पोलैंड का केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को 3.75 प्रतिशत पर रख सकता है स्थिर, वैश्विक बाजारों में हलचल आईएनजी के अर्थशास्त्रियों के अनुसार नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड अपनी प्रमुख संदर्भ दर को 3.75% पर यथावत रख सकता है, वहीं वैश्विक स्तर पर मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में दबाव देखा जा रहा है। नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड यानी एनबीपी आगामी 4 नवंबर को अपनी संदर्भ दर को 3.75 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रख सकता है। मौद्रिक नीति की यह यथास्थिति वर्ष 2026 के अंत तक जारी रहने के आसार जताए गए हैं। आईएनजी के अर्थशास्त्री राफाल बेनेकी और एडम एंटोनियाक के मुख्य मुद्रास्फीति मॉडल के संकेत बताते हैं कि देश में मूल्य दबाव फिलहाल नियंत्रण में हैं और मजदूरी वृद्धि के कारण उत्पन्न होने वाले दूसरे दौर के प्रभाव भी सीमित बने हुए हैं। हालांकि, ऊर्जा से जुड़ी महंगाई के दीर्घकालिक जोखिमों से निपटने के लिए एक बीमा उपाय के तौर पर वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कुल मिलाकर 50 आधार अंकों की ब्याज दर बढ़ोतरी का अनुमान भी जताया गया है। पोलैंड में मुद्रास्फीति और श्रम बाजार का रुख अर्थशास्त्रियों के मुख्य मुद्रास्फीति विश्लेषण के अनुसार, जब वर्ष 2027 के दौरान ऊर्जा संकट का असर धीरे-धीरे समाप्त होगा, तब कोर मुद्रास्फीति की राह अपेक्षाकृत सौम्य रहने की उम्मीद है। इस स्थिरता का सबसे बड़ा सहारा वेतन वृद्धि में नरमी को माना जा रहा है। महामारी के दौर में आई महंगाई की लहर और वर्ष 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद उपजी परिस्थितियों की तुलना में मौजूदा समय में श्रम बाजार की स्थितियां काफी ढीली हैं। इसके साथ ही देश की वर्तमान सरकार मजदूरी को लेकर अधिक सख्त नीति पर आगे बढ़ रही है। वर्ष 2027 में लगातार दूसरे साल न्यूनतम मजदूरी में केवल 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा रही है, जबकि इसकी तुलना में वर्ष 2023 और 2024 के दौरान न्यूनतम वेतन में लगभग 20 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इस सीमित वेतन विस्तार ने लागत जनित महंगाई के जोखिमों को काफी हद तक थाम लिया है। नवंबर बैठक में व्यापक आर्थिक अनुमानों की भूमिका मौद्रिक नीति परिषद की नवंबर में होने वाली बैठक में नए व्यापक आर्थिक अनुमान चर्चा का एक अहम और केंद्रीय हिस्सा होंगे। यदि इन अनुमानों में वर्ष 2027 और 2028 के मोड़ पर महंगाई के उच्च स्तर पर बने रहने के संकेत मिलते हैं, तो केंद्रीय बैंक अधिक आक्रामक और सख्त रुख अख्तियार कर सकता है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2027 की शुरुआत से नियंत्रित कीमतों, विशेषकर प्राकृतिक गैस की दरों में होने वाली वृद्धि का पैमाना भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। यदि इन विनियमित दरों में तेज इजाफा होता है, तो यह देश की मुद्रास्फीति के पूरे मार्ग को ऊपर की ओर धकेल सकता है। केंद्रीय पूर्वानुमान यही बना हुआ है कि नवंबर या दिसंबर 2026 में ब्याज दरों में कोई फेरबदल नहीं होगा, जिसके बाद वर्ष 2027 की पहली तिमाही में संचयी तौर पर 50 आधार अंकों की दर वृद्धि देखने को मिल सकती है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर ब्याज दर फैसले का असर वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार की बात करें तो एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान मंगलवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई और यह जोड़ी ताजा दो सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गई। यह गिरावट भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी आरबीए द्वारा ब्याज दरों में व्यापक रूप से अपेक्षित 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद सामने आई। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया का यह निर्णय सर्वसम्मति से नहीं लिया गया था। नीतिगत समिति के तीन सदस्यों ने दरों को 4.60 प्रतिशत पर ही स्थिर बनाए रखने के पक्ष में मत दिया। इस आंतरिक असहमति के कारण भविष्य में मौद्रिक सख्ती जारी रहने की उम्मीदें कमजोर पड़ गई हैं। अमेरिकी डॉलर की हल्की मजबूती और सीमित सख्ती की संभावनाओं के सम्मिलित प्रभाव ने इस मुद्रा जोड़ी को नीचे की ओर धकेलने का काम किया। डॉलर के मुकाबले येन और भू-राजनीतिक कारक अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) जोड़ी भी मंगलवार के एशियाई सत्र में थोड़ी कमजोर हुई। इसने पिछले कारोबारी सत्र में 158.00 तक की बढ़त के एक हिस्से को गंवा दिया। ईरान से जुड़ी कूटनीति की उम्मीदों और अमेरिका में मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले अमेरिकी डॉलर के सुस्त पड़ने से यह नरमी आई है। दूसरी तरफ मुद्रा हस्तक्षेप के जोखिम जापानी येन को सहारा दे रहे हैं, यद्यपि बैंक ऑफ जापान यानी बीओजे द्वारा अगली ब्याज दर वृद्धि के समय को लेकर बनी अनिश्चितता येन की बढ़त को सीमित कर रही है। इस खींचतान की वजह से यह जोड़ी एक जाने-पहचाने दायरे में फंसी हुई है, जिससे कारोबारियों के लिए स्पष्ट दिशा तय करने से पहले सतर्कता बरतने की स्थिति बनी हुई है। सोने की कीमतों में गिरावट और कच्चे तेल की चाल कमोडिटी बाजार में सोने (XAU/USD) ने मंगलवार को अपनी गति खो दी। ईरान के कशम द्वीप पर अमेरिकी हमले की खबरों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी लौटी, जिससे सोने पर दबाव बना। इस दौरान सोने का भाव 0.93 प्रतिशत गिरकर लगभग 3,909 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। तेल के उछाल और जोखिम धारणा में आए बदलाव ने सर्राफा बाजार के रुझान को प्रभावित किया है। क्रिप्टोकरेंसी और अमेरिकी डॉलर सूचकांक का हाल डिजिटल एसेट बाजार में भी बिकवाली का दबाव देखा गया। बिटकॉइन मंगलवार को 76,566 डॉलर पर फिसल गया और उसने छह सप्ताह के निचले स्तर का परीक्षण किया। इसी तरह इथेरियम भी दबाव में रहा और एक संकीर्ण समर्थन दायरे के भीतर समेकित होता दिखा। वहीं रिपल 1.25 डॉलर के स्तर से थोड़ा ऊपर कारोबार करता नजर आया। अमेरिकी डॉलर सूचकांक अपने कारोबारी सत्र के निचले स्तरों से सुधरने का प्रयास कर रहा है, लेकिन यह 102.00 के नीचे अपने पुराने दायरे में ही बना हुआ है। अमेरिकी ग्रीनबैक को ईरान में जारी तनाव और तेल की ऊंची कीमतों से कुछ समर्थन मिल रहा है, जबकि अमेरिका में राजनीतिक अनिश्चितता डॉलर की बढ़त को रोकने का काम कर रही है। इसका आप पर असर वैश्विक केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों और भू-राजनीतिक तनावों का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय परिसंपत्तियों और निवेश पोर्टफोलियो पर पड़ता है। • मुद्रा विनिमय और विदेशी निवेश: विभिन्न देशों की ब्याज दरों में अंतर से विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले या विदेशी संपत्तियों में लेन-देन करने वाले व्यक्तियों को विनिमय दरों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। • सोना और कीमती धातुएं: सोने की कीमतों में 0.93 प्रतिशत की नरमी आकर यह 3,909 डॉलर पर आ गया है। गहने खरीदने वालों और सर्राफा निवेशकों को अल्पकालिक मूल्य सुधार का लाभ मिल सकता है। • कच्चा तेल और ईंधन खर्च: मध्य पूर्व में सैन्य हमलों के बाद कच्चे तेल में आई तेजी ईंधन लागत बढ़ा सकती है। यदि यह रुख जारी रहा तो आने वाले समय में परिवहन और लॉजिस्टिक्स खर्च में वृद्धि हो सकती है। • क्रिप्टोकरेंसी निवेशक: बिटकॉइन 76,566 डॉलर के छह सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया है। डिजिटल परिसंपत्ति धारकों को आगामी अस्थिरता को देखते हुए अपने जोखिम प्रबंधन की समीक्षा करनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ पोलैंड की मौद्रिक नीति में स्थिरता और वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव विभिन्न आर्थिक और भू-राजनीतिक कारकों के सम्मिलित प्रभाव के कारण उत्पन्न हुए हैं। • मजदूरी में संयमित वृद्धि: पोलैंड में वर्ष 2027 के लिए न्यूनतम वेतन वृद्धि को 3 प्रतिशत तक सीमित किया गया है। विगत वर्षों की 20 प्रतिशत की वृद्धि के मुकाबले यह संयम लागत जनित मुद्रास्फीति दबावों को नियंत्रित रखने में सहायक है। • आरबीए का विभाजित फैसला: ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक द्वारा 25 आधार अंकों की दर वृद्धि के बावजूद समिति के तीन सदस्यों ने दरें 4.60 प्रतिशत पर रखने का समर्थन किया। इस असहमति ने आगे दरें बढ़ने की संभावनाओं को कम कर दिया। • सैन्य तनाव और कच्चा तेल: ईरान के कशम द्वीप पर अमेरिकी हमले की रिपोर्ट के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। इस घटनाक्रम ने सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों और मुद्रा प्रवाह की दिशा बदल दी। सवाल-जवाब 1. नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड की ब्याज दर को लेकर क्या अनुमान है? अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि पोलैंड का केंद्रीय बैंक 4 नवंबर को अपनी संदर्भ दर को 3.75 प्रतिशत पर स्थिर रखेगा और 2026 के अंत तक इसमें बदलाव नहीं होगा। 2. पोलैंड में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी कब हो सकती है? आईएनजी के अर्थशास्त्रियों के अनुसार वर्ष 2027 की पहली तिमाही में संचयी रूप से 50 आधार अंकों की ब्याज दर बढ़ोतरी हो सकती है। 3. रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के हालिया फैसले का क्या परिणाम रहा? आरबीए ने ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की, लेकिन तीन सदस्यों द्वारा 4.60 प्रतिशत पर यथास्थिति के पक्ष में रहने के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दो सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया। 4. सोने और बिटकॉइन की कीमतों में मंगलवार को क्या बदलाव देखा गया? सोने का भाव 0.93 प्रतिशत गिरकर लगभग 3,909 डॉलर पर आ गया, जबकि बिटकॉइन फिसलकर 76,566 डॉलर पर छह सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया। https://trendkia.com/market/poland-ka-kendriya-bainka-byaja-daron-ko-3-75-pratishata-para-rakha-sakata-hai-sthira-vaishvika-bajaron-men-halachala-55925 TrendKia — Har trend, sabse pehle.