पूंजी प्रवाह और रिजर्व बैंक के समर्थन से भारतीय रुपया मजबूत, अमेरिकी डॉलर में नरमी मजबूत पूंजी प्रवाह और भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित समर्थन के दम पर रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दूसरे दिन मजबूत हुआ है। हालांकि, कच्चे तेल के बदलते दाम और भू-राजनीतिक तनाव पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। घरेलू बाजार में मजबूत पूंजी प्रवाह और भारतीय रिजर्व बैंक के निरंतर सहयोग की उम्मीद के बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है। शुरुआती कारोबार में स्थानीय मुद्रा ने सप्ताह की शांत शुरुआत की है। हालांकि विश्लेषक और कारोबारी इस बात पर बारीक नजर रखे हुए हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम किस दिशा में आगे बढ़ते हैं और केंद्रीय बैंक मुद्रा की स्थिरता बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाता है। कच्चे तेल की कीमतों और ईरान पर प्रतिबंधों का असर हाल ही में कच्चे तेल के दामों में आई नरमी के कारण रुपये पर बना दबाव कुछ समय के लिए कम हुआ था क्योंकि निवेशकों ने अमेरिका द्वारा ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाने की संभावनाओं के बीच मुनाफावसूली की थी। इसके बावजूद, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट की उस टिप्पणी के बाद ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता फिर से गहरा गई है, जिसमें ईरान पर अभूतपूर्व प्रतिबंध लगाने की योजनाओं का जिक्र किया गया है। ईरान से होने वाले तेल शिपमेंट में भारी रुकावट, चीनी खरीदारों को मिलने वाली रियातों में कमी और अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी जैसी वजहों से वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए संकट बढ़ सकता है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक होने के नाते भारत के लिए यह स्थिति खासी संवेदनशील है। इसी वर्ष की शुरुआत में ऊंचे तेल दामों के कारण भारत को विदेशी निवेशकों की भारी पूंजी निकासी का सामना करना पड़ा था। रिजर्व बैंक की रणनीति और विदेशी मुद्रा भंडार वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारतीय रिजर्व बैंक की सक्रिय हस्तक्षेप नीतियों से रुपये को सुरक्षा मिलने की पूरी उम्मीद है। केंद्रीय बैंक द्वारा इस बात की जानकारी दी गई है कि जून महीने में भुगतान संतुलन को मजबूत करने के लिए शुरू किए गए उपायों के तहत लगभग 73 अरब डॉलर जुटाए गए हैं, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया है। जापानी वित्तीय संस्थान MUFG/BTMU के विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक के नीतिगत बयानों के लहजे में एक स्पष्ट बदलाव आया है। उन्होंने रेखांकित किया कि अगस्त की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के मिनट्स उम्मीद से अधिक आक्रामक रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक अपनी ढील देने की नीति के अंत तक पहुंच चुका है और आने वाले समय में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है सोमवार को भारतीय शेयर बाजार लगातार दो हफ्तों की गिरावट से उबरते हुए हल्की बढ़त के साथ खुले। पिछले हफ्ते Nifty 50 और BSE Sensex में क्रमशः 0.5% और 0.6% की गिरावट दर्ज की गई थी, जिसकी मुख्य वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव, महंगे होते बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें थीं। अमेरिकी प्रतिबंधों की पूरी रूपरेखा सामने आने तक बाजार का रुख सतर्क बना रह सकता है। अमेरिकी राजकोषीय नीतियों का असर और मुद्रा जोड़े की चाल वाशिंगटन में शुरू की गई नई राजकोषीय पहलों के कारण अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना हुआ है, जिसका असर USD/INR की चाल पर भी दिखाई दे रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने बॉन्ड यील्ड में तेजी को रोकने के लिए लंबी अवधि के सरकारी कर्ज की रीपरचेज यानी पुनर्खरीद को कम से कम दोगुना करने की योजना का ऐलान किया है। ट्रेजरी सचिव बेसेंट ने संकेत दिया कि यह पुनर्खरीद 4 अरब डॉलर से भी आगे बढ़ सकती है, जिसका उद्देश्य यील्ड को वास्तविक आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों के साथ संतुलित करना है। दूसरी ओर, Scotiabank के रणनीतिकारों का तर्क है कि अमेरिका की राजकोषीय चिंताओं को झेलने के लिए मुद्राएं ही मुख्य शॉक एब्जॉर्बर का काम करती हैं। लंबी अवधि के यील्ड को काबू में रखने के प्रयासों के कारण अमेरिकी डॉलर को इन राजकोषीय नीतियों के नकारात्मक प्रभावों का बड़ा बोझ उठाना पड़ रहा है, जिससे डॉलर पर दबाव बने रहने के आसार हैं। वर्तमान में USD/INR जोड़ी 95.66 के आसपास कारोबार कर रही है, जो इसके नौ-अवधि और 50-अवधि के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज से ऊपर बनी हुई है। तकनीकी संकेतकों के अनुसार, 14-दिन का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 51 के आसपास है, जो तटस्थ से लेकर मजबूत रुझान को दर्शाता है। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, इस जोड़े के लिए प्रमुख प्रतिरोध स्तर 95.70 और 95.75 पर हैं, जबकि तत्काल समर्थन स्तर 95.62 और 95.59 पर देखे जा रहे हैं। रुपये को प्रभावित करने वाले वृहद आर्थिक कारक भारतीय रुपया वैश्विक और घरेलू दोनों तरह के कारकों के प्रति बेहद संवेदनशील मुद्रा है। देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर की प्रधानता और विदेशी निवेश के आंकड़े इसके मूल्य को सीधे तौर पर तय करते हैं। इसके अलावा विनिमय दर में स्थिरता बनाए रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक का विदेशी मुद्रा बाजार में सीधा हस्तक्षेप और मौद्रिक नीति के तहत तय ब्याज दरें भी अहम भूमिका निभाती हैं। केंद्रीय बैंक विनिमय दर को स्थिर रखकर व्यापार को सुगम बनाने का प्रयास करता है। साथ ही ब्याज दरों में बदलाव के जरिए महंगाई दर को 4% के लक्ष्य पर बनाए रखने की कोशिश भी की जाती है। आम तौर पर ऊंची ब्याज दरें रुपये को मजबूत करती हैं, क्योंकि इससे कैरी ट्रेड को बढ़ावा मिलता है। इस प्रक्रिया में निवेशक कम ब्याज वाले देशों से कर्ज लेकर अधिक ब्याज देने वाले देशों में निवेश करते हैं और अंतर से मुनाफा कमाते हैं। सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर, व्यापार घाटा, मुद्रास्फीति और विदेशी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष निवेश (FDI और FII) जैसे वृहद आर्थिक कारक रुपये की सेहत तय करते हैं। मजबूत विकास दर विदेशी निवेश को आकर्षित करती है, जिससे रुपये की मांग बढ़ती है। वहीं उच्च मुद्रास्फीति देश के निर्यात को महंगा बनाती है और आयात के भुगतान के लिए अधिक रुपये बेचने पड़ते हैं, जो मुद्रा के लिए नकारात्मक होता है। हालांकि इसके जवाब में रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने से विदेशी निवेशकों का रुझान फिर से बढ़ सकता है। इसका आप पर असर भारत में: कच्चे तेल के दामों और विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव का सीधा असर आयात लागत और खुदरा महंगाई पर पड़ता है, जिससे दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम प्रभावित हो सकते हैं। व्यापारियों और निवेशकों के लिए: मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच विदेशी निवेशकों और विनिमय दरों पर नजर रखने वालों को अपनी रणनीतियों में सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। सवाल-जवाब 1. भारतीय रुपया हाल ही में क्यों मजबूत हुआ है? मजबूत पूंजी प्रवाह और भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित समर्थन के कारण रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ है। 2. कच्चे तेल की कीमतों का रुपये पर क्या असर पड़ता है? कच्चे तेल के दाम गिरने से रुपये पर दबाव कम होता है, जबकि कीमतें बढ़ने से आयात महंगा होने के कारण रुपये पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। 3. भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में क्यों हस्तक्षेप करता है? आरबीआई विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने और बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप करता है। 4. USD/INR जोड़ी वर्तमान में किस स्तर पर कारोबार कर रही है? USD/INR जोड़ी लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार 95.66 के आसपास कारोबार कर रही है। https://trendkia.com/market/punji-pravaha-aura-reserve-bank-ke-samarthana-se-indian-rupee-majabuta-us-dollar-men-narami-20957 TrendKia — Har trend, sabse pehle.