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  "type": "article",
  "title": "नोमुरा के अनुसार 2027 की शुरुआत में ब्याज दर बढ़ा सकता है रिक्सबैंक, अमेरिकी ट्रेजरी की घोषणा से वैश्विक बाजारों में तेजी",
  "summary": "नोमुरा के ताजा विश्लेषण के अनुसार स्वीडन का केंद्रीय बैंक रिक्सबैंक वर्ष 2027 की पहली तिमाही में ब्याज दरें बढ़ा सकता है। वहीं, अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा बॉन्ड बायबैक दोगुना करने के फैसले से बिटकॉइन, यूरो और पौंड में जोरदार तेजी देखी जा रही है।",
  "content": "वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस समय दो बड़ी आर्थिक घटनाओं पर निवेशकों और विश्लेषकों की कड़ी नजर बनी हुई है। एक ओर जहां जापानी वित्तीय दिग्गज नोमुरा के विश्लेषकों ने स्वीडन के केंद्रीय बैंक रिक्सबैंक द्वारा वर्ष 2027 की शुरुआत में ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने का नया अनुमान पेश किया है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा अपने बॉन्ड बायबैक कार्यक्रम का आकार अचानक दोगुना करने के फैसले ने दुनिया भर के संपत्ति बाजारों में नई तरलता और उत्साह भर दिया है। इन वैश्विक नीतिगत बदलावों और तरलता में सुधार के कारण विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (FX) से लेकर क्रिप्टोकरेंसी और कीमती धातुओं तक व्यापक उतार-चढ़ाव दर्ज किया जा रहा है।\n\n \n\nरिक्सबैंक की ब्याज दरों पर नोमुरा का विश्लेषण और महंगाई का दबाव\n नोमुरा के हालिया बाजार विश्लेषण पत्र के अनुसार, स्वीडन के केंद्रीय बैंक रिक्सबैंक का नीतिगत दर अनुमान, जो जून के आंकड़ों में चौथे 2026 की तिमाही तक 1.82 प्रतिशत पहुंचने का अनुमान जताया गया था, वह मार्च के पिछले पूर्वानुमान 1.77 प्रतिशत से अधिक है। इसके साथ ही, केंद्रीय बैंक के अनुमानों के मुताबिक चौथे 2027 की तिमाही तक यह दर बढ़कर 2.00 प्रतिशत पर पहुंच जाने की संभावना दर्शाई गई है। रिक्सबैंक के आधिकारिक मार्गदर्शन में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस वर्ष के अंत में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना अभी भी बनी हुई है। यद्यपि सीपीआईएफ (CPIF) हेडलाइन मुद्रास्फीति की दर फिलहाल निचले स्तर पर बनी हुई है, लेकिन हाल ही में आए अप्रत्याशित महंगाई के आंकड़ों ने नीति निर्माताओं को भविष्य में मुद्रास्फीति के ऊपर जाने वाले जोखिमों के प्रति अधिक सतर्क और सतर्क बना दिया है।\n\n नोमुरा के अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि ऊर्जा को छोड़कर सीपीआईएफ मुद्रास्फीति दर रिक्सबैंक के अपने नवीनतम पूर्वानुमान की तुलना में थोड़ा अधिक तेजी से बढ़ेगी। विश्लेषकों के अनुसार वर्ष 2027 की पहली तिमाही में यह वार्षिक आधार पर औसतन 1.2 प्रतिशत रहेगी, जिसके बाद वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में इसमें तेजी से उछाल आकर यह 2.4 प्रतिशत पर पहुंच सकती है। इस अचानक आई तेजी का मुख्य कारण अप्रैल 2026 में खाद्य पदार्थों पर वैट (VAT) की दरों को आधा किए जाने के बाद का बेस इफेक्ट माना जा रहा है, जो वार्षिक मुद्रास्फीति के आंकड़ों को ऊपर धकेलेगा।\n\n हालांकि रिक्सबैंक के नीति निर्माता आमतौर पर अस्थायी कर बदलावों और राजकोषीय उपायों के असर को नजरअंदाज करते हैं, लेकिन नोमुरा का मानना है कि लक्ष्य से अधिक मुद्रास्फीति की संभावना केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों में वृद्धि करने का अतिरिक्त आधार प्रदान करेगी। विशेष रूप से यदि स्वीडन की आर्थिक वृद्धि दर इसी तरह मजबूत बनी रहती है, तो यह कदम उठाना और अनिवार्य हो जाएगा। इसके बावजूद, नोमुरा ने इस बात पर कायम रहने का फैसला किया है कि चालू वर्ष 2026 के दौरान नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं होगा। चूंकि हेडलाइन मुद्रास्फीति वर्तमान में काफी निचले स्तर पर बनी हुई है, इसलिए नीति निर्माताओं द्वारा मौद्रिक नीति में दी जा रही राहत को जल्दबाजी में वापस लेने की संभावना नहीं दिखती।\n\n \n\nअमेरिकी ट्रेजरी ने बाजार लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए बॉन्ड बायबैक कार्यक्रम का दायरा बढ़ाया\n दूसरी ओर, अमेरिका के वित्तीय बाजार में एक बड़े कदम के तहत अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने बुधवार को अपने पूर्व-निर्धारित कैलेंडर से हटकर एक अहम नीतिगत घोषणा की। ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) के अनुसार दोपहर 12:32 बजे जारी की गई इस आधिकारिक विज्ञप्ति में ट्रेजरी विभाग ने जानकारी दी कि वह 10-वर्ष से 20-वर्ष और 20-वर्ष से 30-वर्ष वाले दीर्घकालिक सरकारी बॉन्ड क्षेत्रों में अपनी लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक गतिविधियों को कम से कम दोगुना करने जा रहा है।\n\n इस फैसले के तहत प्रति बायबैक ऑपरेशन की अधिकतम सीमा को पहले के $2 बिलियन से बढ़ाकर कम से कम $4 बिलियन प्रति ऑपरेशन कर दिया गया है। अमेरिकी ट्रेजरी का यह नया नियम 9 सितंबर से प्रभावी होगा और 4 नवंबर तक निरंतर जारी रहेगा। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि निश्चित समय सीमा से बाहर जाकर लिया गया यह निर्णय अमेरिकी बॉन्ड बाजार में तरलता (लिक्विडिटी) के संकट को दूर करने और लंबी अवधि की प्रतिभूतियों में स्थिरता लाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, जिसने वैश्विक वित्तीय परिदृश्य पर तत्काल सकारात्मक प्रभाव दिखाया है।\n\n \n\nकमजोर होते अमेरिकी डॉलर से वैश्विक विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों की हलचल\n अमेरिकी ट्रेजरी के इस लिक्विडिटी सहायता कदम के बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर पर दबाव बढ़ता देखा गया, जिससे प्रमुख वैश्विक मुद्राओं को मजबूती मिली है। गुरुवार के यूरोपीय कारोबारी सत्र में ब्रिटिश पौंड (GBP/USD) अपने मई के उच्चतम स्तर के करीब पहुंचते हुए 1.3650 के आसपास कारोबार करता हुआ देखा गया। अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट का मुख्य कारण यह रहा कि निवेशक और ट्रेडर यह मूल्यांकन करने में लगे थे कि अमेरिकी सरकार की यह बॉन्ड बायबैक योजना बाजार की दिशा बदलने में कितनी बड़ी भूमिका निभा सकती है। इसके साथ ही, बाजार सहभागियों का ध्यान अब आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और मध्य पूर्व के राजनीतिक घटनाक्रमों पर केंद्रित है।\n\n इसी क्रम में, यूरो (EUR/USD) यूरोपीय सत्र में तीन महीने के अपने उच्चतम स्तर को पार करते हुए 1.1700 से ऊपर पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर में दोबारा शुरू हुई गिरावट के चलते यूरो ने अपनी तेजी की रफ्तार को फिर से हासिल किया है। विदेशी मुद्रा बाजार अब अमेरिका के आने वाले बेरोजगार दावों (Jobless Claims) के आंकड़ों पर टकटकी लगाए हुए है, जबकि ईरान से जुड़ी भू-राजनीतिक चिंताओं का असर भी बाजार में बना हुआ है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने (Gold) की कीमतों में हल्की इंट्राडे गिरावट दर्ज की गई और यह $4,500 प्रति औंस के स्तर से नीचे बना रहा। डॉलर के तीन महीने के निचले स्तर की तरफ लुढ़कने के बावजूद सोने में तेजी सीमित रही, क्योंकि निवेशक मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सतर्क रुख अपना रहे हैं।\n\n \n\nबिटकॉइन का $72,000 के करीब पहुंचना और क्रिप्टो मार्केट में शॉर्ट स्क्वीज\n अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा ऋण बायबैक अभियानों को दोगुना करने के फैसले का सबसे प्रत्यक्ष और सकारात्मक प्रभाव क्रिप्टोकरेंसी बाजार पर देखा गया। गुरुवार को बिटकॉइन (Bitcoin) की कीमतों में लगातार विस्तार होता नजर आया और यह $72,000 के स्तर के बेहद करीब पहुंच गया। अमेरिका द्वारा बाजार में नकदी और लिक्विडिटी बढ़ाने के इस कदम ने डिजिटल एसेट सेक्टर में निवेशकों के जोखिम उठाने की क्षमता और बाजार की धारणा को अत्यधिक मजबूत किया है।\n\n वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि ट्रेजरी के इस निर्णय ने न केवल लिक्विडिटी की स्थितियों में सुधार किया, बल्कि डेरिवेटिव्स बाजार में भारी शॉर्ट स्क्वीज (Short Squeeze) को भी जन्म दिया। जिन ट्रेडर्स ने बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टो परिसंपत्तियों में गिरावट पर दांव लगा रखा था, उन्हें अपनी पोजीशन को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे खरीदारी का अतिरिक्त दबाव बना। इस घटनाक्रम ने पूरे क्रिप्टो बाजार के लिए एक मजबूत और सकारात्मक उत्प्रेरक का काम किया है, जिससे आने वाले समय में डिजिटल संपत्तियों में तेजी बने रहने की उम्मीद की जा रही है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा डॉलर लिक्विडिटी बढ़ाए जाने से वैश्विक बाजारों में सुधार होगा, जिससे भारतीय शेयर बाजारों और विदेशी संस्थागत निवेश (FII) प्रवाह को समर्थन मिल सकता है।\n\nवैश्विक स्तर पर: स्वीडन में संभावित ब्याज दर वृद्धि और अमेरिकी बॉन्ड बायबैक से अंतरराष्ट्रीय निवेशकों, क्रिप्टो ट्रेडर्स और फॉरेक्स बाजार के कारोबारियों को नए अवसर और उतार-चढ़ाव देखने को मिलेंगे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. नोमुरा के अनुसार रिक्सबैंक कब ब्याज दरें बढ़ा सकता है?\nनोमुरा का अनुमान है कि स्वीडन का केंद्रीय बैंक रिक्सबैंक 2027 की पहली तिमाही (Q1 2027) में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।\n\n2. अमेरिकी ट्रेजरी ने बॉन्ड बायबैक के लिए क्या नया नियम जारी किया है?\nअमेरिकी ट्रेजरी ने 10 से 20 साल और 20 से 30 साल की परिपक्वता वाले बॉन्ड के लिए बायबैक सीमा को $2 बिलियन से बढ़ाकर कम से कम $4 बिलियन प्रति ऑपरेशन कर दिया है, जो 9 सितंबर से 4 नवंबर तक लागू रहेगा।\n\n3. अमेरिकी ट्रेजरी की घोषणा का क्रिप्टो बाजार और बिटकॉइन पर क्या प्रभाव पड़ा?\nट्रेजरी द्वारा लिक्विडिटी बढ़ाए जाने से क्रिप्टो बाजार में सकारात्मक भावना बनी, जिससे शॉर्ट स्क्वीज हुआ और बिटकॉइन की कीमत $72,000 के करीब पहुंच गई।\n\n4. यूरो और पौंड का अमेरिकी डॉलर के मुकाबले क्या रुख रहा?\nडॉलर में गिरावट के चलते यूरो (EUR/USD) तीन महीने के उच्चतम स्तर 1.1700 से ऊपर चला गया और ब्रिटिश पौंड (GBP/USD) मई के उच्चतम स्तर के पास 1.3650 पर पहुंच गया।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-08-20",
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