{
  "type": "article",
  "title": "पाइपलाइन बंद होने और रिफाइनिंग संकट से डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं",
  "summary": "अमेरिका में डीजल की खुदरा कीमतें 6.285 डॉलर प्रति गैलन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। मध्य पूर्व में आपूर्ति बाधाओं, सऊदी अरब की पाइपलाइन पर ड्रोन हमलों और वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता में गिरावट से ईंधन बाजार में गंभीर दबाव बन गया है।",
  "content": "अमेरिकी ऊर्जा बाजार में डीजल की कीमतें एक ऐतिहासिक और अप्रत्याशित उछाल दर्ज करते हुए 6.285 डॉलर प्रति गैलन के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। यह तेजी ऐसे समय में सामने आई है जब सामान्य गैसोलीन अपने पुराने रिकॉर्ड से काफी नीचे बना हुआ है। जहां गैसोलीन जून 2022 में बने अपने उच्चतम स्तर से लगभग 14% नीचे कारोबार कर रहा है, वहीं डीजल उसी महीने के अपने पुराने रिकॉर्ड स्तर से करीब 8% ऊपर निकल चुका है। एक ही कच्चे तेल, उन्हीं तेल शोधन संयंत्रों और एक समान कर प्रणाली के बावजूद आज दोनों ईंधनों की कीमतों में लगभग 2 डॉलर प्रति गैलन का अंतर आ चुका है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि दुनिया में बुनियादी कच्चे तेल की कोई बड़ी कमी नहीं है, बल्कि उस तकनीकी ढांचे और रिफाइनरियों की कमी हो गई है जो कच्चे तेल को माल ढुलाई के उपयोग योग्य ईंधन में बदलती हैं। यह रिफाइनिंग संकट फरवरी से लगातार गहराता जा रहा है।\n\n \n\nकच्चे तेल और रिफाइनिंग क्षमता के बीच का बुनियादी फर्क\n\nकच्चे तेल की आपूर्ति और तैयार ईंधन की उपलब्धता के बीच का अंतर ही आने वाले समय में कीमतों की दिशा तय करता है। जब बाजार में कच्चे तेल की कमी होती है, तो किसी भी तेल उत्पादक देश द्वारा कुओं से अतिरिक्त उत्पादन शुरू करते ही उसे दूर किया जा सकता है। इसके विपरीत, तेल शोधन क्षमता की कमी को तुरंत हल नहीं किया जा सकता। एक नई रिफाइनरी का निर्माण करने में आमतौर पर करीब एक दशक का समय लग जाता है। अल्पकालिक समाधान केवल दो ही परिस्थितियों में संभव है: या तो मौजूदा रिफाइनरियों पर जारी हमले रुकें, या फिर बंद पड़े शोधन संयंत्र दोबारा चालू हों।\n\nकच्चे तेल का एक बैरल कोई एकल उत्पाद नहीं होता जिसे मांग के अनुसार पूरी तरह किसी एक ईंधन में बदला जा सके। जब एक रिफाइनरी में कच्चा तेल प्रोसेस होता है, तो वह गैसोलीन, डीजल, जेट ईंधन और भारी अवशेषों में बंटता है। इस विभाजन का निर्धारण रिफाइनरी में लगी मशीनरी और धातु की बनावट से होता है, न कि इस बात से कि उपभोक्ता बाजार में किस उत्पाद की मांग ज्यादा कर रहे हैं। कोई भी रिफाइनरी ऑपरेटर अपने उत्पादन मिश्रण में मामूली बदलाव तो कर सकता है, लेकिन इस अनुपात को न तो बड़े पैमाने पर बदला जा सकता है और न ही बहुत तेजी से।\n\n \n\nभंडारण के आंकड़े और इन्वेंट्री में भारी गिरावट\n\nडीजल और हीटिंग ऑयल जैसे डिस्टिलेट श्रेणी के ईंधनों का अमेरिकी भंडार 4 सितंबर को समाप्त सप्ताह में घटकर 106.274 मिलियन बैरल पर आ गया। यह स्तर उस विशेष सप्ताह के लिए पांच साल के औसत से लगभग 14% कम है। पिछले पांच वर्षों के दौरान इस अवधि में दर्ज किए गए किसी भी आंकड़े की तुलना में यह सबसे निचला स्तर है। अमेरिका में डीजल की मौजूदा खपत दर को देखते हुए, यह भंडार पूरे देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल करीब चार सप्ताह का ही बचा है।\n\nइसके विपरीत, उसी सप्ताह में कच्चे तेल का अमेरिकी भंडार 424.1 मिलियन बैरल दर्ज किया गया। यह आंकड़ा कच्चे तेल के पांच साल के औसत के आधा प्रतिशत के दायरे में बना हुआ है और पूरी तरह से अपने सामान्य दायरे में स्थित है। यह डेटा साफ तौर पर दर्शाता है कि समस्या कच्चे तेल की उपलब्धता में नहीं, बल्कि डिस्टिलेट ईंधनों के उत्पादन में है।\n\n \n\nयूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व के तनाव से निर्यात ठप\n\nवैश्विक स्तर पर डीजल की कमी को बढ़ाने में भू-राजनीतिक संघर्षों की सबसे बड़ी भूमिका रही है। यूक्रेन के हमलों के कारण रूसी तेल शोधन संयंत्रों का कामकाज बार-बार बाधित हुआ है, जिससे रूस से तैयार पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात लगभग रुक चुका है। दूसरी ओर, संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के कारण फारस की खाड़ी की रिफाइनरियों से उत्पादों की शिपिंग बुरी तरह प्रभावित हुई है।\n\nअंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त महीने में फारस की खाड़ी और रूस से डीजल व गैसऑयल का शुद्ध निर्यात फरवरी की तुलना में 1.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन घट गया। इस कमी की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि फरवरी में यही दोनों क्षेत्र दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले डिस्टिलेट व्यापार का लगभग 45% हिस्सा आपूर्ति करते थे। अचानक इतनी बड़ी आपूर्ति रुकने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा गई है।\n\n \n\nसऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमला\n\nआपूर्ति संकट तब और भी गंभीर हो गया जब एक ही सप्ताह के भीतर सऊदी अरब के दोनों प्रमुख तेल निकासी मार्ग पूरी तरह बंद हो गए। मार्च से होर्मुज जलडमरूमध्य के व्यावहारिक रूप से बंद होने के बाद, सऊदी अरब अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए लाल सागर तट पर स्थित यानबू तक प्रतिदिन लगभग 5 मिलियन बैरल तेल पहुंचा रहा था। यह पाइपलाइन कुल 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन की क्षमता के लिए बनाई गई है।\n\n10 सितंबर को इराक से लॉन्च किए गए ड्रोनों ने इस पाइपलाइन के पंपिंग स्टेशनों पर हमला कर दिया, जिसके बाद सऊदी अरब ने पाइपलाइन से आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी। इस पाइपलाइन की मरम्मत में हफ्तों का समय लगने की बात कही जा रही है। इस हमले से कुछ ही दिन पहले, हूती बलों ने मोचा और पेरिम् द्वीप पर नियंत्रण कर लिया था। यह वह जलडमरूमध्य क्षेत्र है जहां से यानबू से निकलने वाले किसी भी तेल कार्गो को गुजरना पड़ता है। नतीजतन, सऊदी अरब के पास पूर्व या पश्चिम दोनों ही दिशाओं में तेल भेजने का कोई विश्वसनीय रास्ता नहीं बचा है।\n\n \n\nमुद्रास्फीति और केंद्रीय बैंक की दरों पर व्यापक असर\n\nफेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले अगस्त महीने के मुद्रास्फीति आंकड़े सामने आए हैं, जो अर्थव्यवस्था के दो अलग-अलग पहलू प्रस्तुत करते हैं। 11 सितंबर को जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में महीने के दौरान 0.4% की वृद्धि दर्ज की गई। इसमें गैसोलीन की कीमतों में 3.9% की तेजी आई, जो कुल मासिक वृद्धि के एक तिहाई से अधिक हिस्से के लिए जिम्मेदार थी। केवल उपभोक्ता महंगाई को देखने पर यह समस्या केवल निजी वाहन चालकों तक सीमित दिखाई देती है।\n\nहालांकि, उससे एक दिन पहले जारी उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) से एक कहीं अधिक गंभीर संकट का पता चलता है। अगस्त में डीजल की थोक कीमतों में 24.1% की भारी वृद्धि दर्ज की गई। उत्पादकों द्वारा माल के लिए ली जाने वाली कीमतों में हुई कुल वृद्धि के एक तिहाई से अधिक हिस्से के लिए अकेले डीजल जिम्मेदार रहा। इसके साथ ही, अन्य व्यवसायों को बेचे जाने वाले प्रोसेस्ड माल की कीमतों में हुई बढ़त में डीजल का योगदान लगभग दो-तिहाई रहा।\n\nअमेरिकी ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स (BLS) उत्पादन प्रक्रिया को उपभोक्ता तक दूरी के आधार पर चार चरणों में विभाजित करता है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, डीजल इन चारों चरणों में बढ़ते उत्पादन खर्च का मुख्य कारण बनकर उभरा है। दूसरी ओर, जो कंपनियां वास्तव में पंपों पर ईंधन बेचती हैं, उनके मार्जिन में उसी महीने 11.3% की गिरावट आई। इसका अर्थ है कि जिस महीने आम जनता ने ईंधन कीमतों के लिए रिटेल पंप ऑपरेटरों को जिम्मेदार ठहराया, उसी महीने उनके अपने मुनाफे में भारी कटौती हुई।\n\nपरिवहन क्षेत्र में माल ढुलाई के अनुबंधों में ईंधन की बढ़ती लागत का असर तुरंत दिखाई दिया। अगस्त में ट्रकिंग की कीमतें 2.0% बढ़ीं, जबकि फ्रेट और वेयरहाउसिंग की दरों में 2.3% की तेजी दर्ज की गई। इसका मुख्य कारण यह है कि किसी भी पैकेज को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में डीजल सबसे बड़ा परिवर्तनीय खर्च होता है, जिसे वाणिज्यिक अनुबंध सीधे ग्राहकों पर डाल देते हैं। इस समय फेडरल रिजर्व की ब्याज दर 3.50%-3.75% के दायरे में है। आगामी बैठक में इस दर को बढ़ाकर 3.75%-4.00% करने की 92.5% संभावना बाजार मान रहा है, जबकि वायदा बाजार दिसंबर तक दरें 4.17% तक पहुंचने की उम्मीद कर रहा है। यद्यपि डीजल अकेले इस मौद्रिक सख्ती का कारण नहीं है, लेकिन केंद्रीय बैंक की नीति समिति द्वारा पढ़े जा रहे प्रत्येक आर्थिक आंकड़े में इसका प्रभाव शामिल है।\n\n \n\nऊर्जा पूर्वानुमान और रिफाइनिंग मार्जिन में भारी संशोधन\n\nऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) ने अपने मासिक पूर्वानुमान के आंकड़ों को 3 सितंबर को अंतिम रूप दिया था, जबकि प्रमुख पाइपलाइन 10 सितंबर को नष्ट हुई। इस अप्रत्याशित घटना से पहले ही एजेंसी ने केवल एक महीने के भीतर अपने 2026 के डीजल मार्जिन अनुमान को 20.8% और 2027 के अनुमान को 28.5% बढ़ा दिया था। साथ ही, एजेंसी ने चालू वर्ष के लिए खुदरा डीजल का औसत अनुमान 5.07 डॉलर और अगले वर्ष के लिए 4.40 डॉलर कर दिया था।\n\nउस रिपोर्ट में एजेंसी द्वारा उल्लेखनीय बताए गए तीन प्रमुख बदलावों में से दो सीधे तौर पर डीजल से संबंधित थे। कीमतों में कमी का जो भी मार्ग अनुमानित था, वह उस मार्ग पर निर्भर था जो रिपोर्ट जारी होने के ठीक एक सप्ताह बाद पूरी तरह बंद हो गया।\n\n \n\nशेयर बाजार और ऊर्जा कंपनियों का प्रदर्शन\n\nइक्विटी बाजारों ने रिफाइनिंग क्षमता के इस संकट को महीनों पहले ही भांप लिया था। रिफाइनिंग क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के शेयरों में इस वर्ष भारी उछाल देखा गया है। मैराथन पेट्रोलियम (MPC) के शेयर इस साल 153% चढ़ चुके हैं, वलेरो एनर्जी (VLO) में 143% की बढ़त आई है, एचएफ सिनक्लेयर (DINO) 142% बढ़ा है और फिलिप्स 66 (PSX) के शेयर 106% ऊपर हैं।\n\nइसकी तुलना में, जो कंपनियां मुख्य रूप से कच्चे तेल की खोज और उत्पादन करती हैं, उनका प्रदर्शन अपेक्षाकृत सीमित रहा है। एक्सॉन मोबिल (XOM) और शेवरॉन (CVX) के शेयरों में लगभग 40% की वृद्धि हुई है, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क सूचकांक S&amp;P 500 इस दौरान लगभग 11% बढ़ा है। पिछले नौ महीनों से निवेशक कच्चे तेल के बैरल की तुलना में उस बैरल को प्रोसेस करने की रिफाइनिंग क्षमता के लिए लगभग तीन गुना अधिक प्रीमियम का भुगतान कर रहे हैं।\n\n \n\nबाजार की नजरें और आगे के संकेत\n\nवर्तमान स्तरों पर डीजल में तेजी की स्थिति बनाए रखने वाले निवेशक मुख्य रूप से सऊदी अरब के मरम्मत कार्यक्रम पर दांव लगा रहे हैं। डीजल वायदा वर्तमान में 5.00 डॉलर प्रति गैलन से थोड़ा नीचे कारोबार कर रहा है, जबकि रिफाइनिंग क्रैक मार्जिन 113 डॉलर से गिरकर 105 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गया है। यह रुझान दर्शाता है कि बाजार पहले से ही पाइपलाइन की मरम्मत की उम्मीद कर रहा है, लेकिन मुख्य अनिश्चितता इस बात को लेकर है कि बहाली कब तक पूरी होगी।\n\nआने वाले दिनों में बाजार के प्रतिभागी चार प्रमुख कारकों पर कड़ी नजर रखेंगे। पहला, राजनीतिक अधिकारियों के बयानों के बजाय अरामको की ओर से पाइपलाइन दोबारा शुरू करने की आधिकारिक तारीख। दूसरा, डिस्टिलेट के साप्ताहिक भंडार का 100 मिलियन बैरल के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे जाना, जिसके इसी महीने टूटने की आशंका व्यक्त की गई है। तीसरा, रिफाइनरी मेंटेनेंस सीजन के दौरान यूटिलाइजेशन दर का 95% से ऊपर बने रहना, जिसका मतलब होगा कि ऑपरेटर भारी रिफाइनिंग मार्जिन कमाने के लालच में जरूरी मेंटेनेंस टाल रहे हैं और भविष्य के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर रहे हैं। चौथा, आगामी ऊर्जा परिदृश्यों में होने वाले संशोधन, जहां लगातार दूसरा ऊर्ध्वगामी संशोधन यह साबित करेगा कि नीतिगत एजेंसियां बाजार का पूर्वानुमान लगाने के बजाय केवल उसके पीछे चल रही हैं।\n\nडीजल में तेजी का यह तर्क तभी गलत साबित हो सकता है जब दोनों बंद मार्ग एक साथ स्थायी रूप से खुल जाएं, डिस्टिलेट इन्वेंट्री अपने पांच साल के दायरे में वापस आ जाए, या फिर 6 डॉलर से अधिक का डीजल मांग को इतना तोड़ दे कि माल ढुलाई पूरी तरह रुक जाए। यह वह स्थिति होगी जहां ऊंची कीमतें खुद मांग को खत्म करके बाजार को संतुलित करेंगी और रिफाइनरियों के मौजूदा मुनाफे को समाप्त कर देंगी।\n\n \n\nवैश्विक वित्तीय बाजारों और परिसंपत्तियों की स्थिति\n\nऊर्जा संकट और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं के बीच वैश्विक वित्तीय बाजारों में सतर्कता का माहौल है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) एशियाई सत्र में 0.7150 से नीचे दबाव में रहा, जो पिछले दिन छुए गए तीन सप्ताह के निचले स्तर के करीब है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर के करीब बनी हुई है, जिसने अमेरिकी डॉलर को मजबूती दी है और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बनाए रखा है। चीन के अगस्त के मिले-जुले आर्थिक आंकड़ों से भी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को कोई सहारा नहीं मिला।\n\nअमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) की जोड़ी 155.00 के स्तर की ओर बढ़ती दिखी, क्योंकि ट्रेडर्स एफओएमसी और बैंक ऑफ जापान (BoJ) की बैठकों का इंतजार कर रहे हैं। फेड द्वारा दरें बढ़ाने के दांव और तेल से जुड़े मुद्रास्फीति जोखिम अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को ऊंचा रख रहे हैं, जो डॉलर का समर्थन कर रहे हैं। हालांकि, बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत सामान्यीकरण के आक्रामक रुख के संकेतों से येन को कुछ समर्थन मिल सकता है, जो इस जोड़ी की बढ़त को सीमित कर सकता है।\n\nसोने की कीमतों में कमजोरी जारी रही और यह 4,300 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर से ऊपर टिकने में संघर्ष करता दिखा। अमेरिकी डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव और केंद्रीय बैंक की बैठक से पहले की सतर्कता के कारण कीमती धातु में मामूली नुकसान दर्ज किया गया। दूसरी ओर, प्रमुख ऑल्टकॉइन जैसे रिपल (XRP), कार्डानो (ADA) और हाइपरलिक्विड (HYPE) लाल निशान में कारोबार करते दिखे और इनमें लगभग 2% की गिरावट दर्ज की गई। क्रिप्टो बाजार में यह बिकवाली क्लेरिटी एक्ट क्लोजर वोट से पहले देखने को मिली है।\n\nइसका आप पर असर\nडीजल की रिकॉर्ड कीमतों और रिफाइनिंग संकट के कारण वैश्विक स्तर पर माल ढुलाई लागत बढ़ने और आवश्यक वस्तुओं की खुदरा कीमतों में तेजी आने का सीधा जोखिम पैदा हो गया है।\n\n• परिवहन और आपूर्ति लागत: वाणिज्यिक ट्रकिंग और माल ढुलाई की दरों में तुरंत बढ़ोतरी होगी। उपभोक्ता वस्तुओं और पैकेटबंद सामानों की अंतिम कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।\n• दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें: थोक उत्पादक कीमतों में वृद्धि के कारण किराने का सामान और आवश्यक वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। खुदरा विक्रेताओं द्वारा इस अतिरिक्त लागत का बोझ आम उपभोक्ताओं पर डाला जाएगा।\n• केंद्रीय बैंक की ब्याज दरें: ऊर्जा कीमतों में तेजी के कारण ब्याज दरों में और बढ़ोतरी होने की संभावना मजबूत हो गई है। इसके चलते होम लोन, ऑटो लोन और व्यक्तिगत कर्ज की ईएमआई में बढ़ोतरी हो सकती है।\n• ईंधन रिटेलर्स और पेट्रोल पंप: पंप संचालकों के खुदरा मार्जिन में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। स्थानीय स्तर पर पंप मालिकों को मुनाफा बनाए रखने के लिए भारी संघर्ष करना पड़ेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह संकट बुनियादी कच्चे तेल की कमी की वजह से नहीं, बल्कि तेल शोधन संयंत्रों के बाधित होने और प्रमुख परिवहन मार्गों पर हुए हमलों के कारण पैदा हुआ है।\n\n• रिफाइनिंग क्षमता पर भू-राजनीतिक हमले: यूक्रेनी हमलों ने रूसी शोधन संयंत्रों को नुकसान पहुंचाया है जबकि अमेरिका और ईरान के तनाव ने खाड़ी रिफाइनरियों का निर्यात रोक दिया। इसके परिणामस्वरूप अगस्त में डिस्टिलेट का दैनिक निर्यात 1.6 मिलियन बैरल घट गया।\n• पाइपलाइन और समुद्री चोकपॉइंट का बंद होना: 10 सितंबर को इराक से लॉन्च किए गए ड्रोन हमलों ने सऊदी अरब की प्रमुख ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को बंद करने पर मजबूर किया। इसके साथ ही हूती बलों द्वारा महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य पर नियंत्रण करने से दोनों निकासी मार्ग बंद हो गए।\n• कच्चे तेल और डिस्टिलेट का असंतुलन: कच्चे तेल के पर्याप्त भंडार के बावजूद रिफाइनरियों की धातु संरचना मांग के अनुसार तुरंत डीजल उत्पादन नहीं बढ़ा सकती। नए शोधन संयंत्र स्थापित करने में करीब एक दशक का समय लगता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अमेरिका में डीजल की मौजूदा कीमत क्या है और यह गैसोलीन से अलग क्यों है?\nअमेरिका में डीजल की कीमत 6.285 डॉलर प्रति गैलन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। गैसोलीन अपने पुराने उच्च स्तर से 14% नीचे है जबकि डीजल अपने पिछले रिकॉर्ड से 8% ऊपर है।\n\n2. क्या बाजार में कच्चे तेल की भारी कमी है?\nनहीं, कच्चे तेल का भंडार 424.1 मिलियन बैरल के साथ पांच साल के औसत के करीब है। कमी कच्चे तेल को डीजल में बदलने वाली रिफाइनिंग क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर की है।\n\n3. सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन क्यों बंद हुई?\n10 सितंबर को इराक से लॉन्च किए गए ड्रोनों ने पाइपलाइन के पंपिंग स्टेशनों पर हमला किया, जिसके बाद सऊदी अरब ने इसे मरम्मत के लिए बंद कर दिया।\n\n4. अमेरिकी डिस्टिलेट इन्वेंट्री की स्थिति क्या है?\n4 सितंबर को समाप्त सप्ताह में डिस्टिलेट भंडार 106.274 मिलियन बैरल रहा, जो पांच साल के औसत से 14% कम है और केवल चार सप्ताह की खपत के बराबर है।\n\n5. डीजल की कीमतों का महंगाई पर क्या प्रभाव पड़ा है?\nअगस्त में थोक डीजल कीमतों में 24.1% की भारी वृद्धि हुई, जो उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) में सामानों की कीमतों की बढ़ोतरी के एक-तिहाई हिस्से के लिए जिम्मेदार थी।\n\n6. शेयर बाजार में रिफाइनिंग कंपनियों का प्रदर्शन कैसा रहा है?\nमैराथन पेट्रोलियम 153% और वलेरो एनर्जी 143% चढ़ चुके हैं, जो कच्चे तेल उत्पादक कंपनियों की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन है।",
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  "publishedAt": "2026-09-19",
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