मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच यूरोपीय गैस की कीमतें 100 यूरो के करीब पहुंचीं ईरान पर नए अमेरिकी हमलों की खबरों के बाद यूरोपीय टीटीएफ गैस अनुबंधों में फिर उछाल देखने को मिला है, जिससे पहले आई 10 प्रतिशत की गिरावट बेअसर हो गई। ऊर्जा बाजारों में कूटनीतिक सुलह की अल्पकालिक उम्मीदों के टूटने के साथ ही महाद्वीप में ईंधन की लागत फिर से बढ़ गई है। डच टीटीएफ हब पर केंद्रित यूरोपीय प्राकृतिक गैस का व्यापार 100 यूरो प्रति मेगावाट-घंटे के अहम स्तर के बेहद करीब पहुंच गया है। पिछले कारोबारी सत्र में संघर्ष विराम की संभावनाओं ने बाजार से भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम को घटाया था, जिसके चलते दरों में लगभग 10 प्रतिशत का भारी गोता देखा गया था। उस गिरावट के दौरान गैस के दाम 104 यूरो से लुढ़क कर 93.5 यूरो प्रति मेगावाट-घंटे तक आ गए थे। हालांकि, यह राहत ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी, क्योंकि नए सैन्य टकराव की खबरों ने आपूर्ति को लेकर चिंताओं को फिर से हवा दे दी है। सैन्य टकराव से बदली यूरोपीय गैस बाजार की तस्वीर कमर्जबैंक ने ऊर्जा बाजार की इस अनिश्चित स्थिति पर प्रकाश डालते हुए सचेत किया है कि मध्य पूर्व में पूर्ववर्ती वार्ताओं का रिकॉर्ड बहुत आश्वस्त करने वाला नहीं रहा है। संस्थान के अनुसार, ऐतिहासिक रूप से शांति के कई प्रयास अंतिम परिणाम देने में विफल साबित हुए हैं। अगर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ एक और बड़ा हमला करने का फैसला करता है, तो गैस के दाम बेहद तेजी से उछलकर आसानी से 100 यूरो के पार जा सकते हैं। इस संवेदनशील पृष्ठभूमि में व्यापारी किसी भी दीर्घकालिक मंदी का दांव लगाने से बच रहे हैं, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में किसी भी बड़े व्यवधान का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा शिपमेंट पर पड़ता है। कच्चे तेल में तेजी और सोने पर बढ़ता दबाव ईरान के रणनीतिक द्वीप केशम पर अमेरिकी सैन्य हमले की जानकारी सामने आने के तुरंत बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। ऊर्जा की कीमतों में आई इस नई तेजी का सीधा असर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सर्राफा बाजार पर पड़ा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव में कमजोरी देखने को मिली और यह लगभग 0.93 प्रतिशत टूटकर 3,909 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था। व्यापारियों ने ऊर्जा संपत्तियों में नकदी झोंकने के लिए कीमती धातुओं में अपनी स्थिति को हल्का किया, जिससे पीली धातु का मोमेंटम मंगलवार को सुस्त पड़ गया। विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव और डॉलर की स्थिति करेंसी फ्रंट पर अमेरिकी डॉलर इंडेक्स निचले स्तरों से उबरने में कामयाब रहा, यद्यपि यह 102.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे ही सीमित रहा। ग्रीनबैक को तेल की बढ़ती दरों और ईरानी तनाव से सहारा मिल रहा है, लेकिन अमेरिका में मध्यावधि चुनावों से जुड़ी राजनीतिक अनिश्चितता इसके बड़े मुनाफे पर ब्रेक लगा रही है। मंगलवार के एशियाई सत्र में यूएसडी/जेपीवाई जोड़ी 158.00 के उच्च स्तर से पीछे हटकर मामूली गिरावट के साथ कारोबार करती दिखी। जापानी येन को टोक्यो द्वारा संभावित मुद्रा हस्तक्षेप के जोखिमों से समर्थन मिल रहा है, जबकि बैंक ऑफ जापान द्वारा अगली ब्याज दर वृद्धि के समय को लेकर बना संशय येन के लाभ को सीमित कर रहा है। वहीं दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (एयूडी/यूएसडी) में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक द्वारा अपनी आधिकारिक नकद दर में 25 आधार अंकों की बहुप्रतीक्षित बढ़ोतरी किए जाने के बाद भी यह मुद्रा 0.6960 के स्तर तक फिसल गई। बाजार विश्लेषकों ने केंद्रीय बैंक के बयान को उम्मीद से कम आक्रामक माना, जिसके कारण ब्याज दर में इजाफे के बावजूद करेंसी मल्टी-डे ट्रफ के करीब आ गई। क्रिप्टो बाजार पर व्यापक मंदी का साया जोखिम वाली संपत्तियों पर बने वैश्विक दबाव का असर डिजिटल टोकन बाजार में भी स्पष्ट रूप से देखा गया। बिटकॉइन लगातार बिकवाली के दबाव में रहते हुए 76,566 डॉलर पर आ गया, जिससे यह छह सप्ताह के अपने सबसे निचले स्तरों का परीक्षण करता दिखा। प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी इथेरियम भी एक बेहद संकीर्ण समर्थन दायरे में सीमित रहते हुए दबाव का सामना कर रही है। इस बीच, रिपल का कारोबार थोड़ा स्थिर रहा और यह मामूली अंतर से 1.25 डॉलर के ऊपर बना हुआ था। कुल मिलाकर, भू-राजनीतिक उथल-पुथल, कमोडिटी में उछाल और केंद्रीय बैंकों के असमंजस ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में सतर्कता का माहौल बना दिया है। इसका आप पर असर मध्य पूर्व में नए सिरे से सैन्य हमलों और ऊर्जा बाजारों में उछाल से वैश्विक स्तर पर ईंधन तथा निवेश परिदृश्य प्रभावित हो रहा है। • ऊर्जा कीमतों पर असर: प्राकृतिक गैस के 100 यूरो के करीब पहुंचने से यूरोपीय बिजली उत्पादन लागत बढ़ सकती है। इसका सीधा असर आयातित ऊर्जा पर निर्भर उद्योगों और सर्दियों की आपूर्ति लागत पर दिखाई देगा। • कच्चा तेल और मुद्रास्फीति: ईरान के द्वीप पर हमले से कच्चे तेल में नई तेजी देखने को मिली है। तेल महंगा होने से वैश्विक लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ेगी और केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरें घटाना कठिन हो जाएगा। • सर्राफा निवेशकों के लिए: सोने के भाव 0.93 प्रतिशत गिरकर 3,909 डॉलर के करीब आ गए हैं। कीमती धातुओं में अल्पावधि उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, इसलिए नए दांव लगाने से पहले सतर्कता बरतनी होगी। • डिजिटल परिसंपत्तियों पर दबाव: बिटकॉइन छह सप्ताह के निचले स्तर 76,566 डॉलर पर फिसल गया है। जोखिम वाली संपत्तियों से नकदी निकलने के कारण क्रिप्टो निवेशकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसा क्यों हुआ यूरोपीय गैस और वैश्विक वित्तीय बाजारों में यह अचानक हलचल कूटनीतिक उम्मीदों के टूटने और नए प्रत्यक्ष सैन्य हमलों के कारण पैदा हुई है। • कूटनीतिक वार्ताओं का बेअसर होना: शुरुआत में शांति वार्ताओं की चर्चा से गैस 10 प्रतिशत तक टूटकर 93.5 यूरो पर आई थी। हालांकि, पूर्व में ऐसी कई वार्ताओं के विफल रहने के इतिहास ने व्यापारियों को दोबारा सतर्क कर दिया। • केशम द्वीप पर अमेरिकी हमला: वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के रणनीतिक केशम द्वीप पर हुए सैन्य प्रहार ने तेल की कीमतों को तुरंत उछाल दिया। ऊर्जा मार्ग में व्यवधान की आशंकाओं ने गैस में दोबारा रिस्क प्रीमियम जोड़ दिया। • राजनीतिक और मौद्रिक अनिश्चितता: अमेरिका में आगामी मध्यावधि चुनाव और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के अलग-अलग ब्याज दर रुख ने मुद्राओं और परिसंपत्तियों में अस्थिरता बढ़ा दी। सवाल-जवाब 1. यूरोपीय गैस की कीमतों में हालिया बदलाव क्या रहा? यूरोपीय टीटीएफ गैस की दरें पहले 104 यूरो से 10 प्रतिशत गिरकर 93.5 यूरो प्रति मेगावाट-घंटे पर आई थीं, लेकिन नए हमलों के बाद यह फिर 100 यूरो के करीब पहुंच गईं। 2. कमर्जबैंक ने गैस की कीमतों को लेकर क्या चेतावनी दी है? बैंक का कहना है कि यदि डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर एक और हमला करते हैं, तो गैस की कीमतें तेजी से बढ़कर आसानी से 100 यूरो के पार जा सकती हैं। 3. कच्चे तेल में तेजी के बाद सोने की कीमतों पर क्या असर पड़ा? सोने में 0.93 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और इसका कारोबार लगभग 3,909 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। 4. क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन किस स्तर पर कारोबार कर रहा था? बिटकॉइन 76,566 डॉलर के स्तर पर फिसल गया, जिससे उसने छह सप्ताह के निचले स्तरों का परीक्षण किया। 5. ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक के फैसले के बाद मुद्रा पर क्या असर देखा गया? केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि के बावजूद कम आक्रामक रुख के चलते एयूडी/यूएसडी गिरकर 0.6960 के स्तर पर पहुंच गया। https://trendkia.com/market/middle-east-men-barhate-sainya-tanava-ke-bicha-european-gaisa-ki-kimaten-100-euro-ke-kariba-pahunchin-55950 TrendKia — Har trend, sabse pehle.