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  "type": "article",
  "title": "भारतीय रिजर्व बैंक का डॉलर शॉर्ट पॉजिशन पूरी तरह नियंत्रण में, गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मुद्रा बाजार की स्थिति और सरकारी बॉन्ड हस्तक्षेप पर दी सफाई",
  "summary": "रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया है कि शुद्ध डॉलर शॉर्ट फॉरवर्ड स्थिति स्थिर है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अमेरिकी ट्रेजरी के फैसलों और क्रिप्टो एवं फॉरेक्स बाजार में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।",
  "content": "भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने देश के विदेशी मुद्रा बाजार और केंद्रीय बैंक के रणनीतिक कदमों पर स्थिति स्पष्ट की है। वित्तीय संस्थान बीएनवाई मेलन के रणनीतिकार जेफ यू ने गवर्नर के बयानों को रेखांकित करते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों के दौरान भारतीय रुपये को सहारा देने के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा बनाए गए बड़े मंदी के दांव के बावजूद, भारतीय रिजर्व बैंक की शुद्ध शॉर्ट फॉरवर्ड डॉलर स्थिति पूरी तरह से प्रबंधनीय और नियंत्रण में है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी मुद्रा का प्रवाह उम्मीद से अधिक मजबूत बना हुआ है और विनिमय दर पूरी तरह बाजार के सिद्धातों पर आधारित है।\n\nविदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप और एफसीएनआर रणनीति\nगवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रिजर्व बैंक की कार्रवाई का प्राथमिक उद्देश्य केवल अत्यधिक अस्थिरता और सट्टेबाजी की गतिविधियों पर लगाम लगाना है। उन्होंने एफसीएनआर(बी) स्वैप विंडो को समय से पहले बंद करने के निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि यह कोई नीतिगत बदलाव नहीं था, बल्कि आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर किया गया एक सटीक समायोजन था। उनका कहना था कि जैसे-जैसे नसबंदी यानी स्टरलाइजेशन की लागत बढ़ती है, प्रत्येक अतिरिक्त स्वैप किए गए डॉलर से मिलने वाला लाभ धीरे-धीरे कम होने लगता है।\n\nविदेशी मुद्रा प्रवाह और 80 अरब डॉलर का लक्ष्य\nभारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी पूंजी के आगमन पर चर्चा करते हुए संजय मल्होत्रा ने कहा कि हालिया महीनों में विदेशी मुद्रा का प्रवाह अनुमान से काफी बेहतर रहा है। हाल के समय में विदेशी मुद्रा आकर्षित करने के लिए उठाए गए विविध कदमों से भारतीय रिजर्व बैंक को कम से कम 80 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह हासिल होने की उम्मीद है। इन उपायों में एफसीएनआर(बी) जमा योजनाएं, बाह्य वाणिज्यिक उधार यानी ईसीबी और ओवरसीज विदेशी मुद्रा ऋण शामिल हैं, जिनसे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिल रही है।\n\nवैश्विक मुद्रा बाजार और अमेरिकी डॉलर की स्थिति\nअंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना हुआ है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा दीर्घकालिक बॉन्ड खरीद को अचानक बढ़ाने के फैसले के बाद डॉलर सूचकांक में नरमी दर्ज की गई। जीबीपी/यूएसडी जोड़ी दिन के कारोबार में 1.3650 के छह महीने के उच्चतम स्तर को छूने के बाद थोड़ा पीछे हटी, लेकिन 1.3600 के स्तर से ऊपर मजबूती से टिकी हुई है। दूसरी ओर, ईयूआर/यूएसडी जोड़ी तीन महीने के उच्चतम स्तर को छूने के बाद अपनी तेजी की गति खो बैठी और 1.1700 के स्तर से नीचे सपाट कारोबार करती दिखी।\n\nबॉन्ड यील्ड और अमेरिकी ट्रेजरी की तरलता कार्रवाई\nबुधवार को भारी गिरावट के बाद गुरुवार को अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में स्थिरता देखी गई, जहां 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड मामूली रूप से बढ़कर 4.672 प्रतिशत पर पहुंच गई। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने बुधवार को ग्रीनविच मीन टाइम के अनुसार दोपहर 12:32 बजे अपने पूर्व निर्धारित कैलेंडर से हटकर एक बड़ा निर्णय लिया। विभाग ने 10 से 20 वर्ष और 20 से 30 वर्ष की परिपक्वता वाली अवधि वाले दीर्घकालिक ऋणों की बायबैक सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन कर दिया। यह तरलता सहायता कार्यक्रम 9 सितंबर से लागू होकर 4 नवंबर तक चलेगा, जिसने बॉन्ड यील्ड में हालिया उछाल को शांत करने में मदद की है।\n\nसोने की कीमतों में गिरावट और क्रिप्टो बाजार में तेजी\nअमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड्स में आई स्थिरता का असर कीमती धातुओं पर भी देखने को मिला। गुरुवार को अमेरिकी कारोबारी घंटों की शुरुआत में सोने (एक्सएयू/यूएसडी) की कीमतों में अंतर-दिवसीय गिरावट का विस्तार देखा गया। इसके विपरीत, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में खरीदारों की मजबूत पकड़ बनी हुई है। बिटकॉइन (BTC) 70,000 डॉलर के स्तर को पार कर बढ़त बनाए हुए है। एथेरियम (ETH) 2,200 डॉलर के ऊपर तेजी के रुख के साथ कारोबार कर रहा है, जबकि रिपल (XRP) ने भी रिकवरी दिखाते हुए 1.15 डॉलर के स्तर से ऊपर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: रिजर्व बैंक द्वारा डॉलर स्थिति और विदेशी मुद्रा भंडार में 80 अरब डॉलर के प्रवाह के प्रबंधन से भारतीय रुपये में स्थिरता आएगी, जिससे आयातित वस्तुओं की मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।\n\nनिवेशकों के लिए: वैश्विक बाजारों में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में स्थिरता और क्रिप्टोकरेंसी में रिकवरी से शेयर और डिजिटल एसेट में व्यापार करने वाले भारतीय निवेशकों को दिशा मिलेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने डॉलर शॉर्ट स्थिति पर क्या कहा?\nगवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक की शुद्ध शॉर्ट फॉरवर्ड डॉलर स्थिति पूरी तरह से प्रबंधनीय है और विनिमय दर बाजार के नियमों पर आधारित है।\n\n2. रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा उपायों से कितना फंड जुटने की उम्मीद कर रहा है?\nरिजर्व बैंक को एफसीएनआर जमा, ईसीबी और विदेशी मुद्रा ऋण जैसे उपायों के जरिए कम से कम 80 अरब डॉलर प्राप्त होने की उम्मीद है।\n\n3. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने बॉन्ड बायबैक को लेकर क्या फैसला किया?\nअमेरिकी ट्रेजरी ने दीर्घकालिक ऋण बायबैक संचालन का आकार 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन कर दिया है।\n\n4. क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन और एथेरियम की क्या स्थिति है?\nबिटकॉइन 70,000 डॉलर के पार निकल गया है, जबकि एथेरियम 2,200 डॉलर और रिपल 1.15 डॉलर से ऊपर कारोबार कर रहा है।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-08-20",
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