पॉलिश ज़्लॉटी पर बढ़ता दबाव और वैश्विक मुद्राओं में तेज हलचल यूरो के मुकाबले पॉलिश ज़्लॉटी में कमजोरी का रुख बना हुआ है, जबकि केंद्रीय बैंकों की नीतियों और बॉन्ड यील्ड के चलते वैश्विक मुद्रा बाजारों में डॉलर की मजबूती हावी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में पॉलिश ज़्लॉटी पर बिकवाली का दबाव लगातार गहराता दिखाई दे रहा है। यूरो और ज़्लॉटी की जोड़ी (EUR/PLN) ने जुलाई और अगस्त के 4.34 के उच्च स्तर को पार करने के बाद अपनी बढ़त का दायरा और विस्तृत कर लिया है। बाजार की मौजूदा चाल से संकेत मिल रहे हैं कि यह करेंसी पेयर कई महीनों के बढ़ते चैनल की ऊपरी सीमा की ओर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। तकनीकी चार्ट पर 4.40 से 4.41 का दायरा एक अंतरिम बाधा क्षेत्र के रूप में सामने आ सकता है। हालांकि, बाजार में किसी भी बड़े पुलबैक के संकेत फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं, जिससे ज़्लॉटी के लिए चुनौतियां बनी हुई हैं। ज़्लॉटी के अहम तकनीकी स्तर और केंद्रीय बैंक का रुख करेंसी पेयर के लिए अगस्त का 4.34 का शिखर अब सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर की भूमिका निभा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक यह स्तर नीचे की तरफ नहीं टूटता, तब तक किसी गहरी गिरावट का जोखिम बेहद कम है। यदि यह जोड़ी 4.40 से 4.41 के प्रतिरोध दायरे को पार कर जाती है, तो आने वाले समय में एक व्यापक तेजी शुरू हो सकती है, जो भाव को 4.45 और फिर 4.48 के अगले अनुमानित स्तरों तक ले जा सकती है। मध्य और पूर्वी यूरोप (CEE) के आर्थिक परिदृश्य पर नजर डालें तो नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड (NBP) की मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को 3.75% पर स्थिर रखे जाने का अनुमान है। पोलैंड में मुद्रास्फीति सितंबर के दौरान NBP के सहनशीलता दायरे के ऊपरी स्तर 4% को पार कर गई थी। ऐसे में मौजूदा बैठक को भविष्य में नीतिगत सख्ती के लिए एक सेतु के रूप में देखा जा रहा है। गवर्नर ग्लापिन्स्की के मुद्रास्फीति के बढ़ते जोखिमों पर चिंता जताने और नवंबर में संभावित दर वृद्धि के लिए बाजार को तैयार करने के संकेत मिल रहे हैं, जब केंद्रीय बैंक के नए स्टाफ पूर्वानुमान जारी होंगे। हालांकि, सख्त मौद्रिक रुख ज़्लॉटी को कुछ सहारा दे सकता है, लेकिन लगातार बने भू-राजनीतिक और बाहरी जोखिमों के कारण EUR/PLN के 4.35 के स्तर से ऊपर बने रहने की संभावना अधिक है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ज़्लॉटी (USD/PLN) के ताजा बाजार आंकड़ों को देखें तो यह फिलहाल 3.92 पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले 3.90 के बंद स्तर की तुलना में 0.32% की मजबूती दर्शाता है। 52 हफ्तों के दौरान इस जोड़ी का दायरा 3.49 से 3.93 के बीच रहा है, जबकि वॉल्यूम 20 दिनों के औसत के 1.00 गुना पर दर्ज हुआ है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय RSI 83 के स्तर पर है, जो ओवरबॉट स्थिति दर्शाता है। MACD 0.04 पर है जबकि इसका सिग्नल 0.03 पर है, जिसका हिस्टोग्राम 0.01 पर तेजी का संकेत दे रहा है। मूविंग एवरेज के मोर्चे पर 20-दिवसीय EMA 3.83, 50-दिवसीय EMA 3.78 और 200-दिवसीय EMA 3.70 पर है, जिसमें गोल्डन क्रॉस बना हुआ है। वहीं 50-दिवसीय SMA 3.76 और 200-दिवसीय SMA 3.68 पर स्थित है। 20-दिवसीय बॉलिंजर बैंड 3.70 से 3.94 के दायरे में है, 14-दिवसीय ADX 44 के साथ मजबूत ट्रेंड की पुष्टि करता है, और स्टोकेस्टिक इंडिकेटर की फास्ट लाइन 92 व सिग्नल लाइन 84 पर है। 0.03 के 14-दिवसीय ATR के साथ मुख्य पिवट 3.90 पर है, जहां पहला प्रतिरोध R1 3.93 और दूसरा प्रतिरोध R2 3.95 पर है, जबकि पहला सपोर्ट S1 3.89 और दूसरा सपोर्ट S2 3.86 पर टिका है। वैश्विक मुद्राओं पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व का असर एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) अपनी हालिया रिकवरी को भुनाने में संघर्ष करता दिखा और 0.7000 के स्तर से नीचे नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करता रहा। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में ताजा उछाल के बाद अमेरिकी डॉलर में निचली कीमतों पर लिवाली देखने को मिली। रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की ओर से सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दबाव में बना हुआ है। बाजार के तमाम प्रतिभागियों की नजरें अब आगामी FOMC बैठकों के ब्योरे पर टिकी हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) की जोड़ी बुधवार को एशियाई सत्र में 158.50 के करीब डेढ़ सप्ताह के उच्च स्तर के पास टिकी रही। यहां खरीदार FOMC मिनट्स से पहले आगे की बढ़त के लिए 200-दिवसीय SMA बाधा को पार करने का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी ने सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की मांग बढ़ा दी है, जबकि बैंक ऑफ जापान (BoJ) की नरम टिप्पणियों ने इस जोड़ी की बढ़त को अतिरिक्त सहारा दिया है। सोने में सुस्ती और क्रिप्टो बाजार में गिरावट कमोडिटी बाजार में सोने (XAU/USD) ने मंगलवार की अपनी बढ़त को गंवा दिया और व्यापक मंदी के रुख को दोबारा अपना लिया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ताजा बैठक के मिनट्स जारी होने से पहले डॉलर की व्यापक मजबूती ने पीली धातु पर दबाव डाला। सोना मंगलवार को 4,180 डॉलर के दायरे से फिसलकर 4,120 डॉलर के नीचे कारोबार करने लगा, जो धीरे-धीरे अपने दो महीने के निचले स्तर 4,104 डॉलर के करीब पहुंच रहा है। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में डॉगकॉइन (DOGE) का नुकसान और बढ़ गया है। यह लगभग 0.090 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है, जिसमें इस हफ्ते अब तक 5% से अधिक की गिरावट आ चुकी है। बाजार में मंदी का दबाव गहरा रहा है क्योंकि शॉर्ट पोजीशन एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। कमजोर पड़ते मोमेंटम इंडिकेटर्स डॉगकॉइन में आगे और गिरावट का अंदेशा दे रहे हैं, जबकि डेरिवेटिव्स बाजार के आंकड़े ट्रेडर्स के बीच सतर्कता को दर्शाते हैं। भारतीय रुपये की स्थिति और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की दुविधा भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति बैठक के नतीजों के बाद भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर हुआ है। USD/INR की जोड़ी उछलकर 96.72 के करीब पहुंच गई, जो चार महीनों में देखा गया इसका उच्चतम स्तर है। नीतिगत बैठक में RBI ने अपनी रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5% करने का फैसला किया, जो फरवरी 2023 के बाद से पहली दर वृद्धि है। इस सख्त कदम के बावजूद बाजार की ठंडी प्रतिक्रिया ने रुपये पर दबाव बनाए रखा। यूरोप के मोर्चे पर यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के सामने एक असामान्य स्थिति पैदा हो गई है। सामान्य परिस्थितियों में जब मुद्रास्फीति अपने तय लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से चल रही हो, तो ब्याज दरों में वृद्धि एक सीधा और स्पष्ट समाधान होता है। लेकिन मौजूदा हालात सामान्य नहीं हैं। इस समय बॉन्ड बाजार ही वित्तीय स्थितियों को कड़ा करने का आधा काम कर रहा है, जिसके कारण ECB एक बेहद जटिल और मुश्किल दुविधा का सामना कर रहा है। इसका आप पर असर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में डॉलर की व्यापक मजबूती और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के फैसलों का सीधा असर वैश्विक व्यापार, यात्रा और निवेश पर पड़ता है। • भारत में प्रभाव: डॉलर के मुकाबले रुपया 96.72 के चार महीने के उच्च स्तर पर जाने से आयात लागत बढ़ सकती है। विदेशों में पढ़ाई करने वाले छात्रों और आयातकों को अधिक भुगतान करना पड़ सकता है। • ब्याज दरों पर असर: भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा रेपो दर को बढ़ाकर 5.5% करने से ऋण महंगे होने की संभावना है। बैंकों द्वारा इसका असर होम लोन और ऑटो लोन की मासिक किश्तों पर डाला जा सकता है। • वैश्विक यात्रियों के लिए: यूरोप और अमेरिका की यात्रा करने वाले यात्रियों को मुद्रा विनिमय दरों पर नजर रखनी चाहिए। डॉलर और यूरो के मजबूत रहने से विदेशी खर्च का बजट बढ़ सकता है। • सोने के खरीदारों के लिए: सोने के 4,120 डॉलर के नीचे फिसलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें नरम हुई हैं। हालांकि, घरेलू स्तर पर रुपये की कमजोरी के चलते कीमतों में मिलने वाली राहत सीमित रह सकती है। ऐसा क्यों हुआ वैश्विक मुद्रा बाजारों में हालिया उतार-चढ़ाव अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में तेजी, विभिन्न देशों में मुद्रास्फीति के दबाव और केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसलों के संयुक्त प्रभाव के कारण देखने को मिला है। • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नए सिरे से आई तेजी ने डॉलर की मांग को मजबूत किया है। इसके चलते सुरक्षित निवेश की तलाश में वैश्विक पूंजी डॉलर की तरफ आकर्षित हुई है। • पोलैंड में मुद्रास्फीति का दबाव: पोलैंड में महंगाई दर NBP के 4% के सहनशीलता दायरे से ऊपर निकलने के कारण मौद्रिक नीति सख्त होने की संभावनाएं बनी हैं। इसके बावजूद बाहरी भू-राजनीतिक जोखिमों ने ज़्लॉटी को दबाव में रखा है। • आरबीआई की दर वृद्धि: भारतीय रिज़र्व बैंक ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए रेपो रेट को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5% किया है। हालांकि बाजार की ठंडी प्रतिक्रिया और डॉलर की वैश्विक मजबूती के चलते रुपये में गिरावट दर्ज की गई। • केंद्रीय बैंकों के बीच नीतिगत अंतर: बैंक ऑफ जापान के नरम रुख और यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने खड़े नीतिगत संकट ने डॉलर के मुकाबले अन्य मुद्राओं की स्थिति को और कमजोर किया है। सवाल-जवाब 1. EUR/PLN जोड़ी के लिए प्रमुख रेजिस्टेंस स्तर क्या हैं? तकनीकी रूप से 4.40 से 4.41 का दायरा अंतरिम रेजिस्टेंस का काम कर रहा है, जिसके पार होने पर अगला लक्ष्य 4.45 और 4.48 हो सकता है। 2. नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड की ब्याज दर को लेकर क्या उम्मीदें हैं? केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दर को 3.75% पर स्थिर रखे जाने का अनुमान है, जबकि नवंबर में दर वृद्धि के संकेत मिल सकते हैं। 3. भारतीय रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट में कितना बदलाव किया है? आरबीआई ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 5.5% कर दिया है, जो फरवरी 2023 के बाद पहली वृद्धि है। 4. सोने की कीमत में हालिया गिरावट का क्या स्तर रहा है? सोना 4,180 डॉलर से गिरकर 4,120 डॉलर के नीचे कारोबार कर रहा है, जो इसके दो महीने के निचले स्तर 4,104 डॉलर के करीब है। 5. डॉगकॉइन के भाव में हाल ही में कितनी गिरावट आई है? डॉगकॉइन इस सप्ताह 5% से अधिक गिरकर लगभग 0.090 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। https://trendkia.com/market/polish-zloty-para-barhata-dabava-aura-vaishvika-mudraon-men-teja-halachala-44616 TrendKia — Har trend, sabse pehle.