# मध्य पूर्व में मिसाइल हमलों के बीच कच्चे तेल में तेजी, डब्ल्यूटीआई 89 डॉलर के पार

> सऊदी अरब नीत गठबंधन द्वारा खमीस मुशायत के ऊपर हूती बैलिस्टिक मिसाइल को रोके जाने और यमन के अदन एयरपोर्ट पर हमलों के बीच कच्चे तेल और वैश्विक वित्तीय बाजारों में हलचल बढ़ गई है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/middle-east-men-misaila-hamalon-ke-bicha-crude-oil-men-teji-wti-89-dolara-ke-para-44260 · **Language:** Hindi
**Tags:** कच्चा तेल, डब्ल्यूटीआई क्रूड, सऊदी अरब, हूती विद्रोही, ओपेक, आरबीआई रेपो रेट, सोने का भाव, विदेशी मुद्रा बाजार, वित्त

मध्य पूर्व में नए सिरे से सैन्य तनाव भड़कने के बाद ऊर्जा और वैश्विक वित्तीय बाजारों में हलचल तेज हो गई है। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने खमीस मुशायत के ऊपर एक हूती बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही नष्ट करने की पुष्टि की है। इसके साथ ही गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मालकी ने स्पष्ट किया है कि बैलिस्टिक और सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों के खतरों को बेअसर करने तथा उनके प्रक्षेपण स्थलों को नष्ट करने के लिए सैन्य अभियान लगातार जारी रहेंगे। दूसरी ओर, यमन के अदन में सुरक्षा प्राधिकरण के मीडिया कार्यालय ने जानकारी दी है कि हूती विद्रोहियों द्वारा दागी गई दो मिसाइलें अदन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से टकराई हैं, हालांकि इस हमले में किसी भी व्यक्ति के हताहत होने की खबर नहीं है।

## कच्चे तेल के दामों में हलचल और डब्ल्यूटीआई का मिजाज
क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष का सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर देखा जा रहा है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल दैनिक आधार पर 0.29 प्रतिशत की बढ़त के साथ 89.40 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार होने वाले प्रमुख तेल प्रकारों में डब्ल्यूटीआई सबसे महत्वपूर्ण पैमानों में से एक है। वैश्विक बाजार में ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ डब्ल्यूटीआई तीन मुख्य कच्चे तेल प्रकारों में गिना जाता है। अपने अपेक्षाकृत कम घनत्व और कम सल्फर तत्व की वजह से इसे हल्का और मीठा यानी लाइट और स्वीट कच्चा तेल कहा जाता है। कम सल्फर और हल्के घनत्व के कारण इसे रिफाइन करना बेहद आसान माना जाता है, जिससे यह उच्च गुणवत्ता वाले ईंधन के रूप में पहचाना जाता है।

इस अमेरिकी कच्चे तेल का मुख्य स्रोत संयुक्त राज्य अमेरिका है और इसका वितरण कुशिंग हब के जरिए किया जाता है। वैश्विक ऊर्जा जगत में कुशिंग को दुनिया का पाइपलाइन चौराहा यानी पाइपलाइन क्रॉसरोड्स ऑफ द वर्ल्ड माना जाता है। तेल बाजार के लिए यह प्रमुख बेंचमार्क है और वित्तीय मीडिया में इसके भाव नियमित तौर पर प्रमुखता से उद्धृत किए जाते हैं। हालिया लाइव बाजार सत्र में क्रूड ऑयल फ्यूचर्स 90.29 डॉलर पर आ गया है, जो इसके पिछले बंद भाव 89.44 डॉलर के मुकाबले 0.95 प्रतिशत की तेजी दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का निचला और ऊपरी दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर के बीच रहा है, जबकि वॉल्यूम 20 दिनों के औसत का 0.03 गुना दर्ज हुआ है। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-दिवसीय आरएसआई 47 पर है, एमएसीडी -0.20 बनाम सिग्नल 0.91 पर बना हुआ है, जबकि ईएमए 50 (90.15 डॉलर) ईएमए 200 (80.98 डॉलर) से ऊपर रहते हुए दीर्घकालिक तेजी के रुझान की पुष्टि कर रहा है। पिवट स्तर 90.17 डॉलर है, जिसमें रेजिस्टेंस 90.73 डॉलर (R1) और 91.16 डॉलर (R2) तथा सपोर्ट 89.74 डॉलर (S1) और 89.18 डॉलर (S2) पर है।

## मांग, आपूर्ति और भू-राजनीति का खेल
किसी भी अन्य वित्तीय परिसंपत्ति की तरह डब्ल्यूटीआई तेल की कीमतें भी बुनियादी तौर पर मांग और आपूर्ति के संतुलन पर निर्भर करती हैं। जब वैश्विक आर्थिक विकास में तेजी आती है, तो उद्योगों और परिवहन में ईंधन की खपत बढ़ती है, जिससे मांग में मजबूती आती है। इसके विपरीत वैश्विक मंदी या धीमी विकास दर मांग को कमजोर कर देती है। राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध, सैन्य झड़पें और कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध आपूर्ति शृंखला को बाधित करके अचानक कीमतों को आसमान पर पहुंचा सकते हैं। मध्य पूर्व में तनाव हमेशा से टैंकरों की आवाजाही और तेल बुनियादी ढांचे के लिए जोखिम भरा साबित होता रहा है, जिससे कीमतों में तेजी आती है।

इसके अतिरिक्त अमेरिकी डॉलर का मूल्य भी डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार का अधिकांश हिस्सा अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए जब डॉलर कमजोर होता है तो अन्य मुद्रा वाले देशों के लिए तेल खरीदना सस्ता हो जाता है, जिससे मांग और कीमतें बढ़ती हैं। दूसरी ओर, जब डॉलर मजबूत होता है तो आयातकों के लिए तेल महंगा पड़ जाता है, जो मांग को सीमित करने का काम करता है।

## ओपेक के फैसले और साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट का असर
वैश्विक तेल बाजार पर 12 प्रमुख तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक का व्यापक प्रभाव रहता है। यह संगठन वर्ष में दो बार नियमित बैठकें आयोजित करके सदस्य देशों के लिए तेल उत्पादन कोटा तय करता है। यदि ओपेक सदस्य देश उत्पादन कोटे में कटौती का फैसला करते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति सख्त हो जाती है और भाव चढ़ जाते हैं। इसके उलट जब यह समूह उत्पादन बढ़ाने की घोषणा करता है, तो बाजार में अतिरिक्त तेल आने से कीमतें गिरती हैं। ओपेक प्लस इसी समूह का विस्तारित रूप है, जिसमें दस अतिरिक्त गैर-ओपेक उत्पादक देश शामिल हैं, जिनमें सबसे प्रमुख नाम रूस का है।

बाजार की चाल को प्रभावित करने में अमेरिकी साप्ताहिक इन्वेंट्री डेटा भी अहम भूमिका निभाता है। यह डेटा अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट यानी एपीआई और अमेरिकी सरकारी ऊर्जा सूचना प्रशासन यानी ईआईए द्वारा जारी किया जाता है। भंडार में आने वाले उतार-चढ़ाव वास्तविक मांग और आपूर्ति को दर्शाते हैं। यदि इन्वेंट्री में गिरावट आती है, तो यह मजबूत मांग का संकेत होता है जिससे कीमतों को सहारा मिलता है। इसके विपरीत भंडार में बढ़ोतरी अतिरिक्त आपूर्ति की ओर इशारा करती है, जो कीमतों पर दबाव बनाती है। एपीआई की रिपोर्ट हर मंगलवार को प्रकाशित होती है, जबकि ईआईए का आधिकारिक डेटा उसके ठीक अगले दिन यानी बुधवार को आता है। दोनों रिपोर्टों के आंकड़े 75 प्रतिशत मौकों पर एक दूसरे के लगभग समान यानी एक प्रतिशत के दायरे में रहते हैं। हालांकि सरकारी संस्था होने के नाते ईआईए के आंकड़ों को बाजार अधिक विश्वसनीय और प्रामाणिक मानता है।

## मुद्रा बाजारों और बॉन्ड यील्ड में उथल-पुथल
भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच वैश्विक मुद्रा बाजारों में भी व्यापक हलचल देखने को मिल रही है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नई तेजी आने के बाद सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर में निचले स्तरों पर खरीदार सक्रिय हो गए हैं। इस माहौल में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी AUD/USD की जोड़ी अपने हालिया सुधार को बनाए रखने में संघर्ष कर रही है और बुधवार के एशियाई सत्र में 0.7000 के नीचे नकारात्मक रुख के साथ कारोबार कर रही है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ओर से सख्त रुख की उम्मीदों के बावजूद बढ़ते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कारण इस जोड़ी पर लगातार दबाव बना हुआ है। अब बाजार के सभी प्रतिभागियों की नजरें आगामी एफओएमसी मिनट्स पर टिकी हैं।

दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले डॉलर यानी USD/JPY बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में 158.50 के करीब डेढ़ हफ्ते के उच्चतम स्तर के पास बना हुआ है। बैंक ऑफ जापान की ओर से नीतिगत नरमी के संकेतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की मजबूती ने डॉलर की मांग को फिर से बढ़ा दिया है। अब तेजी के व्यापारी एफओएमसी मिनट्स जारी होने से पहले 200-दिवसीय एसएमए के स्तर को पार करने का इंतजार कर रहे हैं ताकि नई बढ़त के लिए स्थिति बनाई जा सके।

## सोने में सुस्ती और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के कड़े फैसले
सुरक्षित निवेश का पारंपरिक साधन माना जाने वाला सोना बुधवार के एशियाई सत्र में थोड़ा कमजोर हुआ है। सोने ने पिछले कारोबारी सत्र में 4,100 डॉलर के आसपास या दो महीने के निचले स्तर से उछाल दिखाया था, लेकिन यह तेजी अब थम गई है। अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती और बॉन्ड यील्ड में ताजा उछाल के चलते गैर-उपज वाले सर्राफा की चाल सीमित हो गई है। निवेशक फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति बैठक के विवरण यानी एफओएमसी मिनट्स से पहले सतर्क हैं, जिसके चलते सोना पिछले एक हफ्ते के दायरे में ही फंसा हुआ है।

इस बीच केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसलों का रुख भी काफी आक्रामक नजर आ रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक बुधवार को सुबह 10:00 बजे अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के फैसले की घोषणा करने जा रहा है। इस कैलेंडर वर्ष में अब तक ब्याज दरों को स्थिर रखने के बाद, इस बार केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी का चक्र शुरू करने की व्यापक संभावना है। बाजार आम सहमति के अनुसार, रिजर्व बैंक अपने प्रमुख रेपो रेट को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.25 प्रतिशत से 5.5 प्रतिशत करने की तैयारी में है।

यूरोपीय परिदृश्य की बात करें तो यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने बेहद जटिल स्थिति पैदा हो गई है। अपने लक्ष्य से लगभग दोगुनी गति से चल रही मुद्रास्फीति से निपटने के लिए सामान्य परिस्थितियों में ईसीबी के पास ब्याज दरें बढ़ाने का सीधा रास्ता होता। लेकिन मौजूदा परिस्थितियां सामान्य नहीं हैं। इस बार बॉन्ड बाजार पहले ही ईसीबी के लिए मौद्रिक सख्ती का एक हिस्सा खुद ही कर रहा है, जिससे केंद्रीय बैंक के सामने नीतिगत स्तर पर एक गंभीर और पेचीदा दुविधा खड़ी हो गई है।

## इसका आप पर असर
मध्य पूर्व में मिसाइल हमलों और तेल कीमतों में उछाल से आम उपभोक्ताओं के ईंधन खर्च और ब्याज दरों पर सीधा असर पड़ सकता है।

- **भारत में असर:** कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल के दामों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा आयात बिल बढ़ने से चालू खाता घाटा और मुद्रास्फीति में वृद्धि की आशंका पैदा हो सकती है।
- **लोन की ईएमआई पर प्रभाव:** भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में 25 आधार अंकों की संभावित बढ़ोतरी से बैंकों के होम लोन और कार लोन की ब्याज दरें महंगी हो जाएंगी। मौजूदा कर्जदारों की मासिक ईएमआई बढ़ सकती है, इसलिए उन्हें अपने बजट की पहले से समीक्षा करनी चाहिए।
- **सोने के खरीदार और निवेशक:** अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर के मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव सीमित दायरे में अटके हुए हैं। आभूषण खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों को बड़ी तेजी का सामना नहीं करना पड़ेगा, हालांकि भू-राजनीतिक तनाव जारी रहने पर कीमतें दोबारा बढ़ सकती हैं।
- **वैश्विक यात्रियों और आयातकों के लिए:** मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती से अन्य स्थानीय मुद्राओं पर दबाव पड़ सकता है। इससे विदेश यात्रा, विदेशी पढ़ाई और आयातित इलेक्ट्रॉनिक सामानों का खर्च आने वाले दिनों में बढ़ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
मध्य पूर्व में सैन्य संघर्ष के तेज होने और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की आगामी नीतियों के चलते वैश्विक वित्तीय और कमोडिटी बाजारों में यह उतार-चढ़ाव देखा गया है।

- **सैन्य तनाव और मिसाइल हमले:** यमन के अदन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हूती मिसाइलों के गिरने और सऊदी अरब के खमीस मुशायत में मिसाइल रोके जाने से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका पैदा हुई। इस सामरिक जोखिम के कारण तेल व्यापारियों ने तुरंत कच्चे तेल के भाव बढ़ा दिए।
- **अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मांग:** अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में तेजी आने से निवेशकों ने सुरक्षित ठिकाने के तौर पर अमेरिकी डॉलर में खरीदारी शुरू कर दी। डॉलर की मजबूती ने गैर-उपज वाले सोने और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी जोखिम वाली संपत्तियों पर दबाव बना दिया।
- **मुद्रास्फीति नियंत्रण के लिए दर वृद्धि की तैयारी:** भारत में निरंतर मुद्रास्फीति के दबाव को देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया नीतिगत सख्ती की तैयारी में है। कैलेंडर वर्ष में यथास्थिति बनाए रखने के बाद केंद्रीय बैंक अब रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत करने की योजना बना रहा है।
- **यूरोप में बॉन्ड बाजार की सख्ती:** यूरोप में मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के लक्ष्य से लगभग दोगुनी होने के बावजूद बॉन्ड बाजार पहले ही वित्तीय स्थितियों को सख्त कर रहा है। इसके कारण यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने नीतिगत दरें बढ़ाने को लेकर जटिल दुविधा की स्थिति बन गई है।

## सवाल-जवाब

### 1. सऊदी अरब नीत गठबंधन ने किस मिसाइल को नष्ट करने की पुष्टि की?
गठबंधन ने सऊदी अरब के खमीस मुशायत के ऊपर एक हूती बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही मार गिराने की जानकारी दी है।

### 2. यमन के अदन एयरपोर्ट पर हुए हमले में क्या कोई हताहत हुआ?
अदन सुरक्षा प्राधिकरण के मीडिया कार्यालय के अनुसार, अदन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दो मिसाइलें टकराईं लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

### 3. डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत में कितनी बढ़ोतरी दर्ज की गई?
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चा तेल 0.29 प्रतिशत की दैनिक बढ़त के साथ 89.40 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

### 4. डब्ल्यूटीआई को हल्का और मीठा तेल क्यों कहा जाता है?
अपने अपेक्षाकृत कम घनत्व और सल्फर की बेहद कम मात्रा के कारण डब्ल्यूटीआई को लाइट और स्वीट कच्चा तेल कहा जाता है, जिससे इसे रिफाइन करना आसान होता है।

### 5. भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति से बाजार क्या उम्मीद कर रहा है?
बाजार की आम सहमति के मुताबिक, रिजर्व बैंक रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत कर सकता है।

### 6. ओपेक प्लस समूह में ओपेक के अलावा सबसे प्रमुख देश कौन सा है?
ओपेक प्लस में शामिल दस अतिरिक्त गैर-ओपेक उत्पादक देशों में सबसे प्रमुख देश रूस है।

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