चीन का केंद्रीय बैंक कर्ज वृद्धि लक्ष्यों के बजाय ब्याज दर टूल्स से तय करेगा नीति, गवर्नर पान गोंगशेंग ने दिया संकेत पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना के गवर्नर पान गोंगशेंग ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय बैंक नीतिगत दिशा तय करने के लिए ऋण लक्ष्यों के बजाय ब्याज दरों का सहारा लेगा। चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) ने अपनी मौद्रिक नीति संचालन में एक बड़े रणनीतिक बदलाव की रूपरेखा सामने रखी है। बैंक के गवर्नर पान गोंगशेंग ने बुधवार को जानकारी दी कि केंद्रीय बैंक अब पारंपरिक ऋण वृद्धि लक्ष्यों पर अपनी निर्भरता कम करेगा और अपनी नीतिगत दिशा तय करने के लिए ब्याज दर से जुड़े उपकरणों का अधिक उपयोग करेगा। यह कदम वित्तीय प्रणाली के आधुनिकीकरण और बाजार आधारित तंत्र को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना के प्राथमिक उद्देश्य और ढांचा पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना के बुनियादी मौद्रिक नीति लक्ष्यों में मुख्य रूप से मूल्य स्थिरता बनाए रखना, विनिमय दर में स्थायित्व सुनिश्चित करना और समग्र आर्थिक विकास को बढ़ावा देना शामिल है। इसके अतिरिक्त, चीन का केंद्रीय बैंक वित्तीय क्षेत्र में आवश्यक सुधारों को लागू करने का भी काम करता है, जिसमें घरेलू वित्तीय बाजारों का विकास और उन्हें बाहरी दुनिया के लिए खोलना शामिल है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के सीधे स्वामित्व में संचालित होता है, जिस कारण इसे पश्चिमी केंद्रीय बैंकों की तरह पूरी तरह स्वायत्त संस्था नहीं माना जाता। स्टेट काउंसिल के चेयरमैन द्वारा नामित चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) समिति के सचिव का केंद्रीय बैंक के प्रबंधन और नीतिगत दिशा पर गहरा प्रभाव होता है, जो सामान्यतः गवर्नर से अलग पद माना जाता है। हालांकि, पान गोंगशेंग वर्तमान में इन दोनों ही प्रमुख पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जिससे केंद्रीय बैंक के नेतृत्व और संचालन में सामंजस्य बना हुआ है। मौद्रिक नीति उपकरण और लोन प्राइम रेट का महत्व पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए नीतिगत उपकरणों के एक व्यापक सेट का उपयोग करता है। इनमें प्रमुख उपकरणों के तौर पर सात दिवसीय रिवर्स रेपो रेट (RRR), मीडियम-टर्म लेंडिंग फैसिलिटी (MLF), विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप और रिजर्व रिक्वायरमेंट रेशियो (RRR) शामिल हैं। इन तमाम उपकरणों के बीच लोन प्राइम रेट (LPR) चीन की सबसे महत्वपूर्ण बेंचमार्क ब्याज दर है। लोन प्राइम रेट में होने वाला कोई भी बदलाव सीधे तौर पर बाजार में कर्ज और होम लोन या बंधक ऋणों पर चुकाई जाने वाली दरों के साथ-साथ बचत पर मिलने वाले ब्याज को भी प्रभावित करता है। इसके अतिरिक्त, लोन प्राइम रेट में बदलाव के माध्यम से चीन का केंद्रीय बैंक अपनी मुद्रा चीनी रॅन्मिन्बी की विनिमय दरों पर भी असर डालता है। इसलिए कर्ज के तय लक्ष्यों से हटकर दर-आधारित उपकरणों पर जोर देना पूरी बैंकिंग व्यवस्था पर व्यापक असर डालेगा। चीन में निजी बैंकों की स्थिति और डिजिटल लेंडर्स की भूमिका चीन के कुल वित्तीय तंत्र में निजी बैंकों की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत काफी छोटी है, जहां वर्तमान में केवल 19 निजी बैंक काम कर रहे हैं। इन निजी वित्तीय संस्थानों में सबसे बड़े नाम डिजिटल लेंडर्स वेबैंक और मायबैंक के हैं, जिन्हें देश की प्रमुख टेक कंपनियों टेंसेंट और एंट ग्रुप का समर्थन प्राप्त है। चीन ने साल 2014 में पूरी तरह से निजी पूंजी द्वारा वित्तपोषित घरेलू बैंकों को सरकारी प्रभुत्व वाले वित्तीय क्षेत्र में काम करने की अनुमति दी थी। केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत दरों को प्राथमिक साधन बनाने से इन डिजिटल और निजी कर्जदाताओं के लिए भी अपनी ऋण लागतों और ब्याज संरचना को बाजार की गतिशीलता के अनुसार ढालना अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा। वैश्विक मुद्रा बाजार और अमेरिकी डॉलर का रुख एशियाई कारोबारी सत्र में बुधवार को अमेरिकी डॉलर दो सप्ताह के उच्च स्तर के करीब मजबूती बनाए हुए है। फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर वृद्धि और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से पैदा हुई महंगाई की चिंताओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग को सहारा दिया है। इस डॉलर मजबूती के बीच AUD/USD पर लगातार तीसरे दिन नकारात्मक दबाव देखा गया और यह 0.7100 के स्तर का बचाव करते हुए महीने के निचले स्तर के पास कारोबार कर रहा है। जोखिम के प्रति संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर वैश्विक चिंताओं का स्पष्ट असर दिख रहा है। वहीं दूसरी ओर, USD/JPY बुधवार को एशियाई सत्र में तेजी के साथ 155.00 के स्तर को पार कर एक सप्ताह के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया। कच्चे तेल से जुड़ी मुद्रास्फीति की आशंकाओं और अमेरिका-ईरान तनाव ने डॉलर की आरक्षित मुद्रा की हैसियत को मजबूती दी है। हालांकि, फेडरल रिजर्व के फैसले और गुरुवार से शुरू होने वाली बैंक ऑफ जापान की बैठक से पहले ट्रेडर्स सतर्क दिखे, जिससे यह जोड़ी 155.00 के मध्य स्तर से नीचे बनी रही। सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार पर दबाव फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर निर्णय से पहले नए संकेतों के इंतजार में बुधवार को एशियाई सत्र में सोना 4,300 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे दबाव में बना रहा। तेल कीमतों के कारण बढ़ी महंगाई की आशंकाओं और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आए उछाल ने बिना ब्याज देने वाली इस सुरक्षित धातु पर असर डाला है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से मजबूत होता अमेरिकी डॉलर भी सोने के लिए एक बाधा बन रहा है। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में सीनेट में क्लैरिटी एक्ट के आगे न बढ़ पाने के बाद मंगलवार को एथेरियम गिरकर 2,400 डॉलर पर आ गया था। फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक में ब्याज दर में बढ़ोतरी की बाजार में लगभग तय संभावना और विनियामक अनिश्चितता के बावजूद, इस प्रमुख ऑल्टकॉइन ने नई पूंजी को आकर्षित करना जारी रखा है। पिछले कुछ दिनों के दौरान एथेरियम में खरीदार बिकवालों पर हावी नजर आए हैं। ब्रिटेन में मुद्रास्फीति के आंकड़े और जापान की नीतिगत दिशा ब्रिटेन का ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स बुधवार को 06:00 GMT पर अगस्त महीने के लिए बहुप्रतीक्षित कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) डेटा जारी करने वाला है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के मौद्रिक नीति निर्णय से ठीक एक दिन पहले आने वाली यह मुद्रास्फीति रिपोर्ट ब्रिटिश पाउंड में भारी उतार-चढ़ाव की वजह बन सकती है। दूसरी तरफ, जापान की बेहद कम ब्याज दरों ने एक दशक से भी अधिक समय तक वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की थी, जिससे जापानी येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था। चूंकि इस सप्ताह बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को फिर से सख्त करने की उम्मीद जताई जा रही है, इसलिए यह दीर्घकालिक लाभ अब एक नए दौर में प्रवेश कर सकता है। जहां अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की थी, वहीं जापान वैश्विक स्तर पर लंबे समय तक एक अलग रुख पर कायम रहा था। इसका आप पर असर केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों में बदलाव और वैश्विक ब्याज दरों की दिशा से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश के माहौल पर सीधा असर पड़ता है। • वैश्विक कर्ज लागत पर: नीतिगत दरों को प्राथमिकता देने से बाजार में उधारी की लागत अधिक पारदर्शी और प्रभावी ढंग से तय होगी। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पूंजी प्रवाह और विनिमय दरों पर सीधा असर पड़ सकता है। • मुद्रा और आयात लागत: डॉलर के मजबूत होने और कच्चे तेल की महंगाई से आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए विदेशी मुद्रा खर्च बढ़ सकता है। स्थानीय बाजारों में इससे आयातित सामान और ईंधन की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। • निवेशकों के लिए: सोने और क्रिप्टोकरेंसी जैसे संपत्तियों पर बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का दबाव बना रह सकता है। निवेशकों को केंद्रीय बैंकों के फैसलों से पहले अपनी संपत्तियों के आवंटन में सतर्कता बरतनी होगी। • वैश्विक फंडिंग व्यवस्था: जापानी येन की सस्ती फंडिंग व्यवस्था के सख्त होने से वैश्विक परिसंपत्ति बाजारों में पूंजी के प्रवाह की गति बदल सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों और उभरते बाजारों के लिए तरलता पर असर पड़ सकता है। ऐसा क्यों हुआ पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा ऋण मात्रा लक्ष्यों के स्थान पर ब्याज दरों को प्राथमिकता देने का निर्णय वित्तीय व्यवस्था को आधुनिक बनाने की आवश्यकता से प्रेरित है, जबकि वैश्विक बाजारों में तनाव केंद्रीय बैंकों की सख्ती और भू-राजनीति के कारण बना हुआ है। • नीतिगत आधुनिकीकरण: प्रशासनिक ऋण कोटा के बजाय ब्याज दरों का उपयोग करने से वित्तीय प्रणाली में पूंजी का आवंटन अधिक कुशल बनता है। इससे बैंकों को बाजार की वास्तविक लागतों के आधार पर ऋण जोखिम का मूल्यांकन करने की सुविधा मिलती है। • मुद्रास्फीति और बॉन्ड यील्ड: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से उत्पन्न महंगाई की चिंताओं और फेडरल रिजर्व की संभावित दर वृद्धि ने अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल को बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर धकेल दिया है। इस स्थिति ने अमेरिकी डॉलर को व्यापक मजबूती प्रदान की है। • भू-राजनीतिक अनिश्चितता: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते दबाव ने निवेशकों को जोखिम भरी संपत्तियों से हटाकर सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख करने के लिए प्रेरित किया है। इसी कारण पारंपरिक मुद्राओं और कमोडिटीज में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। सवाल-जवाब 1. पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना के गवर्नर पान गोंगशेंग ने क्या बयान दिया है? उन्होंने कहा कि चीन का केंद्रीय बैंक नीतिगत दिशा तय करने के लिए ऋण वृद्धि के लक्ष्यों पर निर्भरता घटाएगा और ब्याज दर उपकरणों पर अधिक ध्यान केंद्रित करेगा। 2. चीन का प्राथमिक बेंचमार्क ब्याज दर कौन सा है? लोन प्राइम रेट (LPR) चीन का प्रमुख बेंचमार्क ब्याज दर है, जिससे बाजार में मिलने वाले ऋणों, बंधक दरों और जमा पर मिलने वाले ब्याज का निर्धारण होता है। 3. चीन में कितने निजी बैंक संचालित हैं और इनमें प्रमुख कौन हैं? चीन में 19 निजी बैंक हैं, जिनमें टेंसेंट और एंट ग्रुप द्वारा समर्थित डिजिटल ऋणदाता वेबैंक और मायबैंक सबसे बड़े संस्थान हैं। 4. बुधवार को सोने और एथेरियम की कीमतों का क्या रुख रहा? सोना एशियाई कारोबार में 4,300 डॉलर से नीचे दबाव में रहा, जबकि मंगलवार को सीनेट में क्लैरिटी एक्ट रुकने के बाद एथेरियम गिरकर 2,400 डॉलर पर आ गया था। 5. बैंक ऑफ जापान की आगामी बैठक क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है? बैंक ऑफ जापान द्वारा इस सप्ताह मौद्रिक नीति को फिर से सख्त किए जाने की उम्मीद है, जिससे दशकों से चली आ रही येन आधारित सस्ती वैश्विक फंडिंग का दौर बदल सकता है। https://trendkia.com/market/pboc-ke-pan-ne-kaha-karja-lakshyon-ke-bajaya-dara-tulsa-para-adhika-nirbhara-rahegi-niti-33871 TrendKia — Har trend, sabse pehle.