मध्य पूर्व कूटनीति के बीच 102.00 के करीब ठहरा अमेरिकी डॉलर इंडेक्स, फेड की दरों पर टिकी नजरें मध्य पूर्व संकट सुलझाने के लिए जारी राजनयिक वार्ताओं के बीच सेफ-हेवन मांग घटने से अमेरिकी डॉलर 102.00 के पास स्थिर रहा, जबकि मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को बनाए रखा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत पर अमेरिकी मुद्रा सीमित दायरे में कारोबार करती नजर आई, जहाँ छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक का आकलन करने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) पिछले कारोबारी सत्र में मामूली बढ़त दर्ज करने के बाद एशियाई कारोबारी घंटों में 102.00 के करीब स्थिर रहा। मध्य पूर्व संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में जारी राजनयिक कोशिशों के कारण वित्तीय बाजारों में सुरक्षित निवेश यानी सेफ-हेवन संपत्तियों की मांग में कुछ नरमी देखने को मिली है, जिससे डॉलर की चाल काफी हद तक नियंत्रित रही। हालांकि, ईरान के खिलाफ नए अमेरिकी सैन्य कदम को लेकर बाजार में आशंकाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले युद्ध खत्म करने के समझौते की दिशा में कतरी और ईरानी अधिकारी लगातार तीसरे दिन विचार-विमर्श में जुटे रहे। मुद्रास्फीति आंकड़े और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति का आधार अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े हालिया आंकड़ों ने केंद्रीय बैंक द्वारा सख्त रुख बनाए रखने की अटकलों को ताजा ईंधन दिया है। ब्राउन ब्रदर्स हैरीमैन ने इस बात को रेखांकित किया है कि सितंबर महीने की पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि मुद्रास्फीति को नीचे लाने की दिशा में हो रही प्रगति फिलहाल थम गई है। जारी आंकड़ों के मुताबिक हेडलाइन PCE अगस्त के 0.3% के मुकाबले सितंबर में 0.5% महीने-दर-महीने बढ़ी, जिससे सालाना आधार पर यह दर अगस्त के 3.4% से बढ़कर 3.6% पर पहुंच गई, जो बाजार के आम अनुमानों के अनुरूप थी। इसी तरह कोर PCE के मोर्चे पर भी सख्ती दर्ज की गई, जहाँ यह आंकड़ा महीने-दर-महीने 0.3% बढ़ा, जो अगस्त के 0.3% के बराबर ही रहा, जबकि सालाना आधार पर कोर PCE दर अगस्त के 3.0% के मुकाबले बढ़कर 3.1% दर्ज की गई। हेडलाइन और कोर दोनों ही पैमानों पर कीमतों में यह लगातार बनी हुई मजबूती इस विश्लेषण को बल देती है कि भले ही बाजार का ध्यान वेतन वृद्धि और समग्र विकास की गति की ओर घूम रहा हो, लेकिन महंगाई घटने की रफ्तार रुकने से डॉलर को लगातार आंतरिक सहारा मिल रहा है। दिसंबर ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदें और आगामी आर्थिक घटनाएं ब्याज दरों के परिदृश्य पर नजर रखने वाला सीएमई फेडवॉच टूल दर्शाता है कि वायदा बाजार इस समय दिसंबर की बैठक में नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी की करीब 75% संभावना को लेकर चल रहे हैं। मुद्रा व्यापारी अब आने वाले दिनों के महत्वपूर्ण वृहद आर्थिक घटनाक्रमों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिनमें अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल्स (NFP) रोजगार रिपोर्ट के साथ-साथ ISM मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज आंकड़े शामिल हैं। सप्ताह के दौरान फेडरल रिजर्व के कई प्रमुख अधिकारियों के निर्धारित वक्तव्य भी आने वाले हैं, जिनसे केंद्रीय बैंक के आगामी मौद्रिक नीतिगत रुख पर अधिक स्पष्ट मार्गदर्शन मिलने की उम्मीद की जा रही है। वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में अमेरिकी डॉलर की स्थिति अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक राष्ट्रीय मुद्रा होने के साथ-साथ दुनिया भर के कई अन्य देशों में स्थानीय नोटों के समानांतर चलने वाली वास्तविक मुद्रा भी है। वैश्विक स्तर पर यह सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है, जो 2022 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वैश्विक विदेशी मुद्रा विनिमय टर्नओवर के 88% से अधिक हिस्सेदारी रखती है, जिसका दैनिक लेन-देन औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर बैठता है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह लेते हुए दुनिया की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा का स्थान हासिल किया था। अपने ऐतिहासिक सफर के अधिकांश दौर में डॉलर का मूल्य सोने के समर्थन पर आधारित था, लेकिन 1971 में ब्रेटन वुड्स समझौते के खात्मे के साथ ही गोल्ड स्टैंडर्ड व्यवस्था हमेशा के लिए समाप्त हो गई। वर्तमान व्यवस्था में डॉलर का मूल्य सीधे तौर पर फेडरल रिजर्व की नीतियों और अमेरिकी आर्थिक शक्ति से संचालित होता है। फेडरल रिजर्व का दोहरा दायित्व और ब्याज दरों का प्रभाव अमेरिकी डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण एकल कारक मौद्रिक नीति है, जिसे फेडरल रिजर्व द्वारा तय किया जाता है। केंद्रीय बैंक के पास दो बुनियादी संवैधानिक अधिदेश हैं: पहला कीमतों में स्थिरता बनाए रखना यानी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना, और दूसरा अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना। इन दोनों लक्ष्यों को साधने के लिए फेड का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों में सामयिक फेरबदल करना है। जब कीमतें बेहद तेजी से ऊपर भागती हैं और मुद्रास्फीति फेड के निर्धारित 2% के वार्षिक लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में वृद्धि करता है, जो डॉलर के मूल्य को प्रत्यक्ष मजबूती प्रदान करता है। इसके विपरीत जब मुद्रास्फीति 2% से नीचे खिसक जाती है या बेरोजगारी दर चिंताजनक स्तर तक बढ़ जाती है, तो फेडरल रिजर्व आमतौर पर ब्याज दरों में कटौती का रास्ता चुनता है, जिससे ग्रीनबैक पर दबाव बनता है और उसकी विनिमय दरों में नरमी आती है। क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग की नीतियां जब पारंपरिक ब्याज दरें अप्रभावी साबित होने लगें या चरम आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो, तब फेडरल रिजर्व अतिरिक्त डॉलर छापने और क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) लागू करने का असाधारण कदम उठा सकता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत केंद्रीय बैंक किसी अवरुद्ध या जकड़ी हुई वित्तीय प्रणाली में बड़े पैमाने पर नकदी और ऋण का प्रवाह सुनिश्चित करता है। यह गैर-मानक नीतिगत उपाय तब अपनाया जाता है जब परस्पर डिफ़ॉल्ट के डर से बैंक एक-दूसरे को ऋण देना बंद कर देते हैं और बाजार में ऋण का प्रवाह सूख जाता है। जब ब्याज दरों को शून्य के करीब लाने से भी अर्थव्यवस्था में हरकत न हो, तब इसे अंतिम उपाय के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। वर्ष 2008 के महावित्तीय संकट के समय उभरे भयंकर क्रेडिट क्रंच से निपटने के लिए फेड ने इसी हथियार का मुख्य रूप से सहारा लिया था। इस रणनीति के अंतर्गत फेड नई मुद्रा छापकर वित्तीय संस्थानों से मुख्य रूप से अमेरिकी सरकारी बॉन्ड खरीदता है। नकदी की प्रचुरता के कारण QE आमतौर पर अमेरिकी डॉलर को कमजोर करता है। इसके उलट क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) की प्रक्रिया होती है, जिसमें फेडरल रिजर्व वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व हो रहे बॉन्ड के मूलधन को नए ऋणपत्रों में दोबारा निवेश नहीं करता, जिससे बाजार से तरलता घटती है और यह कदम प्रायः डॉलर के लिए सकारात्मक माना जाता है। विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य प्रमुख जोड़ियों की स्थिति सप्ताह की शुरुआत में अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ियों में भी विशेष उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। ईरान पर कूटनीतिक प्रगति की ताजा उम्मीदों ने निवेशकों के जोखिम लेने के उत्साह को सहारा दिया, जिससे सुरक्षित निवेश वाले अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती मिली। इसके चलते एशियाई सत्र में AUD/USD की जोड़ी अपनी शुरुआती गिरावट को पलटते हुए उबरने में सफल रही, हालांकि पिछले गुरुवार को छुए गए एक महीने के उच्चतम स्तर से नीचे ही बनी रही, क्योंकि निवेशक आरबीए के आगामी महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले से पहले नई स्थिति लेने से बच रहे हैं। दूसरी ओर USD/JPY जोड़ी ने नए कारोबारी सप्ताह में सकारात्मक रुख बनाए रखा और बैंक ऑफ जापान (BoJ) की बैठक के बाद शुक्रवार को 157.00 के निचले स्तर तक गिरने के बाद उबरते हुए 158.00 के दायरे तक पहुंच गई। जापानी वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा द्वारा संभावित बाजार हस्तक्षेप को लेकर दी गई ताजा चेतावनियों का भी इस जोड़ी की तेजी पर कोई खास असर नहीं दिखा। सोने के भाव और कमोडिटी बाजार का समीकरण सुरक्षित निवेश वाली धातुओं में सोने की कीमतों में भी सप्ताह की शुरुआत में थोड़ी हलचल देखी गई। पीली धातु ने एशियाई सत्र के दौरान 3,900 डॉलर का स्तर दोबारा हासिल किया और शुक्रवार को अक्टूबर 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने के बाद हुए भारी नुकसान की आंशिक भरपाई की। हालांकि, सोने की इस तेजी की सीमाएं काफी सीमित दिख रही हैं, क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और मुद्रास्फीति की लगातार चिंताओं के कारण फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के दांव मजबूती से बने हुए हैं, जो गैर-उपज वाली धातु के आकर्षण को सीमित रखते हैं। इसका आप पर असर वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मौजूदा स्थिरता और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाएं आम उपभोक्ताओं और निवेशकों के लिए प्रत्यक्ष वित्तीय प्रभाव लेकर आती हैं। • भारत में प्रभाव: मजबूत अमेरिकी डॉलर और फेड दरों में बढ़ोतरी की आशंका से भारतीय रुपये की विनिमय दर पर दबाव बना रह सकता है। इसके चलते कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आयात महंगे हो सकते हैं, जिससे घरेलू स्तर पर खुदरा महंगाई पर असर पड़ सकता है। • वैश्विक निवेशकों के लिए: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मजबूती बने रहने से सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर पूंजी का प्रवाह बढ़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप भारतीय शेयर बाजार जैसे उभरते बाजारों से विदेशी संस्थागत पूंजी की निकासी का जोखिम बना रहेगा। • सोने के खरीदारों के लिए: सोने की कीमतों में 3,900 डॉलर पर आई तेजी के बावजूद आगे बड़ा उछाल सीमित रहने की उम्मीद है। फेडरल रिजर्व द्वारा दरें बढ़ाने की संभावना के कारण ब्याज न देने वाली संपत्तियों पर दबाव बना रहेगा, जिससे घरेलू बाजार में सोने के भाव सीमित दायरे में रह सकते हैं। • विदेशी यात्रियों और छात्रों के लिए: डॉलर के 102.00 के स्तर पर टिके रहने से विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और पर्यटकों का बजट प्रभावित रहेगा। डॉलर के मुकाबले अन्य मुद्राओं के दबाव में रहने से ट्यूशन फीस और यात्रा खर्च में कोई बड़ी राहत तुरंत नहीं मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी डॉलर इंडेक्स का 102.00 के करीब स्थिर रहना दो विरोधाभासी ताकतों के बीच संतुलन का परिणाम है, जिसमें कूटनीतिक प्रगति से सुरक्षित निवेश की मांग घटी है, जबकि जिद्दी महंगाई ने फेड द्वारा दरें बढ़ाने के अनुमानों को जिंदा रखा है। • राजनयिक वार्ताओं का असर: मध्य पूर्व संघर्ष को थामने के लिए कतर और ईरान के बीच लगातार तीन दिनों से चल रही वार्ताओं ने बाजार में युद्ध के विस्तार के डर को कुछ हद तक शांत किया है। इस भू-राजनीतिक राहत ने सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की तात्कालिक खरीदारी को कम कर दिया। • स्थिर महंगाई के आंकड़े: अमेरिका में सितंबर के PCE आंकड़ों ने स्पष्ट किया कि मुद्रास्फीति को नीचे लाने की प्रक्रिया ठहर गई है, जहाँ हेडलाइन महंगाई बढ़कर 3.6% और कोर महंगाई 3.1% पर पहुंच गई। इस निरंतरता ने यह सुनिश्चित किया कि केंद्रीय बैंक अपनी सख्त मौद्रिक नीति को जारी रखने के लिए विवश रहे। • ब्याज दर वृद्धि की मजबूत संभावना: वायदा बाजार इस समय दिसंबर की बैठक में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की 75% संभावना आंक रहे हैं। उच्च ब्याज दरों की संभावना से अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए डॉलर में रिटर्न आकर्षक बना हुआ है, जिससे बिकवाली थमी रही। सवाल-जवाब 1. यूएस डॉलर इंडेक्स किस स्तर पर कारोबार कर रहा है? यूएस डॉलर इंडेक्स पिछले कारोबारी सत्र में मामूली बढ़त दर्ज करने के बाद एशियाई घंटों में 102.00 के करीब स्थिर बना हुआ है। 2. दिसंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की क्या संभावना है? सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार, वित्तीय बाजार दिसंबर की बैठक में नीतिगत दर में बढ़ोतरी की करीब 75% संभावना मानकर चल रहे हैं। 3. अमेरिका में सितंबर माह के PCE मुद्रास्फीति आंकड़े क्या रहे? सितंबर में हेडलाइन PCE सालाना आधार पर 3.6% और कोर PCE 3.1% दर्ज की गई, जबकि महीने-दर-महीने आधार पर हेडलाइन PCE में 0.5% और कोर PCE में 0.3% की बढ़त रही। 4. मध्य पूर्व संकट को लेकर कौन से कूटनीतिक प्रयास चल रहे हैं? कतरी और ईरानी अधिकारी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले युद्ध खत्म करने के समझौते पर पहुंचने के लिए लगातार तीसरे दिन बातचीत कर रहे हैं। 5. जापानी येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले डॉलर की क्या स्थिति रही? USD/JPY जोड़ी सुधरकर 158.00 के दायरे में पहुंच गई, जबकि कूटनीतिक आशावाद के कारण AUD/USD ने एशियाई सत्र की शुरुआती गिरावट की भरपाई की। 6. सोने के भाव किस स्तर पर पहुंचे और इसकी बढ़त क्यों सीमित है? सोने ने एशियाई सत्र में 3,900 डॉलर का स्तर दोबारा छू लिया, लेकिन कच्चे तेल के ऊंचे दामों और फेड दर वृद्धि की आशंकाओं के कारण इसकी बढ़त सीमित रहने की संभावना है। https://trendkia.com/market/middle-east-kutaniti-ke-bicha-102-00-ke-kariba-thahara-us-dollar-index-fed-ki-daron-para-tiki-najaren-54766 TrendKia — Har trend, sabse pehle.