# रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद होम लोन महंगा होने से त्योहारी सीजन में मकानों की बिक्री पर असर की आशंका

> केंद्रीय बैंक के ताजा नीतिगत फैसले के चलते कर्ज की लागत बढ़ने की उम्मीद है, जिस पर क्रेडाई और नारेडको ने त्योहारी मांग और दीर्घकालिक असर पर अपनी राय रखी है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/rbi-dvara-repo-dara-men-25-adhara-ankon-ki-barhotari-ke-bada-homa-lona-mahnga-hone-se-tyohari-sijana-men-makanon-ki-bikri-para-asa-44468 · **Language:** Hindi
**Tags:** रियल एस्टेट, होम लोन, रेपो रेट, रिजर्व बैंक, क्रेडाई, नारेडको, आवास बिक्री

रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में 25 आधार अंकों की ताजा वृद्धि किए जाने के बाद आवास बाजार में होम लोन की ब्याज दरें बढ़ने के संकेत मिलने लगे हैं। देश के प्रमुख रियल एस्टेट डेवलपर संगठनों, क्रेडाई और नारेडको ने बुधवार को इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उधारी लागत में इस इजाफे से आने वाले त्योहारी सीजन के दौरान मकानों की बिक्री पर कुछ प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, दोनों संगठनों का यह भी मानना है कि रिहायशी संपत्तियों की मजबूत बुनियादी मांग इस असर को काफी हद तक सीमित रखने में मददगार साबित होगी।

## कर्ज महंगा होने और त्योहारी सीजन की बिक्री पर प्रभाव
क्रेडाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेखर पटेल और नारेडको के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक के इस फैसले का सीधा असर होम लोन की ब्याज दरों पर पड़ेगा। जब बैंकों के लिए पूंजी की लागत बढ़ती है, तो उसका बोझ अंततः ग्राहकों पर पड़ता है। पटेल ने कहा कि रेपो दर में की गई इस वृद्धि को वैश्विक अनिश्चितताओं और मुद्रास्फीति को लेकर बनी चिंताओं के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और घरेलू स्तर पर महंगाई के दबाव को संतुलित करने के लिए नीतिगत दरों में यह बदलाव किया गया है।

शेखर पटेल ने आगे बताया कि मौद्रिक नीति का सीधा असर रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए पूंजी की उपलब्धता और उसकी कुल लागत दोनों पर पड़ता है। बाजार इस समय त्योहारी सीजन में कदम रख रहा है, जो पारंपरिक रूप से आवासीय संपत्तियों की खरीद-बिक्री के लिए सबसे महत्वपूर्ण और सक्रिय समय माना जाता है। ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर कर्ज लेने की लागत में बढ़ोतरी होने से त्योहारी अवधि के दौरान संपत्तियों के पंजीकरण और बुकिंग की गति में कुछ रुकावट आ सकती है। इसके बावजूद, उन्होंने भरोसा जताया कि मकान खरीदने को लेकर लोगों के बीच जो स्वाभाविक बुनियादी मांग बनी हुई है, वह काफी मजबूत है।

## खरीदारों का रुझान और लंबी अवधि का परिदृश्य
नारेडको के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने आवास बाजार की मौजूदा स्थिति का विश्लेषण करते हुए कहा कि इस समय घरों की मांग का आधार बेहद ठोस बना हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि मजबूत ग्राहक धारणा, त्योहारी उत्साह और खुद के मकान के मालिकाना हक की दीर्घकालिक जरूरत के दम पर रिहायशी बाजार पर इस दर वृद्धि का कुल प्रभाव सीमित ही रहेगा। रियल एस्टेट सेक्टर वर्तमान गति को बनाए रखने में पूरी मजबूती और लचीलापन दिखाएगा।

मकान खरीदारों की वित्तीय योजना पर बात करते हुए शेखर पटेल ने कहा कि किसी भी ग्राहक के लिए ब्याज दर केवल एक बड़े और दीर्घकालिक फैसले का हिस्सा होती है। उन्होंने कहा, "होम लोन आमतौर पर कम से कम 15 वर्षों की प्रतिबद्धता होती है।" इतनी लंबी समय-सीमा के दौरान बाजार चक्र के अनुसार ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव आना स्वाभाविक है, जहां कई बार दरें ऊपर चढ़ती हैं और कई बार नीचे भी आती हैं। पटेल ने जोर दिया कि रेपो दर में होने वाले बदलावों को अलग-थलग करके नहीं देखना चाहिए, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था और समग्र विकास के दीर्घकालिक परिदृश्य को ध्यान में रखकर फैसला लेना समझदारी भरा कदम है।

क्रेडाई और नारेडको देश भर के रियल एस्टेट बिल्डरों और डेवलपर्स का प्रतिनिधित्व करने वाले दो सबसे बड़े संगठन हैं। इन दोनों संस्थाओं की संयुक्त सदस्य संख्या लगभग 20,000 बिल्डरों की है, जो भारत के प्रमुख शहरी और अर्ध-शहरी केंद्रों में आवासीय तथा वाणिज्यिक परियोजनाओं के निर्माण से जुड़े हुए हैं।

## इसका आप पर असर
रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी करने से होम लोन लेने वाले मौजूदा और नए दोनों तरह के ग्राहकों की मासिक ईएमआई या कर्ज की अवधि में सीधा इजाफा होगा।

- **भारत में कर्जदारों पर:** फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी तय होने से मासिक किस्त या लोन की कुल समयावधि दोनों बढ़ जाएंगी। अगर आप नया कर्ज लेने की योजना बना रहे हैं, तो बैंकों के नए ब्याज दर स्लैब की पड़ताल कर अपने बजट का दोबारा आकलन करें।
- **त्योहारी खरीदारों पर:** त्योहारी सीजन में नए मकान की योजना बना रहे परिवारों के लिए शुरुआती वित्तपोषण लागत थोड़ी अधिक हो जाएगी। ग्राहक डेवलपर्स द्वारा त्योहारी ऑफर्स और सबवेंशन स्कीमों का विश्लेषण कर अतिरिक्त लागत की भरपाई करने की कोशिश कर सकते हैं।
- **मौजूदा लोन धारकों पर:** पुराने कर्जदारों की मासिक किस्त की राशि बढ़ सकती है या बैंक लोन का टेन्योर आगे बढ़ा सकते हैं। कर्जदार आंशिक प्री-पेमेंट के जरिए बढ़ते ब्याज के बोझ को नियंत्रित करने का विकल्प चुन सकते हैं।
- **संपत्ति बाजार की कीमतों पर:** डेवलपर्स के लिए पूंजी की लागत बढ़ने से निर्माण पर खर्च में मामूली बढ़ोतरी आ सकती है। खरीदारों को सलाह दी जाती है कि वे बुकिंग करने से पहले कुल लागत और अतिरिक्त ब्याज का आकलन कर लें।

## ऐसा क्यों हुआ
रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने और वैश्विक बाजार में जारी आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से रेपो दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की है।

- **मुद्रास्फीति का दबाव:** घरेलू बाजार में लगातार बनी महंगाई की चिंताओं को थामने के लिए केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दरों में बढ़ोतरी का रास्ता चुना है। नकदी के प्रवाह को थोड़ा नियंत्रित कर मांग और आपूर्ति में संतुलन बैठाने की कोशिश की जा रही है।
- **वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता:** अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चल रहे उथल-पुथल भरे माहौल और विदेशी पूंजी के प्रवाह में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए दरें बढ़ाई गई हैं। वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के अनुरूप नीतिगत तालमेल बिठाना जरूरी माना गया।
- **पूंजी की लागत में समायोजन:** बैंकिंग प्रणाली में धन की उपलब्धता और लागत को स्थिर रखने के लिए मौद्रिक नीति में यह बदलाव लागू किया गया है। इसका सीधा मकसद आर्थिक वृद्धि की गति को रोके बिना वित्तीय अनुशासन बनाए रखना है।

## सवाल-जवाब

### 1. रिजर्व बैंक ने रेपो दर में कितने आधार अंकों की वृद्धि की है?
रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति में रेपो दर को 25 आधार अंकों से बढ़ा दिया है।

### 2. इस फैसले का होम लोन की ब्याज दरों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
क्रेडाई और नारेडको के अनुसार, इस कदम के बाद होम लोन पर लगने वाली ब्याज दरों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

### 3. त्योहारी सीजन में मकानों की बिक्री पर इसका क्या असर हो सकता है?
उधारी की लागत बढ़ने से त्योहारी सीजन के दौरान घरों की बिक्री पर कुछ प्रभाव पड़ सकता है, हालांकि अंतर्निहित मांग मजबूत बनी हुई है।

### 4. क्रेडाई के अध्यक्ष शेखर पटेल ने होम लोन के बारे में क्या राय व्यक्त की?
उन्होंने कहा कि होम लोन आमतौर पर कम से कम 15 साल की प्रतिबद्धता होती है, जिसमें ब्याज दरों के बढ़ने और घटने के चक्र आते रहते हैं।

### 5. क्रेडाई और नारेडको की संयुक्त सदस्य संख्या कितनी है?
इन दोनों प्रमुख रियल एस्टेट डेवलपर संगठनों की संयुक्त सदस्य संख्या लगभग 20,000 बिल्डरों की है।

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