रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ब्याज दर बढ़ोतरी के बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दो हफ्ते के निचले स्तर पर फिसला रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की 25 आधार अंकों की दर वृद्धि में मतभेद और कमजोर आर्थिक परिदृश्य के चलते ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दो हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ताजा मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (bps) की अपेक्षित बढ़ोतरी के बाद भी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर भारी दबाव देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान मंगलवार को लगातार दूसरे कारोबारी दिन AUD/USD जोड़ी में बिकवाली का दौर हावी रहा, जिससे यह दो सप्ताह के निचले स्तर तक लुढ़क गया। केंद्रीय बैंक के नीतिगत फैसले में सर्वसम्मति का अभाव और देश के आर्थिक भविष्य को लेकर बनी चिंताएं मुद्रा के कमजोर प्रदर्शन की मुख्य वजह बनी हुई हैं। हालांकि अमेरिकी डॉलर में भी बहुत आक्रामक तेजी नहीं है, फिर भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अपनी हालिया जमीन गंवाता हुआ दिख रहा है। नीतिगत फैसले में मतभेद और दर वृद्धि पर ब्रेक के संकेत केंद्रीय बैंक की बैठक में दर वृद्धि का फैसला पूरी तरह एकतरफा नहीं रहा। नीति समिति के 9 सदस्यों में से 6 सदस्यों ने 25 आधार अंकों की वृद्धि का समर्थन किया, जबकि 3 सदस्यों ने ब्याज दरों को 4.60% पर ही स्थिर रखने के पक्ष में मतदान किया। इस 6-3 के बंटे हुए मतदान ने निवेशकों को यह स्पष्ट संकेत दिया है कि भविष्य में दरों में और सख्ती की गुंजाइश सीमित हो सकती है। जब नीति निर्माताओं के बीच आगे की राह को लेकर आम सहमति नहीं होती, तो बाजार इसे आक्रामक सख्ती चक्र के समापन के रूप में देखता है। आर्थिक विकास की सुस्त रफ्तार और आने वाले समय के धुंधले परिदृश्य ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर बिकवाली का दबाव और गहरा कर दिया है। इसके बावजूद, वैश्विक मुद्रा बास्केट में अन्य जोड़ियों के मुकाबले स्थिति मिश्रित रही और चालू हफ्ते में जापानी येन के सामने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा सबसे अधिक मजबूत दर्ज की गई। अमेरिकी राजनीति और ईरान कूटनीति के बीच डॉलर का मिजाज वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की अपनी चाल भी काफी उतार-चढ़ाव भरी बनी हुई है। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले ग्रीनबैक पर भू-राजनीतिक मोर्चे से आ रही नरमी का असर देखने को मिला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को बयान दिया कि ईरान युद्ध खत्म करने के लिए समझौता करना चाहता है और ऐसा समझौता संभव हो सकता है। दूसरी तरफ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी साफ किया कि तेहरान बातचीत के जरिए सभी समस्याओं का समाधान तलाशने का पक्षधर है। इन दोनों बयानों से कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें बढ़ीं, जिससे सुरक्षित पनाहगाह के तौर पर डॉलर की मांग थोड़ी सुस्त हुई। हालांकि, मंगलवार को अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के लिए हो रहे मतदान के कारण बाजार में व्यापक अनिश्चितता और झिझक का माहौल है। इस चुनाव से यह तय होगा कि अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों पर किसका नियंत्रण रहेगा। सीनेट की लगभग एक तिहाई सीटों और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों के नवीनीकरण के साथ ही फ्लोरिडा और ओहायो में विशेष चुनाव हो रहे हैं, जो अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा खाली की गई सीटों को भरने के लिए आयोजित किए जा रहे हैं। मजबूत मैन्युफैक्चरिंग आंकड़े और सोने पर दबाव कूटनीतिक नरमी के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था के बुनियादी आंकड़े फेडरल रिजर्व के सख्त रुख को आधार प्रदान कर रहे हैं। सोमवार को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र की कारोबारी गतिविधि में अक्टूबर के दौरान लगातार 10वें महीने विस्तार दर्ज किया गया। इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट (ISM) का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई अक्टूबर महीने में बढ़कर 55.5 पर पहुंच गया, जो सितंबर में 54.5 के स्तर पर था। यह आंकड़ा विश्लेषकों के आम अनुमानों से कहीं बेहतर रहा। विनिर्माण क्षेत्र में आई इस तेजी ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दरों को ऊंची बनाए रखने की उम्मीदों को फिर से हवा दे दी है, जिसके चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में सुधार देखा गया। बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने से बिना ब्याज वाली संपत्तियों पर असर पड़ा और एशियाई कारोबार में सोना $3,950 के स्तर से नीचे फिसल गया, जिससे पिछले हफ्ते के एक साल के निचले स्तर से शुरू हुई सोने की रिकवरी का एक हिस्सा वापस धुल गया। जापानी येन और प्रमुख मुद्राओं का मिला-जुला रुख विदेशी मुद्रा बाजार में केवल ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख मुद्राएं भी सीमित दायरे में संघर्ष कर रही हैं। मंगलवार के एशियाई सत्र में USD/JPY जोड़ी में हल्की नरमी देखी गई और यह पिछले दिन के 158.00 तक के उछाल के कुछ हिस्से को गंवाकर नीचे आई। अमेरिकी डॉलर पर कूटनीतिक चर्चाओं और चुनावों के दबाव के बीच जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित बाजार हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को सहारा दिया है। फिर भी बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा अगली दर वृद्धि के सटीक समय को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण येन में बहुत बड़ा उछाल नहीं आ सका। इसके चलते यह मुद्रा जोड़ी एक जाने-पहचाने दायरे में सिमटी हुई है और कारोबारी किसी भी बड़े दांव से बचते नजर आ रहे हैं। इसका आप पर असर वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में केंद्रीय बैंकों के फैसलों और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों से मुद्रा विनिमय दरों तथा कमोडिटी कीमतों पर सीधा असर पड़ रहा है। • मुद्रा निवेशकों के लिए: ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि के बावजूद आंतरिक मतभेद के चलते ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में और गिरावट का जोखिम बना हुआ है। यदि आप विदेशी मुद्रा में ट्रेडिंग करते हैं, तो नीतिगत फैसलों के बाद सर्वसम्मति की स्थिति पर नजर रखकर ही अपनी स्थिति निर्धारित करें। • सोने के खरीदारों के लिए: मजबूत अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग आंकड़ों और बढ़ती बॉन्ड यील्ड के कारण सोना $3,950 के स्तर से नीचे आ गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरमी का लाभ उठाकर निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सुरक्षित खरीदारी की योजना बना सकते हैं। • अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और छात्रों के लिए: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में दो सप्ताह की कमजोरी से ऑस्ट्रेलिया जाने वाले यात्रियों और भारतीय छात्रों के लिए वहां का खर्च अपेक्षाकृत कुछ कम हो सकता है। मुद्रा का कमजोर रुख ट्यूशन फीस और रहने के खर्च के रूपांतरण पर थोड़ी राहत दे सकता है। • वैश्विक वित्तीय बाजारों पर: अमेरिकी मध्यावधि चुनावों और कांग्रेस के नियंत्रण को लेकर अनिश्चितता के कारण बाजार में सीमित दायरे का कारोबार देखने को मिल रहा है। चुनावी नतीजे आने तक निवेशकों को बड़े एकतरफा दांव लगाने से बचना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ब्याज दर वृद्धि के बाद भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के गिरने और वैश्विक बाजारों में नरमी के पीछे कई नीतिगत, आर्थिक और राजनीतिक कारण सक्रिय रहे हैं। • नीतिगत मतभेद: नीति निर्माताओं के बीच 6-3 के विभाजन ने यह स्पष्ट किया कि बोर्ड के तीन सदस्य ब्याज दर को 4.60% पर ही स्थिर रखना चाहते थे। इस असहमति से बाजार को यह संकेत मिला कि ऑस्ट्रेलिया में भविष्य में और दर वृद्धि होने की संभावना काफी घट चुकी है। • कमजोर आर्थिक दृष्टिकोण: देश के समग्र आर्थिक परिदृश्य को लेकर जताई गई चिंताओं ने दर वृद्धि के सकारात्मक असर को पूरी तरह बेअसर कर दिया। निवेशकों ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी से ज्यादा तवज्जो सुस्त पड़ती विकास गति को दी, जिससे मुद्रा पर बिकवाली हावी हो गई। • मजबूत अमेरिकी आंकड़े: अमेरिका में विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधि अक्टूबर में 55.5 पर पहुंच गई, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने की धारणा मजबूत हुई। इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी बॉन्ड यील्ड सुधरी और सोने जैसी संपत्तियों से पूंजी निकासी तेज हो गई। • भू-राजनीतिक और चुनावी कारक: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान द्वारा बातचीत से मसले हल करने के बयानों ने डॉलर पर सुरक्षित पनाहगाह का दबाव घटाया, जबकि अमेरिकी मध्यावधि चुनाव ने व्यापक सतर्कता बनाए रखी। सवाल-जवाब 1. रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया ने ब्याज दरों पर क्या फैसला लिया? रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया ने ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (bps) की अपेक्षित बढ़ोतरी की है। 2. नीतिगत बैठक में मतदान की स्थिति क्या रही? नीति समिति में फैसला 6-3 के अंतर से हुआ, जिसमें 3 सदस्यों ने ब्याज दर को 4.60% पर बनाए रखने के पक्ष में मतदान किया। 3. दर बढ़ोतरी के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर क्यों गिरा? मतदान में मतभेद और देश के कमजोर आर्थिक परिदृश्य के कारण आगे और दर वृद्धि की उम्मीदें कम होने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दो सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया। 4. अमेरिका के विनिर्माण क्षेत्र का आंकड़ा कैसा रहा? आईएसएम मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई सितंबर के 54.5 से बढ़कर अक्टूबर में 55.5 पर आ गया, जो लगातार 10वें महीने विस्तार को दर्शाता है। 5. सोने की कीमतों पर क्या असर पड़ा? अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में सुधार और मजबूत आर्थिक आंकड़ों के कारण सोना एशियाई सत्र में कमजोर होकर $3,950 के स्तर से नीचे फिसल गया। 6. अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में किन सीटों पर मतदान हो रहा है? चुनावों में सीनेट की लगभग एक तिहाई सीटों, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों तथा मार्को रुबियो और जेडी वेंस की खाली सीटों पर विशेष चुनाव हो रहे हैं। https://trendkia.com/market/reserve-bank-of-australia-ki-byaja-dara-barhotari-ke-bada-australian-dollar-do-haphte-ke-nichale-stara-para-phisala-55510 TrendKia — Har trend, sabse pehle.