पश्चिम एशिया में गतिरोध से कच्चे तेल में उछाल, मासिक बढ़त की ओर डब्ल्यूटीआई वॉशिंगटन और तेहरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी गतिरोध के बीच डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल संभलकर 90 डॉलर के पार निकला है, जिससे यह महीने में करीब 5.5 प्रतिशत की बढ़त की ओर बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को फिर से मजबूती देखने को मिली है, जहां वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल पिछले कारोबारी सत्र की गिरावट से उबरते हुए 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है। भू-राजनीतिक मोर्चे पर वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जारी तनातनी ने आपूर्ति को लेकर जोखिम को केंद्र में बनाए रखा है, जिससे इस प्रमुख अमेरिकी बेंचमार्क को मासिक आधार पर करीब 5.5 प्रतिशत की बढ़त हासिल करने में मदद मिल रही है। हालांकि, खाड़ी देशों से निर्यात में सुधार और सऊदी अरब के वैकल्पिक पाइपलाइन संचालन से आपूर्ति से जुड़ी कुछ चिंताएं जरूर कम हुई हैं, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर ठोस नतीजे न निकलने से बाजार में जोखिम प्रीमियम पूरी तरह खत्म नहीं हो सका है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर वॉशिंगटन और तेहरान के बीच वार्ता का संकट ईरान ने इस बात की पुष्टि की है कि उसे होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह सुचारू करने के उद्देश्य से दिए गए अपने सात दिवसीय प्रस्ताव पर वॉशिंगटन का आधिकारिक जवाब मिल गया है। इससे पहले शुरुआती योजना को डोनाल्ड ट्रंप ने खारिज कर दिया था। इसके साथ ही तेहरान ने साफ संकेत दिए हैं कि वह अपनी प्राथमिक मांगों को लेकर कोई नरमी नहीं बरतेगा। इन मांगों में ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी को हटाना और फ्रीज की गई ईरानी वित्तीय संपत्तियों को जारी करना प्रमुख रूप से शामिल है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस पूरे घटनाक्रम में वॉशिंगटन से मिले उत्तर की समीक्षा तेहरान में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ करने वाले हैं। ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता आकार लेता है, तो तेल की कीमतों से भू-राजनीतिक प्रीमियम का एक बड़ा हिस्सा घट सकता है। इसके विपरीत, यदि यह गतिरोध लंबा खिंचता है, तो डब्ल्यूटीआई की कीमतों को ऊपरी स्तरों पर लगातार समर्थन मिलता रहेगा और कच्चे तेल में फिर से नया उछाल देखने को मिल सकता है। सऊदी आपूर्ति में सुधार और अमेरिकी भंडार से राहत के प्रयास अमेरिकी बेंचमार्क मंगलवार को 4 प्रतिशत से अधिक लुढ़क गया था, जो 4 सितंबर के बाद का इसका निचला स्तर था। उस समय आपूर्ति को लेकर डर कम होने से कीमतों पर तेज बिकवाली दबाव बना था। सऊदी अरब ने अपनी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन को दोबारा शुरू करने के बाद यानबू बंदरगाह पर तेल टैंकरों की लोडिंग फिर से आरंभ कर दी है। यह पाइपलाइन होर्मुज जलडमरूमध्य से अलग एक सुरक्षित वैकल्पिक समुद्री मार्ग प्रदान करती है। गोल्डमैन सैक्स के एक अनुमान के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल का निर्यात सुधरकर पिछले सप्ताह लगभग 2.33 करोड़ बैरल प्रतिदिन के स्तर तक पहुंच गया, जो मोटे तौर पर वर्ष 2025 के औसत स्तर के बराबर है। इसके अलावा, संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी बाजार में तरलता बनाए रखने और कीमतों को काबू में करने के लिए अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से 4 करोड़ बैरल तक तेल जारी करने की पेशकश की है। अमेरिकी इन्वेंट्री आंकड़ों में अप्रत्याशित बढ़त दूसरी तरफ, अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन यानी ईआईए द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सप्ताह अमेरिका में कच्चे तेल के व्यावसायिक भंडार में 9,22,000 बैरल की बढ़ोतरी दर्ज की गई। बाजार इस आंकड़े में लगभग 3,00,000 बैरल की कमी की उम्मीद कर रहा था। हालांकि, यह बढ़त उससे पिछले सप्ताह दर्ज की गई 29.69 लाख बैरल की विशाल बढ़ोतरी की तुलना में काफी कम रही है। कच्चे तेल के भौतिक बाजार में यह लगातार देखा गया है कि इन्वेंट्री में उतार-चढ़ाव मांग और आपूर्ति के संतुलन को दर्शाता है। जब भंडार में अचानक कमी आती है, तो यह मजबूत मांग का संकेत देकर कीमतों को चढ़ाता है, जबकि इन्वेंट्री में उम्मीद से अधिक इजाफा आपूर्ति बढ़ने की ओर इशारा करता है और बाजार में सुस्ती लाता है। डब्ल्यूटीआई का तकनीकी ढांचा और दैनिक चार्ट के संकेत दैनिक चार्ट पर डब्ल्यूटीआई अमेरिकी तेल अपने प्रमुख 50-दिवसीय, 100-दिवसीय और 200-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज यानी एसएमए से ऊपर बना हुआ है। इस महीने की शुरुआत में 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बाद आई गिरावट के बावजूद यह स्थिति तकनीकी रूप से एक सकारात्मक अंतर्निहित रुझान की ओर इशारा करती है। मोमेंटम इंडिकेटर्स की बात करें तो स्थिति थोड़ी सतर्कता भरी नजर आ रही है। दैनिक चार्ट पर 50-दिवसीय एसएमए 87.03 डॉलर, 100-दिवसीय एसएमए 84.78 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 81.27 डॉलर पर स्थित है, जो किसी भी तेज गिरावट की स्थिति में मजबूत सपोर्ट का काम करेंगे। नीचे की तरफ पहला तात्कालिक सहारा 89.95 डॉलर के क्षेत्र में है। यदि बिकवाली काफी गंभीर रूप ले लेती है, तो बाजार के लिए गहरे संरचनात्मक स्तर 75 डॉलर और 70 डॉलर पर निकलकर आते हैं। ऊपर की ओर पहला क्षैतिज अवरोध 95 डॉलर के करीब है, जिसके पार जाने पर 100 डॉलर का कड़ा मनोवैज्ञानिक स्तर सामने खड़ा है। बाजार के लाइव आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल की वर्तमान कीमत 90.96 डॉलर पर चल रही है, जो पिछले बंद स्तर 89.38 डॉलर के मुकाबले 1.77 प्रतिशत ऊपर है। 14-दिवसीय आरएसआई 47 के स्तर पर है, जो तटस्थ दायरे को दर्शाता है। वहीं एमएसीडी 0.98 पर है जबकि इसकी सिग्नल लाइन 2.48 पर बनी हुई है, जिसका हिस्टोग्राम -1.50 पर नकारात्मक बना हुआ है। यह संकेत देता है कि तेजी का दबाव अपनी गति खो रहा है, भले ही लंबी अवधि के मूविंग एवरेज इसे सहारा दे रहे हों। इसके 52-सप्ताह का ट्रेडिंग दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहा है। डब्ल्यूटीआई क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है? वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खरीदे और बेचे जाने वाले कच्चे तेल की तीन प्रमुख वैश्विक किस्मों में से एक है, जिसमें ब्रेंट और दुबई क्रूड भी शामिल हैं। डब्ल्यूटीआई को इसकी कम डेंसिटी और कम सल्फर मात्रा के कारण 'लाइट' और 'स्वीट' क्रूड माना जाता है। इस गुणवत्ता के कारण इसे रिफाइन करना बेहद आसान और सस्ता होता है, जिससे इससे गैसोलीन और डीजल जैसे ईंधन उच्च मात्रा में तैयार किए जा सकते हैं। यह कच्चा तेल मुख्य रूप से अमेरिका में उत्पादित होता है और इसकी डिलीवरी कुशिंग हब के जरिए होती है, जिसे दुनिया के पाइपलाइनों का चौराहा माना जाता है। वैश्विक वित्तीय बाजारों में डब्ल्यूटीआई का भाव तेल के व्यापक रुझान को मापने के लिए सबसे प्रमुख बेंचमार्क के रूप में देखा जाता है। कीमतों को तय करने वाले प्रमुख वैश्विक कारक किसी भी अन्य कमोडिटी की तरह, कच्चे तेल की कीमतें भी अंततः मांग और आपूर्ति के मूलभूत नियमों पर निर्भर करती हैं। मजबूत वैश्विक आर्थिक विकास ईंधन की भारी मांग पैदा करता है, जबकि मंदी या सुस्त विकास के दौर में खपत घट जाती है। युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध उत्पादन या परिवहन में रुकावट डालकर आपूर्ति चक्र को झटका देते हैं। इसके अतिरिक्त, ओपेक यानी पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन उत्पादन कोटा तय करके बाजार पर सीधा प्रभाव डालता है। जब ओपेक उत्पादन घटाता है, तो आपूर्ति सीमित होने से कीमतें ऊपर जाती हैं। ओपेक प्लस में रूस सहित 10 गैर-ओपेक उत्पादक भी जुड़े हुए हैं। अमेरिकी डॉलर की कीमत भी तेल के मूल्य निर्धारण को प्रभावित करती है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल का अधिकांश कारोबार अमेरिकी डॉलर में ही होता है। कमजोर डॉलर गैर-अमेरिकी खरीदारों के लिए तेल को सस्ता बनाता है, जिससे मांग को समर्थन मिलता है। व्यापक वित्तीय और मुद्रा बाजारों का हाल कमोडिटी और करेंसी बाजारों में बुधवार को अन्य संपत्तियों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले दो महीने के निचले स्तर 0.6950 के करीब कारोबार करता दिखा, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया के कम उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आंकड़ों ने वहां ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को कमजोर कर दिया। दूसरी ओर, बैंक ऑफ जापान की सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों और बाजार में हस्तक्षेप के जोखिमों के चलते जापानी येन में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 157.00 से नीचे मजबूती देखने को मिली। सोने के बाजार में तेज रिवर्सल आया और यह 4,200 डॉलर का स्तर छूने में नाकाम रहने के बाद फिसलकर 4,150 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में लौट आया। क्रिप्टो परिसंपत्तियों में बिटकॉइन 83,000 डॉलर के स्तर की रक्षा करने की जद्दोजहद में सुस्त कारोबार करता रहा, जबकि इथेरियम 2,600 डॉलर से 2,700 डॉलर के सीमित दायरे में बंधा रहा और रिपल 1.50 डॉलर के पास टिका रहा। यूरोप में मुद्रास्फीति के दबावों और डॉलर की ताकत के बीच यूरो टूटकर 1.1312 के स्तर तक पहुंच गया, जो मई 2025 के बाद का इसका निचला स्तर है। इसका आप पर असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 90 डॉलर के ऊपर दोबारा वापसी से उपभोक्ताओं, आयातकों और नीति निर्माताओं पर सीधा वित्तीय असर पड़ने की संभावना है। • भारत में: कच्चे तेल के 90 डॉलर के पार टिके रहने से सरकारी तेल विपणन कंपनियों की रिफाइनिंग लागत बढ़ेगी, जिसका दबाव आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है। इससे परिवहन और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ सकता है, जिससे आम उपभोक्ताओं के लिए दैनिक उपभोग की वस्तुओं की महंगाई बढ़ने का जोखिम पैदा होगा। • वैश्विक निवेशकों के लिए: कमोडिटी डेरिवेटिव्स और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में अस्थिरता बढ़ने से पोर्टफोलियो पर असर पड़ सकता है। निवेशकों को भू-राजनीतिक वार्ताओं के ताजा घटनाक्रमों के अनुसार अपने हेजिंग और स्टॉप-लॉस रणनीतियों की दोबारा समीक्षा करनी चाहिए। • आयात-निर्भर उद्योगों के लिए: पेंट, प्लास्टिक, रसायन और विमानन कंपनियों के कच्चे माल का खर्च बढ़ जाएगा। इन कंपनियों को अपनी उत्पादन लागत नियंत्रित करने या ग्राहकों पर बढ़े हुए दाम डालने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। • ईंधन उपभोक्ताओं के लिए: वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के कारण घरेलू स्तर पर ईंधन के दाम स्थिर रहने की उम्मीदें कमजोर पड़ सकती हैं। यदि तेल लंबे समय तक ऊंचा बना रहा, तो आम जनता को यात्रा और माल ढुलाई पर अधिक जेब ढीली करनी पड़ेगी। ऐसा क्यों हुआ कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी रणनीतिक जलमार्गों पर भू-राजनीतिक गतिरोध, कूटनीतिक असहमति और वैश्विक आपूर्ति जोखिमों के परस्पर मेल के कारण सामने आई है। • कूटनीतिक गतिरोध: मुख्य तात्कालिक कारण वॉशिंगटन और तेहरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के समझौते पर सहमति न बन पाना है। अमेरिका द्वारा ईरान के शुरुआती प्रस्ताव को अस्वीकार किए जाने और ईरान द्वारा अपनी वित्तीय व नौसैनिक शर्तों पर अड़े रहने से अनिश्चितता बरकरार है। • रणनीतिक समुद्री मार्ग का जोखिम: होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सर्वाधिक महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। इस मार्ग पर नौसैनिक नाकेबंदी और आवागमन में अवरोध की आशंका सीधे तौर पर वैश्विक तेल आपूर्ति की सुरक्षा को प्रभावित करती है। • आपूर्ति राहत के विपरीत दबाव: हालांकि सऊदी अरब ने पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन और यानबू बंदरगाह के जरिए वैकल्पिक निर्यात मार्ग खोले हैं और अमेरिका ने रणनीतिक भंडार जारी करने का वादा किया है, लेकिन ये उपाय होर्मुज से जुड़े दीर्घकालिक डर को पूरी तरह शांत करने में नाकाफी साबित हुए हैं। • अप्रत्याशित अमेरिकी इन्वेंट्री: अमेरिकी ईआईए के आंकड़ों में इन्वेंट्री में 9,22,000 बैरल की अप्रत्याशित बढ़ोतरी होने के बावजूद, बाजार का मुख्य ध्यान तात्कालिक भंडारण से हटकर पश्चिम एशिया के कूटनीतिक संकट पर केंद्रित बना हुआ है। सवाल-जवाब 1. डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की मुख्य वजह क्या है? अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को पुनः खोलने को लेकर चल रही वार्ताओं में सहमति न बन पाना और आपूर्ति में व्यवधान की आशंका इसकी मुख्य वजह है। 2. ईरान की मुख्य मांगें क्या हैं? ईरान ने अपने बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्रीज की गई अपनी संपत्तियों को जारी करने की मांग रखी है। 3. सऊदी अरब ने आपूर्ति बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाया है? सऊदी अरब ने अपनी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन को चालू कर यानबू बंदरगाह से तेल टैंकरों की लोडिंग फिर से शुरू की है, जिससे होर्मुज से अलग एक वैकल्पिक मार्ग मिल सका है। 4. अमेरिकी रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से कितना तेल दिया जा रहा है? संयुक्त राज्य अमेरिका ने बाजार में आपूर्ति को सहारा देने के लिए अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से 4 करोड़ बैरल तक कच्चा तेल जारी करने की पेशकश की है। 5. अमेरिकी ईआईए के हालिया इन्वेंट्री आंकड़े क्या दर्शाते हैं? ईआईए के आंकड़ों के अनुसार पिछले सप्ताह अमेरिकी कच्चे तेल के भंडार में 9,22,000 बैरल की बढ़ोतरी हुई, जबकि बाजार में 3,00,000 बैरल की कमी का अनुमान था। 6. तकनीकी रूप से डब्ल्यूटीआई के लिए अहम स्तर कौन से हैं? ऊपर की तरफ 95 डॉलर और 100 डॉलर पर कड़ा प्रतिरोध है, जबकि नीचे की तरफ 89.95 डॉलर और 50-दिवसीय एसएमए पर 87.03 डॉलर पर प्रमुख सहारा है। https://trendkia.com/market/pashchima-eshiya-men-gatirodha-se-kachche-tela-men-uchhala-masika-barhata-ki-ora-wti-40638 TrendKia — Har trend, sabse pehle.