नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड के संभावित ब्याज दर ठहराव से ज़्लॉटी पर दबाव के संकेत कमर्शबैंक के विश्लेषक तथा घोष के अनुसार नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड बेस रेट को 3.75 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है, जिससे पोलिश ज़्लॉटी पर दबाव बना रहेगा। साथ ही वैश्विक बाजारों में डॉलर की कमजोरी, सोने में तेजी और क्रिप्टो में मजबूती दर्ज की गई। नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड (एनबीपी) की आगामी मौद्रिक नीति बैठक को लेकर वित्तीय बाजारों में व्यापक चर्चा चल रही है। विश्लेषकों का लगभग सर्वसम्मत अनुमान है कि पोलैंड का केंद्रीय बैंक अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर यानी बेस रेट को 3.75 प्रतिशत के स्तर पर अपरिवर्तित बनाए रख सकता है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि दर के इस स्तर पर बने रहने के बावजूद असली दिशा कल होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस और बैंक के नए आर्थिक अनुमानों से ही स्पष्ट होगी। कमर्शबैंक के विश्लेषक तथा घोष का मानना है कि केंद्रीय बैंक की यह सतर्कता और नीतिगत निष्क्रियता पोलिश मुद्रा ज़्लॉटी को लगातार दबाव में रख सकती है। प्रशासनिक छूट और मुद्रास्फीति की वास्तविक तस्वीर पोलैंड में हाल के महीनों के मुद्रास्फीति आंकड़ों ने नीतिगत निर्णयों को प्रभावित किया है। सितंबर में हेडलाइन मुद्रास्फीति 4.1 प्रतिशत सालाना दर्ज की गई थी, जो अक्टूबर में घटकर 3.5 प्रतिशत सालाना पर आ गई। सतही तौर पर यह मंदी ब्याज दरों में बढ़ोतरी को टालने का एक प्रमुख कारण बनी हुई है। हालांकि, आर्थिक विश्लेषक तथा घोष के अनुसार यह गिरावट वास्तविक मूल्य स्थिरता को नहीं दर्शाती है। यह धीमापन पूरी तरह से सरकार द्वारा ईंधन की कीमतों में किए गए प्रशासनिक बदलावों के कारण संभव हुआ है। पोलिश सरकार ने ईंधन पर लगने वाले वैट को 23 प्रतिशत से घटाकर 8 प्रतिशत कर दिया था और एक्साइज ड्यूटी को यूरोपीय संघ के न्यूनतम स्तर तक कम कर दिया था। इस सरकारी राहत के कारण पैसेंजर ईंधन की कीमतों में मासिक आधार पर 9.7 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई। अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि यह कदम केवल एक अस्थायी टैक्स हस्तक्षेप है, न कि कोई स्वाभाविक या वास्तविक डिफ्लेशन। मौद्रिक नीति और भविष्य की चुनौतियां तथा घोष का विचार है कि मौद्रिक नीति को इस प्रकार के प्रशासनिक हस्तक्षेपों को नजरअंदाज करना चाहिए। इसके बजाय नीतिगत ध्यान उस वास्तविक अंतर्निहित मुद्रास्फीति पर केंद्रित होना चाहिए जो आधिकारिक लक्ष्य से ऊपर बढ़ रही थी। पोलिश अर्थव्यवस्था में कच्चे ऊर्जा और कमोडिटी की कीमतों का दबाव लगातार ऊंचा बना हुआ है। इसके अलावा श्रम बाजार में अभी भी कड़ा रुख देखा जा रहा है। ईंधन पर दी जा रही यह सरकारी सहायता वर्तमान कार्यक्रम के अनुसार साल के अंत में समाप्त होने वाली है। एनबीपी के आगामी मुद्रास्फीति अनुमान कुछ परिदृश्यों को स्पष्ट कर सकते हैं, लेकिन वे भविष्य के सरकारी फैसलों, विनियमित टैरिफ या राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़ी अनिश्चितता को पूरी तरह हल नहीं कर सकते। विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि एनबीपी की इस निष्क्रियता से पोलिश मौद्रिक नीति पीछे छूटने का जोखिम उठा रही है, जिससे ज़्लॉटी पर दबाव कायम रहेगा। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और वैश्विक मुद्राओं का हाल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में बुधवार को व्यापक उतार चढ़ाव देखने को मिला। एशियाई सत्र में शुरुआती अमेरिकी मध्यावधि चुनावी नतीजों से उपजी राजनीतिक अनिश्चितता ने अमेरिकी डॉलर पर भारी दबाव डाला। वॉशिंगटन में गतिरोध की संभावना ने निवेशकों को सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख करने के लिए प्रेरित किया। इसका असर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स पर दिखा, जहां ताजा गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट ने फेडरल रिजर्व की ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदों के प्रभाव को कमजोर कर दिया और ग्रीनबैक को नीचे खींच लिया। एशियाई कारोबार के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दो सप्ताह के निचले स्तर से ऊपर संभलते हुए 0.6965 के आसपास कारोबार करता दिखा। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) के कम आक्रामक रुख ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की बढ़त को सीमित रखा। दूसरी तरफ, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी के कारण डॉलर-येन जोड़ी पर भारी बिकवाली का दबाव रहा। बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में यूएसडी/जेपीवाई फिसलकर 158.00 के स्तर से नीचे आ गया, जो डॉलर के एक महीने के निचले स्तर को दर्शाता है। सोने में उछाल और क्रिप्टो बाजार की तेजी कमजोर होते अमेरिकी डॉलर और सुरक्षित परिसंपत्तियों की मांग के दम पर सोने की कीमतों में जोरदार तेजी देखी गई। यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में सोना कई नए साप्ताहिक शिखरों को छूते हुए 4,050 डॉलर प्रति औंस के स्तर के बेहद करीब पहुंच गया। हाउस और सीनेट में डेमोक्रेट्स की जीत ने वॉशिंगटन में नीतिगत गतिरोध की संभावनाओं को हवा दी है। इस राजनीतिक अनिश्चितता ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स को दबाया, जिसने बदले में डॉलर को नुकसान पहुंचाते हुए पीली धातु की मांग को मजबूत समर्थन दिया। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी निवेशकों की धारणा में सुधार देखने को मिला। बुधवार को व्यापक डिजिटल एसेट बाजार में जोखिम उठाने की इच्छा बढ़ने से बिटकॉइन 78,000 डॉलर के स्तर से ऊपर कारोबार करता नजर आया। बिटकॉइन के इस सकारात्मक रुख का असर अन्य प्रमुख सिक्कों पर भी पड़ा। एथेरियम 2,300 डॉलर के स्तर से ऊपर टिका रहा, जबकि रिपल 1.28 डॉलर के ऊपर पहुंच गया, जिससे इसने लगातार दो दिनों की बढ़त दर्ज की। निजी क्षेत्र के रोजगार आंकड़ों पर बाजार की नजर वित्तीय बाजारों की निगाहें अब बुधवार को आने वाली निजी क्षेत्र की रोजगार रिपोर्ट पर टिकी हैं। ऑटोमैटिक डेटा प्रोसेसिंग (एडीपी) रिसर्च इंस्टीट्यूट अक्टूबर माह के लिए अपने रोजगार आंकड़े जारी करने वाला है। बाजार विश्लेषकों की आम सहमति रोजगार सृजन में मामूली मंदी की उम्मीद कर रही है। आंकड़ों के अनुसार सितंबर में निजी क्षेत्र में 90 हजार नई नौकरियां जुड़ी थीं, जबकि अक्टूबर के लिए एडीपी रोजगार परिवर्तन में इसके घटकर 69 हजार रहने का अनुमान लगाया गया है। इस आंकड़े से अमेरिकी श्रम बाजार की वास्तविक मजबूती और आर्थिक गति के संकेत मिलेंगे। इसका आप पर असर केंद्रीय बैंकों के फैसलों और वैश्विक चुनावी नतीजों से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में प्रत्यक्ष बदलाव आ रहा है। • विदेशी मुद्रा कारोबार: पोलैंड की मुद्रा में कमजोरी का जोखिम बढ़ गया है। यदि आप यूरोप में आयात-निर्यात या यात्रा की योजना बना रहे हैं तो मुद्रा दरों में उतार-चढ़ाव पर नजर रखें। • सोने के खरीदार: वैश्विक स्तर पर सोना 4,050 डॉलर के करीब पहुंच रहा है। आने वाले दिनों में स्थानीय स्तर पर भी सोने के आभूषणों और निवेश उत्पादों के दाम चढ़ सकते हैं। • क्रिप्टो निवेशक: बिटकॉइन 78,000 डॉलर के पार जाने से डिजिटल परिसंपत्तियों में तेजी का रुख है। बाजार में जोखिम की धारणा सुधरने से अल्पावधि में पोर्टफोलियो मूल्य में सुधार देखने को मिल सकता है। • वैश्विक आर्थिक रुझान: अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और रोजगार में मंदी के संकेत वैश्विक नीतिगत दरों को प्रभावित करेंगे। इसका सीधा असर विकासशील देशों की मुद्राओं और पूंजी प्रवाह पर पड़ता है। ऐसा क्यों हुआ पोलैंड में ब्याज दर ठहराव की संभावना और वैश्विक बाजारों में हलचल कई नीतिगत और राजनीतिक कारणों से प्रेरित है। • अस्थायी टैक्स कटौती का प्रभाव: पोलैंड सरकार ने ईंधन पर वैट को 23 प्रतिशत से घटाकर 8 प्रतिशत और एक्साइज ड्यूटी को न्यूनतम स्तर पर किया था। इस नीतिगत राहत की वजह से अक्टूबर में पैसेंजर ईंधन 9.7 प्रतिशत सस्ता हुआ और मुद्रास्फीति घटकर 3.5 प्रतिशत दिख रही है। • केंद्रीय बैंक का सतर्क रुख: नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड गिरती हुई हेडलाइन महंगाई के आधार पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी से बच रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि प्रशासनिक हस्तक्षेप समाप्त होते ही वास्तविक मुद्रास्फीति का दबाव पुनः सामने आ सकता है। • अमेरिकी चुनाव की अनिश्चितता: अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में हाउस और सीनेट में डेमोक्रेट्स की जीत से वॉशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध की आशंका पैदा हुई है। इस अनिश्चितता ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स को नीचे धकेल दिया और डॉलर में भारी बिकवाली शुरू कर दी। सवाल-जवाब 1. नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड की बेस रेट को लेकर क्या अनुमान है? बाजार के लगभग सभी विश्लेषकों का अनुमान है कि एनबीपी अपनी बेस रेट को 3.75 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखेगा। 2. पोलैंड में अक्टूबर महीने की मुद्रास्फीति में गिरावट की क्या वजह रही? ईंधन पर वैट 23% से घटाकर 8% करने और एक्साइज ड्यूटी कम करने से पैसेंजर ईंधन 9.7% सस्ता हुआ, जिससे मुद्रास्फीति 3.5% पर आ गई। 3. विश्लेषक पोलिश ज़्लॉटी पर दबाव की बात क्यों कर रहे हैं? कमर्शबैंक के अनुसार अस्थायी टैक्स कटौती को वास्तविक डिफ्लेशन मानकर दरें न बढ़ाना एनबीपी को नीतिगत रूप से पीछे छोड़ सकता है। 4. अमेरिकी डॉलर में गिरावट का प्रमुख कारण क्या रहा? अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के शुरुआती नतीजों से उपजी राजनीतिक अनिश्चितता और बॉन्ड यील्ड्स में कमी ने डॉलर पर भारी दबाव बनाया। 5. सोने और बिटकॉइन की कीमतों में क्या रुझान देखा गया? सोना लगभग 4,050 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया, जबकि बिटकॉइन 78,000 डॉलर के स्तर के ऊपर कारोबार करता नजर आया। 6. अक्टूबर के लिए निजी क्षेत्र के रोजगार को लेकर क्या अनुमान है? एडीपी रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर में निजी क्षेत्र में 69 हजार नई नौकरियां जुड़ने का अनुमान है, जो सितंबर के 90 हजार से कम है। https://trendkia.com/market/national-bank-of-poland-ke-snbhavita-byaja-dara-thaharava-se-zloty-para-dabava-ke-snketa-56460 TrendKia — Har trend, sabse pehle.