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  "type": "article",
  "title": "फेडरल रिजर्व की सख्त ब्याज दर नीति के बावजूद डॉलर इंडेक्स की रफ्तार क्यों थमी",
  "summary": "फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेतों के बावजूद अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 103 के स्तर से नीचे फंसा हुआ है, क्योंकि वैश्विक केंद्रीय बैंकों की सक्रियता और बॉन्ड यील्ड के दबाव ने डॉलर की बढ़त पर लगाम लगा दी है।",
  "content": "अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों को सख्त बनाए रखने के स्पष्ट संकेतों के बावजूद विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की तेजी अचानक ठहर गई है। 16 सितंबर को केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने के बाद पहले महीने में यूएस डॉलर इंडेक्स ने 3 प्रतिशत से अधिक की मजबूत बढ़त दर्ज की थी, लेकिन 14 अक्टूबर के बाद से यह सूचकांक कोई नया उच्च स्तर नहीं बना पाया है। जिस दिन अमेरिका के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर के आंकड़े 3.7 प्रतिशत पर आए थे, उसी दिन डॉलर ने अपनी हालिया तेजी का चरम छुआ और फिर वहीं से फिसल गया। फेडरल रिजर्व की बैठक में दो अधिकारियों द्वारा दरों में एक और बढ़ोतरी के पक्ष में मतदान करने के बाद भी बाजार में डॉलर को लेकर वह उत्साह नहीं दिखा, जिसकी उम्मीद लगाई जा रही थी। इस समय विदेशी मुद्रा कारोबारी पहले से ही भविष्य की लगभग तीन अतिरिक्त बढ़ोतरी को कीमतों में शामिल कर चुके हैं। इसके अलावा सूचकांक में शामिल अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंक भी अब अपनी मौद्रिक नीतियों को तेजी से कड़ा कर रहे हैं, जिससे डॉलर का सापेक्ष लाभ सीमित हो गया है। डॉलर इंडेक्स में यूरो की हिस्सेदारी 57.6 प्रतिशत है, इसलिए अब इस सूचकांक की भावी दिशा काफी हद तक यूरोपीय घटनाक्रमों पर निर्भर कर रही है।\n\nफेडवॉच के अनुमान और भविष्य की ब्याज दरों का रास्ता\nसीएमई फेडवॉच टूल के जरिए वायदा कीमतों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि 9 दिसंबर को होने वाली बैठक में दरों में वृद्धि की संभावना लगभग 83 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। अगर आगामी बैठकों के क्रम को जोड़कर देखा जाए, तो मार्च 2027 तक करीब दो और बढ़ोतरी, जून तक ढाई बढ़ोतरी और सितंबर 2027 तक लगभग तीन बढ़ोतरी की संभावनाएं बाजार में आंकी जा रही हैं। जून के महीने तक नीतिगत ब्याज दर के 4.50 प्रतिशत से 4.75 प्रतिशत के दायरे में पहुंचने की सबसे अधिक संभावना जताई जा रही है, जो मौजूदा 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत के स्तर से तीन चौथाई अंक अधिक है। इसके साथ ही फेडरल रिजर्व ने बुधवार को अपनी घोषणा में यह भी स्पष्ट किया कि साल 2027 में होने वाली आठ नियमित बैठकों में से पतझड़ के मौसम वाली एक बैठक में ब्याज दरों पर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, साल 2028 के दौरान आठ की जगह केवल छह बैठकों में ही दर संबंधी फैसले किए जाने की योजना है। इसका सीधा अर्थ यह है कि वर्ष 2028 में नीतिगत स्तर पर बाजार को अचानक चौंकाने के दो अवसर कम हो जाएंगे, जिससे नीतिगत आक्रामकता का मनोवैज्ञानिक असर धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा है।\n\nदुनिया भर के केंद्रीय बैंक भी कस रहे हैं शिकंजा\nअमेरिकी डॉलर के थमने की एक प्रमुख वजह यह है कि अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाएं भी अपनी ब्याज दरों को बढ़ा रही हैं, जिससे पूंजी केवल अमेरिका की ओर ही आकर्षित नहीं हो रही है। यूरोपियन सेंट्रल बैंक ने जून और सितंबर के महीनों में दरें बढ़ाकर अपनी डिपॉजिट दर को 2.5 प्रतिशत तक पहुंचा दिया है। दूसरी तरफ, बैंक ऑफ इंग्लैंड से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह 5 नवंबर को अपनी 3.75 प्रतिशत की मौजूदा दर में बढ़ोतरी करेगा, जहां बाजार एक साल की अवधि के भीतर लगभग चार बढ़ोतरी की उम्मीद लगा रहा है। बैंक ऑफ कनाडा ने भी बुधवार को अपनी बेंचमार्क दर को बढ़ाकर 2.50 प्रतिशत कर दिया है और स्पष्ट चेतावनी दी है कि मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए उसे दरों को और ऊपर ले जाने की आवश्यकता पड़ सकती है। इसी तरह एशियाई बाजारों में बैंक ऑफ जापान को लेकर अनुमान लगाए जा रहे हैं, जहां दिसंबर में दर वृद्धि की संभावना लगभग चार में से तीन यानी 75 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है। बैंक ऑफ जापान ने सितंबर में दरों को 25 आधार अंक बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत किया था, और उसका केंद्रीय संदेश यही था कि कीमतों में बढ़ोतरी का जोखिम बना हुआ है, वास्तविक ब्याज दरें अभी भी नकारात्मक क्षेत्र में हैं और आगे नीतिगत दरों में बढ़ोतरी तय मानी जानी चाहिए।\n\nट्रेजरी यील्ड में उछाल और अमेरिकी कर्ज का बदलता दर्जा\nअमेरिकी सरकारी बॉन्ड बाजार में जारी उथल-पुथल भी डॉलर के समीकरण को उलझा रही है। 5 अक्टूबर को 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5.31 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो साल 2002 के बाद का उच्चतम स्तर था। फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर ने अक्टूबर के मध्य में इस बात को रेखांकित किया था कि दुनिया के सबसे सुरक्षित निवेश साधन के रूप में अमेरिकी सरकारी कर्ज ने अपना कुछ पुराना रुतबा खो दिया है। वॉलर का अनुमान था कि इस प्रतिष्ठा में आई कमी की वजह से बॉन्ड यील्ड में आधा प्रतिशत या उससे अधिक का अतिरिक्त इजाफा हो सकता है, जो कि सितंबर में की गई ब्याज दर वृद्धि के आकार से कम से कम दोगुना है। बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक बहुत ही असामान्य रुझान देखा गया, जहां 2-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई, जबकि 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह स्थिति इस बात का संकेत देती है कि निवेशक फेड द्वारा दरों में और बढ़ोतरी पर दांव लगाने के बजाय वाशिंगटन को दस साल के लिए कर्ज देने के एवज में अतिरिक्त जोखिम प्रीमियम मांग रहे हैं। आम तौर पर जब फेड की दरों में बढ़ोतरी अन्य केंद्रीय बैंकों से तेज होती है, तब यील्ड बढ़ने से डॉलर मजबूत होता है। लेकिन जब अमेरिकी कर्ज को अपने पास रखने के लिए निवेशक ज्यादा प्रतिफल की मांग करने लगते हैं, तो वही बढ़ी हुई यील्ड डॉलर की साख को चोट पहुंचाती है। ऐसा ही उदाहरण अप्रैल 2025 में समाप्त हुए हफ्ते में देखा गया था, जब 10-वर्षीय यील्ड में आधा प्रतिशत का उछाल आया था और फेड का व्यापक डॉलर इंडेक्स 1.4 प्रतिशत टूट गया था।\n\nडॉलर इंडेक्स का तकनीकी ढांचा और प्रमुख स्तर\nतकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो डॉलर इंडेक्स की वर्तमान स्थिति एक सीमित दायरे में फंसी नजर आ रही है। मध्य सितंबर में जब फेड ने दरें बढ़ाई थीं, तब सूचकांक लगभग 99.00 के स्तर पर था, जहां से चढ़कर यह 14 अक्टूबर को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आने पर 103.00 के ठीक नीचे तक पहुंचा था। अप्रैल 2025 के बाद का यह उच्चतम स्तर एक कारोबारी सत्र भी नहीं टिक सका। उसके बाद से इंडेक्स 101.50 से 102.50 के संकीर्ण दायरे में कारोबार कर रहा है। फेड के ताजा फैसले के समय भी तेजी का यह प्रयास 102.50 के करीब आकर रुक गया, जो 14 अक्टूबर के उच्च स्तर से काफी नीचे था। दैनिक स्टोकेस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी स्टोकेस्टिक आरएसआई अक्टूबर की शुरुआत में ही अपने शीर्ष पर पहुंच गया था और अब अपने दायरे के बिल्कुल निचले स्तर पर फिसल चुका है, जिससे यह साफ होता है कि तेजी में सुस्ती फेड के बुधवार के फैसले से बहुत पहले ही शुरू हो चुकी थी।\n\nलाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स वर्तमान में 101.91 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 102.19 की तुलना में 0.27 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 95.55 से 102.95 के बीच रहा है। दैनिक तकनीकी संकेतकों में 14-अवधि का आरएसआई 54 के स्तर पर न्यूट्रल है, जबकि एमएसीडी 0.29 पर है जो सिग्नल लाइन 0.37 से नीचे होने के कारण बियरिश हिस्टोग्राम संकेत (-0.08) दिखा रहा है। मूविंग एवरेज के मोर्चे पर, 20-दिवसीय ईएमए 101.82 पर, 50-दिवसीय ईएमए 101.20 पर और 200-दिवसीय ईएमए 99.87 पर स्थित है। वहीं 50-दिवसीय एसएमए 100.75 और 200-दिवसीय एसएमए 99.62 पर है। लंबी अवधि का रुझान अभी भी सकारात्मक बना हुआ है क्योंकि 50-दिवसीय ईएमए 200-दिवसीय ईएमए से ऊपर रहते हुए गोल्डन क्रॉस की स्थिति बनाए हुए है। बोलिंजर बैंड 101.54 से 102.56 के बीच फैला हुआ है, जिसके मध्य में भाव 102.05 पर केंद्रित है। यदि दैनिक आधार पर डॉलर इंडेक्स 101.50 के अक्टूबर के निचले स्तर से नीचे बंद होता है, तो यह ठहराव सीधे गिरावट में बदल जाएगा और 101.00 के ठीक ऊपर स्थित 50-दिवसीय औसत तथा उसके नीचे 100.00 पर स्थित 200-दिवसीय औसत का परीक्षण देखने को मिल सकता है। आज के लिए मुख्य पिवट स्तर 102.09 है, जिसमें पहला रेजिस्टेंस 102.27 और दूसरा रेजिस्टेंस 102.63 पर है, जबकि पहला सपोर्ट 101.73 और दूसरा सपोर्ट 101.55 पर बना हुआ है।\n\nमुद्रा बाजारों और कमोडिटी में हलचल\nडॉलर की इस सुस्ती का सीधा असर वैश्विक मुद्रा जोड़ियों और कमोडिटी की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 0.7055 के स्तर के करीब पहुंच गया। ऑस्ट्रेलिया में महंगाई के उम्मीद से अधिक आंकड़ों ने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को बल दिया है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिला। दूसरी ओर, अमेरिकी सितंबर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स यानी पीसीई महंगाई रिपोर्ट पर भी निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं। यूएसडी/जेपीवाई की जोड़ी शुक्रवार को एशियाई सत्र की शुरुआत से पहले 158.00 के आसपास एक अनिर्णायक दायरे में घूम रही है। बुधवार की तेज गिरावट के बाद इसमें सीमित उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, क्योंकि निवेशक बैंक ऑफ जापान के आगामी ब्याज दर फैसले का इंतजार कर रहे हैं, जहां फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने की आम सहमति दिख रही है। बहुमूल्य धातुओं की बात करें तो सोना अपनी हालिया तीन दिनों की बढ़त का सिलसिला तोड़ते हुए गुरुवार को 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर के पास ताजा बिकवाली दबाव का सामना कर रहा है। सोने में यह नरमी डॉलर में हल्की मजबूती और मिले-जुले अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के बीच आई है, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में भी दबाव बना हुआ है। आने वाले दिनों में 5 नवंबर को बैंक ऑफ इंग्लैंड की नीति, 10 नवंबर को अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़े और दिसंबर में फेड तथा ईसीबी की बैठकें बाजार की दिशा तय करेंगी, जिनमें से केवल एक निर्णय पर फेड का नियंत्रण है।\n\nइसका आप पर असर\nअमेरिकी डॉलर के ठहराव और वैश्विक ब्याज दरों में वृद्धि का सीधा असर विदेशी मुद्रा बाजार, आयात लागत और भारतीय निवेशकों के पोर्टफोलियो पर पड़ता है।\n\n• मुद्रा विनिमय पर प्रभाव: अमेरिकी डॉलर के 102.50 के नीचे सीमित रहने से भारतीय रुपये पर डॉलर का तत्काल दबाव कम हुआ है। अगर डॉलर इंडेक्स 101.50 के नीचे गिरता है तो विदेशों में पढ़ाई या यात्रा करने वाले भारतीयों के खर्चों में स्थिरता आ सकती है।\n• सोने के निवेशकों के लिए: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव $4,000 प्रति औंस के करीब दबाव में आ गए हैं। भारतीय बाजार में सोने की खरीदारी करने वालों को डॉलर के स्थिर रहने और यील्ड में बदलाव के बीच सीमित दायरे में कीमतें देखने को मिल सकती हैं।\n• विदेशी कर्जदार कंपनियों के लिए: डॉलर की मजबूती रुकने से विदेशी मुद्रा में कर्ज लेने वाली भारतीय कंपनियों की ब्याज लागत का जोखिम फिलहाल नहीं बढ़ा है। हालांकि, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5.31 प्रतिशत के आसपास रहने से नए विदेशी कर्ज जुटाना अभी भी काफी महंगा बना रहेगा।\n• इक्विटी और कमोडिटी बाजार: कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और डॉलर के सीमित दायरे से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के चालू खाते के घाटे को राहत मिलती है। इससे घरेलू शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली की आक्रामकता धीमी पड़ सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक रुख बनाए रखने के बावजूद डॉलर इंडेक्स में बढ़त न होने के पीछे कई बुनियादी और तकनीकी कारण हैं। बाजार पहले ही भावी कदमों को कीमतों में शामिल कर चुका है और वैश्विक स्तर पर अन्य केंद्रीय बैंक भी दरों में बढ़ोतरी कर रहे हैं।\n\n• अन्य केंद्रीय बैंकों की सख्त नीतियां: यूरोपियन सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ कनाडा जैसे अन्य प्रमुख संस्थान भी अपनी ब्याज दरों को आक्रामक रूप से बढ़ा रहे हैं। डॉलर इंडेक्स में यूरो का भार 57.6 प्रतिशत है, इसलिए यूरोपीय दरों में बढ़ोतरी से डॉलर का सापेक्ष आकर्षण घट गया है।\n• अमेरिकी बॉन्ड पर बढ़ा हुआ रिस्क प्रीमियम: 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का 5.31 प्रतिशत तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि निवेशक अमेरिका के सरकारी कर्ज पर अधिक रिटर्न मांग रहे हैं। फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर के अनुसार अमेरिकी ऋण की सुरक्षित साख कम होने से उपजी यील्ड वृद्धि डॉलर को मजबूती देने के बजाय नुकसान पहुंचाती है।\n• पहले से तय बाजार अनुमान: वायदा बाजार ने पहले ही दिसंबर में दर वृद्धि की 83 प्रतिशत संभावना और आगे की तीन बढ़ोतरी को कीमतों में शामिल कर लिया है। जब सभी संभावित दर वृद्धियां पहले से ही बाजार भाव में परिलक्षित हों, तो नई घोषणाएं डॉलर को ऊपर ले जाने में असमर्थ साबित होती हैं।\n• बैठकों की संख्या में कटौती: फेडरल रिजर्व द्वारा वर्ष 2027 की एक बैठक में दर निर्णय न लेने और 2028 में बैठकों की संख्या आठ से घटाकर छह करने के फैसले ने लंबी अवधि में आक्रामकता की धार को कुंद कर दिया है। इससे बाजार में नीतिगत स्तर पर अचानक सख्त फैसले आने की गुंजाइश कम हो गई है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. फेडरल रिजर्व की सख्त नीति के बाद भी यूएस डॉलर इंडेक्स क्यों नहीं बढ़ रहा है?\nबाजार पहले ही 83 प्रतिशत संभावना के साथ आगामी दर बढ़ोतरी को शामिल कर चुका है, और ईसीबी तथा बैंक ऑफ इंग्लैंड जैसे अन्य केंद्रीय बैंक भी दरें बढ़ा रहे हैं, जिससे डॉलर का सापेक्ष लाभ समाप्त हो गया है।\n\n2. डॉलर इंडेक्स में यूरो की कितनी हिस्सेदारी है?\nयूएस डॉलर इंडेक्स में यूरो की हिस्सेदारी 57.6 प्रतिशत है, जिसके कारण यूरोपीय मौद्रिक नीति और आर्थिक आंकड़े इस सूचकांक को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं।\n\n3. क्रिस्टोफर वॉलर ने अमेरिकी कर्ज के बारे में क्या कहा था?\nफेड गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर ने कहा था कि दुनिया के सबसे सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी सरकारी कर्ज की प्रतिष्ठा कुछ कम हुई है, जिससे बॉन्ड यील्ड में आधा प्रतिशत या उससे अधिक का अतिरिक्त इजाफा हुआ है।\n\n4. डॉलर इंडेक्स के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर कौन से हैं?\nडॉलर इंडेक्स के लिए तत्काल सपोर्ट स्तर 101.50 और 101.00 हैं, जबकि मजबूत रेजिस्टेंस 102.50 और 102.95 के स्तर पर बना हुआ है।\n\n5. आने वाले दिनों में मुद्रा बाजार के लिए कौन सी तारीखें सबसे महत्वपूर्ण हैं?\n5 नवंबर को बैंक ऑफ इंग्लैंड की बैठक, 10 नवंबर को अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़े और 9 दिसंबर को फेडरल रिजर्व की ब्याज दर घोषणा सबसे महत्वपूर्ण तारीखें हैं।",
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