मिडिल ईस्ट के तनाव से क्रूड ऑयल में ज़बरदस्त उछाल, ईसीबी के अहम फैसले पर टिकी दुनिया की नज़रें वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति की चिंताओं के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी तेज़ी आई है, जिससे दुनिया भर में महंगाई का डर फिर से हावी हो गया है। इस बीच, मुद्रा बाज़ार यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अहम मौद्रिक नीति और जापानी येन में आई ऐतिहासिक गिरावट पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं। वैश्विक वित्तीय बाज़ार इस समय बेहद अस्थिर और खतरनाक दौर से गुज़र रहे हैं, जहां एक तरफ भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ प्रमुख केंद्रीय बैंकों की अहम मौद्रिक नीतियों ने खलबली मचा रखी है। मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य और कूटनीतिक तनाव के बीच फिलहाल कोई शांति का रास्ता नज़र नहीं आ रहा है, और इसका सबसे सीधा और भयानक असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट की स्थिरता पर पड़ा है। तेल की कीमतों ने एक ज़बरदस्त और रुकने का नाम न लेने वाली तेज़ी पकड़ ली है, जो दुनिया के बड़े आयातक देशों की नाज़ुक आर्थिक रिकवरी को पटरी से उतारने का खतरा पैदा कर रही है। बुनियादी कमोडिटी की कीमतों में आया यह अचानक उछाल दुनिया भर में महंगाई के उस डर को फिर से ज़िंदा कर रहा है जिसे काबू में करने के लिए दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार संघर्ष कर रहे थे। इस बेहद अस्थिर मैक्रोइकॉनॉमिक माहौल के बीच, फॉरेन एक्सचेंज बाज़ार के ट्रेडर्स का पूरा ध्यान यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के आने वाले अहम ब्याज दर के ऐलान पर केंद्रित हो गया है। इसी दौरान, यूएस डॉलर (USD) लगभग सभी प्रमुख मुद्राओं के खिलाफ अपनी ज़बरदस्त ताक़त दिखा रहा है, खासकर जापानी येन (JPY) के मुकाबले, जो गिरकर चार दशकों के अपने सबसे निचले और चौंकाने वाले स्तर पर आ गया है, जिसके चलते सरकारी अधिकारियों को कड़ी चेतावनियां जारी करनी पड़ी हैं। क्रूड ऑयल की सप्लाई को लेकर बढ़ीं चिंताएं मिडिल ईस्ट के मोर्चे पर बढ़ती दुश्मनी ने ग्लोबल कमोडिटी बाज़ार में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है, और ज़ाहिर तौर पर क्रूड ऑयल बाज़ार की इस घबराहट का सबसे बड़ा शिकार बना है। डॉयचे बैंक के वित्तीय विश्लेषकों ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया है कि हाल ही में कीमतों में आया यह उछाल कितनी भयानक रफ्तार से हुआ है। उनकी गहरी रिसर्च के मुताबिक, ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड इस हफ़्ते की शुरुआत में 3.36% की बड़ी छलांग लगाकर 94.07 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। इसके बाद भी यह तेज़ी नहीं रुकी और अगली ही सुबह यह 1.96% और चढ़कर 95.94 डॉलर प्रति बैरल के हैरान करने वाले स्तर पर जा पहुंचा। इतनी तेज़ी से कीमतों का ऊपर जाना इस बात को साबित करता है कि बाज़ार सप्लाई चेन में होने वाली किसी भी संभावित रुकावट को लेकर कितना ज़्यादा संवेदनशील हो चुका है। सबसे अहम बात यह है कि फ्यूचर्स मार्केट का बुनियादी ढांचा इस बात का पुख्ता संकेत दे रहा है कि बड़े संस्थागत निवेशक इसे महज़ किसी खबर से आई पल-भर की तेज़ी नहीं, बल्कि एक लंबे समय तक चलने वाला ढांचागत बदलाव मान रहे हैं। डॉयचे बैंक के जानकारों ने बड़ी ही बारीकी से बताया कि निवेशक अब इस बात को स्वीकार करके चल रहे हैं कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें एक लंबे अरसे तक ऊंची बनी रहेंगी। इसका प्रमाण 6 महीने का ब्रेंट फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट है, जिसने कल 0.59% की बढ़त के साथ 81.74 डॉलर प्रति बैरल के एक महीने के उच्चतम स्तर को छू लिया। यह फॉरवर्ड प्राइसिंग साफ दिखाती है कि बाज़ार एक लंबे समय तक सप्लाई की कमी के लिए खुद को तैयार कर रहा है। सप्लाई को लेकर इस गहरी चिंता को और भड़काने का काम प्रमुख उत्पादक देशों की रणनीतिक चालों ने किया है। खासतौर पर, बाज़ार का डर तब और बढ़ गया जब यह खबर आई कि सऊदी अरब ने अपने महत्वपूर्ण तेल निर्यात का रास्ता बदलकर उसे लाल सागर के यानबू पोर्ट की तरफ मोड़ दिया है। इस फैसले ने उस एनर्जी मार्केट में एक और बड़ी लॉजिस्टिक मुश्किल खड़ी कर दी है, जो पहले से ही बेहद दबाव में काम कर रहा था। यूएस क्रूड ऑयल (CL=F) का लाइव मार्केट डेटा भी इस बुलिश माहौल की गवाही दे रहा है और यह साफ बता रहा है कि बाज़ार पूरी तरह से खरीदारों के कब्ज़े में है। यह कमोडिटी इस समय 89.39 डॉलर पर मज़बूती के साथ ट्रेड कर रही है, जो इसके पिछले क्लोज़ 86.83 डॉलर से 2.95% की शानदार बढ़त है। फिलहाल यह अपने 54.98 से 119.48 डॉलर की 52-हफ्ते की विशाल रेंज के ऊपरी हिस्से में आराम से कारोबार कर रहा है। डेली कैंडलस्टिक चार्ट्स से निकाले गए टेक्निकल इंडिकेटर्स एक बेहद ताक़तवर अपट्रेंड की ओर इशारा कर रहे हैं। 14-दिन का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 68 के उच्च स्तर पर बना हुआ है, जो भारी मोमेंटम दिखाता है और यह ओवरबॉट ज़ोन की सीमा को छू रहा है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेन्स डाइवर्जेन्स (MACD) -1.13 की सिग्नल लाइन के मुकाबले 1.29 के शानदार स्तर पर है, जो 2.42 का एक मज़बूत बुलिश हिस्टोग्राम बना रहा है और इसमें फिलहाल रुकने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। कीमत ने 89.12 डॉलर के अपर बोलिंजर बैंड को भी पार कर लिया है, जो इस मौजूदा रैली की अकल्पनीय ताक़त को कन्फर्म करता है। इसके अलावा, बड़े मूविंग एवरेज लंबी अवधि की मज़बूती की एक साफ़ तस्वीर पेश कर रहे हैं; 50-दिन का एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA), जो 82.43 डॉलर पर है, उसने 200-दिन के ईएमए (75.40 डॉलर) को काफी नीचे से काटते हुए एक स्पष्ट गोल्डन क्रॉस पैटर्न बनाया है। एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) 27 पर है, जो इस बात की पुष्टि करता है कि एक असली ट्रेंडिंग माहौल बना हुआ है। फास्ट स्टोकास्टिक लाइन्स अपने 95 के सिग्नल के मुकाबले 98 पर अपनी चरम सीमा पर हैं। रिस्क मैनेजमेंट करने वाले एक्टिव ट्रेडर्स के लिए, 14-दिन का एवरेज ट्रू रेंज (ATR) 3.90 डॉलर की डेली वोलैटिलिटी दिखा रहा है, जो स्टॉप-लॉस बफर सेट करने के लिए एक अहम पैमाना है। क्रूड का डेली पिवट पॉइंट 88.85 डॉलर पर है, जिसमें ऊपर की ओर रुकावट का पहला स्तर 90.39 डॉलर (R1) और दूसरा 91.38 डॉलर (R2) पर है। वहीं नीचे की तरफ पहला सपोर्ट 87.86 डॉलर (S1) और दूसरा 86.32 डॉलर (S2) पर कीमत को सहारा देने के लिए मौजूद है। यूरोज़ोन की नज़रें ईसीबी के फैसले पर ग्लोबल एनर्जी सेक्टर में मचे इस हाहाकार के बीच, फॉरेन एक्सचेंज मार्केट का पूरा ध्यान जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक के मुख्य हेडक्वार्टर पर टिका हुआ है। यूरोपीय ट्रेडिंग सेशन के दौरान यूरो ने शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार दूसरे दिन अपनी बढ़त बनाए रखी है और यूएस डॉलर के मुकाबले 1.1400 के अहम और क्रिटिकल स्तर के ऊपर बेहद मज़बूती से डटा हुआ है। यूरो का यह लचीलापन ऐसे समय में सामने आया है जब बड़े संस्थागत ट्रेडर्स ईसीबी गवर्निंग काउंसिल की मौद्रिक नीति की घोषणा से ठीक पहले अपने पोर्टफोलियो को रणनीतिक तौर पर सेट कर रहे हैं। बाज़ार के सभी खिलाड़ी केंद्रीय बैंक की प्रेस रिलीज़ और उसके बाद होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस के एक-एक शब्द का बहुत बारीकी से विश्लेषण करेंगे। उनकी नज़र खासकर इस बात पर होगी कि क्या भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने को लेकर कोई स्पष्ट मार्गदर्शन या हल्का सा भी संकेत मिलता है या नहीं। यूरोपीय सेंट्रल बैंक पूरे यूरोज़ोन ब्लॉक के लिए सर्वोच्च रिज़र्व बैंक के रूप में काम करता है। इसका सबसे बड़ा और कानूनी रूप से अनिवार्य लक्ष्य कीमतों में पूरी तरह से स्थिरता बनाए रखना है, जिसे यह संस्था मध्यम अवधि में महंगाई को लगभग 2% के लक्ष्य के आसपास रखने के रूप में परिभाषित करती है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ईसीबी द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला सबसे प्रमुख और ताक़तवर हथियार बेंचमार्क ब्याज दरों में सीधा बदलाव करना है। आम तौर पर, जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो यह ज़्यादा रिटर्न की तलाश में विदेशी पूंजी को अपनी ओर खींचता है, जिससे ओपन मार्केट में यूरो मुद्रा मज़बूत होती है। इसके विपरीत, दरों को तेज़ी से घटाने पर मुद्रा की कीमत पर भारी दबाव पड़ता है और वह कमज़ोर हो जाती है। ये बेहद अहम मौद्रिक नीतियां ईसीबी की गवर्निंग काउंसिल द्वारा तय की जाती हैं, जिसकी साल में ठीक आठ बार बेहद गोपनीय बैठकें होती हैं। इन ऐतिहासिक फैसलों को यूरोज़ोन के अलग-अलग राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के प्रमुख और छह स्थायी कार्यकारी बोर्ड सदस्य मिलकर लेते हैं, और फिलहाल इस शक्तिशाली समूह का नेतृत्व ईसीबी की प्रभावशाली अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड कर रही हैं। क्वांटिटेटिव ईजिंग और टाइटनिंग का गणित जब कीमतों में स्थिरता लाने के लिए पारंपरिक ब्याज दर के उपाय नाकाफी साबित होते हैं, खासकर तब जब दरें पहले से ही शून्य या उसके करीब हों, तो यूरोपीय सेंट्रल बैंक के पास क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) नाम का एक असाधारण नीतिगत कदम उठाने का विशेष अधिकार होता है। यह एक बेहद गैर-पारंपरिक मौद्रिक नीति है, जिसमें ईसीबी डिजिटल रूप से नए यूरो छापता है और इस नई बनी पूंजी का इस्तेमाल करके सीधे कमर्शियल बैंकों और बड़े वित्तीय संस्थानों से वित्तीय संपत्तियां, मुख्य रूप से सरकारी कर्ज़ या हाई-रेटिंग वाले कॉर्पोरेट बॉन्ड, खरीदता है। वित्तीय प्रणाली को अतिरिक्त नकदी से भरकर, क्यूई का मक़सद लंबे समय के कर्ज़ को सस्ता करना और सुस्त पड़ी आर्थिक गतिविधियों को तेज़ करना होता है। हालांकि, बाज़ार में पैसे की सप्लाई बहुत ज़्यादा बढ़ जाने के कारण, क्यूई का परिणाम अक्सर यूरो के काफी कमज़ोर होने के रूप में सामने आता है। क्यूई को बिल्कुल आखिरी विकल्प माना जाता है। ईसीबी ने 2009 से 2011 तक चले ग्रेट फाइनेंशियल क्राइसिस के सबसे बुरे दौर में इस बड़े हथियार का भारी इस्तेमाल किया था। इसे 2015 में भी लागू किया गया था जब कीमतों में लगातार गिरावट के कारण महंगाई दर बहुत नीचे बनी हुई थी, और हाल ही में कोविड महामारी से अर्थव्यवस्था को लगे भयानक झटके को कम करने के लिए भी इसका बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया। इसके ठीक उलट, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) क्यूई प्रक्रिया का बिल्कुल उल्टा मैकेनिज़्म है। इसे क्यूई के लंबे दौर के बाद बहुत सावधानी से तभी शुरू किया जाता है, जब आर्थिक रिकवरी साफ तौर पर पटरी पर आ चुकी हो और खतरनाक महंगाई लक्ष्य के स्तर से ऊपर बढ़ने लगे। जहां क्यूई व्यवस्था में यूरोपीय सेंट्रल बैंक वित्तीय संस्थानों को लिक्विडिटी देने के लिए सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड आक्रामक तरीके से खरीदता है, वहीं क्यूटी साइकिल में ईसीबी नए बॉन्ड खरीदना पूरी तरह से बंद कर देता है। और सबसे अहम बात यह है कि उसके पास पहले से मौजूद बॉन्ड्स के मैच्योर होने पर जो मूलधन वापस मिलता है, उसे वह दोबारा निवेश नहीं करता। व्यापक वित्तीय प्रणाली से लिक्विडिटी को सोच-समझकर और तरीके से वापस खींचने का यह कदम बेलगाम महंगाई से लड़ने के लिए उठाया जाता है। करेंसी मार्केट में इस कदम को यूरो की वैल्यूएशन के लिए एक बेहद सकारात्मक या बुलिश बुनियादी उत्प्रेरक माना जाता है। बाज़ार के एनालिस्ट्स और अर्थशास्त्री इन उलझे हुए मैक्रोइकॉनॉमिक समीकरणों को समझने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। एरेन सेंगेज़र, जो दिल से एक अर्थशास्त्री हैं और मैक्रोइकॉनॉमिक डेटा रिलीज़, केंद्रीय बैंक की नीतियों में बदलाव और राजनीतिक उथल-पुथल का वित्तीय संपत्तियों पर पड़ने वाले शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म असर का सटीक आकलन करने के विशेषज्ञ हैं, उस गहरी विश्लेषणात्मक शक्ति की मिसाल हैं जिसकी इन उथल-पुथल भरे संस्थागत बाज़ारों में नेविगेट करने के लिए आज सख्त ज़रूरत है। जापानी येन में ऐतिहासिक गिरावट, पाउंड की रिकवरी थमी जहां एक तरफ यूरो अपने भविष्य के फैसले का इंतज़ार कर रहा है, वहीं जापानी येन में एक ऐतिहासिक और दर्दनाक गिरावट देखी जा रही है। इस हफ्ते की शुरुआत में USD/JPY करेंसी पेयर में गिरावट का एक बेहद छोटा और मामूली दौर देखा गया था, लेकिन वह कमज़ोरी कुछ ही पल की थी। इस पेयर ने तेज़ी से अपनी आक्रामक ऊपर की चाल को फिर से पकड़ लिया और 163.00 के हैंडल के ऊपर बिना किसी बड़े बदलाव के दिन का कारोबार बंद किया। इसके बाद यूरोपीय सेशन में, यूएस डॉलर ने येन के खिलाफ ज़बरदस्त और ना रुकने वाली रफ्तार पकड़ी, जिससे यह पेयर बड़ी आसानी से 163.30 के पार चला गया। यह जापानी मुद्रा का पिछले लगभग चार दशकों का सबसे निचला और दर्दनाक स्तर है। मुद्रा में गिरावट की इस भयानक गति ने टोक्यो में शीर्ष सरकारी स्तर पर तत्काल चिंता पैदा कर दी है। गुरुवार की शुरुआत में, जापान के वित्त मंत्री सैट्सुकी काटायामा ने प्रेस को कड़ी मौखिक चेतावनी दी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सरकार ज़रूरत पड़ने पर फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में कड़े फैसले लेने के लिए पूरी तरह तैयार है, जो सीधे तौर पर गिरते येन को सहारा देने के लिए बाज़ार में सीधा दखल देने की एक खुली चेतावनी है। यूरोपीय बाज़ार के दूसरे हिस्से में, ब्रिटिश पाउंड अपने पैर जमाने के लिए भारी संघर्ष कर रहा है। गुरुवार को सक्रिय यूरोपीय ट्रेडिंग घंटों के दौरान GBP/USD पेयर की हाल ही में शुरू हुई रिकवरी अचानक रुक गई, जिससे यह 1.3400 के स्तर से काफी नीचे संघर्ष करता हुआ नज़र आया। पाउंड के ऊपर जाने की संभावनाओं पर दो बड़ी चीज़ों ने ब्रेक लगा दिया है, एक तो व्यापक स्तर पर यूएस डॉलर में आई ताज़गी भरी मज़बूती, और दूसरा ब्रिटेन के उम्मीद से ज़्यादा ठंडे महंगाई आंकड़े। ब्रिटेन में महंगाई के कम होने के इस स्थानीय संकेत ने बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा आक्रामक रूप से ब्याज दरें बढ़ाए जाने की बाज़ार की उम्मीदों को कम कर दिया है। इसके चलते, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच जहां लोग सुरक्षित निवेश की ओर भाग रहे हैं, वहां पाउंड बेहद कमज़ोर स्थिति में आ गया है। गोल्ड की चमक फीकी, महंगाई के डर से फेड के कड़े फैसलों की उम्मीद अगर बड़े करेंसी मैट्रिक्स पर नज़र डालें, तो यूएस डॉलर इस हफ़्ते एक अजेय ताक़त साबित हुआ है। प्रमुख लिस्टेड मुद्राओं में प्रतिशत बदलाव का विश्लेषण इस बात की पुष्टि करता है कि यूएस डॉलर निस्संदेह सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाला रहा, जिसने खास तौर पर स्विस फ्रैंक के खिलाफ अपना पूरा दबदबा दिखाया। प्रमुख मुद्राओं का जटिल हीट मैप इस व्यापक डॉलर की ताक़त को उजागर करता है, जो इस बेहद अनिश्चित वैश्विक माहौल में पसंद की जाने वाली नंबर एक बेस करेंसी के रूप में काम कर रहा है। ग्रीनबैक की इस ज़बरदस्त ताक़त का भारी दबाव कीमती धातुओं पर पड़ रहा है। गुरुवार के यूरोपीय सेशन में गोल्ड फिलहाल 4,100 डॉलर के मनोवैज्ञानिक राउंड फिगर के आसपास अपने पुलबैक को थामने की जी-तोड़ कोशिश कर रहा है। भू-राजनीतिक तनाव के समय गोल्ड को जो पारंपरिक सुरक्षित निवेश वाली खरीदारी का फायदा मिलता है, वह इस बार उसी मिडिल ईस्ट तनाव के कारण बेअसर हो गया है जो क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के और ज़्यादा खतरनाक होने के कारण यूएस क्रूड ऑयल की कीमतें बेतहाशा बढ़कर 90 डॉलर के करीब छह हफ़्ते के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। इस वजह से एनर्जी की कीमतों में आया उछाल पूरी दुनिया में महंगाई का भयानक खौफ पैदा कर रहा है। महंगाई की ये गहरी उम्मीदें बदले में इस बात पर दांव लगाने के लिए बाज़ार को मजबूर कर रही हैं कि अमेरिकी फेडरल रिज़र्व को भविष्य में ब्याज दरों में और भी आक्रामक बढ़ोतरी करनी पड़ेगी। फेड के इन सख्त दांवों ने कीमती धातुओं के लिए तबाही मचा दी है, क्योंकि इससे बिना ब्याज वाले बुलियन का आकर्षण खत्म हो जाता है और निवेशक अपना पैसा ज़्यादा रिटर्न देने वाले कैश विकल्पों में लगाने लगते हैं। क्रिप्टो मार्केट में बदलाव की आहट जहां एक तरफ फिएट करेंसी, सॉवरेन बॉन्ड और पारंपरिक कमोडिटी बाज़ार चिंताओं से घिरे हुए हैं, वहीं इसके बिल्कुल विपरीत, क्रिप्टोकरेंसी सेक्टर ढांचागत मज़बूती के शानदार संकेत दे रहा है। मंगलवार देर रात बिटवाइज़ के चीफ इन्फॉर्मेशन ऑफिसर मैट होगन द्वारा प्रकाशित एक व्यापक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल एसेट इकोसिस्टम शायद बहुत खामोशी से अपने अगले बड़े और गेम-चेंजिंग बुल मार्केट की नींव रख रहा है। होगन का मुख्य और गहरी रिसर्च पर आधारित तर्क यह है कि अपनाने की अगली बड़ी लहर पारंपरिक फाइनेंस की पुरानी व्यवस्था और ब्लॉकचेन आधारित वित्तीय ढांचे के बीच तेज़ी से बढ़ते तकनीकी तालमेल से आएगी। होगन ने बाज़ार के उन ठोस सबूतों की ओर इशारा किया जो बताते हैं कि व्यापक क्रिप्टो मार्केट शायद अपने मैक्रो मार्केट बॉटम पर पहुंचने के साफ शुरुआती संकेत दे रहा है। उन्होंने प्रदर्शन के आंकड़ों में एक चौंकाने वाले अंतर को उजागर किया। 1 जुलाई के बाद से, सबसे प्रमुख डिजिटल एसेट बिटकॉइन ने खामोशी से 9% की शानदार बढ़त दर्ज की है। कीमत में यह ज़बरदस्त उछाल इसलिए भी बहुत ज़्यादा मायने रखता है क्योंकि यह ठीक उसी समय हुआ जब टेक कंपनियों वाले नैस्डैक 100 इक्विटी इंडेक्स में 6% की भारी गिरावट आई। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि डिजिटल एसेट्स अब पारंपरिक रिस्क-ऑन टेक्नोलॉजी शेयरों की कमज़ोरी से खुद को अलग कर रहे हैं, जिसकी बाज़ार को लंबे समय से तलाश थी। व्यापक मैक्रो स्तर पर इस उम्मीद के बावजूद, पुराने और विशिष्ट ऑल्टकॉइन्स अभी भी अपने तकनीकी और स्थानीय ट्रेडिंग पैटर्न में फंसे हुए हैं। रिपल का अपना टोकन और स्टेलर नेटवर्क का मूल एसेट दोनों इस समय बेहद सावधानी के साथ ट्रेड कर रहे हैं, क्योंकि वे कई सालों के अहम तकनीकी स्तरों के आसपास खतरनाक तरीके से मंडरा रहे हैं। XRP इस वक्त सीधे तौर पर अपने 50-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) पर एक बड़े और जोखिम भरे रेजिस्टेंस का सामना कर रहा है। अपनी बुलिश रफ्तार को फिर से हासिल करने के लिए उसे इस स्तर को साफ तौर पर पार करना ही होगा। वहीं दूसरी ओर, XLM एक लंबे और थकाऊ कंसोलिडेशन के दौर में फंसा हुआ है, और बेहद मज़बूत माने जाने वाले 0.187 डॉलर के सपोर्ट ज़ोन के आसपास मुश्किल से टिका हुआ है। इस बीच, डेरिवेटिव्स बाज़ार के डेटा का गहराई से विश्लेषण करने पर बाज़ार में भारी उतार-चढ़ाव की तस्वीर सामने आती है। यह डेटा पूरी तरह से मिला-जुला है लेकिन इसमें गिरावट का एक हल्का सा झुकाव है, जो यह बताता है कि बड़े संस्थागत ट्रेडर्स अभी भी बहुत ज़्यादा सावधानी बरत रहे हैं और उन्होंने अपनी अगली बड़ी चाल को पूरी तरह से रहस्य के पर्दे में छिपा रखा है। इसका आप पर असर • आम उपभोक्ताओं के लिए: क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ सकते हैं और माल ढुलाई महंगी होने से रोज़मर्रा की चीज़ों की कीमतों में फिर से भारी उछाल आ सकता है। • निवेशकों के लिए: तेल की बढ़ती कीमतों के कारण अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरें और बढ़ाए जाने की आशंका गहरा गई है, जो गोल्ड जैसे बिना ब्याज वाले एसेट्स के लिए नुकसानदायक है और डॉलर को मज़बूत कर रहा है। • क्रिप्टो निवेशकों के लिए: टेक स्टॉक्स की भारी गिरावट के बावजूद बिटकॉइन का मज़बूत प्रदर्शन बाज़ार के निचले स्तर पर पहुंचने का संकेत देता है, हालांकि रिपल और स्टेलर जैसे ऑल्टकॉइन्स अभी भी अहम तकनीकी रुकावटों का सामना कर रहे हैं। सवाल-जवाब 1. क्रूड ऑयल की कीमतें तेज़ी से क्यों बढ़ रही हैं? मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सऊदी अरब द्वारा अपने तेल निर्यात को लाल सागर के यानबू पोर्ट की तरफ मोड़ने जैसी रणनीतिक आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण तेल की कीमतें तेज़ी से बढ़ रही हैं। 2. यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) का मुख्य लक्ष्य क्या है? यूरोपीय सेंट्रल बैंक का मुख्य लक्ष्य ब्याज दरों में बदलाव करके यूरोज़ोन में कीमतों की स्थिरता बनाए रखना और महंगाई को लगभग 2% के आसपास सीमित रखना है। 3. जापानी येन में इतनी भारी गिरावट क्यों आ रही है? यूएस डॉलर की व्यापक मज़बूती के कारण जापानी येन डॉलर के मुकाबले अपने चार दशक के सबसे निचले स्तर पर आ गया है, जिसके चलते जापान के वित्त मंत्री को बाज़ार में दखल देने की कड़ी चेतावनी देनी पड़ी है। 4. क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) क्या होता है? क्वांटिटेटिव ईजिंग एक असाधारण मौद्रिक नीति है जिसमें केंद्रीय बैंक नए नोट छापकर सरकारी या कॉर्पोरेट बॉन्ड खरीदता है, ताकि सुस्त अर्थव्यवस्था को रफ़्तार देने के लिए बाज़ार में नकदी बढ़ाई जा सके। 5. पारंपरिक टेक स्टॉक्स के मुकाबले बिटकॉइन का प्रदर्शन कैसा है? बिटकॉइन ने मज़बूती दिखाते हुए 1 जुलाई से 9% की शानदार बढ़त हासिल की है, जबकि इसी दौरान टेक कंपनियों वाले नैस्डैक 100 इंडेक्स में 6% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। https://trendkia.com/market/midila-ista-ke-tanava-se-kruda-yala-men-zabaradasta-uchhala-ecb-ke-ahama-phaisale-para-tiki-duniya-ki-nazaren-10169 TrendKia — Har trend, sabse pehle.