# नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बीच भारतीय शेयर बाजार में निचले स्तरों से तेज सुधार

> रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी और रुख बदलने के बावजूद दलाल स्ट्रीट में निचले स्तरों से रिकवरी देखने को मिली।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/nitigata-byaja-daron-men-barhotari-ke-bicha-indian-stock-market-men-nichale-staron-se-teja-sudhara-44401 · **Language:** Hindi
**Tags:** आरबीआई, सेंसेक्स, निफ्टी, रेपो रेट, शेयर बाजार, मौद्रिक नीति

रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि की घोषणा के बाद भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। मौद्रिक नीति समिति के फैसले से पहले बिकवाली के दबाव में आए प्रमुख सूचकांकों ने बाद में अपने निचले स्तरों से उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया। जब रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अपना वक्तव्य शुरू किया, तब अनिश्चितता के कारण सेंसेक्स करीब 450 अंक फिसल गया था। हालांकि नीतिगत निर्णय स्पष्ट होने और अनिश्चितता का बादल छंटने के बाद निवेशकों ने निकासी करने के बजाय खरीदारी का रुख अपनाया। बाजार पहले ही ब्याज दरों में इस वृद्धि की संभावना को भांप चुका था, जिसके चलते बाजार में बड़ी गिरावट टल गई और बिकवाली की रफ्तार सुस्त पड़ गई।

## प्रमुख सूचकांकों की स्थिति और शुरुआती उतार-चढ़ाव
सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 72,520.73 के निचले स्तर तक चला गया था, जो ठीक उसी समय दर्ज हुआ जब रिजर्व बैंक के गवर्नर नीतिगत फैसलों की घोषणा के लिए मंच पर आए थे। इसके बाद बाजार संभला और सेंसेक्स 294.69 अंक अथवा 0.40 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,773.12 पर कारोबार करता नजर आया। निफ्टी में भी बिल्कुल इसी तरह का उतार-चढ़ाव देखा गया। 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 22,578.25 के दिन के निचले स्तर को छूने के बाद रिकवर होकर 128.05 अंक या 0.6 प्रतिशत की नरमी के साथ 22,648.05 के स्तर पर पहुंचा।

## बैंकिंग शेयरों में मजबूती और ऑटो व मेटल में दबाव
बाजार के विभिन्न क्षेत्रों में रुझान बंटा हुआ रहा। बैंकिंग शेयरों ने बाजार को संभालने में सबसे अहम भूमिका निभाई। कोटक बैंक में दो प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि बजाज फाइनेंस, एसबीआई और एक्सिस बैंक सेंसेक्स में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले शेयरों में शामिल रहे। हालांकि सोने से जुड़ी कंपनियों, रक्षा क्षेत्र, ऑटो और मेटल शेयरों में आई तेज बिकवाली की वजह से तेजी के खरीदार पूरे बाजार को हरे निशान में लाने में कामयाब नहीं हो सके।

टाइटन के शेयर में चार प्रतिशत की भारी गिरावट आई, जबकि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स दो प्रतिशत टूटा। एशियन पेंट्स के शेयरों में 1.5 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। वाहन निर्माता कंपनियों में एमएंडएम 1.5 प्रतिशत और मारुति सुजुकी एक प्रतिशत नीचे फिसले। इसी तरह ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील माने जाने वाले अन्य शेयरों जैसे अल्ट्राटेक सीमेंट और टाटा स्टील में भी एक-एक प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।

## विभिन्न सेक्टोरल सूचकांकों का प्रदर्शन
सूचकांकों के स्तर पर निफ्टी बैंक 55,153.00 के आसपास स्थिर कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज सूचकांक फिसलकर 24,898 के करीब आ गया। व्यापक बाजार में निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में उछाल दर्ज हुआ, लेकिन निफ्टी मिडकैप सूचकांकों को बिकवाली के दबाव का सामना करना पड़ा।

क्षेत्रीय सूचकांकों की बात करें तो निफ्टी ऑटो 1.5 प्रतिशत टूटकर 25,163.10 के आसपास आ गया। निफ्टी मेटल में भी 1.5 प्रतिशत की समान गिरावट दर्ज हुई और यह 12,411.70 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी एफएमसीजी और निफ्टी रियल्टी सूचकांकों में एक-एक प्रतिशत की गिरावट देखी गई। इसके विपरीत, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी प्राइवेट बैंक दोनों ही बढ़त के साथ कारोबार करते रहे।

## बाजार विश्लेषकों का नजरिया
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी के विजयकुमार का मानना है कि नीतिगत दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी तय थी और बाजार पहले ही इसे मानकर चल रहा था। उनके अनुसार बाजार के लिए असली पहेली मौद्रिक रुख और विकास दर तथा मुद्रास्फीति के उभरते संतुलन पर केंद्रीय बैंक का दृष्टिकोण था। इसी कारण से नीतिगत नतीजों पर बाजार की प्रतिक्रिया मुख्य रूप से उभरते परिदृश्य पर गवर्नर की टिप्पणियों से तय हुई।

च्वाइस इंटरनेशनल के सीईओ अरुण पोद्दार ने कहा कि दर वृद्धि मजबूत विकास के बीच उभरते मुद्रास्फीति के दबावों के प्रति एक नपा-तुला कदम है। उनके मुताबिक रुख में बदलाव यह भी दिखाता है कि केंद्रीय बैंक घरेलू और वैश्विक जोखिमों, विशेष रूप से कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मुद्रास्फीति पर उनके संभावित प्रभाव पर पूरी नजर बनाए हुए है। पोद्दार ने रेखांकित किया कि दर वृद्धि वित्तीय स्थितियों में कुछ अल्पकालिक सख्ती ला सकती है, लेकिन भारत की बुनियादी आर्थिक मजबूती बरकरार है। उन्होंने कहा कि इक्विटी बाजारों के लिए अब सारा ध्यान मुद्रास्फीति की दिशा, नकदी की स्थिति और ब्याज दरों के माहौल पर रहेगा। रिजर्व बैंक का नपा-तुला और आंकड़ों पर आधारित दृष्टिकोण मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने के साथ-साथ टिकाऊ आर्थिक वृद्धि का समर्थन करने में महत्वपूर्ण होगा।

## नीतिगत दरों में बदलाव और रुख में सख्ती
गहन समीक्षा के बाद रिजर्व बैंक ने नीतिगत रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.25 प्रतिशत से 5.50 प्रतिशत कर दिया। इसके अतिरिक्त स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी दर को संशोधित कर 5.25 प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी दर तथा बैंक दर को 5.75 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। मौद्रिक नीति समिति ने अक्टूबर 2018 के बाद पहली बार अपने नीतिगत रुख को बदलकर नपी-तुली सख्ती करने का फैसला किया। उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक ने फरवरी 2023 के बाद पहली बार नीतिगत दरों में इजाफा किया है।

## वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और भू-राजनीतिक चुनौतियां
रिजर्व बैंक के अनुसार अगस्त 2026 में हुई पिछली मौद्रिक नीति समिति बैठक के बाद से पश्चिम एशिया में संघर्ष फिर से भड़कने और कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी अस्थिरता ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को अनिश्चितता में डाल रखा है। वैश्विक वृद्धि में लचीलापन जरूर दिखा है, लेकिन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई के तेज होने से मौद्रिक नीति को सख्त बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने सितंबर में दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी। फेड के वक्तव्यों और प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा दरों को सख्त किए जाने से वैश्विक नीतिगत दरों के ऊंचे रहने की संभावना मजबूत हुई है।

प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में वित्तीय स्थिरता से जुड़ी चिंताओं और सख्त वित्तीय परिस्थितियों के कारण वैश्विक बॉन्ड यील्ड रिकॉर्ड ऊंचाई पर बनी हुई है। पश्चिम एशिया संघर्ष का कोई समाधान सामने न आने से वैश्विक परिदृश्य के लिए कई नकारात्मक जोखिम बने हुए हैं, जिनमें वित्तीय स्थितियों का और सख्त होना, एआई से जुड़ी संपत्तियों का ऊंचा मूल्यांकन और भारी सार्वजनिक कर्ज शामिल हैं।

## गवर्नर का आर्थिक आकलन
रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि सितंबर में पश्चिम एशिया संघर्ष के अचानक तेज होने और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आई मजबूती तथा उतार-चढ़ाव ने आर्थिक धारणाओं को कमजोर किया और वित्तीय बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी। गवर्नर ने स्पष्ट किया कि वैश्विक वृद्धि मजबूत रहने के बावजूद पिछले वर्ष की तुलना में 2026 में इसके धीमे पड़ने का अनुमान है।

गवर्नर ने यह भी कहा कि ऊर्जा की बढ़ती लागत और खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतों के कारण वैश्विक मुद्रास्फीति में तेज वृद्धि का अनुमान है, जिसने प्रमुख केंद्रीय बैंकों को मौद्रिक नीतियों को कड़ा करने के लिए प्रेरित किया है। व्यापारिक अनिश्चितता, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ती बॉन्ड यील्ड और मजबूत होते अमेरिकी डॉलर ने वैश्विक वित्तीय बाजार की धारणा को नाजुक बना रखा है। वित्तीय स्थितियों की सख्ती, एआई शेयरों के उचित मूल्यांकन को लेकर अनिश्चितता और पश्चिम एशिया संकट के न सुलझने जैसे कारक वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के लिए जोखिम खड़े कर रहे हैं।

## इसका आप पर असर
रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी करने से आम नागरिकों के कर्ज और निवेश पर सीधा असर पड़ेगा।

- **कर्ज की लागत:** रेपो दर 5.50 प्रतिशत होने से बैंकों के होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है। कर्जदारों की मासिक किस्त (ईएमआई) का बोझ बढ़ेगा या कर्ज की कुल अवधि लंबी हो जाएगी।
- **फिक्स्ड डिपॉजिट:** बैंकों में जमा पूंजी पर मिलने वाले रिटर्न में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है। फिक्स्ड डिपॉजिट और बचत खातों पर ग्राहकों को थोड़ा अधिक ब्याज मिलने की उम्मीद है।
- **शेयर बाजार के निवेशक:** ऑटो, रियल्टी और मेटल जैसे ब्याज दर संवेदनशील क्षेत्रों में अल्पावधि में दबाव बना रह सकता है। वहीं मजबूत बैलेंस शीट वाले बैंकिंग शेयरों में स्थिरता बनी रहने की संभावना है।
- **आर्थिक योजना:** नया बड़ा कर्ज लेने की योजना बना रहे ग्राहकों को उच्च ब्याज दरों के लिए तैयार रहना होगा। मौजूदा कर्जदारों को अपने कर्ज को समय से पहले चुकाने या पुनर्गठन करने पर विचार करना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
रिजर्व बैंक ने वैश्विक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और उभरती महंगाई पर लगाम लगाने के लिए रेपो दर में वृद्धि की है।

- **कच्चे तेल में उछाल:** सितंबर 2026 में पश्चिम एशिया में संघर्ष दोबारा भड़कने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता और तेजी आई है। ऊर्जा की बढ़ती लागत घरेलू मुद्रास्फीति को बढ़ाने का प्रमुख कारक बन रही है।
- **वैश्विक केंद्रीय बैंकों की सख्ती:** अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने सितंबर में दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी और प्रमुख केंद्रीय बैंक भी सख्त रुख अपनाए हुए हैं। वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर से मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ा है।
- **रुख में बदलाव:** अक्टूबर 2018 के बाद पहली बार मौद्रिक रुख को नपी-तुली सख्ती में बदला गया है ताकि भविष्य के जोखिमों को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। फरवरी 2023 के बाद पहली बार नीतिगत दरें बढ़ाकर मांग जनित महंगाई को रोकने का प्रयास किया गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. रिजर्व बैंक ने नीतिगत रेपो दर में कितनी बढ़ोतरी की है?
रिजर्व बैंक ने नीतिगत रेपो दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की है, जिससे यह 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गई है।

### 2. रिजर्व बैंक ने पिछली बार नीतिगत दरों में कब बढ़ोतरी की थी?
रिजर्व बैंक ने इससे पहले आखिरी बार फरवरी 2023 में नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी की थी।

### 3. मौद्रिक नीति समिति ने अपने नीतिगत रुख में क्या बदलाव किया है?
मौद्रिक नीति समिति ने अक्टूबर 2018 के बाद पहली बार अपने रुख को बदलकर नपी-तुली सख्ती कर दिया है।

### 4. एसडीएफ और एमएसएफ की नई दरें क्या तय की गई हैं?
स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी दर को 5.25 प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी दर तथा बैंक दर को 5.75 प्रतिशत निर्धारित किया गया है।

### 5. दर बढ़ोतरी के बाद सेंसेक्स और निफ्टी का क्या रुख रहा?
शुरुआती गिरावट के बाद सेंसेक्स सुधरकर 72,773.12 पर और निफ्टी रिकवर होकर 22,648.05 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।

### 6. बाजार में किन शेयरों ने सबसे मजबूत प्रदर्शन किया?
बैंकिंग शेयरों में कोटक बैंक दो प्रतिशत चढ़ा, जबकि बजाज फाइनेंस, एसबीआई और एक्सिस बैंक सेंसेक्स के शीर्ष लाभ कमाने वाले शेयरों में रहे।

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