मुनाफावसूली और कच्चे तेल में उछाल से निफ्टी मेटल इंडेक्स पस्त, मेटल शेयरों में गिरावट शुक्रवार के कारोबारी सत्र में भारी मुनाफावसूली, वैश्विक बाजार में कमजोरी और कच्चे तेल के बढ़ते दामों के कारण निफ्टी मेटल इंडेक्स और प्रमुख मेटल शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। भारतीय शेयर बाजार के शुक्रवार के कारोबार में मेटल सेक्टर में जोरदार मुनाफावसूली देखने को मिली। पिछले कुछ हफ्तों से मेटल शेयरों में जारी तेजी पर ब्रेक लगाते हुए निवेशकों ने अपने मुनाफे को भुनाना शुरू कर दिया। दोपहर 1:50 बजे तक निफ्टी मेटल इंडेक्स 0.68% की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था। इस गिरावट में सरकारी और निजी क्षेत्र की प्रमुख मेटल कंपनियों का हाथ रहा, जिनमें नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (नालको), हिंदुस्तान कॉपर और हिंदुस्तान जिंक सबसे ज्यादा पिछड़ने वाले शेयरों में शामिल रहे। इसके अलावा वेदांता और हिंडालको इंडस्ट्रीज जैसी दिग्गज कंपनियों में भी बिकवाली का दबाव देखा गया। विभिन्न मेटल शेयरों में दर्ज की गई गिरावट शुक्रवार को बिकवाली का सबसे ज्यादा असर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी नालको के शेयरों पर पड़ा, जिसका शेयर 5.64% गिरकर 378.6 रुपये प्रति शेयर पर कारोबार कर रहा था। वहीं सरकारी खनन कंपनी हिंदुस्तान कॉपर के शेयरों में 3.12% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा हिंदुस्तान जिंक का शेयर भी दोपहर 1:50 बजे तक लगभग 2.98% नीचे आ गया। दिग्गज डाइवर्सिफाइड नेचुरल रिसोर्सेज कंपनियों में भी सुस्ती का रुख रहा। वेदांता का शेयर आज इंट्राडे कारोबार के दौरान लगभग 1.09% गिरकर 268.15 रुपये प्रति शेयर पर आ गया। वहीं हिंडालको इंडस्ट्रीज का शेयर भी 1.08% की गिरावट के साथ 1,035 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। इस व्यापक बिकवाली से साफ है कि निवेशक मेटल बास्केट में मुनाफावसूली को तरजीह दे रहे हैं। शानदार रैली के बाद मुनाफावसूली का दौर बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि शुक्रवार को मेटल शेयरों में आई इस गिरावट को पिछले महीनों में हुई जबरदस्त तेजी के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। निफ्टी मेटल इंडेक्स ने पिछले एक महीने में लगभग 2% की बढ़त हासिल की थी, जबकि साल 2026 में अब तक यह इंडेक्स करीब 15.75% की शानदार तेजी दर्ज कर चुका है। इतनी बड़ी तेजी के बाद बाजार में मुनाफावसूली का आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, न कि घरेलू बुनियादी आर्थिक स्थिति में किसी खराबी का संकेत। बाजार की इस चाल पर बात करते हुए विभावंगल अनुकूलकरा प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और प्रबंध निदेशक सिद्धार्थ मौर्य ने स्पष्ट किया कि शुक्रवार के सत्र में मेटल शेयरों में गिरावट मुख्य रूप से प्रॉफिट टेकिंग और वैश्विक मेटल कीमतों में कमजोरी के कारण हुई है। उन्होंने कहा कि निफ्टी मेटल पहले ही इस साल 15% से ज्यादा चढ़ चुका था, इसलिए इतनी मजबूत बढ़त के बाद गिरावट की उम्मीद की जा रही थी। कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक उत्पादन की चिंताएं मुनाफावसूली के अलावा कुछ बाहरी वैश्विक कारकों ने भी बेस मेटल उत्पादक कंपनियों की धारणा को प्रभावित किया है। विशेष रूप से एल्युमिनियम उत्पादक कंपनियों जैसे वेदांता एल्युमिनियम, हिंडालको इंडस्ट्रीज और नालको पर दोहरा दबाव देखा गया। एक तरफ वैश्विक स्तर पर एल्युमिनियम का उत्पादन बढ़ने की आशंका है, तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। इन परिचालन दबावों के बारे में विस्तार से बताते हुए सिद्धार्थ मौर्य ने कहा कि एल्युमिनियम कंपनियों के शेयर वैश्विक उत्पादन बढ़ने की चिंताओं और कच्चे तेल के 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने से दबाव में आ गए, जो सामान्य रूप से बाजार के लिए नकारात्मक माना जाता है। एनर्जी की ऊंची लागत मेटल स्मेल्टिंग प्रक्रिया को महंगा बना देती है, जिससे कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर असर पड़ने का खतरा रहता है। तिमाही नतीजे, बेस मेटल तेजी का बैकग्राउंड और आगे का दृष्टिकोण यह हालिया गिरावट ऐसे समय में आई है जब मेटल कंपनियों के हालिया तिमाही नतीजे काफी मजबूत रहे थे। बेहतर प्रदर्शन के कारण पिछले कुछ दिनों में निवेशकों ने मेटल शेयरों में जम कर खरीदारी की थी। इसके अलावा बेस मेटल की कीमतों में आई मजबूती और चांदी के दामों में आई तेजी ने भी मेटल कंपनियों के प्रति निवेशकों का आकर्षण बढ़ाया था। भविष्य की दिशा को लेकर विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी मेटल इंडेक्स का दृष्टिकोण सतर्कता के साथ सकारात्मक बना हुआ है, हालांकि आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है। विश्लेषकों के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी कारक यह होगा कि क्या इंडेक्स अपने हालिया सपोर्ट लेवल्स को बनाए रखने में कामयाब रहता है या नहीं। यदि सपोर्ट लेवल टूटता है, तो मेटल शेयरों में कुछ और गिरावट देखने को मिल सकती है। इसका आप पर असर निवेशकों के लिए: मेटल शेयरों में आए इस शॉर्ट-टर्म करेक्शन के बाद निवेशकों को सपोर्ट लेवल्स पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ग्लोबल कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। बाजार पर असर: कच्चे तेल के $87 प्रति बैरल के पास पहुंचने से एनर्जी खर्च बढ़ने की आशंका है, जिससे मेटल कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बन सकता है। सवाल-जवाब 1. शुक्रवार को निफ्टी मेटल इंडेक्स में गिरावट क्यों आई? निफ्टी मेटल में गिरावट मुख्य रूप से हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली, वैश्विक मेटल कीमतों में सुस्ती और कच्चे तेल के बढ़ते दामों के कारण आई। 2. शुक्रवार के सत्र में कौन से मेटल शेयर सबसे ज्यादा गिरे? नालको का शेयर 5.64% गिरकर 378.6 रुपये पर आ गया, हिंदुस्तान कॉपर 3.12% और हिंदुस्तान जिंक दोपहर 1:50 बजे तक लगभग 2.98% गिरा। 3. हाल के महीनों में मेटल शेयरों का प्रदर्शन कैसा रहा है? शुक्रवार की गिरावट से पहले, निफ्टी मेटल इंडेक्स ने एक महीने में लगभग 2% और 2026 में अब तक लगभग 15.75% का रिटर्न दिया था। 4. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का एल्युमिनियम कंपनियों पर क्या असर पड़ता है? कच्चे तेल की कीमतें 87 डॉलर प्रति बैरल के पास रहने से उत्पादन लागत बढ़ती है, जिससे नालको, हिंडालको और वेदांता जैसी कंपनियों के मार्जिन प्रभावित होते हैं। https://trendkia.com/market/munaphavasuli-aura-kachche-tela-men-uchhala-se-nifty-metal-indeksa-pasta-metala-sheyaron-men-giravata-16650 TrendKia — Har trend, sabse pehle.