आरबीए की नीतिगत बैठक से पहले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में अस्थिरता, 0.7000 के स्तर पर टिकी नजरें रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की आगामी ब्याज दर बैठक से पहले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7000 के अहम तकनीकी स्तर के करीब संभलने की कोशिश कर रहा है, जबकि मजबूत अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड दबाव बनाए हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दो दिनों की तेज गिरावट के बाद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7000 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब संभलने का प्रयास कर रहा है। यूरोपीय कारोबारी सत्र में यह मुद्रा जोड़ी करीब 0.7020 तक पहुंचने में कामयाब रही, जबकि ताजा बाजार आंकड़ों में यह 0.7026 के आसपास कारोबार कर रही है जो पिछले बंद स्तर 0.7034 से 0.12 प्रतिशत कम है। पूरे सप्ताह के प्रदर्शन पर नजर डालें तो प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर का दबदबा देखने को मिला है और अमेरिकी मुद्रा सबसे ज्यादा ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर ही हावी रही है। निवेशकों की निगाहें अब अगले सप्ताह मंगलवार को होने वाली रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की मौद्रिक नीति घोषणा पर टिक गई हैं। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की आगामी बैठक और रोजगार आंकड़े बाजार विश्लेषकों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया के घरेलू आर्थिक आंकड़े मौद्रिक सख्ती जारी रखने के पक्ष में माहौल बना रहे हैं। ब्राउन ब्रदर्स हैरिमन के रणनीतिकारों के अनुसार ऑस्ट्रेलिया की अगस्त लेबर फोर्स रिपोर्ट ने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर उसे 4.60 प्रतिशत तक ले जाने की संभावना को काफी मजबूत किया है। इस बढ़ोतरी की संभावना को ब्याज दर बाजार में लगभग 90 प्रतिशत तक मान लिया गया है। रोजगार के मोर्चे पर अर्थव्यवस्था में उम्मीद से कहीं बेहतर विस्तार दर्ज किया गया है। अगस्त में कुल 39,500 नए रोजगार जुड़े, जबकि अर्थशास्त्रियों का अनुमान केवल 20,000 नौकरियों का था और इससे पिछले महीने यानी जुलाई में 15,900 नौकरियों की गिरावट देखी गई थी। यह पूरी तेजी पार्ट-टाइम रोजगार के कारण देखने को मिली, जिसमें 45,800 पदों का इजाफा हुआ, जबकि जुलाई में 30,800 पार्ट-टाइम पद घटे थे। तकनीकी स्तर और फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट का गणित चार्ट विश्लेषण के लिहाज से इस मुद्रा जोड़ी के लिए कई महत्वपूर्ण स्तर सक्रिय हैं। नीचे की दिशा में पहला तात्कालिक तकनीकी सहारा 61.8 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट स्तर पर 0.7008 के करीब स्थित है। यदि बिकवाली का दबाव बढ़ता है, तो अगला सहारा 78.6 प्रतिशत स्तर पर 0.6945 और इसके बाद 100 प्रतिशत रिट्रेसमेंट आधार 0.6865 पर देखने को मिलेगा। ऊपरी स्तरों की बात करें तो पहला प्रतिरोध 50.0 प्रतिशत रिट्रेसमेंट स्तर 0.7052 पर बना हुआ है। इसके पार जाने पर 38.2 प्रतिशत स्तर 0.7096, 20-पीरियड ईएमए 0.7108 और 23.6 प्रतिशत स्तर 0.7151 पर प्रतिरोध रहेगा। किसी भी दीर्घकालिक और स्थायी सुधार के लिए 0.7240 का फाइबोनैचि स्तर एक मजबूत बाधा का काम करेगा। वर्तमान तकनीकी पैमानों पर नजर डालें तो आरएसआई 33 के स्तर पर है जो मंदड़ियों के प्रभाव को दर्शाता है, जबकि एमएसीडी संकेत भी नकारात्मक क्षेत्र में बना हुआ है। 52-सप्ताह का ट्रेडिंग दायरा 0.6422 से 0.7277 के बीच रहा है। पिवट पॉइंट 0.7021 पर स्थित है, जिसके लिए पहला सपोर्ट 0.7012 और दूसरा सपोर्ट 0.6998 पर है। ऊपर की तरफ पहला रेजिस्टेंस 0.7034 और दूसरा रेजिस्टेंस 0.7043 दर्ज किया गया है। 200-दिन के एसएमए से नीचे फिसलने के कारण एशियाई सत्र में यह जोड़ी अगस्त की शुरुआत के बाद के सबसे निचले स्तर तक लुढ़क गई थी। फेडरल रिजर्व का रुख, कच्चा तेल और बॉन्ड यील्ड में तेजी अमेरिकी डॉलर के मजबूत रहने के पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व का आक्रामक रुख और कच्चे तेल की कीमतों में आई दो दिनों की तेजी है। कच्चे तेल के भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल जाने से मुद्रास्फीति के दोबारा भड़कने की चिंताएं गहरा गई हैं। इसके साथ ही अमेरिका के पीएमआई आंकड़े कई वर्षों के उच्चतम सूचकांकों को पार कर गए हैं और एफओएमसी सदस्य भविष्य में ब्याज दरों को लेकर कड़ा रुख अपना रहे हैं। इन सभी कारकों ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स को कई वर्षों के उच्च स्तर तक पहुंचा दिया है। वित्तीय गणित के लिहाज से ट्रेजरी नोट्स कुल विपणन योग्य ट्रेजरी का लगभग 52 प्रतिशत हिस्सा हैं, जिसके चलते बॉन्ड यील्ड्स में होने वाली कोई भी वृद्धि अमेरिका के राजकोषीय परिदृश्य के लिए चुनौतीपूर्ण बन जाती है। इस पृष्ठभूमि में वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिमों ने अमेरिकी डॉलर को दो महीने के शिखर पर पहुंचा दिया है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक की ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदों का असर फीका पड़ गया है। वैश्विक मुद्रा बाजार और अन्य परिसंपत्तियों की स्थिति व्यापक मुद्रा बाजार में जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की चाल भी चर्चा में रही। यूएसडी/जेपीवाई शुक्रवार को एशियाई सत्र में 159.00 के तीन सप्ताह के उच्च स्तर से थोड़ा नीचे आया, क्योंकि संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंका में ट्रेडर्स सतर्क हो गए। हालांकि बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 7-2 के बहुमत से 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत किए जाने के बावजूद उसका सामान्यीकरण रुख अपेक्षाओं के अनुरूप था, जिससे येन की तेजी सीमित रही। वहीं दूसरी ओर सोने की कीमतों में भी सीमित दायरे में कारोबार देखा गया और यह साप्ताहिक निचले स्तर के करीब सुस्त रहा। सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली अमेरिकी मुद्रा की मजबूती और उच्च बॉन्ड यील्ड्स ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाए रखा है। इसका आप पर असर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की कमजोरी और अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती का सीधा असर आयात लागत, विदेशी यात्रा और निवेश पोर्टफोलियो पर पड़ता है। • मुद्रा विनिमय और यात्रा: यदि आप ऑस्ट्रेलिया यात्रा या उच्च शिक्षा के लिए धन भेजने की योजना बना रहे हैं, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की नरमी से खर्च में मामूली राहत मिल सकती है। हालांकि मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण डॉलर-आधारित अंतरराष्ट्रीय लेनदेन और हवाई यात्रा की लागत अपेक्षाकृत महंगी बनी रहेगी। • आयात और खुदरा महंगाई: कच्चे तेल के 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने और मजबूत डॉलर से ऊर्जा आयात का बिल बढ़ेगा। इसके परिणामस्वरूप आने वाले हफ्तों में ईंधन और परिवहन लागत बढ़ने से दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। • वैश्विक वित्तीय बाजार: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स के बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर पहुंचने से जोखिम वाली संपत्तियों पर दबाव बढ़ गया है। इक्विटी और कमोडिटी में निवेश करने वाले खुदरा निवेशकों को आने वाले दिनों में सतर्क पोर्टफोलियो आवंटन अपनाना चाहिए। • ब्याज दर चक्र का असर: केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में सख्ती जारी रखने से वैश्विक स्तर पर कर्ज की लागत ऊंची बनी रहेगी। विदेशी मुद्रा में ऋण लेने वाले व्यवसायों को ब्याज भुगतान और हेजिंग रणनीतियों की समय रहते समीक्षा करनी होगी। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स में बहु-वर्षीय उछाल, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और ऑस्ट्रेलिया के घरेलू श्रम बाजार के आंकड़ों ने इस मुद्रा जोड़ी में तेज उतार-चढ़ाव की स्थिति पैदा की है। • कच्चा तेल और मुद्रास्फीति दबाव: कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचना मुख्य तात्कालिक कारण रहा है। इस तेजी ने अमेरिका में मुद्रास्फीति फिर से भड़कने की चिंताओं को जन्म दिया, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा दरें ऊंची रखने की संभावनाएं मजबूत हुईं। • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स का रिकॉर्ड स्तर: मजबूत पीएमआई आंकड़ों और आक्रामक एफओएमसी बयानों ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स को कई वर्षों के शिखर पर पहुंचा दिया। अमेरिकी ट्रेजरी नोट्स कुल विपणन योग्य कर्ज का 52 प्रतिशत हिस्सा हैं, जिससे यील्ड्स में तेजी ने डॉलर को व्यापक मजबूती प्रदान की। • ऑस्ट्रेलियाई श्रम बाजार के आंकड़े: ऑस्ट्रेलिया में अगस्त के दौरान उम्मीद से ज्यादा 39,500 नए रोजगार जुड़े, जिसने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नीतिगत दर को बढ़ाकर 4.60 प्रतिशत करने की 90 प्रतिशत संभावना तय कर दी। हालांकि घरेलू मजबूती के बावजूद वैश्विक डॉलर की आंधी ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को 0.7000 के स्तर पर सीमित रखा। सवाल-जवाब 1. रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया से ब्याज दरों को लेकर क्या उम्मीद की जा रही है? बाजार में लगभग 90 प्रतिशत संभावना जताई जा रही है कि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया आगामी मंगलवार को नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 4.60 प्रतिशत कर देगा। 2. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए तात्कालिक सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर कौन से हैं? तात्कालिक तकनीकी सपोर्ट 61.8 प्रतिशत फाइबोनैचि स्तर यानी 0.7008 पर है, जबकि पहला बड़ा प्रतिरोध 50.0 प्रतिशत स्तर यानी 0.7052 पर देखा जा रहा है। 3. अगस्त में ऑस्ट्रेलिया के रोजगार आंकड़ों का क्या परिणाम रहा? अर्थव्यवस्था में अगस्त के दौरान 39,500 नौकरियां जुड़ीं जो 20,000 के अनुमान से काफी अधिक थीं, जिसमें मुख्य योगदान 45,800 पार्ट-टाइम नौकरियों का रहा। 4. अमेरिकी डॉलर में हालिया मजबूती की मुख्य वजह क्या है? कच्चे तेल का 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचना, मजबूत पीएमआई आंकड़े, फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और बॉन्ड यील्ड्स में बहु-वर्षीय उछाल डॉलर की मजबूती का मुख्य कारण हैं। 5. बैंक ऑफ जापान ने अपनी हालिया नीतिगत बैठक में क्या निर्णय लिया? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। https://trendkia.com/market/rba-ki-nitigata-baithaka-se-pahale-australian-dollar-men-asthirata-0-7000-ke-stara-para-tiki-najaren-38352 TrendKia — Har trend, sabse pehle.