ओपनएआई के रेवेन्यू अनुमान में कटौती से टेक शेयरों में गिरावट, कच्चे तेल में नरमी के बीच फ्यूचर्स में बढ़त ओपनएआई की सालाना आय 70 अरब डॉलर के बजाय करीब 50 अरब डॉलर रहने की खबर से सेमीकंडक्टर और दिग्गज टेक शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। वहीं, कच्चे तेल में नरमी और ट्रेजरी यील्ड में गिरावट के दम पर अमेरिकी फ्यूचर्स और सोने में मजबूती दर्ज की गई। वैश्विक वित्तीय बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की विकास गति और कंपनियों के वास्तविक मूल्यांकन को लेकर नई बहस छिड़ गई है। अमेरिकी शेयर बाजारों में लगातार दूसरे दिन बिकवाली का दबाव देखा गया, जहां एसएंडपी 500 इंडेक्स 0.47 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। इस गिरावट की मुख्य वजह दिग्गज टेक कंपनियों का समूह मैग्निफिसेंट 7 रहा, जिसमें सामूहिक रूप से 0.95 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। ओपनएआई की अनुमानित सालाना आय को लेकर सामने आए ताजा आंकड़ों ने तकनीकी क्षेत्र के निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिसके चलते चिप और हार्डवेयर कंपनियों के शेयरों में भारी मुनाफावसूली दर्ज की गई। हालांकि, व्यापक बाजार का रुख इतना कमजोर नहीं था, क्योंकि सूचकांक के लगभग दो-तिहाई शेयरों ने बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। ओपनएआई की आय पर उठे सवाल और सेमीकंडक्टर शेयरों में गिरावट बाजार की इस हालिया गिरावट का तात्कालिक कारण ओपनएआई की सालाना आय से जुड़ा एक नया वित्तीय आकलन बना। पहले की चर्चाओं में कंपनी की वार्षिक रन-रेट रेवेन्यू लगभग 70 अरब डॉलर के आसपास आंकी जा रही थी, लेकिन नए आंकड़ों के अनुसार यह आंकड़ा 50 अरब डॉलर के करीब रहने का अनुमान है। इस अंतर ने उन निवेशकों को झकझोर दिया जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में तेज और अप्रत्याशित कमाई की उम्मीद लगाए बैठे थे। इस खुलासे का सबसे तीखा असर सेमीकंडक्टर क्षेत्र पर पड़ा। फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स में 3.39 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले तीन सप्ताह से अधिक समय में इसका सबसे खराब एकल-दिवसीय प्रदर्शन है। चिप निर्माता कंपनियों के मूल्यांकन सीधे तौर पर एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले खर्च से जुड़े हैं। जब बुनियादी सॉफ्टवेयर और मॉडल तैयार करने वाली अग्रणी कंपनी की आय उम्मीद से कम आंकी जाती है, तो इसका सीधा असर हार्डवेयर और सर्वर चिप्स की भविष्य की मांग पर पड़ने की आशंका पैदा हो जाती है। एशियाई बाजारों में मिलाजुला रुख और क्षेत्रीय प्रदर्शन वॉल स्ट्रीट की कमजोरी का असर एशियाई कारोबारी सत्र में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जहां विभिन्न देशों के शेयर बाजारों ने अलग-अलग दिशाओं में प्रतिक्रिया दी। जापान के निक्केई में 0.32 प्रतिशत की नरमी आई, जबकि चीन के मुख्य भूमि बाजारों में बिकवाली का दबाव अधिक गहरा रहा। शंघाई कंपोजिट इंडेक्स में 1.21 प्रतिशत की गिरावट देखी गई और सीएसआई 300 इंडेक्स 1.27 प्रतिशत फिसल गया। दक्षिण कोरिया के वित्तीय बाजार सार्वजनिक अवकाश के कारण बंद रहे, जिससे क्षेत्रीय वॉल्यूम पर भी असर पड़ा। इसके विपरीत, कुछ प्रमुख एशियाई केंद्रों में सकारात्मक रुझान भी देखने को मिला। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स विपरीत परिस्थितियों के बावजूद 1.09 प्रतिशत चढ़ने में सफल रहा। इसी तरह, ऑस्ट्रेलिया के एसएंडपी/एएसएक्स 200 ने 0.56 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की, जिसे जिंसों में स्थिरता और घरेलू बैंकिंग शेयरों से सहारा मिला। इस तरह के मिले-जुले प्रदर्शन से स्पष्ट है कि निवेशक पूरे क्षेत्र को एक समान नजरिए से देखने के बजाय चुनिंदा बाजारों में मौके तलाश रहे हैं। कच्चे तेल में नरमी से अमेरिकी और यूरोपीय फ्यूचर्स को राहत नकद बाजारों में गिरावट के बावजूद आगे के सत्रों के लिए संकेत बेहतर होते दिखाई दे रहे हैं। अमेरिकी और यूरोपीय इक्विटी फ्यूचर्स में सम्मानजनक सुधार के संकेत मिले हैं। एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में 0.30 प्रतिशत और जर्मनी के डैक्स फ्यूचर्स में 0.78 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इस सकारात्मक रुख का मुख्य आधार ऊर्जा बाजार में जारी सुस्ती है, जो मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने में सहायक मानी जाती है। कमोडिटी बाजार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, कच्चा तेल (CL=F) पिछले सत्र के 91.49 डॉलर के मुकाबले 0.90 प्रतिशत की गिरावट के साथ 90.67 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। 52 हफ्तों के दौरान 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर के दायरे में रहने वाला कच्चा तेल फिलहाल कमजोर वॉल्यूम और 48 के आरएसआई स्तर के साथ सीमित दायरे में बना हुआ है। तकनीकी मोर्चे पर 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 91.91 डॉलर और पिवट बिंदु 90.76 डॉलर पर स्थित है, जबकि तात्कालिक सपोर्ट 90.10 डॉलर और 89.54 डॉलर पर देखा जा रहा है। ऊर्जा की कीमतों में यह ठहराव कंपनियों के लागत ढांचे को राहत पहुंचा रहा है, जिससे इक्विटी फ्यूचर्स को समर्थन मिला है। मुद्रा बाजार में डॉलर पर दबाव, जापानी येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की स्थिति मुद्रा बाजार में अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में आई रातभर की गिरावट ने डॉलर इंडेक्स को अपने 18 महीने के उच्चतम स्तर से नीचे बनाए रखा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद ट्रेजरी यील्ड में कमी ने डॉलर के ऊपरी स्तरों पर लगाम लगाई है। इस पृष्ठभूमि में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) ने अपने साप्ताहिक निचले स्तर से वापसी करते हुए बढ़त को आगे बढ़ाया और शुक्रवार को एशियाई सत्र में 0.7000 के स्तर की ओर रुख किया। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ओर से ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की उम्मीदों ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को अतिरिक्त बल प्रदान किया है। दूसरी ओर, डॉलर/जापानी येन (USD/JPY) 158.00 के स्तर के आसपास बना रहा। जापान में घरेलू खर्च के आंकड़ों में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई, जिससे येन पर दबाव बना रहा, यद्यपि अमेरिकी डॉलर में जारी नरमी ने इस करेंसी जोड़ी की किसी भी तेज गिरावट को थामे रखा। सोने में लौटी चमक, सुरक्षित निवेश की तलाश अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने में खरीदारी का नया दौर शुरू हुआ है। पीली धातु ने मजबूती का प्रदर्शन करते हुए शुक्रवार को 4,200 डॉलर के स्तर को फिर से छू लिया, जो दो महीने के निचले स्तर से इसके निरंतर सुधार को दर्शाता है। डॉलर में कमजोरी, कच्चे तेल में नरमी और अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल में गिरावट ने सोने के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है। हालांकि, दैनिक आरएसआई इंडिकेटर अभी भी मंदी के रुख का संकेत दे रहा है, लेकिन आगामी अमेरिकी उपभोक्ता धारणा आंकड़ों से पहले निवेशकों की नजरें इस कीमती धातु पर टिकी हुई हैं। इसका आप पर असर वैश्विक टेक शेयरों में बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का सीधा असर भारतीय इक्विटी निवेशकों और घरेलू बजट पर पड़ेगा। • भारत में: कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से देश के आयात बिल और मुद्रास्फीति के दबाव में कमी आ सकती है। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता बने रहने की उम्मीद है, जिससे आम उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर राहत मिलेगी। • वैश्विक निवेशकों के लिए: ओपनएआई के रेवेन्यू अनुमान में कमी से एआई आधारित टेक शेयरों के वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ेगा। आईटी और चिप शेयरों में निवेश करने वाले ट्रेडर्स को अत्यधिक उच्च पी/ई अनुपातों के प्रति सतर्क रुख अपनाना चाहिए। • सोने के खरीदारों के लिए: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव 4,200 डॉलर के स्तर पर मजबूत बने रहने से घरेलू आभूषण बाजार में कीमतें स्थिर या ऊंची रह सकती हैं। शादी-विवाह या निवेश के लिए खरीदारी की योजना बना रहे लोगों को ताजा आर्थिक आंकड़ों तक रुककर खरीदारी करनी चाहिए। • करेंसी ट्रेडर्स के लिए: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट के चलते डॉलर में मजबूती पर विराम लगा है। विदेशी मुद्रा बाजार में कारोबार करने वालों के लिए डॉलर के मुकाबले प्रमुख मुद्राओं में उतार-चढ़ाव के नए अवसर बन रहे हैं। ऐसा क्यों हुआ ओपनएआई के रेवेन्यू पूर्वानुमान में कटौती और तकनीकी शेयरों में मुनाफावसूली ने शेयर बाजार में गिरावट पैदा की, जबकि कच्चे तेल में नरमी ने फ्यूचर्स को सहारा दिया। • एआई रेवेन्यू में बड़ा अंतर: वित्तीय आकलन में ओपनएआई की वार्षिक रन-रेट आय 70 अरब डॉलर के बजाय 50 अरब डॉलर के आसपास आंकी गई। इस 20 अरब डॉलर के अंतर ने बाजार में यह चिंता बढ़ा दी कि एआई कंपनियों की वास्तविक कमाई उनके ऊंचे वैल्यूएशन से मेल नहीं खा रही है। • सेमीकंडक्टर शेयरों पर असर: हार्डवेयर निर्माताओं की बिक्री सीधे तौर पर एआई डाटा सेंटरों के विस्तार पर निर्भर करती है। एआई सॉफ्टवेयर कंपनियों के रेवेन्यू में कमी के संकेतों से चिप बनाने वाली कंपनियों की भविष्य की मांग पर सवाल खड़े हो गए, जिससे फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 3.39 प्रतिशत गिर गया। • कच्चे तेल में नरमी: आपूर्ति और मांग के बदलते परिदृश्य के बीच कच्चे तेल के दाम 90.67 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल गए। ऊर्जा की कम लागत से कंपनियों के मार्जिन में सुधार और मुद्रास्फीति में कमी की उम्मीद जगी, जिससे इक्विटी फ्यूचर्स में रिकवरी देखने को मिली। सवाल-जवाब 1. एसएंडपी 500 में गिरावट की मुख्य वजह क्या रही? ओपनएआई के सालाना रेवेन्यू अनुमान में कमी आने की खबर के बाद मैग्निफिसेंट 7 और सेमीकंडक्टर शेयरों में तेज बिकवाली के चलते एसएंडपी 500 में गिरावट आई। 2. ओपनएआई के रेवेन्यू को लेकर क्या खबर सामने आई है? आंकड़ों के अनुसार ओपनएआई की वार्षिक रन-रेट आय करीब 50 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जो पहले के 70 अरब डॉलर के अनुमान से काफी कम है। 3. सेमीकंडक्टर शेयरों पर इसका क्या असर हुआ? फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स में 3.39 प्रतिशत की भारी गिरावट आई, जो पिछले तीन हफ्तों से अधिक समय का इसका सबसे खराब दिन रहा। 4. कच्चे तेल की वर्तमान कीमत क्या है? कच्चा तेल 0.90 प्रतिशत की गिरावट के साथ 90.67 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर कारोबार कर रहा है। 5. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का क्या स्तर है? सोने ने अपनी रिकवरी जारी रखते हुए 4,200 डॉलर प्रति औंस के स्तर को फिर से छू लिया है। https://trendkia.com/market/openai-ke-revenue-anumana-men-katauti-se-tech-sheyaron-men-giravata-crude-oil-men-narami-ke-bicha-futures-men-barhata-45291 TrendKia — Har trend, sabse pehle.