{
  "type": "article",
  "title": "रिजर्व बैंक के 0.25 फीसदी रेपो रेट बढ़ाने के बाद भी फिसला रुपया, डॉलर के मुकाबले चार महीने के निचले स्तर पर",
  "summary": "भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत कर दिया, फिर भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 96.72 के स्तर तक पहुंच गया।",
  "content": "भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद भारतीय मुद्रा में तेज गिरावट दर्ज की गई है। केंद्रीय बैंक की ओर से नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने के बावजूद घरेलू मुद्रा को मजबूती नहीं मिल सकी। बुधवार को मौद्रिक नीति समिति के फैसले के बाद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया फिसलकर 96.72 के आसपास पहुंच गया, जो बीते चार महीनों का सबसे निचला स्तर है। बाजार में केंद्रीय बैंक के संकेतों को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया रही, जिसके चलते विनिमय दर पर दबाव बढ़ गया।\n\nनीतिगत दरों में 25 आधार अंकों का इजाफा\nमौद्रिक नीति समिति की बैठक में नीति निर्माताओं ने रेपो रेट को 25 आधार अंक यानी 0.25 प्रतिशत बढ़ाने का निर्णय लिया। इस ताजा बढ़ोतरी के साथ ही रेपो रेट अब बढ़कर 5.5 प्रतिशत पर पहुंच गया है। उल्लेखनीय है कि फरवरी 2023 के बाद से केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में की गई यह पहली बढ़ोतरी है। लंबे समय के अंतराल के बाद ब्याज दरें बढ़ाए जाने के बावजूद विदेशी मुद्रा बाजार में घरेलू मुद्रा को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला और डॉलर के मुकाबले इसमें कमजोरी देखने को मिली।\n\nसख्त रुख पर आम सहमति का अभाव\nनीतिगत रुख को सख्त करने के इस कदम पर समिति के भीतर मतभेद भी खुलकर सामने आए। मतदान के दौरान 4-2 का विभाजन देखने को मिला। समिति के दो सदस्यों, कुमार और सिंह ने मौजूदा परिस्थितियों में न्यूट्रल रुख बनाए रखने के पक्ष में अपनी राय दी। सदस्यों के बीच इस विभाजन से यह संकेत मिला कि लगातार और आक्रामक ढंग से ब्याज दरें बढ़ाने को लेकर समिति के भीतर व्यापक सहमति का अभाव है। नीतिगत मार्गदर्शन में इस्तेमाल किए गए कैलिब्रेटेड टाइटनिंग जैसे शब्दों ने भी बाजार को यह सोचने पर मजबूर किया कि आगे चलकर दर वृद्धि या ठहराव दोनों ही विकल्प खुले हैं, जिससे दरों को सख्त करने का कड़ा संदेश कमजोर पड़ गया।\n\nसकारात्मक वास्तविक दरें और हस्तक्षेप की उम्मीद\nनीतिगत संकेतों में आक्रामकता की कमी के बावजूद कुछ आर्थिक कारक मुद्रा को पूरी तरह अनियंत्रित होने से रोक सकते हैं। सकारात्मक वास्तविक ब्याज दरें और जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बैंक का विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रिय हस्तक्षेप विनिमय दर को बहुत अधिक बिगड़ने से थामने में मददगार हो सकता है। हालांकि बाजार की तत्काल प्रतिक्रिया सुस्त रही, लेकिन नियामक के पास ऐसे टूल्स मौजूद हैं जो मुद्रा की अस्थिरता को सीमित दायरे में बनाए रख सकते हैं।\n\nवैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती और अन्य संपत्तियां\nवैश्विक स्तर पर भी अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिल रही है, जिसका असर विभिन्न मुद्राओं और कमोडिटीज पर देखा जा रहा है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नए सिरे से आई तेजी ने भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच डॉलर की मांग बढ़ा दी है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में हालिया सुधार के बाद कमजोरी देखी गई और बुधवार के एशियाई सत्र में एयूडी/यूएसडी 0.7000 के नीचे दबाव में कारोबार करता रहा। दूसरी ओर, बैंक ऑफ जापान के नरम रुख के बीच डॉलर/येन 158.50 के करीब डेढ़ हफ्ते के उच्च स्तर के पास बना रहा, जहां निवेशक 200-दिन के एसएमए से आगे निकलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में भी मंगलवार की तेजी के बाद बुधवार को नरमी आई और एक्सएयू/यूएसडी 4,180 डॉलर के स्तर से फिसलकर 4,120 डॉलर के नीचे कारोबार करने लगा, जो 4,104 डॉलर के दो महीने के निचले स्तर के करीब है। क्रिप्टो बाजार में डॉगकॉइन पर बिकवाली का दबाव देखा गया, जो इस हफ्ते 5 प्रतिशत से अधिक टूटकर 0.090 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा है। इसके अलावा यूरोपीय सेंट्रल बैंक भी मुद्रास्फीति अपने लक्ष्य से दोगुनी चलने के बावजूद बॉन्ड बाजार की सख्ती के चलते ब्याज दरों पर फैसले को लेकर असमंजस की स्थिति का सामना कर रहा है।\n\nतकनीकी स्तर और विनिमय दर की स्थिति\nविदेशी मुद्रा बाजार के लाइव आंकड़ों के अनुसार यूएसडी/आईएनआर वर्तमान में 96.78 पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद 96.34 के मुकाबले 0.45 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 85.86 से 97.05 के बीच रहा है। तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-दिवसीय आरएसआई 64 के स्तर पर है, जबकि एमएसीडी 0.28 पर है जो 0.20 की सिग्नल लाइन से ऊपर है। मूविंग एवरेज के संदर्भ में 20-दिवसीय ईएमए 95.94, 50-दिवसीय ईएमए 95.65 और 200-दिवसीय ईएमए 93.65 पर स्थित है। 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से ऊपर होना गोल्डन क्रॉस दर्शाता है। बोलिंजर बैंड 95.15 से 96.69 के बीच है, जिसमें मौजूदा कीमत ऊपरी बैंड से ऊपर चल रही है। एडीएक्स 27 पर ट्रेंड की पुष्टि कर रहा है। मौजूदा बाजार में दैनिक अस्थिरता एटीआर 0.53 दर्ज की गई है। प्रमुख लेवल्स में पिवट 96.65, पहला रेजिस्टेंस 96.98, दूसरा रेजिस्टेंस 97.18 तथा पहला सपोर्ट 96.45 और दूसरा सपोर्ट 96.12 पर स्थित है।\n\nइसका आप पर असर\nअमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के कमजोर होकर 96.72 के स्तर तक पहुंचने से आयातित वस्तुओं की लागत और विदेशी यात्रा या पढ़ाई के खर्च बढ़ सकते हैं।\n\n• आम उपभोक्ताओं पर: कच्चे तेल और आयातित इलेक्ट्रॉनिक सामानों की लागत बढ़ने से घरेलू बाजार में खुदरा कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। इससे पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की जरूरी चीजों के दाम पर दबाव बना रह सकता है।\n• विदेश में पढ़ने वाले छात्रों पर: डॉलर महंगा होने से अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और जीवनयापन का बजट सीधे तौर पर बढ़ जाता है। छात्रों और उनके अभिभावकों को ट्यूशन फीस के भुगतान के लिए अधिक रुपये खर्च करने पड़ेंगे।\n• ऋणधारकों और कर्जदारों पर: रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट को बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत करने से बैंकों के कर्ज महंगे हो सकते हैं। इससे होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की मासिक ईएमआई में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ जाएगी।\n• निर्यातकों और विदेशी मुद्रा कमाने वालों पर: डॉलर के मजबूत होने से आईटी कंपनियों और सामान निर्यात करने वाले कारोबारियों को रुपये में अधिक प्राप्ति हो सकती है। हालांकि वैश्विक अनिश्चितता और विनिमय दर में भारी उतार-चढ़ाव उनकी हेजिंग लागत को भी बढ़ा सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nरिजर्व बैंक द्वारा दरों में बढ़ोतरी किए जाने के बाद भी रुपये में कमजोरी इसलिए आई क्योंकि मौद्रिक नीति समिति की भाषा में आगे आक्रामक सख्ती के स्पष्ट संकेत नहीं मिले। साथ ही मजबूत वैश्विक डॉलर ने घरेलू मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव बनाया।\n\n• सख्त रुख पर विभाजित फैसला: छह सदस्यीय समिति में 4-2 के अनुपात में मतदान हुआ, जिसमें दो सदस्यों कुमार और सिंह ने न्यूट्रल रुख बनाए रखने का सुझाव दिया। इस असहमति ने यह स्पष्ट किया कि भविष्य में लगातार दर वृद्धि को लेकर समिति में सर्वसम्मति नहीं है।\n• कैलिब्रेटेड रुख के संकेत: नीतिगत बयान में कैलिब्रेटेड टाइटनिंग का उपयोग करने से बाजार को लगा कि आगे दर वृद्धि या ठहराव दोनों संभव हैं। इस अनिश्चितता ने दर वृद्धि के असर को कमजोर कर दिया।\n• अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर: वैश्विक स्तर पर अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त और फेडरल रिजर्व की बैठकों के मिनट्स से पहले डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ। इससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर स्वतः दबाव बढ़ गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कितना बदलाव किया है?\nरिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत कर दिया है।\n\n2. रेपो रेट में पिछली बार बढ़ोतरी कब की गई थी?\nकेंद्रीय बैंक की ओर से इससे पहले नीतिगत दरों में पिछली बढ़ोतरी फरवरी 2023 में की गई थी।\n\n3. नीतिगत बैठक में मतदान का परिणाम क्या रहा?\nनीतिगत फैसले पर 4-2 से मतदान हुआ, जिसमें कुमार और सिंह ने न्यूट्रल रुख बनाए रखने के पक्ष में मत दिया।\n\n4. फैसले के बाद डॉलर के मुकाबले रुपया किस स्तर तक गिरा?\nफैसले के बाद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया फिसलकर 96.72 के स्तर तक पहुंच गया, जो चार महीने का निचला स्तर है।",
  "url": "https://trendkia.com/market/rbi-ke-0-25-phisadi-repo-reta-barhane-ke-bada-bhi-phisala-rupee-dollar-ke-mukabale-chara-mahine-ke-nichale-stara-para-44623",
  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-10-07",
  "tags": [
    "भारतीय रुपया",
    "रिजर्व बैंक",
    "रेपो रेट",
    "अमेरिकी डॉलर",
    "विदेशी मुद्रा बाजार",
    "मौद्रिक नीति",
    "वित्त"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}