पश्चिम एशिया में गहराते संकट और महंगे तेल ने बढ़ाई एशियाई मुद्राओं की मुसीबत, अमेरिकी डॉलर में उछाल लाल सागर और बाब अल-मंदेब में सप्लाई बाधित होने और ऊर्जा आयात बिल बढ़ने से एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ गया है, जिससे निवेशकों का रुझान डॉलर जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ा है। वैश्विक ऊर्जा गलियारों में बढ़ते तनाव और पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में व्यापक उथल-पुथल मचा दी है। यमन में सऊदी समर्थित सैन्य बलों द्वारा हूती ठिकानों से नियंत्रण वापस लेने के लिए शुरू किए गए ताजा अभियान और इसके बाद बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर हूती गुट के कब्जे ने समुद्री व्यापार को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच मौजूद यह समुद्री रास्ता क्षेत्रीय कच्चे तेल के निर्यात के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का एक महत्वपूर्ण बाईपास माना जाता है। इस रणनीतिक रास्ते पर नियंत्रण बदलने के बाद से समुद्री यातायात बाधित होने की आशंकाएं गहरा गई हैं, जिसके चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की जा रही है। इसका सीधा असर ऊर्जा आयातक देशों के भुगतान संतुलन और उनकी घरेलू मुद्राओं के मूल्य पर पड़ रहा है। इंडोनेशियाई रुपिया और व्यापार संतुलन पर बढ़ता दबाव घरेलू विदेशी मुद्रा भंडार और खुदरा बिक्री के महत्वपूर्ण आंकड़ों के जारी होने से पहले इंडोनेशियाई रुपिया भारी बिकवाली के दबाव का सामना कर रहा है। देश का कमजोर व्यापार संतुलन और ऊर्जा आयात की बढ़ती लागत विदेशी मुद्रा स्थिति को लगातार प्रभावित कर रही है। जब कच्चे तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में चढ़ते हैं, तो इंडोनेशिया जैसे देशों को आयात बिल चुकाने के लिए अधिक अमेरिकी डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इस वजह से USD/IDR जोड़ी में लगातार तेजी बनी हुई है, जहां मजबूत अमेरिकी डॉलर स्थानीय मुद्रा पर हावी दिख रहा है। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर की वैश्विक मांग में आए उछाल ने उभरते बाजारों की मुद्राओं के लिए चुनौतियां काफी बढ़ा दी हैं। बाजार में रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ की बदलती रणनीति वित्तीय बाजारों में निवेशकों की मानसिकता को समझने के लिए दो प्रमुख अवधारणाओं, रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ, का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। ये अवधारणाएं यह दर्शाती हैं कि किसी निश्चित समय अवधि में निवेशक कितना जोखिम उठाने को तैयार हैं • रिस्क-ऑन परिवेश: जब बाजार में भविष्य को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण होता है, तो निवेशक अधिक जोखिम भरी परिसंपत्तियों में पूंजी लगाने को उत्सुक रहते हैं। ऐसे समय में शेयर बाजारों में मजबूती आती है, अधिकांश कमोडिटीज के भाव बढ़ते हैं और आर्थिक गतिविधियों में तेजी की उम्मीद से कच्चे माल की मांग में बढ़ोतरी दर्ज की जाती है। इस माहौल में कमोडिटी निर्यातक देशों की मुद्राएं जैसे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD), कैनेडियन डॉलर (CAD), न्यूजीलैंड डॉलर (NZD) और अन्य उभरती मुद्राएं जैसे रूसी रूबल (RUB) और दक्षिण अफ्रीकी रैंड (ZAR) मजबूत होती हैं, जबकि क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी तेजी का रुख रहता है। • रिस्क-ऑफ परिवेश: जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता या युद्ध जैसे संकट गहराते हैं, तो निवेशक सुरक्षित राह चुनते हैं। ऐसी परिस्थितियों में अपेक्षाकृत कम या मामूली रिटर्न देने वाली, लेकिन पूंजी की पूरी सुरक्षा की गारंटी देने वाली संपत्तियों की खरीद बढ़ जाती है। सरकारी बॉन्ड, सोना और अमेरिकी डॉलर (USD), जापानी येन (JPY) व स्विस फ्रैंक (CHF) जैसी सुरक्षित मुद्राएं इस दौर में सर्वाधिक लाभ में रहती हैं। डॉलर, येन और स्विस फ्रैंक को सुरक्षित पनाहगाह क्यों माना जाता है संकट के समय में पूंजी का प्रवाह हमेशा उन मुद्राओं की ओर होता है जिनकी विश्वसनीयता ऐतिहासिक रूप से अटूट रही है। अमेरिकी डॉलर को दुनिया की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा का दर्जा प्राप्त है। किसी भी वैश्विक संकट के दौरान निवेशक अमेरिकी सरकार के ऋण पत्रों (ट्रेजरी बॉन्ड) में बड़े पैमाने पर निवेश करते हैं, क्योंकि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते अमेरिका के डिफॉल्ट होने की संभावना नहीं मानी जाती। दूसरी तरफ, जापानी येन में तेजी जापानी सरकारी बॉन्ड की बढ़ती मांग से आती है, क्योंकि इन बॉन्डों का एक बहुत बड़ा हिस्सा जापान के घरेलू निवेशकों के पास है, जो किसी भी संकट के दौरान भी उन्हें बाजार में नहीं बेचते। इसी तरह, स्विट्जरलैंड के सख्त बैंकिंग कानून निवेशकों को पूंजी की सुरक्षा प्रदान करते हैं, जिससे स्विस फ्रैंक भी सुरक्षित निवेश के रूप में उभरता है। प्रमुख वैश्विक मुद्राओं और संपत्तियों की स्थिति मौजूदा भू-राजनीतिक उथल-पुथल का सीधा असर दुनिया भर के प्रमुख मुद्रा युग्मों और कमोडिटी परिसंपत्तियों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है • AUD/USD: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में नई बिकवाली देखी गई है और एशियाई कारोबार के अंतिम घंटों में यह 0.6900 के स्तर की ओर फिसल गया। पश्चिम एशिया के साथ-साथ रूस-यूक्रेन संघर्ष के बने रहने और अमेरिकी डॉलर की नई मजबूती ने इस जोड़ी को दबाए रखा है। बाजार की नजरें अब कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के आगामी कदमों पर टिकी हैं। • USD/JPY: एशियाई सत्र में इस जोड़ी ने अपनी शुरुआती गिरावट की भरपाई करते हुए 158.00 का स्तर दोबारा हासिल कर लिया और यह पिछले एक सप्ताह के सीमित दायरे में कारोबार कर रही है। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की कमजोर पड़ती उम्मीदों के बावजूद भू-राजनीतिक अनिश्चितता डॉलर को सहारा दे रही है। हालांकि, बैंक ऑफ जापान (BoJ) के सख्त रुख की संभावनाओं और जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित मुद्रा बाजार हस्तक्षेप के जोखिम से इस जोड़ी की बढ़त सीमित रह सकती है। • सोना (Gold): सोने की कीमतों में कंसॉलिडेशन का दौर जारी है और यूरोपीय सत्र की शुरुआत से पहले यह 4,150 डॉलर प्रति औंस के नीचे कारोबार कर रहा है। अमेरिकी रोजगार के कमजोर आंकड़ों के बावजूद डॉलर इंडेक्स में अप्रैल 2025 के बाद से नए उच्चतम स्तर तक की तेजी ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाए रखा है। हालांकि, फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दर वृद्धि की घटती संभावनाओं ने सोने में तेज गिरावट को थाम रखा है। • EUR/USD: यूरो और डॉलर की जोड़ी मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। यह गिरकर 1.1312 तक आ गई और जनवरी के 1.2082 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे कारोबार कर रही है। डॉलर की मजबूती, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और महंगी ऊर्जा कीमतों से यूरोपीय अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान की चिंताएं इस गिरावट का मुख्य कारण हैं। • बीएनबी (BNB): लगातार तीन हफ्तों की साप्ताहिक बढ़त दर्ज करने के बाद बिनैंस कॉइन यानी बीएनबी में कुछ नरमी आई है और यह लगभग 790 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। डेरिवेटिव बाजार में बढ़ते ओपन इंटरेस्ट और सकारात्मक फंडिंग रेट्स से संकेत मिलता है कि वायदा बाजार में निवेशकों की स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है। इसका आप पर असर पश्चिम एशिया में व्यापारिक मार्गों के बाधित होने और डॉलर के मजबूत होने से आयात लागत में वृद्धि होगी, जिसका सीधा असर आम नागरिकों के खर्च और निवेश पर पड़ेगा। • भारत में: कच्चे तेल और ऊर्जा आयात के महंगे होने से पेट्रोल, डीजल और घरेलू माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है। आयात बिल बढ़ने से भारतीय रुपये की विनिमय दर पर दबाव रहेगा, जिससे विदेश यात्रा और विदेशी शिक्षा का बजट बढ़ सकता है। • वैश्विक निवेशकों के लिए: अनिश्चितता के दौर में सुरक्षित संपत्तियों जैसे सरकारी बॉन्ड और सोने में पूंजी का आवंटन बढ़ रहा है। जोखिम भरे उभरते बाजारों और इक्विटी में निवेश करने वालों को मुद्रा के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर पोर्टफोलियो संतुलित करना होगा। • मुद्रा कारोबारियों के लिए: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गैर-अमेरिकी मुद्राओं में अल्पकालिक कमजोरी बनी रह सकती है। आयातकों को अपने विदेशी मुद्रा भुगतानों के लिए समय रहते हेजिंग की रणनीति बनानी चाहिए। • कमोडिटी उपभोक्ताओं के लिए: वैश्विक समुद्री आपूर्ति बाधित रहने से आयातित तेल और औद्योगिक कच्चे माल के दाम ऊंचे बने रहेंगे। स्थानीय बाजार में विनिर्मित वस्तुओं के खुदरा मूल्य पर इसका दबाव आने वाले हफ्तों में दिख सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह स्थिति यमन में तेज हुए सैन्य संघर्ष और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर नियंत्रण बदलने के कारण उत्पन्न हुई है। • सीधा कारण: सऊदी समर्थित बलों के सैन्य अभियान के बाद ईरान समर्थक हूती गुट ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर कब्जा कर लिया, जिससे लाल सागर से गुजरने वाले कच्चे तेल के जहाजों की आवाजाही पर संकट आ गया। • ऊर्जा संकट का प्रभाव: लाल सागर और अदन की खाड़ी का यह मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य के विकल्प के तौर पर काम करता था, जिसके अवरुद्ध होने से ईंधन आयात पर निर्भर देशों का व्यापार संतुलन बिगड़ने लगा। • निवेशकों की प्रतिक्रिया: युद्ध और अनिश्चितता के कारण वित्तीय बाजारों में रिस्क-ऑफ का माहौल बन गया, जिससे पूंजी जोखिम भरी संपत्तियों से निकलकर अमेरिकी डॉलर, ट्रेजरी बॉन्ड और सोने की ओर मुड़ गई। सवाल-जवाब 1. इंडोनेशियाई रुपिया पर दबाव क्यों बढ़ रहा है? ऊर्जा आयात की बढ़ती लागत और देश के कमजोर व्यापार संतुलन के कारण रुपिया दबाव में है, विशेषकर विदेशी मुद्रा भंडार और खुदरा बिक्री के आंकड़ों से पहले। 2. बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य का नियंत्रण क्यों महत्वपूर्ण है? यह जलडमरूमध्य लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच स्थित है और होर्मुज को बाईपास करने वाले कच्चे तेल के जहाजों के लिए प्रमुख समुद्री मार्ग है। 3. रिस्क-ऑफ बाजार का क्या अर्थ होता है? जब निवेशक भविष्य की अनिश्चितताओं से चिंतित होकर कम जोखिम वाली और सुरक्षित संपत्तियां जैसे डॉलर, बॉन्ड और सोना खरीदते हैं, तो उसे रिस्क-ऑफ बाजार कहते हैं। 4. संकट के समय अमेरिकी डॉलर क्यों मजबूत होता है? अमेरिकी डॉलर वैश्विक आरक्षित मुद्रा है और संकट के समय निवेशक अमेरिकी सरकारी बॉन्ड खरीदते हैं, जिसे डिफॉल्ट जोखिम से मुक्त माना जाता है। 5. स्वर्ण बाजार में मौजूदा समय में क्या रुझान दिख रहा है? सोना 4,150 डॉलर प्रति औंस के नीचे एक दायरे में कारोबार कर रहा है, जहां मजबूत डॉलर इसकी बढ़त को रोके हुए है। 6. यूरो में हालिया गिरावट का क्या स्तर रहा है? EUR/USD की जोड़ी गिरकर 1.1312 पर आ गई है, जो मई 2025 के बाद का इसका सबसे निचला स्तर है। 7. बीएनबी टोकन किस भाव पर कारोबार कर रहा है? लगातार तीन हफ्तों की साप्ताहिक बढ़त के बाद बीएनबी लगभग 790 डॉलर के भाव पर कारोबार कर रहा है। https://trendkia.com/market/middle-east-men-gaharate-snkata-aura-mahnge-tela-ne-barhai-asian-mudraon-ki-musibata-us-dollar-men-uchhala-43179 TrendKia — Har trend, sabse pehle.