन (JPY) और स्विस फ्रैंक (CHF)। अमेरिकी डॉलर दुनिया की प्रमुख रिजर्व मुद्रा है, और संकट के समय निवेशक अमेरिकी सरकारी ऋण को सबसे सुरक्षित मानते हैं क्योंकि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के डिफॉल्ट होने की संभावना न के बराबर होती है। जापानी येन को मजबूत घरेलू निवेशक आधार का समर्थन प्राप्त होता है जो संकट में भी सरकारी बॉन्ड्स को बनाए रखते हैं। वहीं स्विस फ्रैंक को स्विट्जरलैंड के कठोर बैंकिंग कानूनों और मजबूत पूंजी सुरक्षा तंत्र के कारण निवेशकों की पहली पसंद माना जाता है। फॉरेक्स बाज़ार, सोना और अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़े ताज़ा मुद्रा बाज़ार रुझानों में, GBP/USD में तीन दिनों की लगातार गिरावट के बाद फिर से तेज़ी आई है और यह 1.3560 के स्तर के पास तीन महीने के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। केबल में यह उछाल अमेरिकी डॉलर पर बने व्यापक बिकवाली के दबाव के कारण आया है। اسی तरह, EUR/USD में भी ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई है और यह मध्य-जून के बाद पहली बार 1.1500 के ऊपरी स्तर को छू गया है। यूरोपीय मुद्रा में यह मजबूती डॉलर की कमजोरी और बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा संभावित हस्तक्षेप की चर्चाओं के बीच दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोना फिर से संभलकर $4,400 प्रति ट्रॉय औंस के स्तर की ओर लौट आया है। अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट, फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में जल्द बढ़ोतरी न किए जाने की संभावनाओं और पश्चिम एशिया के राजनीतिक तनाव ने सोने की कीमतों को सहारा दिया है। आर्थिक आंकड़ों की बात करें तो जुलाई महीने के लिए जारी अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आंकड़े उम्मीद के मुताबिक रहे हैं। मासिक हेडलाइन CPI में 0.1% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि भोजन और ऊर्जा को छोड़कर कोर CPI 0.2% बढ़ा। हालांकि, वार्षिक हेडलाइन मुद्रास्फीति 3.4% पर बनी हुई है, जो फेडरल रिजर्व के 2 प्रतिशत के लक्षित स्तर से काफी अधिक है। इसका सीधा अर्थ यह है कि आम कर्मचारियों की वास्तविक क्रय शक्ति में स्थिरता या गिरावट आ रही है, जबकि कोर मुद्रास्फीति नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इसका आप पर असर • भारत में: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और 3.4% अमेरिकी मुद्रास्फीति के कारण कच्चे तेल और आयातित वस्तुओं के दामों में अस्थिरता आ सकती है, जिससे घरेलू वित्तीय बाज़ारों में अनिश्चितता बढ़ेगी। • वैश्विक निवेशकों और व्यापारियों के लिए: बाज़ार में रिस्क-ऑफ की स्थिति बनने से सुरक्षित निवेश विकल्पों जैसे सोने और अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ेगी, जबकि उच्च-जोखिम वाले शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। सवाल-जवाब 1. दक्षिणी लेबनान में हालिया इज़राइली हमलों में क्या नुकसान हुआ? इज़राइली हवाई हमलों में हिजबुल्लाह के वरिष्ठ कमांडर अबू हसन अला की मौत हुई है और कुल 11 लोगों की जान गई है। 2. काहिरा में चल रही शांति वार्ता में कौन शामिल हैं? काहिरा वार्ता में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रतिनिधि जारेड कुशनर और निकोले म्लादेनोव के साथ मिस्र, कतर और तुर्की के मध्यस्थ व हमास के अधिकारी शामिल हैं। 3. वित्तीय बाज़ार में रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ का क्या अर्थ है? रिस्क-ऑन में निवेशक विकास की उम्मीद में जोखिम भरी संपत्तियां खरीदते हैं, जबकि रिस्क-ऑफ में अनिश्चितता के कारण निवेशक सोने और सरकारी बॉन्ड जैसे सुरक्षित विकल्पों में पैसा लगाते हैं। 4. अमेरिका में जुलाई महीने के मुद्रास्फीति आंकड़े क्या रहे? जुलाई में अमेरिका का मासिक हेडलाइन CPI 0.1% और कोर CPI 0.2% बढ़ा, जबकि वार्षिक हेडलाइन मुद्रास्फीति 3.4% रही जो कि 2 प्रतिशत के लक्ष्य से अधिक है। https://trendkia.com/market/middle-east-escalation-and-cairo-peace-talks-drive-global-markets-risk-dynamics-gold-surge-and-inflation-data-explained-17474 TrendKia — Har trend, sabse pehle.