# नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के आईपीओ में मौजूदा निवेशकों ने बनाए रखा भरोसा, ओएफएस में उतारा बेहद सीमित हिस्सा

> नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के 22,569 करोड़ रुपये के सार्वजनिक निर्गम में संस्थागत भागीदारों ने अपनी मजबूत उपस्थिति बरकरार रखी है और ओएफएस में केवल 5.11 प्रतिशत शेयर ही बिक्री के लिए पेश किए हैं।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/nse-ke-maujuda-niveshakon-ne-banae-rakha-bharosa-ofs-men-utara-behada-simita-hissa-35963 · **Language:** Hindi
**Tags:** एनएसई आईपीओ, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, ओएफएस, संस्थागत निवेशक, शेयर बाजार, भारतीय अर्थव्यवस्था

देश के सबसे बड़े शेयर बाजार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के 22,569 करोड़ रुपये के विशाल सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के दौरान पुराने भागीदारों ने अपनी मिल्कियत छोड़ने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई। ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के जरिए शेयर बेचने की पेशकश के बावजूद इन शेयरधारकों ने अपनी पूंजी का एक बड़ा हिस्सा कंपनी के अंदर ही बनाए रखने का फैसला किया है। इस पूरी बिक्री प्रक्रिया में मुख्य रूप से बड़े संस्थागत निवेशक शामिल रहे, जिनके पास इस निर्गम की शुरुआत से पूर्व नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की 36.82 प्रतिशत संयुक्त हिस्सेदारी मौजूद थी। उन्होंने खुले बाजार में निकासी के लिए एक्सचेंज की कुल हिस्सेदारी में से मात्र 5.11 प्रतिशत के बराबर इक्विटी का त्याग किया है।

## विदेशी और घरेलू संस्थागत शेयरधारकों की संतुलित भागीदारी
इस सार्वजनिक पेशकश के तहत जो 20 संस्थागत इकाइयां अपने शेयर बेचने के लिए आगे आईं, उनमें 9 विदेशी संस्थागत निवेशक शामिल रहे। इस आईपीओ के आने से पहले इन विदेशी फंडों के पास नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की कुल 15.96 प्रतिशत शेयरधारिता थी। वहीं दूसरी तरफ घरेलू स्तर की 11 संस्थागत संस्थाओं ने भी इस निर्गम में हिस्सा लिया। इन घरेलू फर्मों के समूह में 10 सरकारी उपक्रमों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी शामिल रही, जिनके पास ओएफएस से पहले इस एक्सचेंज की 20.86 प्रतिशत इक्विटी थी। इन दोनों ही वर्गों के निवेशकों ने अपनी कुल जमा पूंजी में से केवल बहुत मामूली हिस्से की बिक्री की है।

## प्रमुख शेयरधारकों ने बेचे औसतन सात प्रतिशत शेयर
विभिन्न बड़े वित्तीय संस्थानों के ब्योरे पर नजर डालें तो अरांडा इन्वेस्टमेंट्स के पास इस पेशकश से पहले 4.54 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज थी। इसी तरह स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के पास 4.44 प्रतिशत, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स के पास 4.33 प्रतिशत और क्राइसकैपिटल के पास 3.73 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी। इन चारों दिग्गज कंपनियों ने अपनी-अपनी कुल होल्डिंग में से औसतन करीब 7 प्रतिशत शेयरों की ही बिक्री की है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि वे एक्सचेंज के भविष्य को लेकर लंबे समय के लिए आश्वस्त हैं।

## क्राउन कैपिटल की रणनीति और आंशिक पूंजी निकासी का मौका
विदेशी निवेशकों के पाले से क्राउन कैपिटल ने अपेक्षाकृत थोड़ा बड़ा हिस्सा बेचते हुए अपनी पूर्व हिस्सेदारी में से लगभग 11 प्रतिशत शेयर ओएफएस में पेश किए। इस तरह की चुनिंदा बिकवाली से यह स्पष्ट होता है कि पुराने निवेशकों ने इस विशाल निर्गम का उपयोग अपनी पूंजी का एक छोटा हिस्सा भुनाने के लिए किया, जबकि कंपनी के मुख्य मालिकाना ढांचे में उनकी गहरी भागीदारी पूर्ववत बनी हुई है।

## देश का दूसरा सबसे बड़ा निर्गम और बोली का अंतिम चरण
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की यह सार्वजनिक पेशकश अपने दूसरे दिन यानी शुक्रवार को ही निवेशकों की ओर से पूरी तरह स्वीकार कर ली गई थी और इसके सभी आरक्षित कोटे भर चुके थे। आज इस ऐतिहासिक पेशकश का आखिरी कारोबारी दिन निर्धारित है। भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में यह अब तक का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बन चुका है। इसने साल 2022 के दौरान आए भारतीय जीवन बीमा निगम के 21,000 करोड़ रुपये के निर्गम को पीछे छोड़ दिया है, जबकि पहले स्थान पर साल 2024 में आया हुंडई मोटर इंडिया का 27,870 करोड़ रुपये का विशाल निर्गम काबिज है।

## इसका आप पर असर
संस्थागत निवेशकों द्वारा अपनी अधिकांश हिस्सेदारी बरकरार रखने से यह संकेत मिलता है कि प्रमुख वित्तीय संस्थाएं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की दीर्घकालिक वृद्धि को लेकर आश्वस्त हैं।

- **बाजार स्थिरता:** मौजूदा शेयरधारकों द्वारा अपनी होल्डिंग का बड़ा हिस्सा बचाकर रखने से द्वितीयक बाजार में अतिरिक्त शेयरों का दबाव नहीं बढ़ेगा। इससे लिस्टिंग के बाद शेयर के मूल्य को संस्थागत समर्थन मिलने की संभावना मजबूत रहती है।
- **खुदरा निवेशक धारणा:** बड़े वैश्विक और घरेलू फंडों द्वारा केवल 5.11 प्रतिशत शेयर बेचना एक्सचेंज के वित्तीय स्वास्थ्य पर भरोसे को दर्शाता है। आम निवेशक इसे एक सुरक्षित और टिकाऊ सार्वजनिक निर्गम के संकेत के रूप में देख सकते हैं।
- **पूंजी बाजार विस्तार:** 22,569 करोड़ रुपये का यह बड़ा निर्गम भारतीय शेयर बाजार की गहराई को बढ़ाता है। इससे घरेलू एक्सचेंजों में तरलता और वैश्विक निवेशकों की भागीदारी को दीर्घकालिक बढ़ावा मिलेगा।
- **रिकॉर्ड आकार का प्रभाव:** देश के दूसरे सबसे बड़े आईपीओ के सफल समापन से आगामी बड़ी कंपनियों के लिए प्राथमिक बाजार से पूंजी जुटाने की राह सुगम होगी। यह अन्य गैर-सूचीबद्ध वित्तीय उपक्रमों को भी बाजार में उतरने के लिए प्रेरित करेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के मौजूदा शेयरधारकों ने बड़े पैमाने पर पूरी हिस्सेदारी बेचने के बजाय केवल आंशिक पूंजी भुनाने की रणनीति अपनाई है। इस संतुलित बिक्री के पीछे नियामक प्रक्रियाएं और संस्थागत मूल्यांकन की योजनाएं प्रमुख कारण रही हैं।

- **मूल्यांकन और भविष्य की बढ़त:** संस्थान एक्सचेंज की कारोबारी कमाई और भविष्य की बाजार हिस्सेदारी को लेकर सकारात्मक रुख रखते हैं। इसलिए उन्होंने अपनी पूरी पूंजी निकालने के बजाय केवल आवश्यक तरलता हासिल करने जितना हिस्सा ही बेचा।
- **निकासी का वैधानिक अवसर:** कई घरेलू उपक्रम और विदेशी फंड लंबे समय से इस एक्सचेंज में निवेशित रहे हैं। एक बड़े सार्वजनिक निर्गम ने उन्हें अपने निवेश का एक छोटा हिस्सा वास्तविक नकदी में बदलने की तय सुविधा उपलब्ध कराई।
- **नियामक और सार्वजनिक दायरा:** सार्वजनिक निर्गम की अनिवार्य शर्तों को पूरा करने के लिए एक्सचेंज को बाजार में न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता लानी थी। ओएफएस के जरिए 20 प्रमुख निवेशकों के मामूली शेयरों को जोड़कर इस जरूरी पूंजी आकार को आसानी से पूरा किया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के इस सार्वजनिक निर्गम का कुल आकार कितना है?
इस सार्वजनिक निर्गम का कुल आकार 22,569 करोड़ रुपये है, जो पूर्ण रूप से ऑफर फॉर सेल के रूप में लाया गया है।

### 2. ओएफएस में हिस्सा लेने वाले शेयरधारकों के पास पहले कितनी हिस्सेदारी थी?
बिक्री में शामिल संस्थागत शेयरधारकों के पास आईपीओ आने से पहले नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की 36.82 प्रतिशत संयुक्त हिस्सेदारी थी।

### 3. मौजूदा निवेशकों ने कुल कितने प्रतिशत शेयर बेचने की पेशकश की?
संस्थागत निवेशकों ने कुल हिस्सेदारी में से केवल 5.11 प्रतिशत के बराबर शेयर ही ओएफएस के तहत बिक्री के लिए पेश किए हैं।

### 4. ओएफएस में कितने विदेशी और घरेलू निवेशक शामिल हुए?
इस बिक्री में 9 विदेशी संस्थागत निवेशक और 11 घरेलू संस्थागत निवेशक शामिल हुए, जिनमें 10 सरकारी संस्थाएं और आईसीआईसीआई लोम्बार्ड शामिल हैं।

### 5. भारतीय बाजार के इतिहास में आकार के मामले में यह आईपीओ किस पायदान पर है?
यह हुंडई मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के निर्गम के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ है।

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