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  "type": "article",
  "title": "फारस की खाड़ी में बढ़ते तनाव से ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के पार, सट्टेबाजों ने बढ़ाए तेजी के दांव",
  "summary": "अमेरिका और ईरान के बीच हमलों से होर्मुज जलसंधि पर टैंकरों की आवाजाही ठप होने के बीच ब्रेंट क्रूड फिर 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। अमेरिका के SPR से तेल निकासी बंद होने और सट्टेबाजों के तेजी के नए दांव के बीच आईएनजी के विश्लेषकों ने चेताया है कि बाजार अगले सप्लाई झटके के लिए और कमजोर हो गया है।",
  "content": "ब्रेंट क्रूड की कीमत एक बार फिर 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है, लेकिन इस बार दाम को ऊपर धकेलने वाली वजह मांग में उछाल नहीं, बल्कि डर है। आईएनजी के कमोडिटी विश्लेषक वॉरेन पैटरसन और एवा मान्थे के मुताबिक फारस की खाड़ी में बढ़ते टकराव और अहम समुद्री रास्तों के बंद होने के खतरे ने तेल टैंकरों की आवाजाही को बाधित कर दिया है, जिससे तेल बाजार किसी भी अगले सप्लाई झटके के लिए कहीं ज्यादा कमजोर पड़ गया है।\n\n90 डॉलर के पार क्यों पहुंचा कच्चा तेल\nदाम में इस तेजी की तात्कालिक वजह खाड़ी में दोबारा भड़की हिंसा है। अमेरिका और ईरान के बीच हमलों का सिलसिला जारी है और ये हमले दोनों तरफ जानलेवा साबित हो रहे हैं। आईएनजी की टीम ने चेताया है कि अगर इस तनाव को नहीं रोका गया तो पूरा इलाका एक बार फिर फारस की खाड़ी में बड़े पैमाने के हमलों की चपेट में आ सकता है। विश्लेषकों ने लिखा, \"ICE ब्रेंट आज सुबह 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया और फारस की खाड़ी में तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा।\" जो बाजार अब तक कुछ अस्थायी राहत उपायों के सहारे टिका था, उसके लिए जिंदा टकराव और रास्ते बंद होने का खतरा मिलकर इतना काफी था कि दाम उस स्तर के पार चला गया, जिस पर कारोबारियों की पैनी नजर रहती है।\n\nहोर्मुज पर थम गई टैंकरों की रफ्तार\nबाजार पर पड़े दबाव का सबसे साफ सबूत खुद जहाजों की आवाजाही के आंकड़ों में दिखता है। टैंकरों की आवाजाही लगभग रुक गई है। होर्मुज जलसंधि से बाहर जाने वाले सिर्फ दो तेल टैंकर गुजरते दिखे, जबकि अंदर आने वाला एक भी जहाज नहीं था। यानी आवाजाही घटकर वहीं पहुंच गई है, जहां वह उस समझौते (MoU) से पहले थी, जिसने कुछ समय के लिए हालात सामान्य किए थे। होर्मुज जलसंधि समुद्र के रास्ते होने वाले कच्चे तेल के कारोबार का सबसे अहम रास्ता है, इसलिए यहां थोड़ी सी भी रुकावट सीधे वैश्विक कीमतों पर असर डालती है। यही वजह है कि आवाजाही का लगभग ठप पड़ना बाजार को बेचैन कर रहा है।\n\nहटने वाला है कीमतों का सहारा\nजंग के दौरान दाम को काबू में रखने में एक बड़ी भूमिका अमेरिका के रणनीतिक तेल भंडार (SPR) से लगातार हो रही तेल की निकासी की रही है। इस निकासी ने एक तरह के शॉक एब्जॉर्बर का काम किया, यानी जब सप्लाई टाइट दिखी तब बाजार में अतिरिक्त बैरल पहुंचाए गए। दिक्कत यह है कि आईएनजी के मुताबिक यह कार्यक्रम इसी महीने के आखिर तक बंद होने वाला है। जैसे ही यह रुकेगा, बाजार से एक अहम कुशन हट जाएगा और वह किसी भी नई रुकावट के आगे ज्यादा कमजोर पड़ जाएगा। विश्लेषकों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर SPR से और तेल निकालने का विकल्प हमेशा खुला रहता है, लेकिन फिलहाल हालात यह हैं कि जोखिम बढ़ते जा रहे हैं और सुरक्षा जाल सिकुड़ता जा रहा है।\n\nसट्टेबाजों ने लगाए तेजी के नए दांव\nजिस तरह दाम चढ़े हैं, उसे देखते हुए यह कोई हैरानी की बात नहीं कि सट्टा कारोबारियों ने आगे और तेजी की उम्मीद में अपनी पोजिशन बढ़ा ली है। बीते रिपोर्टिंग हफ्ते में उन्होंने ICE ब्रेंट में 114,752 लॉट जोड़े, जिससे पिछले मंगलवार तक उनका नेट लॉन्ग बढ़कर 169,839 लॉट हो गया। खास बात यह रही कि आईएनजी के मुताबिक यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से बाजार में नई खरीदारी (फ्रेश लॉन्ग) की वजह से आई, न कि पुरानी बिकवाली की पोजिशन कटने से। इसका मतलब है कि पैसा सक्रिय रूप से ऊंचे दाम पर दांव लगा रहा है, न कि सिर्फ पुरानी पोजिशन समेट रहा है। इस तरह की एकतरफा पोजिशनिंग तेजी को और हवा दे सकती है, लेकिन अगर रुख पलटा तो यही बाजार को कमजोर भी कर सकती है।\n\nगैसऑयल दे रहा धीमा संकेत\nरिफाइंड प्रोडक्ट्स की तस्वीर कुछ नरम है। सट्टेबाजों ने ICE गैसऑयल में भी अपना नेट लॉन्ग थोड़ा बढ़ाया और हफ्ते भर में 2,389 लॉट जोड़कर इसे 71,875 लॉट तक पहुंचा दिया। गैसऑयल में हाल की तेज हलचल को देखते हुए आईएनजी को कुछ हैरानी है कि खरीदारी इससे ज्यादा आक्रामक क्यों नहीं रही। फर्म का मानना है कि यह मजबूत पोजिशनिंग शायद अगली कमिटमेंट ऑफ ट्रेडर्स रिपोर्ट में ज्यादा साफ दिखे, जो हाल की हलचल को बेहतर तरीके से समेटेगी।\n\nअभी कहां खड़ा है बाजार\nलाइव फ्यूचर्स आंकड़े बताते हैं कि बाजार इस वक्त कितना बेचैन है। अमेरिकी कच्चा तेल हाल में करीब 82.44 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो इसके पिछले बंद भाव 82.49 डॉलर से मुश्किल से हिला और करीब 0.06% की मामूली गिरावट पर रहा। बीते एक साल में यह कॉन्ट्रैक्ट 54.98 डॉलर से लेकर 119.48 डॉलर तक के चौड़े दायरे में घूमा है, जो दिखाता है कि भू-राजनीति इन कीमतों को कितनी तेजी से उछाल या गिरा सकती है। तकनीकी संकेत मिलेजुले से मजबूत हैं, 14 दिन का RSI करीब 58 पर है, यानी अभी ओवरबॉट क्षेत्र से दूर है, जबकि दाम अपने लंबी अवधि के औसत से ऊपर टिका होने के चलते रुझान सकारात्मक बना हुआ है। फिलहाल जिंदा टकराव, ठप पड़े टैंकर, कमजोर पड़ता SPR कुशन और एकतरफा लॉन्ग पोजिशनिंग मिलकर बाजार का जोखिम सप्लाई की वजह से और उछाल की तरफ झुकाए हुए हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• वाहन चालकों और घरों के लिए: अगर ब्रेंट 90 डॉलर के ऊपर टिका रहा और सप्लाई बाधित रही, तो पेट्रोल, डीजल और ढुलाई की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर रोजमर्रा की कीमतों पर पड़ेगा।\n• निवेशकों और कारोबारियों के लिए: एकतरफा तेजी के दांव का मतलब है कि किसी भी नए हमले पर तेल और उछल सकता है, लेकिन टकराव ठंडा पड़ने पर तेजी से गिर भी सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ब्रेंट क्रूड फिर 90 डॉलर के पार क्यों पहुंचा?\nफारस की खाड़ी में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते हमलों और अहम समुद्री रास्ते बंद होने के खतरे से टैंकरों की आवाजाही बाधित हुई है, जिससे दाम चढ़े हैं।\n\n2. होर्मुज जलसंधि पर क्या हो रहा है?\nयहां जहाजों की आवाजाही लगभग ठप है, बाहर जाते सिर्फ दो तेल टैंकर दिखे और अंदर आने वाला एक भी जहाज नहीं था।\n\n3. अमेरिका के SPR से तेल निकासी बंद होना क्यों मायने रखता है?\nइस निकासी ने जंग के दौरान बाजार को सहारा दिया है, और महीने के आखिर में यह रुकते ही बाजार से एक अहम कुशन हट जाएगा।\n\n4. सट्टेबाजों ने ब्रेंट में कितने दांव बढ़ाए?\nबीते रिपोर्टिंग हफ्ते में उन्होंने 114,752 लॉट खरीदे, जिससे पिछले मंगलवार तक उनका नेट लॉन्ग 169,839 लॉट हो गया।\n\n5. गैसऑयल में पोजिशनिंग कैसी रही?\nसट्टेबाजों ने ICE गैसऑयल में 2,389 लॉट जोड़े, जिससे यह बढ़कर 71,875 लॉट पर पहुंच गया।\n\n6. अमेरिकी कच्चा तेल अभी किस भाव पर है?\nलाइव फ्यूचर्स के मुताबिक अमेरिकी कच्चा तेल करीब 82.44 डॉलर प्रति बैरल पर है, जो पिछले बंद भाव 82.49 डॉलर से लगभग स्थिर है।\n\n7. कीमतें और ऊपर किस वजह से जा सकती हैं?\nफारस की खाड़ी में कोई नया बड़ा हमला, कमजोर पड़ता SPR कुशन और एकतरफा लॉन्ग पोजिशन मिलकर सप्लाई की वजह से और उछाल ला सकते हैं।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-07-21",
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