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  "type": "article",
  "title": "रिजर्व बैंक शुरू कर सकता है ब्याज दरों में बढ़ोतरी का नया दौर, सोसिएते जेनेराल का अनुमान",
  "summary": "सोसिएते जेनेराल के कुणाल कुंडू के अनुसार लगातार बढ़ते महंगाई के दबाव को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक अक्टूबर से ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी का नया चक्र शुरू कर सकता है।",
  "content": "भारत में लगातार गहराते मुद्रास्फीति के दबाव के बीच मौद्रिक नीति में कड़े फैसलों की संभावना बढ़ गई है। वित्तीय सेवा संस्थान सोसिएते जेनेराल के अर्थशास्त्री कुणाल कुंडू का आकलन है कि भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई कीमतों में आई व्यापक तेजी को थामने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी का एक संक्षिप्त सिलसिला शुरू कर सकता है। इस अनुमान के मुताबिक केंद्रीय बैंक अपनी आगामी अक्टूबर नीतिगत बैठक में रेपो दर में 25 आधार अंकों का इजाफा कर सकता है। इसके बाद दिसंबर और फरवरी की बैठकों में भी पच्चीस-पच्चीस आधार अंकों की दो और वृद्धियां देखने को मिल सकती हैं। हालांकि यह मुख्य परिदृश्य नहीं है, फिर भी स्थिति बिगड़ने पर एक ही बार में 50 आधार अंकों की बड़ी बढ़ोतरी की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।\n\nसेवा क्षेत्र और खाद्य महंगाई के कारण मौद्रिक नीति पर बढ़ा दबाव\nअर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की मुद्रास्फीति में आई तेजी ने नीति निर्धारकों के सामने जटिल चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। कुंडू का कहना है कि मौद्रिक नीति के नजरिए से सेवाओं की महंगाई में उछाल बेहद अहम पहलू बन चुका है। अब तक केंद्रीय बैंक खाद्य कीमतों में आने वाले अस्थायी उछाल को अनदेखा करने की रणनीति अपनाता रहा है, लेकिन अब यह गुंजाइश तेजी से घट रही है। हेडलाइन मुद्रास्फीति लगातार तीसरे महीने मध्यम लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है, जबकि मूल यानी अंतर्निहित महंगाई दर भी मजबूत हो रही है। जब खाद्य पदार्थों के साथ-साथ सेवाओं और मुख्य घटकों के दाम भी लगातार बढ़ते हैं, तो दरों में बदलाव के बिना कीमतों पर अंकुश लगाना मुश्किल हो जाता है।\n\nदर वृद्धि की समयसीमा और संभावित बड़े कदम का जोखिम\nसोसिएते जेनेराल के विश्लेषण के अनुसार केंद्रीय बैंक चरणबद्ध तरीके से ब्याज दरों को ऊपर ले जाने की तैयारी कर सकता है। कुणाल कुंडू ने कहा कि सेवा क्षेत्र की बढ़ती महंगाई मौद्रिक नीति के लिहाज से खास तौर पर संवेदनशील है, और उनका मानना है कि रिजर्व बैंक अक्टूबर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है, जिसके बाद दिसंबर और फरवरी में भी इसी आकार के दो और कदम उठाए जा सकते हैं। इस सिलसिलेवार वृद्धि से कुल मिलाकर 75 आधार अंकों की दर वृद्धि दर्ज होगी। हालांकि विश्लेषक यह भी जोड़ते हैं कि यदि आर्थिक आंकड़े उम्मीद से ज्यादा आक्रामक रहे, तो केंद्रीय बैंक सीधे 50 आधार अंकों के भारी झटके का विकल्प भी चुन सकता है, जिसकी आशंका नगण्य नहीं है।\n\nवैश्विक मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड प्रतिफल की स्थिति\nभारतीय रिजर्व बैंक की नीतिगत चर्चाओं के साथ-साथ दुनिया भर के मुद्रा बाजारों में भी तीखी हलचल देखी जा रही है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी की बैठक से पहले अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल बहु-वर्षीय उच्च स्तरों के करीब बने हुए हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से उपजे मुद्रास्फीति के जोखिम ने अमेरिकी डॉलर को व्यापक मजबूती प्रदान की है। इस माहौल में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर कमजोर पड़कर एशियाई कारोबारी सत्र में 0.7150 से नीचे बना हुआ है, जो पिछले कारोबारी दिन दर्ज किए गए तीन सप्ताह से अधिक के निचले स्तर के करीब है। चीन के अगस्त महीने के मिले-जुले आर्थिक आंकड़ों से भी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को कोई सहारा नहीं मिल सका।\n\nजापानी येन और सोने की कीमतों पर वैश्विक बैठकों का असर\nउधर डॉलर के मुकाबले जापानी मुद्रा में लगातार कमजोरी देखी जा रही है और अमेरिकी डॉलर 155.00 के स्तर की तरफ बढ़ रहा है। निवेशक जहां एक तरफ अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों पर नजर बनाए हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ बैंक ऑफ जापान यानी बीओजे की बैठक भी इसी हफ्ते तय है। अमेरिकी दर वृद्धि के दांव डॉलर को सहारा दे रहे हैं, लेकिन बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत सामान्यीकरण के आक्रामक संकेतों की संभावना येन को समर्थन दे सकती है, जिससे इस जोड़ी की तेजी सीमित रहने की संभावना है। दूसरी ओर बहुमूल्य धातु सोना एशियाई सत्र में मामूली बढ़त के बावजूद एक महीने के निचले स्तर के करीब संघर्ष कर रहा है और 4,300 डॉलर प्रति औंस के ठीक नीचे कारोबार कर रहा है, क्योंकि व्यापारी एफओएमसी की दो दिवसीय नीतिगत बैठक से पहले किसी भी बड़े दांव से बच रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\nरिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी से आम नागरिकों के कर्ज महंगे हो सकते हैं और मासिक ईएमआई का बोझ बढ़ सकता है।\n\n• कर्ज की ईएमआई पर: यदि केंद्रीय बैंक अक्टूबर से दरें बढ़ाता है, तो होम लोन और कार लोन की ब्याज दरों में सीधे बढ़ोतरी होगी। इसके चलते कर्जदारों को हर महीने अधिक ईएमआई चुकानी होगी या अपने कर्ज की अवधि बढ़वानी पड़ेगी।\n• बचत और सावधि जमा पर: नीतिगत दरों में बढ़ोतरी का फायदा बैंक जमाकर्ताओं और वरिष्ठ नागरिकों को फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिल सकता है। नए चक्र की शुरुआत के साथ बैंक अपनी एफडी दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं।\n• दैनिक खर्च और बजट: सेवाओं और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आ रही तेजी घरेलू बजट को सीधे प्रभावित कर रही है। जब तक मौद्रिक सख्ती का असर नहीं दिखता, तब तक आवश्यक वस्तुओं पर परिवारों का मासिक खर्च ऊंचा बना रह सकता है।\n• वैश्विक जिंस और निवेश: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का 4,300 डॉलर के करीब बना रहना और बॉन्ड प्रतिफल में तेजी निवेशकों की रणनीति बदल सकती है। ऐसे में बाजार की अस्थिरता को देखते हुए निवेशकों को नए वित्तीय फैसलों में सावधानी बरतनी होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nभारतीय अर्थव्यवस्था में लगातार तीन महीनों से खुदरा मुद्रास्फीति का केंद्रीय बैंक के मध्यम लक्ष्य से ऊपर बने रहना और सेवा क्षेत्र की कीमतों में उछाल आना इस संभावित नीतिगत बदलाव का मुख्य कारण है।\n\n• सेवाओं और अंतर्निहित महंगाई में तेजी: अब तक मुद्रास्फीति का दबाव मुख्यतः खाद्य उत्पादों तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन अब सेवा क्षेत्र और मूल घटकों के दाम भी मजबूत हो रहे हैं। इस व्यापक विस्तार के कारण केंद्रीय बैंक के लिए मूल्य वृद्धि को नजरअंदाज करना अब संभव नहीं रह गया है।\n• लगातार लक्ष्य से ऊपर आंकड़े: हेडलाइन मुद्रास्फीति लगातार तीसरे महीने निर्धारित मध्यम लक्ष्य से ऊपर दर्ज की गई है। जब समग्र मूल्य सूचकांक लगातार तय सीमा को पार करता है, तो नीति निर्माताओं के लिए ब्याज दरों में वृद्धि करना अनिवार्य कदम बन जाता है।\n• अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा और जिंस दबाव: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की वजह से उपजी महंगाई और बढ़ते अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल ने विश्व भर की मुद्राओं और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर दबाव डाला है। इसके चलते उभरते बाजारों के लिए मुद्रास्फीति से निपटना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सोसिएते जेनेराल के अनुसार रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कब और कितनी बढ़ोतरी कर सकता है?\nकुणाल कुंडू के अनुसार रिजर्व बैंक अक्टूबर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है, जिसके बाद दिसंबर और फरवरी में भी 25-25 आधार अंकों की वृद्धि संभव है।\n\n2. क्या रिजर्व बैंक एक बार में 50 आधार अंकों की दर वृद्धि कर सकता है?\nहालांकि यह मुख्य परिदृश्य नहीं है, लेकिन सोसिएते जेनेराल के अनुसार 50 आधार अंकों की बड़ी बढ़ोतरी के जोखिम से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।\n\n3. केंद्रीय बैंक पर दरें बढ़ाने का दबाव क्यों बढ़ रहा है?\nहेडलाइन मुद्रास्फीति लगातार तीसरे महीने मध्यम लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है और सेवा क्षेत्र में मूल्य वृद्धि तेजी से पैर पसार रही है।\n\n4. वैश्विक बाजार में सोने और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल की क्या स्थिति है?\nअमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल बहु-वर्षीय उच्च स्तरों के करीब बने हुए हैं, जबकि सोना 4,300 डॉलर के स्तर के ठीक नीचे संघर्ष कर रहा है।",
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  "publishedAt": "2026-09-19",
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