# नॉर्जेस बैंक ने नीतिगत दर बढ़ाकर 4.5% की, वैश्विक केंद्रीय बैंकों के फैसलों और ट्रंप-शी बैठक पर बाजार की नजर

> नॉर्जेस बैंक ने अपनी नीतिगत ब्याज दर 25 आधार अंक बढ़ाकर 4.5 प्रतिशत कर दी है और 2028 से पहले दरों में कटौती की संभावना से इनकार किया है। इस बीच, बैंक ऑफ जापान की दर वृद्धि और आगामी ट्रंप-शी बैठक के कारण वैश्विक मुद्राओं और सोने की कीमतों में हलचल जारी है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/norges-bank-ne-nitigata-dara-barhakara-4-5-ki-vaishvika-kendriya-bainkon-ke-phaisalon-aura-donald-trump-xi-jinping-baithaka-para-b-37804 · **Language:** Hindi
**Tags:** नॉर्जेस बैंक, ब्याज दरें, बैंक ऑफ जापान, स्विस नेशनल बैंक, सोना, विदेशी मुद्रा बाजार, डोनाल्ड ट्रंप, शी जिनपिंग

वैश्विक वित्तीय बाजारों में केंद्रीय बैंकों की सख्त मौद्रिक नीतियों और अहम भू-राजनीतिक वार्ताओं के बीच व्यापक हलचल देखी जा रही है। नॉर्वे के केंद्रीय बैंक, नॉर्जेस बैंक ने अपनी नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी करते हुए इसे 4.5 प्रतिशत तक पहुंचा दिया है। इसके साथ ही बैंक ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आने वाले अगले छह महीनों के दौरान ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी होने की लगभग 40 प्रतिशत संभावना बनी हुई है। केंद्रीय बैंक के ताजा रुख से यह साफ जाहिर होता है कि ब्याज दरें लंबे समय तक अपने मौजूदा उच्च स्तरों के आसपास ही स्थिर रहेंगी और जब भी दरों में कटौती की शुरुआत होगी, वह काफी सीमित रहने वाली है। अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2028 से पहले किसी भी प्रकार की दर कटौती की उम्मीद नहीं की जा रही है। नॉर्जेस बैंक ने आर्थिक वृद्धि दर करीब 1 प्रतिशत रहने की संभावना जताई है, जो सामान्य क्षमता से मामूली रूप से कम है, जबकि बेरोजगारी दर में मामूली वृद्धि दर्ज होने का अनुमान व्यक्त किया गया है।

## बैंक ऑफ जापान की सख्ती और स्विस नेशनल बैंक का रुख
एशियाई बाजारों में केंद्रीय बैंकों की कार्रवाई ने निवेशकों का ध्यान मजबूती से अपनी ओर खींचा है। बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने अल्पकालिक नीतिगत ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। नीति निर्धारण समिति में यह फैसला 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो पिछले कई हफ्तों से बाजार की आम सहमति और अपेक्षाओं के बिल्कुल अनुरूप रहा। इस निर्णय के बाद जापानी बॉन्ड प्रतिफल में तेज उछाल देखा गया, जिससे संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम के बीच जापानी येन को सहारा मिला।

दूसरी तरफ, यूरोप में स्विस नेशनल बैंक ने वित्तीय विश्लेषकों के अनुमानों के मुताबिक अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों को 0 प्रतिशत के स्तर पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। स्विस नेशनल बैंक के मौद्रिक नीति मूल्यांकन के प्रमुख बिंदुओं के अनुसार, बैंक में वाणिज्यिक बैंकों द्वारा रखी जाने वाली दृष्टि जमा राशि पर एक निश्चित सीमा तक नीतिगत दर के हिसाब से ब्याज दिया जाएगा। केंद्रीय बैंक ने वर्ष 2026 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान बढ़ाकर 0.7 प्रतिशत कर दिया है, जो इसके पूर्व अनुमान 0.6 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है। स्विस अर्थव्यवस्था के परिदृश्य के लिए सबसे बड़ा जोखिम वैश्विक अर्थव्यवस्था के घटनाक्रमों से जुड़ा हुआ बताया गया है।

## मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और ऑस्ट्रेलियाई आंकड़ों का असर
विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) जोड़ी 0.7000 के स्तर की ओर फिसलती दिखाई दी। ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर यह दबाव अगस्त महीने के रोजगार आंकड़ों के जारी होने के बाद बना। आंकड़ों के अनुसार ऑस्ट्रेलिया में बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि बाजार का पूर्वानुमान 4.5 प्रतिशत का था। हालांकि, रोजगार परिवर्तन के आंकड़ों ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया और नई नौकरियों की संख्या 39,500 दर्ज की गई।

इसी कारोबारी सत्र के दौरान डॉलर बनाम येन (USD/JPY) जोड़ी अपने तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर से फिसलकर 158.00 के करीब नुकसान दर्ज करती हुई दिखाई दी। अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल में आई मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आक्रामक नीति बनाए रखने के बढ़ते दावों ने ग्रीनबैक को दो महीने के उच्च स्तर पर संभाले रखा, जबकि जापानी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने येन के नुकसान को सीमित किया।

## ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन से पहले सोने में गिरावट
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों पर लगातार दूसरे दिन नकारात्मक दबाव बना रहा। यूरोपीय कारोबारी सत्र के पहले भाग के दौरान सोना 4,300 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे कारोबार करता हुआ एक सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया। निवेशकों की नजरें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली अत्यंत महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक पर टिकी हुई हैं।

इस उच्च स्तरीय बैठक से किसी बड़े समझौते या घोषणा की उम्मीदें काफी कम हैं। इसके बावजूद वित्तीय बाजारों के प्रतिभागी दुर्लभ धातुओं (दुर्लभ पृथ्वी खनिजों), प्रौद्योगिकी प्रतिबंधों और अमेरिका व चीन के बीच मौजूदा संघर्ष विराम समझौते को आगे बढ़ाए जाने से जुड़े किसी भी नए घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण कारोबारी फिलहाल बड़ी जोखिम भरी पोजीशन लेने से बच रहे हैं।

## इसका आप पर असर
केंद्रीय बैंकों की सख्त मौद्रिक नीतियों और वैश्विक भू-राजनीतिक वार्ताओं से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, मुद्रा विनिमय और निवेश पर सीधा असर पड़ेगा।

- **मुद्रा और विनिमय दर:** अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं में उतार-चढ़ाव जारी रहने से डॉलर और अन्य विदेशी मुद्राओं में लेनदेन करने वालों की लागत प्रभावित होगी। आयातकों और विदेश यात्रा करने वालों को बदलती दरों पर नजर रखनी होगी।
- **सोने के निवेशक:** सोने के 4,300 डॉलर के स्तर से नीचे आने से बहुमूल्य धातुओं में निवेश करने वालों के लिए सतर्कता का माहौल बना है। ट्रंप और शी जिनपिंग की वार्ता के नतीजों के बाद ही सोने की कीमतों की नई दिशा तय होगी।
- **वैश्विक उधारी लागत:** कई केंद्रीय बैंकों द्वारा दरें ऊंची रखने या बढ़ाने से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में उधारी महंगी बनी रहेगी। इसका प्रभाव वैश्विक आर्थिक विस्तार और विदेशी पूंजी प्रवाह पर देखने को मिलेगा।
- **रोजगार और आर्थिक गति:** ऑस्ट्रेलिया में बेरोजगारी दर 4.6 प्रतिशत पहुंचने जैसे आंकड़े श्रम बाजार में सुस्ती का संकेत देते हैं। आर्थिक वृद्धि सुस्त रहने से वैश्विक स्तर पर नई नियुक्तियों और वेतन वृद्धि पर दबाव रह सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
केंद्रीय बैंकों की दर वृद्धि और परिसंपत्ति बाजारों में उतार-चढ़ाव मुद्रास्फीति नियंत्रण की प्राथमिकताओं और प्रमुख द्विपक्षीय बैठकों से उपजी अनिश्चितता के कारण सामने आए हैं।

- **मुद्रास्फीति का दबाव:** नॉर्जेस बैंक द्वारा दर बढ़ाकर 4.5 प्रतिशत करना और स्विस नेशनल बैंक द्वारा 2026 के महंगाई अनुमान को बढ़ाकर 0.7 प्रतिशत करना यह दर्शाता है कि मुद्रास्फीति को काबू में रखने की चुनौती पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। इसी वजह से केंद्रीय बैंक लंबे समय तक दरें उच्च स्तर पर बनाए रखने की रणनीति पर चल रहे हैं।
- **मौद्रिक नीति का सामान्यीकरण:** बैंक ऑफ जापान ने लंबे समय तक जारी रही अति-उदारवादी नीति को पीछे छोड़ते हुए नीतिगत दर को 1.25 प्रतिशत तक पहुंचाया है। यह कदम घरेलू बॉन्ड प्रतिफल में वृद्धि और नीति को सामान्य स्तर पर लाने की योजनाबद्ध रणनीति के तहत उठाया गया है।
- **शिखर सम्मेलन से पहले अनिश्चितता:** अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात से पहले सोने और प्रमुख मुद्राओं में सतर्कता का माहौल है। तकनीक प्रतिबंधों और दुर्लभ धातुओं के व्यापार पर किसी स्पष्ट सहमति के अभाव ने बाजार सहभागियों को जोखिम उठाने से रोका है।

## सवाल-जवाब

### 1. नॉर्जेस बैंक ने नीतिगत ब्याज दर कितनी बढ़ाई है?
नॉर्जेस बैंक ने अपनी नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि करके इसे 4.5 प्रतिशत कर दिया है।

### 2. नॉर्जेस बैंक के अनुसार ब्याज दरों में कटौती कब तक संभव नहीं है?
नॉर्जेस बैंक के पूर्वानुमान के अनुसार वर्ष 2028 से पहले ब्याज दरों में किसी प्रकार की कटौती की संभावना नहीं है।

### 3. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दर में क्या बदलाव किया?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर का लक्ष्य 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है।

### 4. स्विस नेशनल बैंक ने अपनी प्रमुख नीतिगत दर किस स्तर पर रखी है?
स्विस नेशनल बैंक ने अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर को 0 प्रतिशत के स्तर पर अपरिवर्तित रखा है।

### 5. सोने की कीमत किस महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आ गई है?
सोना यूरोपीय कारोबारी सत्र में कमजोर होकर 4,300 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा था।

### 6. ऑस्ट्रेलिया के ताजा रोजगार आंकड़ों में क्या सामने आया?
ऑस्ट्रेलिया की बेरोजगारी दर अगस्त में बढ़कर 4.6 प्रतिशत हो गई, जबकि 39,500 नए रोजगार जुड़े।

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