# रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति बैठक का अंतिम दिन, ब्याज दरों और मुद्रास्फीति अनुमान पर गवर्नर संजय मल्होत्रा का फैसला आज

> भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय अक्टूबर बैठक समाप्त हो रही है, जहां गवर्नर संजय मल्होत्रा सुबह 10 बजे नीतिगत ब्याज दरों और जीडीपी अनुमानों की घोषणा करेंगे।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/rbi-maudrika-niti-baithaka-ka-antima-dina-byaja-daron-aura-mudrasphiti-anumana-para-governor-sanjay-malhotra-ka-phaisala-aja-44230 · **Language:** Hindi
**Tags:** भारतीय रिजर्व बैंक, रेपो रेट, संजय मल्होत्रा, मौद्रिक नीति समिति, मुद्रास्फीति, जीडीपी अनुमान

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय अक्टूबर बैठक का आज समापन हो रहा है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा सुबह 10 बजे इस महत्वपूर्ण नीतिगत समीक्षा के निर्णयों का आधिकारिक ऐलान करेंगे। वित्तीय बाजारों, बैंकिंग क्षेत्र और आम कर्जदारों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्रीय बैंक नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव करता है या फिर मौजूदा रुख को बरकरार रखता है।

## वर्तमान ब्याज दरें और तटस्थ रुख का दौर
केंद्रीय बैंक की प्रमुख नीतिगत दर यानी रेपो रेट इस समय 5.25% पर बनी हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक ने इससे पहले जून और अगस्त की बैठकों में दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। इसके साथ ही नीतिगत रुख भी तटस्थ रखा गया है। वित्तीय विश्लेषक और अर्थशास्त्री इस घटनाक्रम को बेहद करीब से देख रहे हैं कि क्या मौद्रिक नीति समिति दरों को यथावत रखने के सिलसिले को जारी रखेगी, अपने रुख में कोई बदलाव करेगी या फिर दरों में वृद्धि का कोई चौंकाने वाला कदम उठाएगी।

नीतिगत निर्णय के साथ-साथ केंद्रीय बैंक द्वारा मुद्रास्फीति और आर्थिक वृद्धि के संशोधित अनुमान भी पेश किए जाएंगे। अनुमानों के मुताबिक मुख्य मुद्रास्फीति के अक्टूबर से दिसंबर की तिमाही के दौरान अपने चरम स्तर पर पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में केंद्रीय बैंक के अनुमान आने वाले समय के लिए व्यापक आर्थिक दिशा तय करेंगे।

## त्योहारी सीजन में कर्ज और जमा दरों पर असर
त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ आने वाला यह नीतिगत फैसला आम लोगों के गृह ऋण, वाहन ऋण और अन्य कर्जों की मासिक किस्तों यानी ईएमआई को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है। यदि समिति दरों को स्थिर रखती है, तो कर्जदारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। वहीं दूसरी ओर यदि कोई आश्चर्यजनक बढ़ोतरी होती है, तो बैंकों द्वारा उधारी और जमा दोनों दरों में वृद्धि की जा सकती है। इसके अलावा शेयर बाजार और बॉन्ड बाजार भी इस घोषणा के आधार पर अपनी दिशा तय करेंगे।

## अगस्त बैठक के प्रमुख आर्थिक आंकड़े और अनुमान
अगस्त में आयोजित पिछली बैठक में मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने के पक्ष में मतदान किया था। उस फैसले के तहत स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी यानी एसडीएफ दर को 5.00% पर बरकरार रखा गया था। इसके साथ ही मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी यानी एमएसएफ दर और बैंक दर दोनों को 5.50% पर निर्धारित किया गया था।

आर्थिक वृद्धि और महंगाई के मोर्चे पर केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी वृद्धि दर 6.7% रहने का अनुमान व्यक्त किया था। उसी बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित सीपीआई मुद्रास्फीति 5.0% रहने का अनुमान लगाया गया था, जिसमें तीसरी तिमाही के दौरान मुद्रास्फीति के 5.9% पर रहने की संभावना दर्ज की गई थी। अब बाजार इस बात का इंतजार कर रहा है कि क्या अक्टूबर की समीक्षा में इन पुराने आंकड़ों में कोई संशोधन किया जाएगा।

## इसका आप पर असर
रिजर्व बैंक के इस नीतिगत फैसले का सीधा प्रभाव आम नागरिकों के बैंक कर्जों की ईएमआई और बचत पर मिलने वाले ब्याज पर पड़ेगा।

- **भारत में:** यदि नीतिगत रेपो दर 5.25% पर स्थिर रहती है तो गृह और वाहन ऋण की मासिक किस्तों में तत्काल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। कर्ज लेने वाले उपभोक्ता अपनी मौजूदा वित्तीय योजनाओं को बिना किसी अतिरिक्त बोझ के जारी रख सकते हैं।
- **जमाकर्ताओं के लिए:** ब्याज दरों में कोई बदलाव न होने से बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट की दरों में भी स्थिरता बनी रहेगी। बचतकर्ताओं को नई ब्याज दरों के लिए बैंकों की आगामी घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए।
- **त्योहारी खरीदारी:** दरों के स्थिर रहने से त्योहारी सीजन के दौरान नए उपभोक्ता कर्जों पर लागत नियंत्रण में रहेगी। उपभोक्ता त्योहारी खरीदारी के लिए योजनाओं को वर्तमान ब्याज दरों के आधार पर तय कर सकते हैं।
- **वित्तीय बाजार:** शेयर और ऋण बाजारों को नीतिगत रुख से ब्याज दर चक्र की दिशा का स्पष्ट संकेत मिलेगा। खुदरा निवेशक ब्याज दर संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी स्थिति की समीक्षा कर सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति अपनी नियमित तीन दिवसीय समीक्षा बैठक के बाद व्यापक आर्थिक परिस्थितियों और मुद्रास्फीति के दबावों को संतुलित करने के लिए दर का निर्णय लेती है।

- **मुद्रास्फीति का दबाव:** हेडलाइन मुद्रास्फीति के अक्टूबर से दिसंबर तिमाही में चरम स्तर पर पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। इस मूल्य दबाव के प्रबंधन के लिए नीतिगत दरों और तरलता के स्तर की निरंतर निगरानी आवश्यक है।
- **पिछली नीतिगत स्थिरता:** समिति ने जून और अगस्त की पिछली दोनों बैठकों में दरों को 5.25% पर अपरिवर्तित रखा था। पूर्व बैठकों की इस निरंतरता ने वर्तमान तटस्थ नीतिगत रुख का आधार तैयार किया।
- **आर्थिक वृद्धि संतुलन:** वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.7% जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान हासिल करने के साथ-साथ मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखना समिति का मुख्य उद्देश्य है। केंद्रीय बैंक आर्थिक विस्तार को धीमा किए बिना कीमतों को स्थिर रखने का प्रयास कर रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. मौद्रिक नीति समिति का फैसला कब घोषित होगा?
गवर्नर संजय मल्होत्रा 7 अक्टूबर को सुबह 10 बजे तीन दिवसीय बैठक के नीतिगत निर्णय की घोषणा करेंगे।

### 2. वर्तमान में रेपो रेट किस स्तर पर है?
रेपो रेट इस समय 5.25% पर है, जिसे पिछली जून और अगस्त की बैठकों में स्थिर रखा गया था।

### 3. अगस्त की बैठक में एसडीएफ और एमएसएफ दरें क्या तय की गई थीं?
अगस्त की बैठक में एसडीएफ दर 5.00% और एमएसएफ दर के साथ-साथ बैंक दर 5.50% पर रखी गई थी।

### 4. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी और मुद्रास्फीति का क्या अनुमान है?
केंद्रीय बैंक ने 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि 6.7% और सीपीआई मुद्रास्फीति 5.0% रहने का अनुमान लगाया है, जिसमें तीसरी तिमाही में मुद्रास्फीति 5.9% रहने का अनुमान है।

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