# मुद्रास्फीति में नरमी के बावजूद अमेरिकी डॉलर ने बनाई बढ़त, वैश्विक मुद्राओं और संपत्तियों पर दिखा दबाव

> महंगाई के नरम आंकड़ों और ब्याज दरों पर आक्रामकता घटने के संकेतों के बावजूद सुरक्षित निवेश मांग और बॉन्ड प्रतिफल के चलते अमेरिकी डॉलर मजबूत बना हुआ है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/mudrasphiti-men-narami-ke-bavajuda-us-dollar-ne-banai-barhata-vaishvika-mudraon-aura-snpattiyon-para-dikha-dabava-41169 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिकी डॉलर, फेडरल रिजर्व, मुद्रास्फीति, फॉरेक्स बाजार, बॉन्ड यील्ड, सोना

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूती प्रदर्शित कर रहा है और डॉलर इंडेक्स जून के अपने साल के उच्चतम स्तर लगभग 101.80 के करीब पहुंच गया है। हालिया आर्थिक आंकड़ों में अमेरिका के भीतर मुद्रास्फीति के दबाव में कमी दर्ज की गई है, जिससे यह संभावना मजबूत हो रही थी कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी की अपनी आक्रामक रफ्तार को धीमा कर सकता है। इसके बावजूद वित्तीय बाजारों में डॉलर की मांग कमजोर नहीं पड़ी है, बल्कि डेटा जारी होने के तुरंत बाद अल्पकालिक अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल और डॉलर दोनों तेजी से संभल गए। सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग, कच्चे तेल के कारण भविष्य में महंगाई की आशंकाएं और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव मिलकर अमेरिकी मुद्रा को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

## फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और महंगाई के ताजे आंकड़े
संशोधित कोर पीसीई आंकड़ों से संकेत मिलता है कि बुनियादी मूल्य दबावों में वास्तविक मंदी आ रही है। न्यूयॉर्क फेड के प्रेसिडेंट विलियम्स ने इस महीने की दर वृद्धि के बाद यह रुख स्पष्ट किया था कि नीतिगत सख्ती को आगे बढ़ाने से पहले अतिरिक्त आंकड़ों की समीक्षा करने के लिए समय लिया जा सकता है और किसी भी तरह की जल्दबाजी की जरूरत नहीं है। इस बयान के ठीक बाद अगस्त के लिए नरम पीसीई डिफ्लेटर आंकड़े सामने आए, जिसने केंद्रीय बैंक के दृष्टिकोण को समर्थन दिया है। तीन महीने की वार्षिक विकास दर घटकर केवल 2.1% रह गई है, जिसे नीति निर्माताओं के लिए एक राहत भरा संकेत माना जा रहा है।

यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव शुरू होने के बाद की अवधि पर नजर डालें, तो छह महीने की वार्षिक वृद्धि दर अगस्त में घटकर 2.7% रह गई है, जो फरवरी में 3.3% दर्ज की गई थी। इस प्रगति से यह उम्मीद बनती है कि महंगाई को लक्ष्य के करीब लाने की दिशा में कदम आगे बढ़ रहे हैं, भले ही यह प्रक्रिया उतनी तेज न हो जितनी उम्मीद की जा रही थी। इसके चलते अमेरिकी बाजार में अगले वर्ष के दौरान अनुमानित तीन से चार दरों में वृद्धि की संभावना कमजोर पड़ रही है, और अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले अगले महीने लगातार दूसरी दर वृद्धि की आशंका में भी गिरावट आई है।

## येन और यूरो पर डॉलर की मजबूती का सीधा असर
विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में जापानी येन के मुकाबले डॉलर का दबदबा स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। यूएसडी/जेपीवाई एशियाई कारोबारी सत्र में अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी स्तर 158.00 से ऊपर कारोबार करता नजर आया। नरम पीसीई आंकड़ों के बावजूद तेल से प्रेरित महंगाई के जोखिम अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल को कई वर्षों के उच्च स्तर के करीब बनाए हुए हैं। इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिरोध सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर के आकर्षण को बढ़ा रहा है, जिससे बैंक ऑफ जापान की संभावित सख्त मौद्रिक नीति और जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप के जोखिमों के बावजूद डॉलर मजबूत बना हुआ है।

दूसरी ओर, यूरो पर भी भारी दबाव देखने को मिला है और ईयूआर/यूएसडी मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर खिसक गया है। यह जोड़ी गिरकर 1.1312 पर पहुंच गई, जो जनवरी के शिखर स्तर 1.2082 से काफी नीचे है। यूरोप के ऊर्जा संकट से जुड़े जोखिम, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और डॉलर की व्यापक तेजी इस गिरावट के प्रमुख कारण हैं। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि यूरोज़ोन में महंगाई का कोई नया झटका यूरो को अप्रत्याशित सहारा प्रदान कर सकता है।

## ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और सोने के बाजार का ताजा रुख
ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा के मोर्चे पर भी कमजोरी का रुख जारी है। एयूडी/यूएसडी दो महीने के निचले स्तर के करीब सीमित दायरे में रहा और एशियाई सत्र में 0.6900 के मध्य स्तर के आसपास कारोबार करता दिखा। अगस्त महीने में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष तेजी से घटकर 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया, हालांकि इस गिरावट का ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर बहुत सीमित असर हुआ क्योंकि बाजार का मुख्य ध्यान अमेरिकी आर्थिक परिदृश्य पर ही टिका रहा।

कीमती धातुओं के बाजार में सोने को अपनी इंट्राडे बढ़त को बनाए रखने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा। यूरोपीय सत्र के पहले भाग में सोना 4,200 डॉलर के स्तर के आसपास पहुंचने के बाद लगभग सपाट कारोबार करता नजर आया। बुधवार को उम्मीद से कमजोर मुद्रास्फीति के आंकड़े सामने आने के बाद भी डॉलर में लिवाली जारी रही, क्योंकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड लगातार नए बहु-वर्षीय उच्च स्तर छू रही है। बिना ब्याज वाली इस सुरक्षित धातु के लिए ऊंचे बॉन्ड प्रतिफल और मजबूत डॉलर एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

## क्रिप्टोकरेंसी बाजार में हाइपरलिक्विड की चाल
डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में हाइपरलिक्विड यानी एचवाईपीई में भी बिकवाली देखने को मिली। पिछले दिन दर्ज की गई 5% की बढ़त को गंवाते हुए यह टोकन 2% टूट गया। संस्थागत निवेशकों की मांग में नरमी आई है और बुधवार को 5 मिलियन डॉलर की पूंजी निकासी दर्ज की गई, जिससे निकट अवधि में निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। तकनीकी दृष्टिकोण से एचवाईपीई के लिए रुझान मिला-जुला बना हुआ है, क्योंकि इसकी कीमत 90 डॉलर के स्तर से नीचे सीमित बनी हुई है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड प्रतिफल की मजबूती से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, यात्रा और विभिन्न निवेश संपत्तियों पर व्यापक असर पड़ेगा।

- **भारतीय यात्रियों और छात्रों पर असर:** विदेश यात्रा और पढ़ाई का खर्च बढ़ सकता है। मजबूत डॉलर के कारण विदेशी मुद्रा विनिमय दरें भारतीय रुपये पर दबाव बना सकती हैं जिससे विदेशी भुगतान महंगे हो जाते हैं।
- **सोने के निवेशकों के लिए:** सोने की कीमतों में निकट अवधि में सीमित बढ़त दिख सकती है। बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर रहने से गैर-ब्याज देने वाले सोने की मांग पर दबाव बना रहता है।
- **वैश्विक शेयर बाजारों के लिए:** वैश्विक इक्विटी बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की संभावना से विदेशी संस्थागत पूंजी का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
- **क्रिप्टो निवेशकों के लिए:** चुनिंदा डिजिटल संपत्तियों में संस्थागत बिकवाली से सतर्कता जरूरी है। हाइपरलिक्विड जैसी संपत्तियों में 90 डॉलर से नीचे दबाव रहने से ट्रेडर्स को स्टॉप-लॉस का ध्यान रखना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
मुद्रास्फीति के नरम आंकड़ों के बाद भी डॉलर में तेजी सुरक्षित निवेश मांग, तेल से जुड़ी महंगाई की चिंताओं और ऊंचे बॉन्ड प्रतिफल के कारण बनी हुई है।

- **सुरक्षित निवेश का आकर्षण:** अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक गतिरोध ने वैश्विक निवेशकों को सुरक्षित विकल्प के रूप में डॉलर की ओर आकर्षित किया है। यह तनाव अनिश्चितता के दौर में अमेरिकी मुद्रा को मजबूत समर्थन प्रदान करता है।
- **ऊंची बॉन्ड प्रतिफल दरें:** कच्चे तेल के बढ़ते दामों से भविष्य में महंगाई दोबारा भड़कने का खतरा बना हुआ है। इसी आशंका के चलते अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड नए बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर बनी हुई है।
- **फेड की नीति पर संतुलित रुख:** पीसीई महंगाई दर घटकर 2.1% होने के बावजूद बाजार यह मान रहा है कि दरों में कटौती तुरंत नहीं होने वाली है। फेड अधिकारियों के बयानों ने संकेत दिया है कि नीति की समीक्षा में समय लिया जाएगा।

## सवाल-जवाब

### 1. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स किस स्तर पर पहुंच गया है?
डॉलर इंडेक्स अपने जून के साल के उच्चतम स्तर लगभग 101.80 के करीब पहुंच गया है।

### 2. फेडरल रिजर्व की पसंदीदा महंगाई दर में कितनी गिरावट आई है?
संशोधित आंकड़ों के अनुसार तीन महीने की वार्षिक विकास दर घटकर 2.1% और छह महीने की दर अगस्त में 2.7% रह गई है।

### 3. यूएसडी/जेपीवाई किस स्तर पर कारोबार कर रहा है?
यूएसडी/जेपीवाई एशियाई सत्र में 158.00 के अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है।

### 4. ईयूआर/यूएसडी में कितनी गिरावट दर्ज की गई?
ईयूआर/यूएसडी गिरकर 1.1312 के स्तर पर पहुंच गया, जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है।

### 5. सोने की कीमत किस स्तर के पास संघर्ष करती दिखी?
सोना यूरोपीय सत्र के दौरान 4,200 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंचने के बाद लगभग सपाट कारोबार करता रहा।

### 6. हाइपरलिक्विड टोकन में कितनी गिरावट और निकासी दर्ज हुई?
हाइपरलिक्विड में 2% की गिरावट आई और बुधवार को 5 मिलियन डॉलर की संस्थागत निकासी दर्ज की गई।

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