# फेडरल रिजर्व के रुख पर डीबीएस की नजर, ब्याज दरों में ठहराव की वजह बने मिले-जुले आर्थिक संकेत

> डीबीएस के अनुसार लगातार बनी हुई महंगाई और अन्य आर्थिक दबावों के बीच फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बदलाव टालने की संभावना है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-07-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/phedarala-rijarva-ke-rukha-para-dbs-ki-nazara-byaja-daron-men-thaharava-11028 · **Language:** Hindi
**Tags:** फेडरल रिजर्व, ब्याज दरें, महंगाई, डीबीएस, कच्चा तेल, विदेशी मुद्रा बाजार, मुद्रास्फीति

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीतियों को लेकर वित्तीय बाजारों में चर्चाओं का दौर जारी है। सिंगापुर स्थित प्रमुख वित्तीय संस्थान डीबीएस बैंक का आकलन है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और तमाम अंतर्विरोधी संकेतों के बीच अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर रख सकता है। बैंक के विश्लेषकों का मानना है कि नीति निर्माताओं के सामने इस समय कई तरह की असमंजस की स्थितियां बनी हुई हैं, जिसके कारण दरों में किसी भी तरह की तत्काल कटौती या बढ़ोतरी से परहेज किया जा सकता है।

## महंगाई के मोर्चे पर लगातार बनी हुई चुनौतियां
डीबीएस की समीक्षा के मुताबिक कोर महंगाई दर अभी भी चिंता का एक बड़ा विषय बनी हुई है। पिछले दिसंबर 2025 से लगातार तीन प्रतिशत से अधिक स्तर पर बनी कोर महंगाई दर उस लक्ष्य से काफी ऊपर है जिसे केंद्रीय बैंक आधिकारिक तौर पर दो प्रतिशत के आसपास रखना चाहता है। इस जिद्दी मुद्रास्फीति को बढ़ावा देने में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के दाम, आव्रजन से जुड़े दबाव, नए आयात शुल्क और विभिन्न सेवाओं की बढ़ती लागत की अहम भूमिका रही है। इसके ऊपर ईरान में छिड़े संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में आए उछाल ने हेडलाइन महंगाई को और अधिक जटिल बना दिया है, जिससे नीति निर्माताओं की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।

## मैक्रो डेटा में विरोधाभास और इंतजार करने की रणनीति
अर्थव्यवस्था के व्यापक मोर्चे पर आंकड़े इस समय पूरी तरह स्पष्ट संकेत नहीं दे रहे हैं। मैक्रो डेटा का यह मिला-जुला रुख उन लोगों को पर्याप्त दलील देता है जो फिलहाल इंतजार करो और देखो की नीति अपनाने के पक्ष में खड़े हैं। एक तरफ जहां महंगाई के आंकड़े दरों को ऊंचा बनाए रखने की तरफ इशारा करते हैं, वहीं दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था के अन्य महत्वपूर्ण पहलू कुछ अलग ही तस्वीर पेश करते हैं।

## मजदूरी, खुदरा बिक्री और सरकारी कर्ज का दबाव
डीबीएस का यह भी कहना है कि जब वास्तविक रूप में मजदूरी में वृद्धि लगभग शून्य के करीब हो, खुदरा बिक्री के आंकड़े कमजोर दायरे में नजर आ रहे हों और सार्वजनिक ऋण की स्थिति काफी भारी हो, तो ब्याज दरों में ठहराव का दावा और भी मजबूत हो जाता है। आगामी समय में जारी होने वाले सरकारी बॉन्ड और प्रतिभूतियों का आकार काफी बड़ा होने की उम्मीद है, जिसमें छोटी अवधि के कर्ज पर ज्यादा जोर रहने की संभावना है। इन तमाम वित्तीय और आर्थिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए फिलहाल दरों में ठहराव बनाए रखना ही सबसे तार्किक कदम प्रतीत होता है.

## विदेशी मुद्रा बाजारों में प्रमुख मुद्राओं की चाल
व्यापक आर्थिक परिदृश्य के बीच विदेशी मुद्रा बाजारों में प्रमुख मुद्रा जोड़ियों का प्रदर्शन भी देखने को मिल रहा है। सप्ताह के शुरुआती कारोबारी सत्र यानी सोमवार को मजबूती के साथ शुरुआत करने वाली ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी GBP/USD में दिन के दूसरे पहर में रुख बदल गया और यह लाल निशान में लगभग 1.3300 के आसपास कारोबार करती नजर आई। मध्य पूर्व के संघर्ष में कुछ समय के लिए आए ठहराव के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली, जिसने अमेरिकी डॉलर की बढ़त को सीमित करने का काम किया और इस मुद्रा जोड़ी को फिलहाल अपनी स्थिति संभालने में मदद मिली।

इसी प्रकार यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी EUR/USD में भी सोमवार के दूसरे सत्र में अपनी शुरुआती तेजी का जोश बरकरार नहीं रह पाया और यह मामूली बढ़त के साथ 1.1400 के स्तर से नीचे कारोबार करती दिखी। मध्य पूर्व में सैन्य हमलों के रुकने के बाद बाजार के निवेशकों में इस संघर्ष के कम होने की उम्मीदें जरूर जगी हैं, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच किसी कूटनीतिक समाधान तक पहुँचने को लेकर अभी भी अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं।

## इसका आप पर असर
संबंधित बाजार और आर्थिक रुझानों का आम जनता पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ सकता है:

- **भारत में:** अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में ठहराव से वैश्विक वित्तीय बाजारों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की चाल प्रभावित हो सकती है, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार और रुपये के विनिमय मूल्य पर पड़ सकता है।
- **निवेशकों के लिए:** वैश्विक मुद्रास्फीति और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को विदेशी मुद्रा और ऋण बाजारों में ट्रेडिंग के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को रोके रखने के पीछे मुख्य वजह क्या है?
लगातार बनी हुई कोर महंगाई, सुस्त खुदरा बिक्री, शून्य के करीब वास्तविक मजदूरी और भारी सार्वजनिक ऋण के दबाव के कारण दरों में ठहराव की संभावना जताई जा रही है।

### 2. दिसंबर 2025 से महंगाई की क्या स्थिति रही है?
दिसंबर 2025 से कोर महंगाई दर लगातार तीन प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है, जो केंद्रीय बैंक के दो प्रतिशत के लक्ष्य से काफी अधिक है।

### 3. किन कारकों ने हेडलाइन ईंधन की महंगाई को बढ़ाया है?
ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में तेजी आई है, जिससे हेडलाइन महंगाई प्रभावित हुई है।

### 4. सोमवार को विदेशी मुद्रा बाजार में GBP/USD की क्या स्थिति रही?
सोमवार को शुरुआत में तेजी दिखाने के बाद GBP/USD जोड़ी दिन के दूसरे पहर में लाल निशान में आ गई और 1.3300 के आसपास कारोबार करती दिखी।

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