मध्य पूर्व तनाव और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड उछलने से भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स और निफ्टी 50 में तीन दिन में ₹6.55 लाख करोड़ स्वाहा वैश्विक बाजारों में मंदी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,128.79 अंक और निफ्टी 388.85 अंक तक टूट चुके हैं। भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीन कारोबारी सत्रों से जारी बिकवाली के तूफान ने निवेशकों की जेब पर भारी चोट पहुंचाई है। देश के मजबूत आंतरिक आर्थिक आंकड़ों के बावजूद दलाल स्ट्रीट पर हाहाकार का माहौल बना हुआ है। मध्य पूर्व में गहराते भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और अमेरिका में बॉन्ड यील्ड के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता फैल गई है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1) में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत के शानदार स्तर पर रहने के आधिकारिक आंकड़ों के बाद भी वैश्विक दबाव के आगे घरेलू बाजार टिक नहीं सके। 31 अगस्त से 2 सितंबर के दौरान महज तीन दिनों के भीतर भारतीय शेयर बाजारों में निवेशकों के ₹6.55 लाख करोड़ से अधिक की पूंजी हवा में उड़ गई। इस भारी बिकवाली के चलते प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक अपनी महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक सीमाओं से नीचे फिसल गए और लार्ज-कैप से लेकर मिड-कैप तथा स्मॉल-कैप शेयरों तक हर वर्ग में तेज गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी 50 में इंट्राडे गिरावट और मुख्य स्तरों का टूटना सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन यानी बुधवार को भारतीय बाजार खुलने के साथ ही बिकवाली के भारी दबाव में आ गए। कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स एक समय 809 अंकों से अधिक टूट गया था। कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स 681.18 अंक यानी 0.9 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ 76,263.10 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो इसके इंट्राडे निचले स्तर 76,135.72 से महज 100 अंक ऊपर था। इस तेज गिरावट के कारण सेंसेक्स का महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर 76,500 ध्वस्त हो गया। सेंसेक्स के 30 प्रमुख शेयरों में से 26 शेयर गहरे लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, जबकि केवल 4 शेयरों में ही मामूली बढ़त देखने को मिली। दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 50 भी भारी दबाव में दिखाई दिया। निफ्टी 50 इंट्राडे में लगभग 269 अंक टूट गया। कारोबारी सत्र के दौरान निफ्टी 250.40 अंक यानी 1.04 प्रतिशत की गिरावट लेकर 23,805.40 के स्तर पर आ गया, जो इसके दिन के निचले स्तर 23,786.80 के बेहद करीब था। निफ्टी अपने महत्वपूर्ण 24,000 के स्तर से नीचे फिसल गया। पिछले तीन कारोबारी सत्रों (31 अगस्त से 2 सितंबर) के कुल आंकड़ों पर नजर डालें तो सेंसेक्स में 1,128.79 अंकों की भारी गिरावट आई है, जबकि निफ्टी 50 में 388.85 अंकों की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इस दौरान बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांकों ने अपने अहम तकनीकी समर्थन स्तरों को तोड़ दिया है। ₹6.55 लाख करोड़ का नुकसान और बाजार में चौतरफा बिकवाली तीन दिनों की इस निरंतर गिरावट ने निवेशकों की संपत्ति को बहुत भारी नुकसान पहुंचाया है। BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) 31 अगस्त 2026 को ₹490.23 लाख करोड़ था, जो 2 सितंबर को गिरकर लगभग ₹483.68 लाख करोड़ पर आ गया। इस प्रकार तीन दिनों में कुल मिलाकर ₹6.55 लाख करोड़ से अधिक की पूंजी का नुकसान हुआ है। केवल बुधवार के एकल कारोबारी सत्र में ही BSE का मार्केट कैप पिछले सत्र के ₹488.11 लाख करोड़ से ₹4.43 लाख करोड़ घटकर ₹483.68 लाख करोड़ रह गया। बाजार में बिकवाली का दायरा कितना व्यापक था, इसका अंदाजा BSE के एडवांस-डिक्लाइन आंकड़ों से लगाया जा सकता है। BSE पर कारोबार करने वाले कुल 4,292 शेयरों में से 2,616 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि 1,448 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई और 228 शेयर बिना किसी बदलाव के अपरिवर्तित रहे। बाजार के दिग्गजों में एमएंडएम, इंडिगो, एशियन पेंट्स, मारुति सुजुकी, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचसीएल टेक, इंफोसिस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इटर्नल, हिंदुस्तान यूनिलीवर, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, टीसीएस, ट्रेंट, एसबीआई, बजाज फाइनेंस और टाइटन के शेयरों में 1 प्रतिशत से लेकर 3 प्रतिशत तक की भारी गिरावट देखने को मिली। व्यापक बाजार सूचकांकों में भी इसी तरह की तबाही देखी गई। निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांकों में 1-1 प्रतिशत की गिरावट आई। बैंकिंग क्षेत्र पर बिकवाली का सबसे बुरा असर पड़ा, जहां बैंक निफ्टी सूचकांक 421 अंकों से अधिक टूट गया। निजी क्षेत्र के बैंकों में सबसे ज्यादा बिकवाली दर्ज की गई। बाजार में घबराहट और अनिश्चितता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत का वोलाटिलिटी इंडेक्स (India VIX) बिकवाली के इस दौर में लगभग 4 प्रतिशत तक उछल गया, जो आने वाले दिनों में और अधिक अस्थिरता का संकेत देता है। मजबूत Q1 GDP आंकड़ों और बाजार की गिरावट का विरोधाभास भारतीय शेयर बाजार में आई यह तेज गिरावट आर्थिक विश्लेषकों को इसलिए हैरान कर रही है क्योंकि देश के बुनियादी आर्थिक आंकड़े बेहद मजबूत बने हुए हैं। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार भारत ने वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की प्रभावशाली GDP वृद्धि दर हासिल की है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी के विजयकुमार के अनुसार, भारतीय बाजार वर्तमान में घरेलू अनुकूल परिस्थितियों और बाहरी प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच एक नाजुक संतुलन पर टिका हुआ है। डॉ. विजयकुमार का कहना है कि पहली तिमाही के शानदार GDP आंकड़े, जीएसटी संग्रह के उत्कृष्ट आंकड़े, मजबूत ऋण वृद्धि और वाहन बिक्री की शानदार संख्या देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं। ये तमाम कारक कॉरपोरेट आय में सुधार की संभावनाओं को बल देते हैं और बाजार के लिए बड़े सकारात्मक पहलू हैं। हालांकि, इन अनुकूल घरेलू संकेतकों पर बाहरी प्रतिकूल कारक पूरी तरह से हावी हो रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष के बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में 5 प्रतिशत के रातों-रात उछाल ने बाजार की धारणा को नकारात्मक बना दिया है। इसके बावजूद, भारत का चालू खाता घाटा (CAD) महज 0.5 प्रतिशत पर है और देश का विदेशी मुद्रा भंडार $730 अरब के पर्याप्त स्तर पर मौजूद है, जो किसी भी बाहरी संकट से निपटने के लिए मजबूत ढाल प्रदान करता है। अमेरिका-ईरान सैन्य संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में उबाल वैश्विक बाजारों में घबराहट की सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में भड़का नया सैन्य तनाव है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने रात के दौरान ईरानी बुनियादी ढांचे पर लक्षित सैन्य हमले किए। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का दावा है कि ये हमले इस्लामी शासन द्वारा अमेरिकी संपत्तियों पर किए गए हालिया हमलों के जवाब में किए गए थे। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और संपत्तियों को निशाना बनाया। हालिया अमेरिकी हमलों में 4 लोगों की मौत के बाद ईरान ने अमेरिका को गंभीर परिणाम भुगतने और कड़ा दंड देने की चेतावनी दी है। दोनों देशों के बीच बढ़ते इस सैन्य टकराव के जल्द शांत होने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। युद्ध के इस मंडराते खतरे के कारण ऊर्जा बाजारों में आग लग गई है। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड रातों-रात 5 प्रतिशत बढ़कर $96 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया और वर्तमान में $95 से $97 प्रति बैरल के दायरे में मंडरा रहा है। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल $91 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जिसने कारोबार के दौरान ₹92 प्रति बैरल का स्तर भी पार कर लिया था और फिलहाल $90 के आसपास बना हुआ है। दोनों कच्चे तेल बेंचमार्क में 1-1 प्रतिशत की तेजी देखी गई। एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुडी आर का कहना है कि कच्चे तेल में आई इस तेजी के बावजूद भारतीय रुपया भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हस्तक्षेप के बल पर ₹94.9 के स्तर के आसपास अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है। हालांकि, यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ेगा और देश का आयात बिल काफी बढ़ जाएगा। भू-राजनीतिक तनावों में वृद्धि वैश्विक जोखिम धारणा को प्रभावित कर रही है और यह निकट भविष्य में भारतीय बाजारों के लिए बड़ा खतरा बनी रहेगी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और फेडरल रिजर्व का सख्त रुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए दूसरा सबसे बड़ा खतरा अमेरिका में बॉन्ड यील्ड का लगातार बढ़ना है। अमेरिका की 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड अक्टूबर 2023 के बाद के अपने उच्चतम स्तर 4.8 प्रतिशत (या 4.79 प्रतिशत) पर पहुंच गई है। वहीं 30-वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड उछलकर 5.29 प्रतिशत पर आ गई है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण मुद्रास्फीति की आशंकाएं फिर से गहरी हो गई हैं, जिससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाएं मजबूत हो गई हैं। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉरश द्वारा मुद्रास्फीति से निपटने के लिए सख्त मौद्रिक नीति जारी रखने के रुख ने दरों में वृद्धि की उम्मीदों को और बल दिया है। वायदा बाजार अब इस महीने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की 70 प्रतिशत संभावना जता रहा है। बॉन्ड यील्ड में इस उछाल का सीधा असर वैश्विक शेयर बाजारों पर पड़ा है। मंगलवार को अमेरिकी बाजार वॉल स्ट्रीट गिरावट के साथ बंद हुआ, जहां S&P 500 में 0.7 प्रतिशत, डाउ जोंस में 0.8 प्रतिशत और नैस्डैक में 1 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके बाद एशियाई बाजारों में भी गिरावट का रुख रहा, जहां जापान का निकेई सूचकांक 2.61 प्रतिशत तक टूट गया। एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और सीईओ हरिसेल्वन राधाकृष्णन के अनुसार, वैश्विक बाजारों के लिए इस सप्ताह राहत के केवल दो रास्ते हो सकते हैं। पहला, मध्य पूर्व में तनाव कम हो जिससे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आए। दूसरा, अमेरिका के रोजगार बाजार के आंकड़े कमजोर आएं जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम हों। जब तक इनमें से कोई एक स्थिति नहीं बनती, तब तक शेयर बाजारों पर दबाव बना रहेगा। निफ्टी का तकनीकी आउटलुक और समर्थन एवं प्रतिरोध स्तर भारतीय शेयर बाजार के तकनीकी ढांचे पर बात करते हुए चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग के तकनीकी अनुसंधान उपाध्यक्ष सचिन गुप्ता ने बताया कि वर्तमान तकनीकी सेटअप सतर्क रहने और नकारात्मक रुझान के साथ एक सीमित दायरे में कारोबार करने का संकेत दे रहा है। आने वाले दिनों में निफ्टी 50 के 23,800 से 24,200 के दायरे में अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाले माहौल में बने रहने की संभावना है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,950 से 24,000 का क्षेत्र एक अत्यंत महत्वपूर्ण समर्थन (सपोर्ट) जोन के रूप में काम कर रहा है। यदि निफ्टी 23,950 के इस स्तर से नीचे निर्णायक रूप से टूटता है, तो गिरावट का दायरा बढ़कर 23,800 और उसके बाद 23,600 के स्तर तक जा सकता है। दूसरी तरफ, बाजार में सुधार के लिए 24,200 का स्तर तत्काल प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) के रूप में खड़ा है। यदि निफ्टी 24,200 के ऊपर टिकने में कामयाब होता है, तभी बाजार में 24,400 के स्तर की तरफ नई तेजी का रास्ता साफ हो सकेगा। तब तक निवेशकों को कोई भी नया बड़ा दांव लगाने से पहले वैश्विक संकेतकों पर नजर रखनी चाहिए। इसका आप पर असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी का सीधा असर भारतीय आम नागरिकों और शेयर बाजार के निवेशकों की जेब पर पड़ने वाला है। • भारत भर के निवेशकों के लिए: शेयर बाजार में 3 दिनों की इस तेज गिरावट से म्यूचुअल फंड और सीधे शेयरों में निवेश करने वाले निवेशकों का पोर्टफोलियो वैल्यूएशन घट गया है। बाजार में चल रही अस्थिरता को देखते हुए नए निवेशकों को एकमुश्त निवेश करने के बजाय व्यवस्थित निवेश योजना (SIP) के जरिए सतर्क रुख अपनाने की जरूरत है। • पेट्रोल-डीजल और महंगाई पर प्रभाव: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का $96 प्रति बैरल तक पहुंचना भारत के आयात बिल को बढ़ाएगा। अगर कच्चे तेल के दाम लंबे समय तक ऊंचे बने रहते हैं, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं जिससे रोजमर्रा के सामानों की परिवहन लागत और आम महंगाई बढ़ जाएगी। • लोन और EMI पर असर: अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने और वहां ब्याज दरें रुकने या बढ़ने की आशंका से वैश्विक स्तर पर कर्ज महंगा हो सकता है। इससे भारतीय रिजर्व बैंक पर भी रेपो रेट में कटौती टालने या सख्त रुख बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा, जिससे होम लोन और कार लोन की EMI में फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद कम हो जाती है। • भारतीय रुपये की कीमत पर दबाव: कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण डॉलर की मांग बढ़ेगी, जिससे रुपये पर दबाव आ सकता है। रुपये के कमजोर होने से विदेश यात्रा, विदेशों में पढ़ाई और आयातित इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे हो सकते हैं। सवाल-जवाब 1. भारतीय शेयर बाजार में तीन दिनों में कितने रुपये का नुकसान हुआ है? 31 अगस्त से 2 सितंबर के दौरान तीन कारोबारी सत्रों में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर सूचीबद्ध कंपनियों का मार्केट कैप लगभग ₹6.55 लाख करोड़ घट गया है। 2. बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी 50 कितने अंक गिरे? बुधवार को सेंसेक्स 681.18 अंक (0.9%) की गिरावट के साथ 76,263.10 पर और निफ्टी 50 सूचकांक 250.40 अंक (1.04%) की गिरावट के साथ 23,805.40 पर बंद/कारोबार हुआ। 3. बाजार में गिरावट की मुख्य वजह क्या है? मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान सैन्य संघर्ष का बढ़ना, कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) का $96 प्रति बैरल तक उछलना और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का 4.8 प्रतिशत तक पहुंचना गिरावट के मुख्य कारण हैं। 4. भारत की Q1 GDP दर कितनी रही है? चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1) में भारत की जीडीपी (GDP) वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो काफी मजबूत आंकड़ा है। 5. निफ्टी 50 के लिए अगला मुख्य समर्थन (सपोर्ट) स्तर क्या है? तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 23,950 से 24,000 का क्षेत्र मुख्य सपोर्ट जोन है। इसके नीचे जाने पर निफ्टी 23,800 और 23,600 के स्तर तक जा सकता है। 6. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की क्या कीमतें हैं? अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड $95 से $97 प्रति बैरल (निकटतम $96) के बीच और अमेरिकी WTI क्रूड लगभग $90 से $91 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। https://trendkia.com/market/middle-east-tanava-aura-us-bond-yields-ke-bicha-bharatiya-sheyara-bajara-pasta-sensex-aura-nifty-50-men-tina-dina-men-6-55-lakha-k-26290 TrendKia — Har trend, sabse pehle.