मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और आपूर्ति संकट, ब्रेंट क्रूड का भाव 110 डॉलर के करीब पहुंचा मध्य पूर्व में जारी संघर्ष, लाल सागर में जहाजों पर बढ़ते खतरे और सऊदी अरब के उत्पादन में कटौती से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। वहीं मुद्रा बाजार में डॉलर मजबूत बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबर्दस्त तेजी देखने को मिल रही है। मध्य पूर्व में तनाव लगातार गहराने और आपूर्ति में व्यवधान आने की आशंका से ब्रेंट क्रूड का भाव 110 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गया है। सऊदी अरब के उत्पादन में आई भारी कमी और ऊर्जा ढांचे पर बढ़ते खतरे ने तेल बाजार में हलचल पैदा कर दी है। इसके साथ ही अमेरिकी वाणिज्यिक भंडार में गिरावट और चीन की ओर से बढ़ी मांग ने कीमतों को और सहारा दिया है। मध्य पूर्व का संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बाजार विश्लेषक वॉरेन पैटरसन और इवा मन्थे के अध्ययन के अनुसार, कच्चे तेल के मानक आइस ब्रेंट में 6 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। कारोबार के दौरान कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छूने लगीं। तेल बाजार में आई यह तेजी यह दर्शाती है कि निवेशक अब इस संघर्ष के लंबे खींचने और इसके गंभीर असर का नया आकलन कर रहे हैं। क्षेत्रीय आपूर्ति पर मंडरा रहे खतरों की पहचान अब बाजार में स्पष्ट रूप से दिखने लगी है। हालांकि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते अभी भी तेल का परिवहन हो रहा है, लेकिन इसकी मात्रा युद्ध से पहले के स्तर से काफी नीचे बनी हुई है। इससे पता चलता है कि क्षेत्र की स्थिति कितनी नाजुक हो चुकी है। व्यापारी और निवेशक अब किसी भी बड़े व्यवधान की स्थिति से निपटने के लिए जोखिम प्रीमियम जोड़ रहे हैं। लाल सागर और नौवहन पर बढ़ता खतरा सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचे और लाल सागर के जरिए होने वाले कच्चे तेल के निर्यात पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब को निशाना बनाए जाने से जोखिम काफी बढ़ गया है। हूती बलों द्वारा यमन के मोखा बंदरगाह पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास समुद्री जहाजों की आवाजाही पर संकट गहरा गया है। इस स्थिति ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। टैंकरों को लंबे और अधिक खर्चीले मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है। यही वजह है कि सऊदी अरब में उत्पादन में गिरावट और नौवहन में रुकावट की दोहरी मार से कच्चे तेल की कीमतें उच्च स्तर पर टिकी हुई हैं। अमेरिका में तेल भंडार की स्थिति ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले सप्ताह अमेरिका के वाणिज्यिक कच्चे तेल के भंडार में 391k बैरल की कमी आई है। स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) से जारी किए गए तेल का मिलान करने के बाद, अमेरिका के कुल कच्चे तेल भंडार में 1.64m बैरल की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, परिष्कृत ईंधन बाजार को थोड़ी राहत मिली है। समीक्षाधीन अवधि के दौरान गैसोलीन के स्टॉक में 1.27m बैरल और डिस्टिलेट के स्टॉक में 2.09m बैरल की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे रिफाइनरी उत्पादों की तात्कालिक मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी, हालांकि कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं यथावत बनी हुई हैं। विदेशी मुद्रा बाजार की हलचल: AUD/USD और USD/JPY मुद्रा बाजार की बात करें तो एशियाई कारोबारी सत्र में AUD/USD का जोड़ा मध्य-0.7100s के स्तर पर स्थिर हुआ। इससे एक दिन पहले आए अगस्त के मजबूत PPI आंकड़ों के बाद अमेरिकी डॉलर में तेजी आई थी, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर एक सप्ताह से अधिक के निचले स्तर पर चला गया था। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की ओर से सख्त रुख बनाए रखने की उम्मीदों ने AUD की गिरावट को सीमित किया। व्यापारी अब नए संकेत के लिए अमेरिकी उपभोक्ता मुद्रास्फीति (CPI) के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। इसी तरह, USD/JPY का जोड़ा 154.00 के स्तर के आसपास नीचे बना हुआ है। जापानी PPI के ऊंचे आंकड़ों ने बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा नीति सख्त करने की संभावना को बढ़ा दिया है, जिससे येन को मजबूती मिली। हालांकि, अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण इस जोड़ी में बड़ी गिरावट नहीं आई और बाजार सहभागियों की नजरें अमेरिका के आगामी महंगाई आंकड़ों पर टिकी हैं। इसका आप पर असर कच्चे तेल की कीमतों में 110 डॉलर तक की बढ़ोतरी का असर आम उपभोक्ताओं की जेब और महंगाई पर सीधा पड़ता है। • भारत में प्रभाव: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने से घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे परिवहन लागत बढ़ेगी और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम में तेजी आ सकती है। • वैश्विक बाजारों में: क्रूड ऑयल महंगा होने से वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ेगा। इसके परिणामस्वरूप केंद्रीय बैंक ब्याज दरें ऊंची बनाए रख सकते हैं, जिससे कर्ज लेना महंगा रहेगा। • चालू खाता घाटा: भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए तेल आयात का बिल बढ़ेगा। इससे भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हो सकता है। • विमानन और उद्योग: एयरलाइंस के लिए हवाई ईंधन महँगा होने से हवाई सफर के टिकट महंगे हो सकते हैं। लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई वाली कंपनियों का मार्जिन प्रभावित होगा। ऐसा क्यों हुआ कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के खतरे और प्रमुख आपूर्ति मार्गों में आई रुकावटों की वजह से हुई है। • सैन्य संघर्ष और आपूर्ति का खतरा: मध्य पूर्व में युद्ध की स्थिति गहराने और हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर के मोखा बंदरगाह पर नियंत्रण से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में नौवहन असुरक्षित हो गया है। • सऊदी उत्पादन में गिरावट: सऊदी अरब में उत्पादन में भारी कटौती दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता कम हो गई है। • अमेरिकी तेल भंडार में कमी: अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के डेटा के अनुसार वाणिज्यिक और रणनीतिक भंडार में मिलाकर कुल 1.64m बैरल की गिरावट आई है, जिसने आपूर्ति की चिंता बढ़ा दी है। सवाल-जवाब 1. कच्चे तेल की कीमत किस स्तर पर पहुंची है? आइस ब्रेंट क्रूड में 6% से अधिक की तेजी के साथ कीमतें कारोबार के दौरान 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। 2. सऊदी अरब के तेल उत्पादन पर क्या प्रभाव पड़ा है? सऊदी अरब में कच्चे तेल के उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है और इसके ऊर्जा ढांचे पर खतरे बढ़ गए हैं। 3. अमेरिकी तेल भंडार में कितनी कमी आई है? रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व को मिलाकर अमेरिका के कुल कच्चे तेल भंडार में 1.64 मिलियन बैरल की गिरावट आई है। 4. लाल सागर में नौवहन संकट क्यों बढ़ा है? यमन में हूती बलों द्वारा मोखा बंदरगाह पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास जहाजों की आवाजाही पर खतरा बढ़ गया है। https://trendkia.com/market/middle-east-men-barhata-tanava-aura-apurti-snkata-brent-crude-ka-bhava-110-dolara-ke-kariba-pahuncha-31141 TrendKia — Har trend, sabse pehle.