फेड के फैसले से पहले डॉलर में तेजी, सोने पर दबाव बढ़ा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले से पहले डॉलर के दो हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंचने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई। वैश्विक वित्तीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मजबूती के चलते सोने की कीमतों पर दबाव गहराता नजर आ रहा है। पिछले दो कारोबारी सत्रों के दौरान दर्ज की गई बढ़त को बरकरार रखने में बहुमूल्य धातु को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी से जुड़े अनुमानों और पश्चिम एशिया में लगातार गहराते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश के तौर पर अमेरिकी डॉलर की ओर आकर्षित किया है। निवेशक अब फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक के नतीजों और अमेरिका के प्रमुख व्यापक आर्थिक आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं ताकि सर्राफा बाजार की अगली दिशा स्पष्ट हो सके। पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव और कच्चे तेल में उछाल पश्चिम एशिया के क्षेत्र में भू-राजनीतिक जोखिम लगातार बना हुआ है और तनाव के अप्रत्याशित रूप से बढ़ने की आशंका गहरा गई है। ऐसी सूचनाएं सामने आई हैं कि वाशिंगटन ने कई खाड़ी अरब देशों को तीन नवंबर के मध्यावधि चुनावों के तुरंत बाद ईरान के खिलाफ एक छोटे और बेहद आक्रामक सैन्य अभियान के लिए तैयार रहने का संकेत दिया है। इसी बीच यमन में ईरान समर्थित हुती विद्रोहियों ने रियाद स्थित सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय को बैलिस्टिक मिसाइल से सीधा निशाना बनाने का दावा किया है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा संकट और बढ़ गया है। दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली परमाणु और रणनीतिक वार्ताएं पूरी तरह से गतिरोध में फंसी हुई हैं। इस भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में दो दिनों के तकनीकी सुधार के बाद फिर से तेज उछाल ला दिया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी मुद्रा की मांग को और बढ़ाया है, जिससे डॉलर इंडेक्स अपने दो सप्ताह के शिखर पर टिकने में कामयाब रहा है। डॉलर की यही ताकत सर्राफा बाजार में सोने के भाव पर लगातार दबाव बना रही है। सोने का तकनीकी परिदृश्य और अहम सपोर्ट स्तर हाजिर सोने का भाव एशियाई कारोबार के दौरान लगभग 0.3 प्रतिशत गिरकर 4,050 डॉलर प्रति औंस के करीब आ गया। हालांकि, सोना इस सप्ताह की शुरुआत में बने अपने तीन महीने के निचले स्तर से अब भी काफी ऊपर कारोबार कर रहा है। तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा बुनियादी परिस्थितियां दर्शाती हैं कि कीमती धातु के लिए सबसे आसान रास्ता गिरावट की ओर ही बना हुआ है, इसलिए तेजी के किसी भी प्रयास में बिकवाली हावी हो सकती है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार सोना 4,049 डॉलर प्रति औंस के आसपास देखा गया, जो पिछले सत्र के 4,075 डॉलर के बंद स्तर की तुलना में लगभग 0.62 प्रतिशत नीचे है। तकनीकी संकेतकों में 14 दिवसीय आरएसआई 37 के आसपास बना हुआ है, जो कमजोर गति को दर्शाता है। एमएसीडी लाइन शून्य से नीचे -65.04 पर है और सिग्नल लाइन -61.24 से नीचे रहकर नकारात्मक रुख का संकेत दे रही है। इसके अलावा 20 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 4,141 डॉलर, 50 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 4,231 डॉलर और 200 दिवसीय मूविंग एवरेज 4,420 डॉलर पर स्थित हैं, जो चार्ट पर दीर्घकालिक मंदी और डेथ क्रॉस की स्थिति को पुख्ता करते हैं। यदि कीमती धातु में सुधार होता है, तो 38.2 प्रतिशत फिबोनाची स्तर 4,063.08 डॉलर पर एक तात्कालिक बाधा है। इसके ऊपर टिकने पर 50 प्रतिशत रिट्रेसमेंट 4,089.75 डॉलर और 61.8 प्रतिशत स्तर 4,116.43 डॉलर तक रास्ते खुल सकते हैं। इसके बाद के बड़े प्रतिरोध 4,154.40 डॉलर और चक्र के उच्च स्तर 4,202.78 डॉलर के पास हैं। इसके विपरीत यदि 100 घंटे के ईएमए का सहारा टूटता है, तो 23.6 प्रतिशत फिबोनाची स्तर 4,030.07 डॉलर तक गिरावट आ सकती है, जबकि गहराती मंदी भाव को 3,976.72 डॉलर के संरचनात्मक आधार तक ले जा सकती है। मुद्रा बाजार में डॉलर का दबदबा और अन्य मुद्राओं की स्थिति विदेशी मुद्रा बाजार में इस सप्ताह अमेरिकी डॉलर का प्रदर्शन अधिकांश प्रमुख मुद्राओं की तुलना में मजबूत रहा है। खास तौर पर न्यूजीलैंड डॉलर के मुकाबले अमेरिकी डॉलर सबसे मजबूत स्थिति में उभरा है। दूसरी ओर, एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने लगातार दूसरे दिन मजबूती दर्ज की और 23 सितंबर के बाद के अपने नए उच्च स्तर को छुआ। ऑस्ट्रेलिया के ताजा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के गर्म आंकड़ों ने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नवंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को हवा दी है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को अच्छा समर्थन मिला। जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर लगातार तीसरे दिन बढ़त दर्ज करते हुए एक महीने के निचले स्तर से उबरने में सफल रहा। बाजार प्रतिभागियों को उम्मीद है कि बैंक ऑफ जापान अपनी आगामी शुक्रवार की मौद्रिक नीति समीक्षा में आक्रामक रुख अपनाने से बच सकता है। बैंक ऑफ जापान की इस धीमी नीतिगत गति और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती के बीच डॉलर अपने दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के इर्द-गिर्द मजबूती से टिका हुआ है। क्रिप्टो बाजार और बिग टेक कंपनियों के नतीजों पर नजर वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता के माहौल के बीच प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी संपत्तियों में रिकवरी देखने को मिली है। बिटकॉइन, एथेरियम और रिपल ने बुधवार को अपनी बढ़त का दायरा बढ़ाया। क्रिप्टो बाजार के निवेशक अब वैश्विक वृहद रुझानों के साथ-साथ अमेरिकी दिग्गज तकनीकी कंपनियों की तीसरी तिमाही के नतीजों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट और अल्फाबेट बुधवार को अपने वित्तीय आंकड़े जारी करने वाली हैं, जबकि इसके ठीक बाद गुरुवार को अमेज़न के नतीजे आने वाले हैं। इन बड़ी कंपनियों के कॉर्पोरेट परिणाम इक्विटी और जोखिम वाली संपत्तियों की धारणा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले से सोने के घरेलू भाव और व्यक्तिगत निवेश पोर्टफोलियो पर सीधा असर पड़ने वाला है। • भारत में सोने के खरीदारों के लिए: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव 4,050 डॉलर के करीब फिसलने से घरेलू सर्राफा बाजारों में कीमतों में हल्की राहत मिल सकती है। यदि आप आगामी त्योहारी सीजन या शादियों के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो डॉलर की मजबूती के कारण भारतीय बाजारों में कीमतों में उतार-चढ़ाव पर नजर रखकर किस्तों में खरीदारी करना बेहतर रणनीति होगी। • गोल्ड ईटीएफ और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड निवेशकों के लिए: सोने के तकनीकी संकेतकों में गिरावट के रुख के चलते गोल्ड फंड्स के रिटर्न पर अल्कालिक दबाव दिख सकता है। दीर्घकालिक निवेशक 3,980 डॉलर से 4,000 डॉलर प्रति औंस के मजबूत सपोर्ट जोन के आसपास नई यूनिट्स जोड़ने पर विचार कर सकते हैं। • विदेशी मुद्रा और आयात लागत पर प्रभाव: अमेरिकी डॉलर के दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचने से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे कच्चे तेल का आयात महंगा हो सकता है। यह स्थिति आने वाले हफ्तों में परिवहन और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की लागत पर अप्रत्यक्ष प्रभाव डाल सकती है। • क्रिप्टो और जोखिम वाली संपत्तियों के लिए: बिग टेक कंपनियों के नतीजों के बीच बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी में हल्की रिकवरी देखी जा रही है। तकनीकी कंपनियों के मजबूत आंकड़े इक्विटी और डिजिटल संपत्तियों में खुदरा निवेशकों के विश्वास को मजबूत कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ सोने की कीमतों में यह गिरावट अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मांग, ब्याज दरों में वृद्धि की संभावनाओं और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के सम्मिलित प्रभाव के कारण हुई है। • अमेरिकी डॉलर में मजबूती: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को उच्च स्तर पर बनाए रखने या बढ़ाने की संभावनाओं ने डॉलर को भारी मजबूती दी है। डॉलर के दो सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के कारण विदेशी खरीदारों के लिए डॉलर-मूल्यवान सोना महंगा हो गया, जिससे इसकी मांग घट गई। • पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता: अमेरिका द्वारा खाड़ी देशों को संभावित सैन्य अभियानों के लिए तैयार रहने के संकेत और सऊदी अरब में मिसाइल हमलों की खबरों ने अनिश्चितता पैदा की है। इस अनिश्चितता के बीच वैश्विक निवेशकों ने सोने के बजाय अमेरिकी डॉलर को प्राथमिक सुरक्षित आश्रय के रूप में चुना है। • कच्चे तेल में ताजा उछाल: अमेरिका-ईरान वार्ताओं में गतिरोध और क्षेत्रीय तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने मुद्रास्फीति की चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है। उच्च मुद्रास्फीति से केंद्रीय बैंकों द्वारा सख्त मौद्रिक नीतियां जारी रखने की आशंका गहराती है, जो ब्याज न देने वाले सोने के लिए प्रतिकूल साबित होती है। सवाल-जवाब 1. सोने की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण क्या है? अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले डॉलर के दो हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंचने और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने सोने पर दबाव बनाया है। 2. हाजिर बाजार में सोना किस स्तर पर कारोबार कर रहा है? एशियाई कारोबारी सत्र में सोना लगभग 0.3 प्रतिशत गिरकर 4,049 से 4,050 डॉलर प्रति औंस के दायरे में देखा गया है। 3. सोने के लिए नीचे की ओर अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर क्या है? तकनीकी रूप से 23.6 प्रतिशत फिबोनाची स्तर 4,030.07 डॉलर पर तात्कालिक समर्थन है, जबकि बड़ा संरचनात्मक आधार 3,976.72 डॉलर के पास स्थित है। 4. पश्चिम एशिया की किन घटनाओं ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है? खाड़ी देशों में संभावित सैन्य अभियान की चेतावनियों, सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय पर मिसाइल हमले के दावों और अमेरिका-ईरान वार्ता के गतिरोध ने भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ा दी है। 5. फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक का समय क्या है? फेडरल रिजर्व अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा के फैसले की घोषणा 18:00 जीएमटी पर करने वाला है। https://trendkia.com/market/pheda-ke-phaisale-se-pahale-dollar-men-teji-gold-para-dabava-barha-52456 TrendKia — Har trend, sabse pehle.